Tuesday, October 31, 2023

व्यापारी का पतन और उदय : पंचतंत्र की कहानी

 वर्धमान नामक शहर में एक बहुत ही कुशल व्यापारी दंतिल रहता था। राजा को उसकी क्षमताओं के बारे में पता था जिसके चलते राजा ने उसे राज्य का प्रशासक बना दिया। अपने कुशल तरीकों से व्यापारी दंतिल ने राजा और आम आदमी को बहुत खुश रखा। कुछ समय के बाद व्यापारी दंतिल ने अपनी लड़की का विवाह तय किया। इस उपलक्ष्य में उसने एक बहुत बड़े भोज का आयोजन किया। इस भोज में उसने राज परिवार से लेकर प्रजा तक सभी को आमंत्रित किया। राजघराने का एक सेवक, जो महल में झाड़ू लगाता था, वह भी इस भोज में शामिल हुआ। मगर गलती से वह एक ऐसी कुर्सी पर बैठ गया जो केवल राज परिवार के लिए रखी हुयी थी। सेवक को उस कुर्सी पर बैठा देखकर व्यापारी दंतिल को गुस्सा आ जाता है और वह सेवक को दुत्कार कर वह वहाँ से भगा देता है। सेवक को बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती है और वह व्यापारी दंतिल को सबक सिखाने का प्रण लेता है।

अगले ही दिन सेवक राजा के कक्ष में झाड़ू लगा रहा होता है। वह राजा को अर्धनिद्रा में देख कर बड़बड़ाना शुरू करता है। वह बोलता है, “इस व्यापारी दंतिल की इतनी मजाल की वह रानी के साथ दुर्व्यवहार करे। ” यह सुन कर राजा की नींद खुल जाती है और वह सेवक से पूछता है, "क्या यह वाकई में सच है? क्या तुमने व्यापारी दंतिल को दुर्व्यवहार करते देखा है?" सेवक तुरंत राजा के चरण पकड़ता है और बोलता है, "मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं कल रात को सो नहीं पाया। मेरी नींद पूरी नहीं होने के कारण कुछ भी बड़बड़ा रहा था।" यह सुनकर राजा सेवक को कुछ नहीं बोलता लेकिन उसके मन में शक पैदा हो जाता है।

उसी दिन से राजा व्यापारी दंतिल के महल में निरंकुश घूमने पर पाबंदी लगा देता है और उसके अधिकार कम कर देता है। अगले दिन जब व्यापारी दंतिल महल में आता है तो उसे संतरिया रोक देते हैं। यह देख कर व्यापारी दंतिल बहुत आश्चर्य -चकित होता है। तभी वहीँ पर खड़ा हुआ सेवक मज़े लेते हुए बोलता है, "अरे संतरियों, जानते नहीं ये कौन हैं? ये बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं जो तुम्हें बाहर भी फिंकवा सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसा इन्होने मेरे साथ अपने भोज में किया था। तनिक सावधान रहना।"

यह सुनते ही व्यापारी दंतिल को सारा माजरा समझ में आ जाता है। वह सेवक से माफ़ी मांगता है और सेवक को अपने घर खाने पर बुलाता है। व्यापारी दंतिल सेवक की खूब आव-भगत करता है। फिर वह बड़ी विनम्रता से भोज वाले दिन किये गए अपमान के लिए क्षमा मांगता है और बोलता है की उसने जो भी किया, गलत किया। सेवक बहुत खुश होता है और व्यापारी दंतिल से बोलता है, "आप चिंता ना करें, मैं राजा से आपका खोया हुआ सम्मान आपको ज़रूर वापस दिलाउंगा।"

अगले दिन राजा के कक्ष में झाड़ू लगाते हुआ सेवक फिर से बड़बड़ाने लगता है, “हे भगवान, हमारा राजा तो इतना मूर्ख है कि वह गुसलखाने में खीरे खाता है।" यह सुनकर राजा क्रोधित हो जाता है और बोलता है, “मूर्ख, तुम्हारी ये हिम्मत? तुम अगर मेरे कक्ष के सेवक ना होते, तो तुम्हें नौकरी से निकाल देता।" सेवक फिर राजा के चरणों में गिर जाता है और दुबारा कभी ना बड़बड़ाने की कसम खाता है।

राजा भी सोचता है कि जब यह मेरे बारे में इतनी गलत बातें बोल सकता है तो इसने व्यापारी दंतिल के बारे में भी गलत बोला होगा। राजा सोचता है की उसने बेकार में व्यापारी दंतिल को दंड दिया। अगले ही दिन राजा व्यापारी दंतिल को महल में उसकी खोयी प्रतिष्ठा वापस दिला देता है।


(सीख: व्यक्ति बड़ा हो या छोटा, हमें हर किसी के साथ समान भाव से ही पेश आना चाहिए।)

................

दमनक से यह कथा सुनकर संजीवक ने कहा, “ठीक है। तुम जो कहते हो, वही करूँगा।"



तब दमनक उसे साथ लेकर पिंगलक के पास आया। बोला, ''महाराज, मैं संजीवक को ले आया हूँ।''


संजीवक ने भी पिंगलक को नमस्कार किया और पास ही बैठ गया।


पिंगलक ने संजीवक बैल के ऊपर अपना दाहिना हाथ रखते हुए पूछा, ''आप इस वन में कहाँ से आए हैं? यहाँ कुशल से तो रहते हैं?”


संजीवक ने अपनी सारी कथा उसको सुना दी।


पिंगलक ने उसकी कथा सुनकर उससे कहा कि तुम निडर होकर मेरे द्वारा सुरक्षित इस वन में विचरण करो। इसके बाद पिंगलक ने अपने जंगल का राजकाज नए मंत्रियों करटक और दमनक को सौंप दिया और खुद संजीवक के साथ आनंद से रहने लगा।


संजीवक ने कुछ दिनों में ही अपनी बुद्धि के प्रभाव से जंगली पिंगलक की हिंसक आदतें छुड़ाकर उसे ग्राम्य धर्म में लगा दिया। पिंगलक भी उसकी बातों में रुचि लेने लगा। उसकी हिंसा की वृत्ति समाप्त हो गई। वह अब हरिणों और दूसरे जानवरों को अपने नजदीक नहीं आने देता था। करटक और दमनक को भी दूर- ही-दूर रखता था।


परिणाम यह हुआ कि सिंह के शिकार से बचे हुए भोजन से ही पेट भरनेवाले छोटे-छोटे जानवर भूख से व्याकुल हो गए। करटक, दमनक और दूसरे जानवर इस स्थिति पर चिंता करने लगे। वे सोचने लगे कि जब भगवान्‌ शंकर के गले में लिपटा हुआ साँप, गणेशजी के वाहन चूहे को निगल जाना चाहता है, जब कार्तिकेय का वाहन मोर शंकरजी के साँप को खाना चाहता है, जब साँप को मारकर खानेवाले मोर को भी पार्वती का वाहन सिंह खाने की इच्छा रखता है, तब यह अहिंसा का नाटक क्यों?


दमनक ने करटक से कहा, 'अरे भई, अब तो पिंगलक और संजीवक में ऐसी प्रगाढ़ मित्रता हो गई है कि पिंगलक हम लोगों से विमुख ही हो गया। हमारे कितने ही साथी भी भाग गए। हमें राजा को समझाना चाहिए। मंत्री का धर्म है कि वह ठीक समय पर राजा को समझाए।”


करटक ने कहा, “तुमने ही तो यह आग लगाई है। तुम्हीं ने इस घास चरनेवाले जानवर को हमारे स्वामी का मित्र बनाया है।"


दमनक बोला, ''यह सच है। दोष तो मेरा ही है, पिंगलक का नहीं। किंतु मैंने जैसे उनकी मित्रता कराई थी, वैसे ही अब उनकी मित्रता को भंग भी करा दूँगा।”


करटक ने कहा, “लेकिन संजीवक बैल होने पर भी बड़ा बुद्धिमान प्राणी है। उधर सिंह पिंगलक भी भयानक है। यह ठीक है कि तुम्हारी बुद्धि तेज है, फिर भी तुम इन दोनों को अब अलग करने में कैसे समर्थ हो पाओगे?'


दमनक ने कहा, “भाई! असमर्थ होते हुए भी मैं समर्थ हूँ। जो काम पराक्रम से पूरा नहीं हो पाता उसे भी चतुर व्यक्ति युक्ति से पूरा कर सकते हैं। जैसे कौए ने सोने के सूत्र के सहारे विषधर काले साँप का अंत कर दिया था!"


करटक ने पूछा, ''वह कैसे हुआ था?'


दमनक कहने लगा--


Preparation Strategy For Puzzle and Seating Arrangement

 वे उम्मीदवार जो बैंक मेन्स परीक्षा में शामिल होंगे, उन्हें बैठने की व्यवस्था और पहेली के पैटर्न के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए. यह सेक्शन काफी कठिन कहा जाता है लेकिन अगर छात्रों ने इस सेक्शन के लिए अच्छी तरह से तैयारी की है, तो यह काफी स्कोरिंग हो सकता है. नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जो बैंक मेन्स परीक्षाओं के लिए पहेली और बैठने की व्यवस्था तैयार करने में मदद करेंगे.


पज़ल और बैठने की व्यवस्था के प्रश्नों को हल करते समय उम्मीदवारों को एक ही पहेली के लिए 2-3 संभावनाएँ बनानी चाहिए और प्रश्न के अनुसार उन्हें रद्द करते रहना चाहिए. इससे छात्रों को 100% सटीकता के साथ पहेली को हल करने में मदद मिलेगी.

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे प्रश्नों को बहुत ध्यान से पढ़ें और महत्वपूर्ण निर्देशों को लिख लें और प्रश्न को पढ़ते समय इंगित करें. यह संभावनाओं में मदद करेगा और पहेली को और अधिक तेज़ी से हल करेगा.

अपना ध्यान अपनी गति बढ़ाने पर भी रखें. क्योंकि बैंकिंग परीक्षाओं में स्पीड बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

बैठने की व्यवस्था और पहेली के प्रश्नों के साथ दैनिक अभ्यास करें, यह आपकी गति और सटीकता बनाए रखने में मदद करेगा.


उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे मॉक टेस्ट और सेक्शनल टेस्ट देना शुरू करें जो हमारे एक्सपर्ट द्वारा नवीनतम परीक्षा पैटर्न के आधार पर तैयार किए गए हैं, और मॉक टेस्ट और सेक्शनल टेस्ट को हल करने के बाद अच्छी तरह से विश्लेषण करें और अपनी गलतियों को सुधारें.

नवीनतम पैटर्न के साथ कठिन प्रश्नों का अभ्यास करने की आदत डालें. इससे आपको परीक्षा में प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी.

अंत में पिछले वर्ष के प्रश्नपत्रों के प्रश्नों का अभ्यास करना न भूलें, क्योंकि इससे परीक्षा की तैयारी में भी मदद मिलती है. पिछले वर्ष के प्रश्नपत्रों के साथ अभ्यास करने से, उम्मीदवार परीक्षा पैटर्न और परीक्षाओं के कठिनाई स्तर के बारे में पता चल जाएगा.



Seating Arrangement

 बैठक व्यवस्था के रीजनिंग प्रश्न

तर्क में, जब लोगों के बैठने के आधार पर कुछ विवरण और संकेत दिए जाते हैं और उनकी व्यवस्था संकेतों और निर्देशों के अनुसार की जाती है, तो बैठने की व्यवस्था के प्रश्न कहलाते हैं। बैठने की व्यवस्था तर्क प्रश्नों में सीधी रेखा, गोलाकार, आयताकार या किसी अन्य तरीके से बैठने की व्यवस्था शामिल होती है। छात्रों को दी गई स्थिति के अनुसार बैठने की व्यवस्था करनी होगी और फिर प्रश्न का आवश्यक समाधान ढूंढना होगा। यह एक पहेली है और इसका उत्तर तार्किक रूप से पाया जा सकता है। यहां अभ्यास के लिए बैठने की व्यवस्था से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तार्किक प्रश्न दिए गए हैं जो आपकी आगामी परीक्षा की तैयारी को बढ़ावा देंगे।


Seating Arrangement (बैठक व्यवस्था)- ट्रिक्स

छात्रों को बैठक व्यवस्था के सवालों को आसानी से और जल्दी से हल करने के लिए प्रभावी बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स और टिप्स का पालन करने की आवश्यकता है। बैठक व्यवस्था के प्रश्नों के लिए दिशाओं और पहेली को सुलझाने के कौशल की अच्छी समझ की आवश्यकता होती है। बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स आपको अपने तैयारी स्तर पर जोर देने और अपने स्कोर को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बैठक व्यवस्था के प्रश्नों को जल्दी और सटीकता के साथ हल करने के लिए छात्रों को इन ट्रिक्स का पालन करने की आवश्यकता है। कुछ बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स की यहाँ चर्चा कर रहे हैं।


प्रश्न को ध्यान से पढ़ें

दी गई सभी शर्तों और निर्देशों को अच्छी तरह समझें

दी गई स्थिति के अनुसार एक सामान्य आरेख बनाएं

प्रश्न में पूछे गए किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु की दिशा को पहचानें।



Seating Arrangement (बैठक व्यवस्था) प्रश्न

Seating Arrangement (बैठक व्यवस्था) प्रश्न: बैठने की व्यवस्था तार्किक तर्क में एक महत्वपूर्ण विषय है और एसएससी, रेलवे, बैंकिंग और रक्षा जैसी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है। बैठने की व्यवस्था के प्रश्न छात्र की तार्किक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल का परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इन प्रश्नों का सभी परीक्षाओं में लगभग 4-6 अंक या 2-4 प्रश्नों का महत्व होता है। इसलिए, छात्रों के लिए बैठने की व्यवस्था के प्रश्नों की अच्छी तैयारी करना महत्वपूर्ण है।


बैठक व्यवस्था के रीजनिंग प्रश्न

तर्क में, जब लोगों के बैठने के आधार पर कुछ विवरण और संकेत दिए जाते हैं और उनकी व्यवस्था संकेतों और निर्देशों के अनुसार की जाती है, तो बैठने की व्यवस्था के प्रश्न कहलाते हैं। बैठने की व्यवस्था तर्क प्रश्नों में सीधी रेखा, गोलाकार, आयताकार या किसी अन्य तरीके से बैठने की व्यवस्था शामिल होती है। छात्रों को दी गई स्थिति के अनुसार बैठने की व्यवस्था करनी होगी और फिर प्रश्न का आवश्यक समाधान ढूंढना होगा। यह एक पहेली है और इसका उत्तर तार्किक रूप से पाया जा सकता है। यहां अभ्यास के लिए बैठने की व्यवस्था से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तार्किक प्रश्न दिए गए हैं जो आपकी आगामी परीक्षा की तैयारी को बढ़ावा देंगे।


Seating Arrangement (बैठक व्यवस्था)- ट्रिक्स

छात्रों को बैठक व्यवस्था के सवालों को आसानी से और जल्दी से हल करने के लिए प्रभावी बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स और टिप्स का पालन करने की आवश्यकता है। बैठक व्यवस्था के प्रश्नों के लिए दिशाओं और पहेली को सुलझाने के कौशल की अच्छी समझ की आवश्यकता होती है। बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स आपको अपने तैयारी स्तर पर जोर देने और अपने स्कोर को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बैठक व्यवस्था के प्रश्नों को जल्दी और सटीकता के साथ हल करने के लिए छात्रों को इन ट्रिक्स का पालन करने की आवश्यकता है। कुछ बैठक व्यवस्था की ट्रिक्स की यहाँ चर्चा कर रहे हैं।


प्रश्न को ध्यान से पढ़ें

दी गई सभी शर्तों और निर्देशों को अच्छी तरह समझें

दी गई स्थिति के अनुसार एक सामान्य आरेख बनाएं

प्रश्न में पूछे गए किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु की दिशा को पहचानें।

Seating Arrangement फॉर्मूला

बैठक व्यवस्था के प्रश्न सीधी रेखा, वृत्ताकार, वर्गाकार, आयताकार या किसी अन्य तरीके सहित विभिन्न प्रकार के बैठने पर बनते हैं। बैठक व्यवस्था का फॉर्मूला सभी प्रकार के बैठक व्यवस्था के प्रश्नों को जल्दी हल करने में मदद करेगा। बैठक व्यवस्था के प्रकारों को समझने के लिए छात्र नीचे दी गई तस्वीर का उल्लेख कर सकते हैं। बैठक व्यवस्था के फार्मूले में परीक्षा में प्रश्नों को हल करने का एक स्मार्ट तरीका शामिल है।





Seating Arrangement प्रश्न PDF in hindi

बैठक व्यवस्था पर प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए छात्र बैठक व्यवस्था के प्रश्न पीडीएफ का अनुसरण कर सकते हैं। यह छात्रों की गति और सटीकता को बढ़ाने में मदद करता है। छात्रों की बेहतर समझ और तैयारी के लिए उत्तर के साथ बैठक व्यवस्था के प्रश्न की पीडीएफ यहां दी गई हैं। तो अपनी आगामी सरकारी परीक्षाओं के लिए उत्तर पीडीएफ के साथ बैठक व्यवस्था के इन प्रश्नों का अभ्यास करें।


उत्तर के साथ बैठक व्यवस्था प्रश्न

आगामी परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बैठक व्यवस्था के प्रश्नों पर नीचे चर्चा की गई है। परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए छात्रों को इन प्रश्नों का अच्छी तरह अभ्यास करना चाहिए।


Directions (Que.1-5): दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

आठ व्यक्ति A, B, C, D, E, F, G, और H एक वृत्ताकार मेज के चारों ओर बैठे हैं लेकिन आवश्यक नहीं है कि वे समान व्यवस्था में बैठे हों। उनमें से पांच का मुख केंद्र की ओर है जबकि अन्य का मुख बाहर की ओर है।


E, C के दायें से तीसरे स्थान पर है। F, E के बायें से तीसरे स्थान पर बैठा है। F और B के बीच तीन व्यक्ति बैठे हैं। G, F, जिसका मुख केंद्र की ओर नहीं है, के दायें से तीसरे स्थान पर बैठा है। D, A, जिसका मुख केंद्र की ओर नहीं है, के दायें से तीसरे स्थान पर बैठा है।


Que.1 F और A के ठीक बीच में कौन बैठा है?

(a) B

(b) C

(c) E

(d) D

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (e) इनमें से कोई नहीं


Que.2 निम्नलिखित में से कौन B के दायें से दूसरे स्थान पर है?

(a) D

(b) C

(c) E

(d) H

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (b) C, B के दायें से दूसरे स्थान पर बैठा है।


Ans – (b) C sits second to the right of B.


Que.3


P के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(a) A, G के विपरीत है


(b) H, G के दायें से चौथे स्थान पर है


(c) H, G के बायें से चौथे स्थान पर है


(d) सभी सत्य हैं


(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (d) दिए गए सभी कथन सत्य हैं


Que.4 निम्नलिखित में से कौन उस व्यक्ति, जो H के ठीक बायें है, के दायें से दूसरे स्थान पर है?

(a) D

(b) C

(c) E

(d) F

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (b) C, H के ठीक बायें है


Que.5 निम्नलिखित में से कौन A के विपरीत बैठा है?

(a) B

(b) C

(c) E

(d) G

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (b) C, A के विपरीत बैठा है




Directions (Que.6-10): निम्नलिखित दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

एक समूह में आठ दोस्त – P, Q, R, S, T, U, V, और W एक सीधी पंक्ति में उत्तर की ओर मुख करके बैठे हैं।


P, U के दायें से तीसरे स्थान पर बैठा है। न तो P न ही U पंक्ति के अंतिम छोर पर बैठा है। T या तो P या U का निकटतम पड़ोसी नहीं है। W और R के बीच एक व्यक्ति बैठा है। Q पंक्ति के अंतिम छोर पर बैठा है। Q, P के ठीक दायें बैठा है। T, S के बायें नहीं बैठा है। R पंक्ति के किसी छोर से चौथे स्थान पर बैठा है।


Que.6 W और P के बीच कितने व्यक्ति बैठे हैं?

(a) एक


(b) तीन


(c) दो


(d) पांच


(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (c) W और P के बीच तीन व्यक्ति बैठे हैं।


Que.7 S और V के ठीक बीच में कौन बैठा है?

(a) W

(b) P

(c) T

(d) U

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (d) U, S और V के ठीक बीच में बैठा है


Que.8 U और Q के बीच कितने व्यक्ति बैठे हैं?

(a) एक


(b) तीन


(c) दो


(d) पांच


(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (b) U और Q के बीच तीन व्यक्ति बैठे हैं


Que.9 U के सन्दर्भ में S का स्थान क्या है?

(a) बायें से दूसरा


(b) बायें से तीसरा


(c) दायें से तीसरा


(d) दायें से दूसरा


(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (d) S, U के दायें से दूसरे स्थान पर है


Que.10 यदि V, T से संबंधित है और U, P से संबंधित है, तो इसी प्रकार, S किससे संबंधित है?

(a) W

(b) T

(c) R

(d) U

(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (c) S, R से संबंधित है




Que.11 छह व्यक्ति A, B, C, D, E और F वृत्त के चारों ओर बैठे हैं जैसे कि B, D और C के बीच में है, A, E और C के बीच में है, और F, D के दायीं ओर है। ज्ञात कीजिए कि A और F के बीच कौन बैठा है।


(a) E


(b) C


(c) D


(d) F


(e) इनमें से कोई नहीं।


Ans (A)



Directions: (Que.12-16) दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।


(a) P, Q, R, S, T, U, और V एक वृत्त के चारों ओर केंद्र की ओर मुख करके बैठे हैं।


(b) P, V और S के बीच बैठा है।


(C) R, जो S के दायें से दूसरे स्थान पर है, Q और U के बीच बैठा है।


(d) Q, T का पड़ोसी नहीं है।


 Que.12 निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?


(a) V, P और S के बीच है।


(b) S, V के बायें से दूसरे स्थान पर है


(c) R, P के बायें से तीसरे स्थान पर है


(d) P,S के ठीक बायें है


(e) इनमें से कोई नहीं


उत्तर – (d) P, S के ठीक बायें है


Que.13 T का स्थान क्या है?


(a) R और V के बीच


(b) V के ठीक बायें


(c) R के बायें से दूसरा


(d) P के दायें से दूसरा


(e) इनमें से कोई नहीं


Ans- (b) V के ठीक बायें


Que.14 R और U के बीच में कौन बैठा है?


(a) T


(b) S


(c) V


(d) Q


(e) कोई नहीं


Ans – (a) T




Que.15 दी गई स्थिति के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?


(a) R, U के ठीक दायें बैठा है


(b) Q, R के ठीक बायें बैठा है


(c) T, Q के दायें से तीसरे स्थान पर है


(d) U, T के दायें से तीसरे स्थान पर है


उत्तर – (a) R, U के ठीक दायें है


Que.16 निम्नलिखित में से किस जोड़े में, दूसरा सदस्य पहले सदस्य के ठीक दायें है?


(a) QS


(b) PV


(c) RU


(d) VT


Ans – (c) RU




FAQs

Que.1 क्या SSC परीक्षा के लिए बैठक व्यवस्था के प्रश्न महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर - हां, SSC, रेलवे, बैंकिंग, डिफेन्स, आदि सहित सभी सरकारी परीक्षाओं में बैठक व्यवस्था के प्रश्न पूछे जाते हैं।


Que.2 बैठक व्यवस्था के कितने प्रकार के प्रश्न होते हैं?

उत्तर - बैठक व्यवस्था के प्रश्न मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं - सीधी रेखा में बैठक, दो समानांतर रेखा में बैठक, वृत्ताकार बैठक, वर्गाकार बैठक, आयताकार बैठक।



ब्राह्मण-कर्कटक कथा : पंचतंत्र की कहानी

 किसी नगर में ब्रह्मदत्त नामक एक ब्राह्मण रहता था। एक बार किसी काम से उसे दूसरे गाँव जाना पड़ा।


उसकी माँ ने कहा, “पुत्र, तुम अकेले मत जाओ। किसीको साथ ले लो।"


ब्राह्मण ने कहा, ''माँ, इस रास्ते में कोई ऐसा डर नहीं है। मैं अकेला ही चला जाऊँगा।”


फिर भी चलते समय उसकी माँ एक केकड़ा पकड़ लाई और बोली, ''तुम्हें जाना ही है, तो इस केकड़े को साथ ले जाओ। एक से दो भले। समय पड़ने पर काम आएगा।”


ब्राह्मण ने माँ की बात मान ली और केकड़े को कपूर की पूड़िया में रखकर अपने झोले में डाल लिया।


भयंकर गरमी पड़ रही थी। परेशान होकर ब्राह्मण रास्ते में एक पेड़ की छाया में लेट गया। उसे नींद आ गई। उसके सो जाने पर उस पेड़ के नीचे बिल से एक साँप निकला। वह ब्राह्मण के पास आया तो उसे कपूर की गंध आने लगी। वह ब्राह्मण के झोले में घुस गया और कपूर की पुड़िया मुँह में भरकर उसे निगलने का प्रयत्न करने लगा। पुड़िया खुल गई। बस, केकड़े ने तुरंत अपने तीखे पंजों से दबोचकर साँप को मार दिया।


ब्राह्मण की आँख खुली तो वह हैरान रह गया। कपूर की पुड़िया के पास ही मरे हुए साँप को देखकर वह समझ गया कि केकड़े ने ही साँप को मारकर उसकी जान बचाई है। उसने सोचा, अगर मैं माँ की आज्ञा न मानता और उस केकड़े को साथ न लाता, तो आज मेरी जान नहीं बचती।


(सीख : राह का साथी कोई भी हो समय पर सहायक होता है।)

.............

कहानी सुनाकर चक्रधर ने कहा, ''इसलिए कहता हूँ कि यात्रा में कोई दुर्बल व्यक्ति भी साथ हो, तो वह समय पर सहायक होता है।''


चक्रधर की यह बात मानकर सुवर्णसिद्रि ने उससे बिदा ली और लौट पड़ा।

Monday, October 30, 2023

Experiential Learning (प्रायोगिक ज्ञान)

 Direct Experience and Focused Reflection (प्रत्यक्ष अनुभव और केंद्रित प्रतिबिंब)

शिक्षा के दर्शन और पद्धति के रूप में अनुभवात्मक शिक्षा जो प्रत्यक्ष अनुभव और प्रतिबिंब के महत्व पर जोर देती है। इस दृष्टिकोण का उपयोग करने वाले शिक्षक जानबूझकर अपने छात्रों को व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल करते हैं और फिर उन्होंने जो सीखा है उस पर चिंतन करने में उनका मार्गदर्शन करते हैं। यह छात्रों के ज्ञान को बढ़ाने, उनके कौशल विकसित करने और उनके मूल्यों को स्पष्ट करने में मदद करता है।


उदाहरण के लिए, एक इंजीनियरिंग कक्षा के एक शिक्षक के पास असाइनमेंट के रूप में एक छोटे से पुल का डिज़ाइन और निर्माण करने वाले छात्र हो सकते हैं। छात्रों को पुल के निर्माण पर डिजाइन, बजट, सामग्री और काम पर काम करना होगा। पुल बनने के बाद, शिक्षक एक कक्षा चर्चा की सुविधा प्रदान करेगा जहां छात्र इंजीनियरिंग, डिजाइन प्रक्रिया, और असाइनमेंट के दौरान विकसित समस्या समाधान कौशल के बारे में जो कुछ सीखा है, उस पर प्रतिबिंबित करते हैं। यह प्रतिबिंब छात्रों को अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है और उन्हें उन क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करता है जिनमें उन्हें सुधार करने की आवश्यकता है।

Learn by Doing (करके सींखें)

अनुभवजन्य शिक्षा (प्रायोगिक ज्ञान) एक व्यस्त सीखने की प्रक्रिया के रूप में जो हाथों के अनुभव और प्रतिबिंब के महत्व पर जोर देती है। यह एक ऐसी विधि है जहाँ छात्र अनुभव करके और उस पर विचार करके सीखते हैं। इस प्रकार की शिक्षा कई रूप ले सकती है, जैसे हाथों पर प्रयोगशाला प्रयोग, इंटर्नशिप, अभ्यास, क्षेत्र अभ्यास, विदेश में अध्ययन कार्यक्रम, स्नातक अनुसंधान और स्टूडियो प्रदर्शन।


उदाहरण के लिए, जीव विज्ञान वर्ग के एक शिक्षक पौधों की वृद्धि पर विभिन्न प्रकार के उर्वरकों के प्रभावों का निरीक्षण करने के लिए छात्रों से एक प्रयोगशाला प्रयोग करवा सकते हैं। छात्र प्रयोग करेंगे और अपनी टिप्पणियों को रिकॉर्ड करेंगे। प्रयोग के बाद, शिक्षक एक कक्षा चर्चा की सुविधा प्रदान करेगा जहाँ छात्र इस बात पर विचार करेंगे कि उन्होंने प्रयोग से क्या सीखा, जैसे पौधों की वृद्धि पर विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का प्रभाव, और यह कक्षा सामग्री से कैसे संबंधित है। यह प्रतिबिंब छात्रों को अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है और उन्हें उन क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करता है जिनमें उन्हें सुधार करने की आवश्यकता है।

प्रायोगिक सीखने की गतिविधियों को छात्रों को व्यावहारिक, वास्तविक दुनिया के अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो उन्हें सामग्री को बेहतर ढंग से समझने और उनके महत्वपूर्ण सोच कौशल में सुधार करने में मदद कर सकता है।


Learning through experience (अनुभव के माध्यम से सीखना)

अनुभव के माध्यम से सीखने की अवधारणा कॉलेज की कक्षाओं में एक नई अवधारणा नहीं है और जॉन डेवी, कार्ल रोजर्स और डेविड कोलब जैसे उल्लेखनीय शैक्षिक मनोवैज्ञानिकों ने सीखने के सिद्धांतों की नींव प्रदान की है जो इस दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने ऐसे सिद्धांत विकसित किए हैं जो हाथों-हाथ अनुभव के महत्व पर जोर देते हैं, जिसे “करके सीखना” भी कहा जाता है।


उदाहरण के लिए, अनुभवात्मक शिक्षा पर जॉन डेवी का काम प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सक्रिय भागीदारी और सीखने के महत्व पर जोर देता है। उनके सिद्धांत छात्रों को हाथों की गतिविधियों में संलग्न होने और उन्होंने जो सीखा है उस पर प्रतिबिंबित करने का अवसर प्रदान करने के महत्व पर जोर देते हैं। इसी तरह, कार्ल रोजर्स ने “अनुभवात्मक शिक्षा” की अवधारणा को प्रस्तावित किया जो सीखने के स्रोत के रूप में छात्र के व्यक्तिगत अनुभव पर केंद्रित है। डेविड कोलब का प्रायोगिक अधिगम सिद्धांत भी प्रत्यक्ष अनुभव, प्रतिबिंब और भविष्य की स्थितियों में सीखने के अनुप्रयोग के महत्व पर जोर देता है।

इसलिए इन शैक्षिक मनोवैज्ञानिकों ने कॉलेज की कक्षाओं में अनुभव के माध्यम से सीखने की अवधारणा के लिए सैद्धांतिक आधार प्रदान किया है और उनका काम आज भी शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावशाली बना हुआ है।




अनुभवजन्य अधिगम की नींव की खोज: जॉन डेवी, कार्ल रोजर्स, और डेविड कोलब की थ्योरीज़ इन एक्शन)

1. जॉन डेवी का अनुभवात्मक अधिगम का सिद्धांत (John Dewey’s Theory of Experiential Learning): अनुभवात्मक शिक्षा का जॉन डेवी का सिद्धांत प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सक्रिय भागीदारी और सीखने के महत्व पर जोर देता है। उनका मानना था कि छात्र हाथों-हाथ, समस्या-समाधान गतिविधियों के माध्यम से सबसे अच्छा सीखते हैं जो उनके जीवन के लिए प्रासंगिक हैं। डेवी का सिद्धांत छात्रों को व्यावहारिक गतिविधियों में संलग्न होने और उन्होंने जो सीखा है उस पर चिंतन करने का अवसर प्रदान करने के महत्व पर जोर देता है।


उदाहरण के लिए, एक शिक्षक एक स्थायी शहर के मॉडल को डिजाइन करने और बनाने के लिए छात्रों को समूहों में काम करने के लिए कह सकता है, यह परियोजना-आधारित सीखने का दृष्टिकोण छात्रों को पर्यावरण विज्ञान और शहरी नियोजन जैसे कक्षा में सीखी गई बातों को लागू करने की अनुमति देता है, और इस पर प्रतिबिंबित करता है। उनका सीखने का अनुभव।

2. कार्ल रोजर्स का अनुभवात्मक अधिगम का सिद्धांत (Carl Rogers’s Theory of Experiential Learning): कार्ल रोजर्स ने “अनुभवात्मक अधिगम” की अवधारणा को प्रस्तावित किया जो सीखने के स्रोत के रूप में छात्र के व्यक्तिगत अनुभव पर केंद्रित है। उनका मानना था कि छात्र सबसे अच्छा तब सीखते हैं जब वे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं और जब सामग्री उनके जीवन के लिए प्रासंगिक होती है। रोजर्स का सिद्धांत एक सुरक्षित और सहायक शिक्षण वातावरण बनाने के महत्व पर जोर देता है जहां छात्र अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने में सहज महसूस करते हैं।


उदाहरण के लिए, एक शिक्षक छात्रों को एक पत्रिका रखने के लिए कह सकता है जहां वे कक्षा में अध्ययन किए जा रहे किसी विषय से संबंधित अपने व्यक्तिगत अनुभवों को प्रतिबिंबित करते हैं, जैसे कि सांस्कृतिक विविधता, यह दृष्टिकोण छात्रों को अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने और सिद्धांत को अपने स्वयं के साथ जोड़ने की अनुमति देता है। अनुभव।

3. डेविड कोलब का अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत चरणों में (David Kolb’s Experiential Learning theory in steps): डेविड कोलब का अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत चार मुख्य चरणों पर आधारित है:


ठोस अनुभव (सीई) (Concrete Experience (CE)): छात्रों को विषय का प्रत्यक्ष अनुभव होता है।

चिंतनशील अवलोकन (आरओ) (Reflective Observation (RO)): छात्र अपने अनुभव को देखते हैं और उस पर चिंतन करते हैं।

सार अवधारणा (एसी) (Abstract Conceptualization (AC)): छात्र अवधारणा बनाते हैं और अनुभव से सामान्यीकरण करते हैं।

सक्रिय प्रयोग (एई) (Active Experimentation (AE)): छात्र सीखी गई अवधारणाओं और सिद्धांतों को नई स्थितियों में लागू करते हैं।

उदाहरण के लिए, एक शिक्षक छात्रों को एक स्थानीय व्यवसाय के लिए एक क्षेत्र यात्रा में भाग लेने के लिए कह सकता है, यात्रा के दौरान, छात्रों को संचालन का निरीक्षण करने और कर्मचारियों से प्रश्न पूछने का अवसर मिलेगा। यात्रा के बाद, छात्र इस बात पर विचार करेंगे कि उन्होंने क्या देखा और यह कक्षा में सीखी गई अवधारणाओं से कैसे संबंधित है। इसके बाद, वे एकत्रित की गई जानकारी का विश्लेषण करेंगे और अवधारणाओं का निर्माण करेंगे, और अंत में, उन्होंने जो सीखा है उसे एक नई स्थिति में लागू करेंगे, जैसे कि समान व्यवसाय के लिए एक व्यवसाय योजना बनाना।




छात्र को शामिल करना: हैंड्स-ऑन, सहयोगात्मक और चिंतनशील अनुभवों के माध्यम से अनुभवात्मक सीखने की शक्ति)

अनुभवात्मक अधिगम का एक प्रमुख तत्व छात्र है, और यह अधिगम सीखने की प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के परिणामस्वरूप होता है। इसका मतलब यह है कि छात्र सक्रिय रूप से वास्तविक दुनिया के अनुभवों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं जो उनके जीवन के लिए प्रासंगिक हैं और जो उन्होंने सीखा है उस पर प्रतिबिंबित करने में सक्षम हैं।


अनुभवात्मक अधिगम में कई कदम शामिल होते हैं जो छात्रों को व्यावहारिक, सहयोगी और चिंतनशील सीखने का अनुभव प्रदान करते हैं। ये कदम छात्रों को “नए कौशल और ज्ञान को पूरी तरह से सीखने” में मदद करते हैं (हेन्स, 2007)।


उदाहरण के लिए, एक शिक्षक नागरिक सहभागिता पर एक कक्षा के भाग के रूप में छात्रों को एक सामुदायिक सेवा परियोजना में भाग लेने के लिए कह सकता है। छात्र एक ऐसी परियोजना की योजना बनाने और उसे लागू करने के लिए मिलकर काम करेंगे जो एक स्थानीय मुद्दे को संबोधित करती है, जैसे सामुदायिक उद्यान बनाना। परियोजना के दौरान, छात्रों को कक्षा में सीखी गई बातों को लागू करने और एक सामान्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा। परियोजना के बाद, शिक्षक एक कक्षा चर्चा की सुविधा प्रदान करेगा जहाँ छात्र इस बात पर विचार करते हैं कि उन्होंने क्या सीखा और यह कक्षा में शामिल सामग्री से कैसे संबंधित है। इस प्रकार का व्यावहारिक, सहयोगी और चिंतनशील अनुभव छात्रों को सामग्री को पूरी तरह से समझने और बनाए रखने में मदद करता है, और उन्हें महत्वपूर्ण सोच कौशल विकसित करने में भी मदद करता है।

इसी तरह, एक इंजीनियरिंग कक्षा में, छात्रों को एक नए उत्पाद का प्रोटोटाइप बनाने और डिजाइन करने के लिए कहा जा सकता है, इस प्रकार की परियोजना-आधारित शिक्षा छात्रों को उन अवधारणाओं को लागू करने की अनुमति देती है जो उन्होंने कक्षा में सीखी हैं, जैसे डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया, टीमों में काम करें, और परियोजना के परिणाम पर विचार करें। इस प्रकार का व्यावहारिक, सहयोगी और चिंतनशील अनुभव छात्रों को सामग्री को पूरी तरह से समझने और बनाए रखने में मदद करता है, और उन्हें समस्या सुलझाने के कौशल विकसित करने में भी मदद करता है।


कुल मिलाकर, अनुभवात्मक सीखने के दृष्टिकोण छात्रों को सामग्री के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, एक साथ काम करने और उनके सीखने के अनुभवों को प्रतिबिंबित करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस प्रकार की शिक्षा अक्सर पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक प्रभावी होती है और छात्रों को सामग्री को बेहतर ढंग से समझने और बनाए रखने और कौशल विकसित करने में मदद कर सकती है जो उनके जीवन के लिए प्रासंगिक हैं।




सार्थक सीखने के लिए चरण-दर-चरण: अनुभवात्मक सीखने के अनुभव के लिए एक गाइड, चिंतन, विश्लेषण, सामान्यीकरण और प्रक्रिया लागू करें)

अनुभवात्मक अधिगम एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कई कदम शामिल होते हैं जो छात्रों को नए कौशल और ज्ञान को पूरी तरह से समझने और बनाए रखने में मदद करते हैं। निम्नलिखित उन चरणों का वर्णन करता है जिनमें हेन्स (2007) और यूसी डेविस (2011) द्वारा उल्लेखित अनुभवात्मक शिक्षा शामिल है।


“करना” का अनुभव/अन्वेषण (Experiencing/Exploring “Doing”): इस कदम में सक्रिय रूप से व्यावहारिक अनुभव, जैसे प्रयोगशाला प्रयोग, क्षेत्र यात्रा, या सेवा परियोजना शामिल है। उदाहरण के लिए, जीव विज्ञान की कक्षा में, छात्र पौधों की वृद्धि पर विभिन्न प्रकार के उर्वरकों के प्रभावों का निरीक्षण करने के लिए एक प्रयोगशाला प्रयोग कर सकते हैं।

“क्या हुआ?” को साझा करना/चिंतन करना (Sharing/Reflecting “What Happened?”): अनुभव के बाद, छात्र इस बात पर चिंतन करते हैं कि उन्होंने क्या किया है, अपनी टिप्पणियों और विचारों को दूसरों के साथ साझा करते हैं, और उन्होंने जो सीखा है उस पर चर्चा करते हैं। उदाहरण के लिए, प्रयोग करने के बाद, छात्रों ने जो कुछ देखा और जो सीखा है, उस पर चर्चा करेंगे और इस पर विचार करेंगे।

प्रसंस्करण/विश्लेषण “क्या महत्वपूर्ण है?” (Processing/Analyzing “What’s Important?”): छात्र मुख्य अवधारणाओं और संबंधों की पहचान करते हुए एकत्रित की गई जानकारी को संसाधित और विश्लेषण करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र प्रयोग के दौरान एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण करेंगे और पौधों की वृद्धि पर विभिन्न प्रकार के उर्वरकों के प्रभावों की पहचान करेंगे।

सामान्यीकरण “तो क्या?” (Generalizing “So What?”): छात्र अनुभव से सामान्यीकरण करते हैं, अवधारणाओं और सिद्धांतों को बनाते हैं जिन्हें अन्य स्थितियों में लागू किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, छात्र प्रयोग से सामान्यीकरण करेंगे और एक अवधारणा बनाएंगे कि विभिन्न प्रकार के उर्वरक पौधों की वृद्धि को कैसे प्रभावित करते हैं।

अनुप्रयोग “अब क्या?” (Application “Now What?”): छात्रों ने नई परिस्थितियों में जो सीखा है उसे लागू करते हैं, जैसे कि एक स्थायी कृषि परियोजना के लिए व्यवसाय योजना बनाना।

ये कदम छात्रों को व्यावहारिक, सहयोगी और चिंतनशील सीखने का अनुभव प्रदान करते हैं जो उन्हें नए कौशल और ज्ञान को पूरी तरह से समझने और बनाए रखने में मदद करता है। यह छात्रों को महत्वपूर्ण सोच और समस्या सुलझाने के कौशल विकसित करने में भी मदद करता है।





अनुभवात्मक अधिगम में प्रशिक्षक की भूमिकाएँ)

अनुभवात्मक अधिगम में, प्रशिक्षक सीखने की प्रक्रिया को निर्देशित करने के बजाय मार्गदर्शन करता है जहाँ छात्र स्वाभाविक रूप से सीखने में रुचि रखते हैं। (वुर्डिंगर और कार्लसन, 2010) (Wurdinger & Carlson, 2010)


कक्षा में कम शिक्षक-केंद्रित भूमिका स्वीकार करने के लिए तैयार रहें (Be willing to accept a less teacher-centric role in the classroom): इसका मतलब है कि प्रशिक्षक यह पहचानता है कि छात्रों की स्वाभाविक रूप से सीखने में रुचि है और सीखने की प्रक्रिया छात्र-केंद्रित है। उदाहरण के लिए, एक प्रशिक्षक एक समूह चर्चा की सुविधा प्रदान कर सकता है और छात्रों को स्वयं इसे आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत को चलाने की अनुमति देता है।

सीखने के अनुभव को एक सकारात्मक, गैर-प्रभुत्वपूर्ण तरीके से देखें (Approach the learning experience in a positive, non-dominating way): प्रशिक्षक एक सकारात्मक और सहायक सीखने का माहौल बनाता है जहां छात्र अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने में सहज महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों के सीखने का मार्गदर्शन करने के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मक आलोचना का उपयोग कर सकता है।

एक ऐसे अनुभव की पहचान करें जिसमें छात्र रुचि लेंगे और व्यक्तिगत रूप से प्रतिबद्ध होंगे (Identify an experience in which students will find interest and be personally committed): प्रशिक्षक सीखने की गतिविधियों को डिजाइन करता है जो छात्रों के लिए प्रासंगिक और दिलचस्प हैं, और उन्हें अनुभवात्मक सीखने की स्थिति का उद्देश्य समझाता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों को उनके समुदाय में एक सेवा-शिक्षण परियोजना में भाग लेने के लिए कह सकता है, जिसके बारे में वे भावुक हैं।

अपने छात्रों के साथ अपनी भावनाओं और विचारों को साझा करें और उन्हें बताएं कि आप भी अनुभव से सीख रहे हैं (Share your feelings and thoughts with your students and let them know that you are learning from the experience too): प्रशिक्षक एक विकास मानसिकता का मॉडल बनाता है और छात्रों को अपने स्वयं के सीखने के अनुभवों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक कक्षा में चर्चा किए जा रहे किसी विषय पर अपने स्वयं के अनुभव और विचार साझा कर सकता है।

पाठ्यक्रम सीखने के उद्देश्यों को पाठ्यक्रम की गतिविधियों और प्रत्यक्ष अनुभवों से बाँधें ताकि छात्रों को पता चले कि उन्हें क्या करना है(Tie the course learning objectives to course activities and direct experiences so students know what they are supposed to do): प्रशिक्षक सीखने के उद्देश्यों को अनुभवात्मक सीखने की गतिविधियों से जोड़ता है और छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि गतिविधियाँ पाठ्यक्रम सामग्री से कैसे संबंधित हैं। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों को प्रायोगिक प्रयोगशाला प्रयोग में भाग लेने के लिए कह सकता है और इसे कक्षा में शामिल सैद्धांतिक अवधारणाओं से जोड़ सकता है।

छात्रों को सफल होने में मदद करने के लिए प्रासंगिक और सार्थक संसाधन प्रदान करें (Provide relevant and meaningful resources to help students succeed): प्रशिक्षक छात्रों को उनकी सीखने की यात्रा में उपयोगी सामग्री और संसाधन उपलब्ध कराता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों को उनकी समझ के पूरक के लिए अनुभवात्मक सीखने की गतिविधि से संबंधित रीडिंग, वीडियो या ऑनलाइन संसाधन प्रदान कर सकता है।

छात्रों को स्वयं प्रयोग करने और समाधान खोजने की अनुमति दें (Allow students to experiment and discover solutions on their own): प्रशिक्षक छात्रों को अपने सीखने का स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करता है और उन्हें विभिन्न दृष्टिकोणों का पता लगाने और प्रयोग करने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों को अपने स्वयं के प्रोजेक्ट और शोध अध्ययन डिजाइन करने की स्वतंत्रता दे सकता है।

शिक्षण के शैक्षणिक और पोषण संबंधी पहलुओं के बीच संतुलन की भावना खोजें (Find a sense of balance between the academic and nurturing aspects of teaching): प्रशिक्षक अकादमिक कठोरता प्रदान करने और एक सहायक और सीखने के माहौल को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाए रखता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक चुनौतीपूर्ण कार्य प्रदान कर सकता है और साथ ही उन छात्रों को अतिरिक्त सहायता और सहायता भी प्रदान कर सकता है जिन्हें इसकी आवश्यकता हो सकती है।

छात्रों और प्रशिक्षकों की भूमिकाओं को स्पष्ट करें (Clarify students’ and instructors roles): प्रशिक्षक अनुभवात्मक अधिगम प्रक्रिया में छात्रों और प्रशिक्षक दोनों की अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से बताता है। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक पाठ्यक्रम के लिए छात्रों और प्रशिक्षक दोनों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए एक विस्तृत पाठ्यक्रम प्रदान कर सकता है।





अनुभवात्मक अधिगम में छात्र भूमिकाएँ

(Student Roles in Experiential Learning)

अनुभवजन्य अधिगम के गुण वे हैं जिनमें विद्यार्थी अधिगम अनुभव में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का निर्णय लेते हैं (विद्यार्थी अपने स्वयं के अधिगम में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं और अधिगम की दिशा में उनकी एक व्यक्तिगत भूमिका है)। (वुर्डिंगर और कार्लसन, 2010) (Wurdinger & Carlson, 2010)


छात्र उन समस्याओं में शामिल होंगे जो व्यावहारिक, सामाजिक और व्यक्तिगत हैं (Students will be involved in problems which are practical, social and personal): अनुभवात्मक सीखने की गतिविधियों को छात्रों के लिए प्रासंगिक और सार्थक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसमें अक्सर वास्तविक दुनिया की समस्याएं शामिल होती हैं जिनका व्यावहारिक, सामाजिक या व्यक्तिगत महत्व होता है। उदाहरण के लिए, छात्र किसी स्थानीय मुद्दे को संबोधित करने के लिए सामुदायिक सेवा परियोजना में भाग ले सकते हैं, जिसके बारे में वे भावुक हैं।

छात्रों को कक्षा में तब तक आज़ादी दी जाएगी जब तक वे सीखने की प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं (Students will be allowed freedom in the classroom as long as they make headway in the learning process): सीखने की प्रक्रिया छात्र-केंद्रित है और छात्रों को अलग-अलग दृष्टिकोणों का पता लगाने और प्रयोग करने की आज़ादी दी जाती है जब तक कि वे अपने सीखने में प्रगति कर रहे हैं।

खोज करते समय छात्रों को अक्सर कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शामिल होने की आवश्यकता होगी (Students often will need to be involved with difficult and challenging situations while discovering): अनुभवात्मक सीखने में अक्सर व्यावहारिक, वास्तविक दुनिया के अनुभव शामिल होते हैं जो चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं और छात्रों को कठिनाइयों के माध्यम से काम करने और बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, छात्र किसी दूरस्थ स्थान पर क्षेत्र अध्ययन में भाग ले सकते हैं, जो भौतिक और मौसम की स्थिति के कारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

छात्र सीखने की प्रक्रिया में अपनी प्रगति या सफलता का स्व-मूल्यांकन करेंगे जो मूल्यांकन का प्राथमिक साधन बन जाता है (Students will self-evaluate their own progression or success in the learning process which becomes the primary means of assessment): छात्रों को अपने स्वयं के सीखने के अनुभवों को प्रतिबिंबित करने और अपनी प्रगति और सफलता का आत्म-मूल्यांकन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह स्व-मूल्यांकन पाठ्यक्रम के लिए मूल्यांकन का प्राथमिक साधन बन जाता है।

छात्र सीखने की प्रक्रिया से सीखेंगे और परिवर्तन के लिए खुले रहेंगे (Students will learn from the learning process and become open to change): अनुभवात्मक शिक्षा छात्रों को विकास की मानसिकता विकसित करने और परिवर्तन के लिए खुला बनने में मदद करती है। वे सीखने की प्रक्रिया से सीखेंगे, प्रशिक्षक पर कम और अपने साथी साथियों पर अधिक निर्भर होकर, अनुसंधान कौशल विकसित करेंगे और किसी के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ स्व-मूल्यांकन करने की क्षमता विकसित करेंगे।




शिक्षण में अनुभवात्मक अधिगम को एकीकृत करना)

प्रासंगिक और सार्थक अनुभवों की पहचान करें (Identify Relevant and Meaningful Experiences): शिक्षण में अनुभवात्मक अधिगम को एकीकृत करने का एक प्रमुख पहलू प्रासंगिक और सार्थक अनुभवों की पहचान करना है जो पाठ्यक्रम के उद्देश्यों के साथ संरेखित होते हैं। उदाहरण के लिए, इतिहास की कक्षा का एक प्रशिक्षक ऐतिहासिक घटना का अनुभव करने और विषय वस्तु की गहरी समझ हासिल करने के लिए छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक स्थल या युद्ध के मैदान की यात्रा का आयोजन कर सकता है।

तय करें कि छात्रों को सीखने के अनुभव से क्या सीखना चाहिए या क्या हासिल करना चाहिए (Decide What Students Should Learn or Gain from the Learning Experience): प्रशिक्षकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे सीखने के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताएं और छात्रों को अनुभवात्मक सीखने के अनुभव से क्या हासिल करना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक भाषा वर्ग के एक प्रशिक्षक के पास विदेश में एक अध्ययन कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्र हो सकते हैं और उनके भाषा कौशल और सांस्कृतिक समझ में सुधार जैसे विशिष्ट उद्देश्य निर्धारित कर सकते हैं।

अपने स्वयं के शिक्षण में अनुभवात्मक अधिगम को एकीकृत करते समय विचार करने के लिए कुछ प्राथमिक बिंदु नीचे दिए गए हैं।


योजना (Plan): अपने शिक्षण में अनुभवात्मक अधिगम को एकीकृत करने से पहले, सीखने के उद्देश्यों, प्रासंगिक और सार्थक अनुभवों और आवश्यक सामग्रियों और संसाधनों की पहचान करके सीखने के अनुभव की योजना बनाएं। उदाहरण के लिए, एक प्रशिक्षक जंगल के अस्तित्व के पाठ्यक्रम के लिए एक अनुभवात्मक सीखने की गतिविधि के रूप में एक बाहरी उत्तरजीविता सिमुलेशन की योजना बना सकता है।

तैयारी करें (Prepare): एक बार योजना बन जाने के बाद, सामग्री और संसाधनों को इकट्ठा करके, रसद की व्यवस्था करके, और छात्रों को योजना और अपेक्षाओं को संप्रेषित करके अनुभवात्मक सीखने की गतिविधि के लिए तैयार करें। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक परिवहन की व्यवस्था करके, उपकरण एकत्र करके, और छात्रों को बाहरी उत्तरजीविता सिमुलेशन के लिए एक विस्तृत यात्रा कार्यक्रम प्रदान करके तैयार कर सकता है।

सुगम बनाना (Facilitate): अनुभवजन्य सीखने की गतिविधि के दौरान, छात्रों को समस्या-समाधान, सहयोग, सहयोग, आत्म-खोज और आत्म-चिंतन प्रक्रिया के माध्यम से मार्गदर्शन करके सीखने के अनुभव को सुगम बनाना। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक बाहरी उत्तरजीविता सिमुलेशन के बाद एक समूह चर्चा की सुविधा प्रदान कर सकता है ताकि छात्रों को यह समझने में मदद मिल सके कि उन्होंने क्या सीखा है।

मूल्यांकन करें (Evaluate): अनुभवजन्य सीखने की गतिविधि के बाद, छात्रों की प्रगति और समझ का आकलन करके और प्रतिक्रिया प्रदान करके सीखने के अनुभव का मूल्यांकन करें। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षक छात्रों से बाहरी उत्तरजीविता सिमुलेशन के दौरान उनके अनुभव पर एक प्रतिबिंब पत्र लिखने के लिए कह सकता है और इसे मूल्यांकन उपकरण के रूप में उपयोग कर सकता है।

कुल मिलाकर, अनुभवात्मक अधिगम को शिक्षण में एकीकृत करने में सीखने के अनुभव की योजना बनाना, तैयारी करना, सुविधा देना और मूल्यांकन करना शामिल है जो छात्रों को समस्या-समाधान, सहयोग, सहयोग, आत्म-खोज और आत्म-प्रतिबिंब के माध्यम से चुनौती देता है। यह छात्रों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने और व्यावहारिक और व्यक्तिगत अनुभव प्राप्त करने की अनुमति देता है।







अंधा, कुबड़ा और त्रिस्तनी : पंचतंत्र की कहानी

 उत्तरी प्रदेश में मधुपुर नाम का एक नगर है। वहाँ मधुसेन नाम का एक राजा था। विषय सुख भोगने वाले उस राजा मधुसेन को एक तीन स्तनों वाली कन्या उत्पन्न हुई। तीन स्तनों वाली कन्या की उत्पत्ति सुनकर राजा ने कंचुकियों से कहा--“भाई! यह त्रिस्तनी कन्या को दूर जंगल में ले जाकर छोड़ दो कोई जानने भी न पाये।” यह सुनकर कंचुकियों ने कहा--“महाराज! यह तो मालूम है ही कि तीन स्तनों वाली कन्या अनिष्ट करने वाली होती है, फिर भी ब्राह्मण बुलाकर उससे पूछ लेना चाहिए, जिससे दोनों लोक बने रहें; क्योंकि--


जो बराबर दूसरों से पूछता रहता है, सुनता रहता है और यथार्थ बातें धारण करता रहता है उसकी बुद्धि सूर्य की किरणों से कमलिनी की तरह बराबर बढ़ती रहती है। और भी-


जानकार मनुष्य को सदा पूछते रहना चाहिए। प्राचीन काल में राक्षसराज द्वारा पकड़ा हुआ भी एक ब्राह्मण पूछने के कारण छूट गया।”


सजा ने पूछा--“यह कैसे ?”


कंचुकियों ने कहा-


ब्राह्मण और राक्षसराज

देव! किसी जंगली प्रदेश में चंडकर्मा नाम का एक राक्षस रहता था। एक बार वह जंगल में घूम रहा था कि उसे एक ब्राह्मण मिला। वह उसके कंधे पर कूदकर बैठ गया और बोला--“अरे! आगे-आगे चलो।” ब्राह्मण भी बहुत डर गया, वह उसे कंधे पर लेकर चलने लगा। रास्ते में कमल की पंखुड़ियों के समान कोमल राक्षस के पैरों के तलवे को देखकर ब्राह्मण ने पूछा--“भाई! आपके पैर क्यों इतने कोमल हैं?”


राक्षस बोला--“भाई मैंने व्रत रखा है कि गीले पैरों से भूमि का स्पर्श नहीं करता।” यह सुनकर ब्राह्मण अपने छुटकारा पाने का उपाय सोचता हुआ एक सरोवर के किनारे पहुँचा। वहाँ पहुँचने पर राक्षस ने कहा--“जब तक मैं स्नान और देवपूजा करके न आऊँ तब तक तुम इस स्थान से कहीं अन्यत्र मत जाना।” यह कहकर राक्षस सरोवर में नहाने चला गया। ब्राह्मण ने सोचा कि यह देवपूजन करने के बाद निश्चय ही मुझे खा जायगा | इसलिए मैं जल्दी से भागूं जिससे वह गीले पैर मेरे पीछे न आ सके ।' ब्राह्मण ने वैसा ही किया। व्रत टूटने के डर से राक्षस भी उसके पीछे नहीं गया ।


इसलिए सब कहते हैं कि “जानकार आदमी को भी दूसरे से पूछते रहना चाहिए। बड़े राक्षस से भी पकड़े जाने पर सवाल पूछने से ब्राह्मण छूट गया ।”


उसकी बात सुनकर राजा ने ब्राह्मणों को वुलाकर पूछा, "हे ब्राहमणो! मेरे यहां त्रिस्तनी कन्या का जन्म हुआ है । इसकी शांति का कोई उपाय है या नहीं ? ब्राह्मणों ने कहा

-- देव ! सुनिए--


“मनुष्य के यहां कम अथवा अधिक अंगों वाली जो कन्या पैदा होती है, वह अपने पति और शील का नाश करती है ।


"इनमें से भी अगर तीन स्तनों वाली कन्या अपने पिता की नजर पड़े, तो वह तुरन्त अपने पिता का नाश कर देती है, इसमें संदेह नहीं ।


इसलिए इस लड़की को आपको नहीं देखना चाहिए। अगर कोई इस कन्या के साथ विवाह करे तो उसे इस कन्या को देकर देश से बाहर कर दीजिए । ऐसा करने से आपके दोनों लोक सुधरेंगे ।"


उनकी यह बात सुनकर राजा ने डंके की चोट पर मुनादी करा दी, "लोगो ! इस त्रिस्तनी कन्या के साथ जो कोई ब्याह करेगा, उसे एक लाख सुवर्ण मुद्रा उसी समय मिलेगा और उसे देश भी छोड़ना पड़ेगा।" मुनादी किये हुए बहुत दिन बीत गए, फिर भी उस कन्या को लेने को कोई तैयार न हुआ। वह जवान होने तक छिपे स्थान में रहकर यत्नपूर्वक पल-पुसकर बढ़ने लगी।


उसी नगर में कोई अंधा रहता था। उसका मंथरक नाम का एक कुबड़ा आगे लकड़ी पकड़ने वाला था। उन दोनों ने डुग्गी सुनकर आपस में विचार किया, "भाग्यवश कन्या मिलती हो तो हमें डुग्गी रोकनी चाहिए, जिससे सोना मिले जौर उसके मिलने से हमारी जिंदगी सुख से कटे । उस कन्या के दोष से कहीं मैं मर गया तो भी दरिद्रता से पैदा हुई उस तकलीफ से छुटकारा मिल जायगा। कहा है कि


"लज्जा, स्नेह, वाणी की मिठास, बुद्धि, जवानी, स्त्रियों का साथ, अपनों का प्यार, दुःख की हानि, विलास, धर्म, तन्दुरुस्ती, वृहस्पति जैसी बुद्धि, पवित्रता, और आचार-विचार ये सब बातें, आदमियों का पेट-रूपी गढ़ा जब अन्न से भरा होता हैँ, तभी संभव हैं।"


यह कहकर उस अंधे ने मुनादी करने वाले को रोक दिया और कहा, "मैं उस राजकन्या से विवाह करूंगा, यदि राजा मूझे उसे देगा।" बाद में राज कर्मचारियों ने जाकर राजा से कहा, "देव! किसी अंधे ने मुनादी रोक दी है, इस बारे में क्या करना चाहिए ?” राजा ने कहा -


“अंधा हो, बहरा हो, कोढ़ी हो या चाण्डाल हो, कोई भी हो यदि वह राजकन्या लेना चाहता है, वो उसे एक लाख सुवर्ण मुद्रा के साथ देश निकाला दिया जायेगा।”


राजा ने आज्ञा दे दी। राजपुरुषों ने नदी के किनारे ले जाकर एक लाख सुवर्ण मुद्रा के साथ त्रिस्तनी कन्या का उस अन्धे के साथ विवाह कर दिया। और उसे जलयान (जहाज) पर बैठाकर केवटों से कह दिया--“केवटों! विदेश में ले जाकर इस अंधे, कुबड़े और राजकन्या को किसी नगर में छोड़ देना।”


केवटों ने वैसा ही किया। उन्होंने जहाज में बैठाकर उसे विदेश में ले जाकर एक नगर में पहुँचा दिया। केवटों के दिखाने पर रुपये से उसने एक सुन्दर महल खरीद लिया और तीनों बड़े आराम के साथ वहाँ अपनी जिन्दगी का समय बिताने लगे। केवल अन्धा सदा पलंग पर सोया रहता था। घर का सारा कारबार कुबड़ा करता था। इस तरह उनका समय आराम से कटा चला जा रहा था कि कुछ ही दिनों में कुबड़े के साथ राजकन्या का अनुचित सम्बन्ध स्थापित हो गया। यह ठीक ही कहा गया है कि--


“यदि आग शीतल हो जाय, चन्द्रमा जलाने वाला बन जाय, समुद्र का पानी मीठा हो जाय तब स्त्रियों को सतीत्व हो सकता है।”



कुछ दिन बीतने पर त्रिस्तनी ने मन्‍थरक से कहा--“हे सुन्दर! यदि किसी तरह यह अन्धा मर जाय तो हम दोनों सुख की जिन्दगी बिताएँ। कहीं से ढूँढ़कर तुम विष ले आओ, उसे देकर मैं इसका काम तमाम कर दूँ और सुखी बनूँ।”


दूसरे दिन घूमते हुए कुबड़े को एक मरा हुआ काला साँप मिला। उसे लेकर वह प्रसन्न मन से घर वापस लौटा और त्रिस्तनी से बोला--“सुन्दरी! यह एक काला साँप मिल गया है। इसे टुकड़े-टुकड़े काटकर खूब अधिक सोंठ-मिर्च डालकर अच्छे स्वाद का बना डालो। उस अंधे को मछली का मांस बताकर इसे खिला दो। इसे खाते ही वह खत्म हो जायगा, क्योंकि उसे मछली का मांस सदा बहुत रुचिकर लगता है।"


यह कहकर मन्थरक बाहर चला गया। त्रिस्तनी ने तुरंत आग जलाई और काले साँप को टुकड़े टुकड़े काटकर उसमें मट्ठा डालकर चढ़ा दिया और घर के दूसरे कामों में व्यस्त होने के कारण अंधे के पास आकर विनय के साथ कहा-- आर्य पुत्र आज तुम्हें बहुत अधिक पसन्द आने वाली मछली का मांस मैंने मँगा रखा है, तुम हमेशा उसे पूछा करते थे। उसे मैंने पकाने के लिए आग पर चढ़ा दिया है, मैं जब तक दूसरे कामों को निपटा लूँ तब तक तुम करछी लेकर थोड़ी देर उसे चला दो।”


यह सुनकर अन्धा बहुत खुश हुआ। वह जीभ चाटते हुए तुरन्त पलंग से उठ बैठा और लेकर उसे चलाने लगा। मछली का मांस समझकर कड़ाही में चलाते हुए उस अंधे की आँखों पर छाया हुआ काला परदा साँप की विषैली भाप की गरमी से गलने लगा। उसे तुरन्त बहुत लाभ मालूम होने लगा। फिर तो उसने खूब फैला-फैलाकर आँखों में उसकी भाप ली। इस तरह थोड़ी देर में उसकी आँखें जब एकदम साफ हो गईं तो उसने देखा कि कड़ाही में केवल मट्ठा है और उसमें काले साँप के छोटे-छोटे टुकड़े पक रहे हैं, तब उसने सोचा--अरे! इसने क्यों मुझे मछली का मांस बताया, यह तो काले साँप के टुकड़े हैं। तो मैं इसका अच्छी तरह पता लगा लूँ कि इस त्रिस्तनी का मुझे मारने का यह इरादा है या कुबड़े का। या किसी दूसरे ने तो ऐसा नहीं किया है। इस तरह की बातें सोचता हुआ, वह अपने इरादे को छिपाकर पहले की तरह अन्धा बनकर उसे चलाता रहा। इसी बीच कुबड़ा बाहर से आ गया। उसे किसी का कोई डर तो था नहीं, आने के साथ ही त्रिस्तनी आलिंगन एवं चुम्बनादि करने लगा। उस अन्धे ने कुबड़े की सारी करतूत देख ली, उसे जब समीप में उन्हें मारने का कोई हथियार नहीं दिखा तो वह क्रोध से व्याकुल होकर पहले की तरह अंधा बन कर उन दोनों की शैय्या के पास गया। वहाँ जाकर उसने मजबूती के साथ कुबड़े के दोनों पैरों को पकड़कर अपने शिर के ऊपर घुमाया और घुमाने के बाद त्रिस्तनी की छाती पर उसे जोर से पटक दिया। कुबड़े के मारने से त्रिस्तनी का तीसरा स्तन छाती के भीतर बैठ गया और जोर से ऊपर घुमाने के कारण कूबड़े की टेढ़ी कमर भी सीधी हो गई।


इसी से मैंने कहा कि, 'अन्धा, कुबड़ा...इत्यादि।'


यह सुनकर सुवर्णसिद्धि ने कहा--“भाई! यह सच है यद्यपि दैव अनुकूल होने पर सर्वत्र कल्याण ही कल्याण होता है, किन्तु फिर भी मनुष्य को सत्पुरुषों का कहना मानना चाहिए। कभी टूटकर किसी से नहीं चलना चाहिए। जो बातें न मानकर टूटकर तुम्हारी तरह व्यवहार करता है, वह निश्चय ही विनाश के गड्ढे में गिरता है। और भी सुनिये -- एक ही उदर और अलग कण्ठ वाले, एक दुसरे का फल खाने वाले आपस में मेल न होने के कारण भारण्ड पक्षी की तरह नाश होते हैं।''


चक्रधर बोला--“यह कैसे ?”


उसने कहा--

Sunday, October 29, 2023

राक्षस का भय : पंचतंत्र की कहानी

 एक नगर में भद्रसेन नाम का राजा रहता था। उसकी कन्या रत्‍नवती बहुत रुपवती थी। उसे हर समय यही डर रहता था कि कोई राक्षस उसका अपहरण न करले । उसके महल के चारों ओर पहरा रहता था, फिर भी वह सदा डर से कांपती रहती थी । रात के समय उसका डर और भी बढ़ जाता था ।


एक रात एक राक्षस पहरेदारों की नज़र बचाकर रत्‍नवती के घर में घुस गया । घर के एक अंधेरे कोने में जब वह छि़पा हुआ था तो उसने सुना कि रत्‍नवती अपनी एक सहेली से कह रही है "यह दुष्ट विकाल मुझे हर समय परेशान करता है, इसका कोई उपाय कर ।"


राजकुमारी के मुख से यह सुनकर राक्षस ने सोचा कि अवश्य ही विकाल नाम का कोई दूसरा राक्षस होगा, जिससे राजकुमारी इतनी डरती है । किसी तरह यह जानना चाहिये कि वह कैसा है ? कितना बलशाली है ? यह सोचकर वह घोड़े का रुप धारण करके अश्‍वशाला में जा छिपा ।


उसी रात कुछ देर बाद एक चोर उस राज-महल में आया । वह वहाँ घोड़ों की चोरी के लिए ही आया था । अश्‍वशाला में जा कर उसने घोड़ों की देखभाल की और अश्‍वरुपी राक्षस को ही सबसे सुन्दर घोड़ा देखकर वह उसकी पिठ पर चढ़ गया । अश्‍वरुपी राक्षस ने सम्झा कि अवश्यमेव यह व्यक्ति ही विकाल राक्षस है और मुझे पहचान कर मेरी हत्या के लिए ही यह मेरी पीठ पर चढ़ा है । किन्तु अब कोई चारा नहीं था । उसके मुख में लगाम पड़ चुकी थी । चोर के हाथ में चाबुक थी । चाबुक लगते ही वह भाग खड़ा हुआ ।


कुछ दूर जाकर चोर ने उसे ठहरने के लिए लगाम खींची, लेकिन घोड़ा भागता ही गया । उसका वेग कम होने के स्थान पर बढ़ता ही गया । तब, चोर के मन में शंका हुई, यह घोड़ा नहीं बल्कि घोड़े की सूरत में कोई राक्षस है, जो मुझे मारना चाहता है । किसी ऊबड़-खाबड़ जगह पर ले जाकर यह मुझे पटक देगा । मेरी हड्डी-पसली टूट जायेगी ।


यह सोच ही रहा था कि सामने वटवृक्ष की एक शाखा आई । घोड़ा उसके नीचे से गुजरा । चोर ने घोडे़ से बचने का उपाय देखकर शाखा को दोनों हाथों से पकड़ लिया । घोड़ा नीचे से गुज़र गया, चोर वृक्ष की शाखा से लटक कर बच गया ।


उसी वृक्ष पर अश्‍वरुपी राक्षस का एक मित्र बन्दर रहता था । उसने डर से भागते हुये अश्‍वरुपी राक्षस को बुलाकर कहा-


"मित्र ! डरते क्यों हो ? यह कोई राक्षस नहीं, बल्कि मामूली मनुष्य है । तुम चाहो तो इसे एक क्षण में खाकर हज़म कर लो ।"


चोर को बन्दर पर बड़ा क्रोध आ रहा था । बन्दर उससे दूर ऊँची शाखा पर बैठा हुआ था । किन्तु उसकी लम्बी पूंछ चोर के मुख के सामने ही लटक रही थी । चोर ने क्रोधवश उसकी पूंछ को अपने दांतों में भींच कर चबाना शुरु कर दिया । बन्दर को पीड़ा तो बहुत हुई लेकिन मित्र राक्षस के सामने चोर की शक्ति को कम बताने के लिये वह वहाँ बैठा ही रहा । फिर भी, उसके चेहरे पर पीड़ा की छाया साफ नजर आ रही थी।


उसे देखकर राक्षस ने कहा - "मित्र ! चाहे तुम कुछ ही कहो, किन्तु तुम्हारा चेहरा कह रहा है कि तुम विकाल राक्षस के पंजे में आ गये हो ।"



यह कह कर वह भाग गया ।

........................

सुवर्णसिद्धि बोला--“ तो भाई! मुझे भी घर जाने की आज्ञा दो। तुम अपने लोभरूपी वृक्ष का फल यहाँ रहकर चखो।”


चक्रधर बोला--“भाई! यह तो बिना किसी कारण के ही हो गया।” मनुष्य को शुभ-अशुभ फल के भोग भाग्यवश भोगने ही पड़ते हैं। कहा गया है कि--


जिस रावण का दुर्ग त्रिकूट था, समुद्र खाई थे, योद्धा राक्षस थे, कुबेर से अटूट धन मिला था, जो स्वयं शुक्राचार्य की राजनीति का महान पण्डित था, वह भी दुर्भाग्य से विपत्ति के चक्र में पिस गया। और भी देखो कि--


अंधा, कुबड़ा और तीन स्तनों वाली राजकन्या--ये तीनों कर्म के सम्मुख उपस्थित होकर अन्याय से भी सिद्धि को प्राप्त हुए।

सुवर्णसिद्धि बोला--“यह कैसे ?”

उसने कहा--

सियार और ढोल : पंचतंत्र की कहानी

 एक बार एक जंगल के निकट दो राजाओं के बीच घोर युद्ध हुआ। एक जीता दूसरा हारा। सेनाएं अपने नगरों को लौट गईं। बस, सेना का एक ढोल पीछे रह गया। उस ढोल को बजा-बजाकर सेना के साथ गए भाट व चारण रात को वीरता की कहानियां सुनाते थे।

युद्ध के बाद एक दिन आंधी आई। आंधी के जोर में वह ढोल लुढ़कता-पुढ़कता एक सूखे पेड़ के पास जाकर टिक गया। उस पेड़ की सूखी टहनियां ढोल से इस तरह से सट गई थीं कि तेज हवा चलते ही ढोल पर टकरा जाती थीं और ढमाढम-ढमाढम की गुंजायमान आवाज होती।

एक सियार उस क्षेत्र में घूमता था। उसने ढोल की आवाज सुनी। वह बड़ा भयभीत हुआ। ऐसी अजीब आवाज बोलते पहले उसने किसी जानवर को नहीं सुना था। वह सोचने लगा कि यह कैसा जानवर है, जो ऐसी जोरदार बोली बोलता है 'ढमाढम'। सियार छिपकर ढोल को देखता रहता, यह जानने के लिए कि यह जीव उड़ने वाला है या चार टांगों पर दौड़ने वाला।

एक दिन सियार झाड़ी के पीछे छुपकर ढोल पर नजर रखे था। तभी पेड़ से नीचे उतरती हुई एक गिलहरी कूदकर ढोल पर उतरी। हलकी-सी ढम की आवाज भी हुई। गिलहरी ढोल पर बैठी दाना कुतरती रही।

सियार बड़बड़ाया, 'ओह! तो यह कोई हिंसक जीव नहीं है। मुझे भी डरना नहीं चाहिए।'

सियार फूंक-फूंककर कदम रखता ढोल के निकट गया। उसे सूंघा। ढोल का उसे न कहीं सिर नजर आया और न पैर। तभी हवा के झोंके से टहनियां ढोल से टकराईं। ढम की आवाज हुई और सियार उछलकर पीछे जा गिरा।

'अब समझ आया', सियार उठने की कोशिश करता हुआ बोला, 'यह तो बाहर का खोल है। जीव इस खोल के अंदर है। आवाज बता रही है कि जो कोई जीव इस खोल के भीतर रहता है, वह मोटा-ताजा होना चाहिए। चर्बी से भरा शरीर। तभी ये ढम-ढम की जोरदार बोली बोलता है।'

अपनी मांद में घुसते ही सियार बोला, 'ओ सियारी! दावत खाने के लिए तैयार हो जा। एक मोटे-ताजे शिकार का पता लगाकर आया हूं।'

सियारी पूछने लगी, 'तुम उसे मारकर क्यों नहीं लाए?'

सियार ने उसे झिड़की दी, 'क्योंकि मैं तेरी तरह मूर्ख नहीं हूं। वह एक खोल के भीतर छिपा बैठा है। खोल ऐसा है कि उसमें दो तरफ सूखी चमड़ी के दरवाजे हैं। मैं एक तरफ से हाथ डाल उसे पकड़ने की कोशिश करता तो वह दूसरे दरवाजे से न भाग जाता?'

चांद निकलने पर दोनों ढोल की ओर गए। जब वे निकट पहुंच ही रहे थे कि फिर हवा से टहनियां ढोल पर टकराईं और ढम-ढम की आवाज निकली। सियार सियारी के कान में बोला, 'सुनी उसकी आवाज? जरा सोच जिसकी आवाज ऐसी गहरी है, वह खुद कितना मोटा ताजा होगा।'

दोनों ढोल को सीधा कर उसके दोनों ओर बैठे और लगे दांतों से ढोल के दोनों चमड़ी वाले भाग के किनारे फाड़ने। जैसे ही चमड़ियां कटने लगी, सियार बोला, 'होशियार रहना। एक साथ हाथ अंदर डाल शिकार को दबोचना है।'

दोनों ने 'हूं' की आवाज के साथ हाथ ढोल के भीतर डाले और अंदर टटोलने लगे। अंदर कुछ नहीं था। एक-दूसरे के हाथ ही पकड़ में आए।



दोनों चिल्लाए, 'हैं ! यहां तो कुछ नहीं है।' और वे माथा पीटकर रह गए।


सीख : बड़ी-बड़ी शेखी मारने वाले लोग भी ढोल की तरह ही अंदर से खोखले होते हैं।

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यह कहानी सुनने के बाद पिंगलक ने कहा, “भाई, मैं क्या करूँ? जब मेरा पूरा परिवार और सभी साथी भयभीत होकर भागने पर तुले हैं तो अकेला मैं ही कैसे धैर्य से रह सकता हूँ?''


दमनक ने कहा, “इसमें आपके सेवकों का क्या दोष है! जैसा मालिक करेगा वैसा ही सेवक करेंगे। तो भी आप तब तक यहाँ ठहरिए जब तक मैं उस आवाज के विषय में ठीक-ठीक पता न लगा लूँ।''


पिंगलक ने आश्चर्य से पूछा, “क्या तुम वास्तव में वहाँ जाने की सोच रहे हो?"


दमनक ने जवाब दिया, “स्वामी की आज्ञा से तो योग्य सेवक कोई भी काम कर सकता है, चाहे उसे साँप के मुँह में हाथ डालना पड़े या समुद्र ही पार करना पड़े। राजाओं को चाहिए कि ऐसे ही सेवक को सदा अपने निकट रखें।"


पिंगलक ने कहा, ''अगर ऐसी बात है तो जाओ, भद्र, तुम्हारा मार्ग मंगलमय हो।''


दमनक उसको प्रणाम करके आवाज की दिशा में चल पड़ा।


पिंगलक को पछतावा होने लगा कि मैंने बेकार ही दमनक की बातों में आकर उसे अपने मन का भेद बता दिया। उसका क्या विश्वास! पहले मंत्री का पद छिन जाने के कारण वह खिन्‍न तो है ही। बदला लेने के लिए यह भी तो हो सकता है कि दमनक लालच में आकर शत्रु से मिल जाए और बाद में घात लगाकर मुझको ही मरवा दे। खैर, अब तो एक ही रास्ता है कि कहीं दूसरी जगह छिपकर दमनक के आने की राह देखी जाए।


उधर दमनक खोजते-खोजते संजीवक के पास पहुँचा तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। जिसके डर से सिंह की जान निकल रही थी, वह तो यह मामूली-सा बैल है। दमनक इस स्थिति से लाभ उठाने की सोचने लगा--अब तो इस बैल से संधि या विग्रह, कुछ भी करके पिंगलक को सहज ही अपने वश में किया जा सकता है। यही सोचता-सोचता वह लौटकर पिंगलक के पास पहुँचा।


पिंगलक उसे आते देख सँभलकर बैठ गया। दमनक ने पिंगलक को प्रणाम किया।


पिंगलक ने पूछा, “तुमने उस भयंकर प्राणी को देखा क्या? ''


दमनक ने कहा, '' आपकी कृपा से मैं उसे देख आया हूँ।''


पिंगलक को आश्चर्य हुआ- 'सच?'



पिंगलक ने अपनी झेंप मिटाने के लिए कहा, “तो फिर उस बलवान जंतु ने तुम्हें छोड़ कैसे दिया? शायद उसने इसीलिए तुमको छोड़ दिया होगा कि बलशाली लोग अपने समान बलवाले से ही बैर या मित्रता करते हैं। कहाँ वह महाबली और कहाँ तुम जैसा तुच्छ, विनम्र प्राणी!”


दमनक ने मन का क्षोभ छिपाकर कहा, “ऐसा ही सही। वह सचमुच महान्‌ है। बलशाली है और मैं एकदम क्षुद्र, दीन प्राणी हूँ। तो भी यदि आप कहें तो मैं उसे भी लाकर आपकी सेवा में लगा सकता हूँ।"


पिंगलक ने चकित होकर कहा, “सच कहते हो? ऐसा संभव है?''


दमनक बोला, “बुद्धि के लिए कुछ भी असंभव नहीं।''


तब पिंगलक ने कहा, “अगर ऐसी बात है तो मैं आज से ही तुमको अपना मंत्री नियुक्त करता हूँ। तुम्हें प्रजा पर दया और दंड के अधिकार देता हूँ।''


पद और अधिकार पाकर प्रसन्‍न दमनक बड़ी शान से चलता हुआ संजीवक के पास पहुँचा और गुर्राकर बोला, “ओरे दुष्ट बैल, इधर आ। मेरे स्वामी पिंगलक तुझे बुला रहे हैं। इस प्रकार निश्शंक होकर डकराने- गरजने की तुझे हिम्मत कैसे हुई?”


संजीवक ने पूछा, “यह पिंगलक कौन है, भाई?''


दमनक ने जवाब दिया, ''अरे! तू क्या वनराज सिंह पिंगलक को नहीं जानता? अभी तुझे पता चल जाएगा। वह देख, बरगद के पेड़ के नीचे अपने परिवार के साथ जो सिंह बैठा है, वही हमारे स्वामी पिंगलक हैं।''


यह सुनकर संजीवक की कंपकंपी छूट गई। वह कातर स्वर में बोला, ''भाई, तुम तो चतुर सुजान लगते हो। अपने स्वामी से मुझे माफ करवा दो तो मैं अभी तुम्हारे साथ चला चलता हूँ।"


दमनक ने कहा, “बात तो ठीक है, तुम्हारी! अच्छा, ठहरो। मैं अभी स्वामी से पूछकर आता हूँ।"


वह पिंगलक के पास जाकर बोला, “स्वामी, वह कोई मामूली जंतु नहीं है। वह तो भगवान्‌ शंकर का वाहन वृषभ है। मेरे पूछने पर उसने बताया कि भगवान्‌ शंकर के आदेश से वह नित्य यहाँ आकर यमुना-तट पर हरी-हरी घास चरता है और इस वन में घूमा करता है।''


पिंगलक भयभीत होकर बोला, ''यह सच ही होगा, क्योंकि भगवान्‌ की कृपा के बिना घास चरनेवाला यह प्राणी सर्पों से भरे वन में इस तरह से डकराता हुआ, निर्भय विचरण नहीं कर सकता। खैर, यह बता कि

 अब वह कहता क्या है?''



दमनक बोला, “मैंने उससे कह दिया है कि यह वन भगवती दुर्गा के वाहन मेरे स्वामी पिंगलक सिंह के अधिकार में है, इसलिए उनके पास चलकर भाईचारे के साथ रहते हुए इस वन में सुख से चरो। मेरी बात सुनकर उसने आपसे मित्रता की याचना की है।''


पिंगलक बहुत खुश हुआ। वह प्रशंसा करते हुए बोला, “मंत्रिवर, तुम धन्य हो! मैंने उसको अभयदान दिया; लेकिन तुम मुझे भी उससे अभयदान दिलाकर मेरे पास ले आओ।"


दमनक अपनी बुद्धि और भाग्य पर इतराता हुआ फिर संजीवक के पास पहुँचा। बोला, “मित्र! मेरे स्वामी ने तुमको अभयदान दे दिया है। अब तुम निडर होकर मेरे साथ चलो। किंतु याद रहे कि राजा का साथ और कृपा पाने के बाद भी तुम हमसे उचित व्यवहार ही करना। कहीं घमंड में आकर मनमाना आचरण न कर बैठना। मैं समयानुकूल ही शासन करूँगा। मंत्री के पद पर तुम्हारे रहने से हम दोनों को राज्य-लक्ष्मी का सुख मिलेगा। जो व्यक्ति अहंकार के कारण उत्तम, मध्यम और अधम व्यक्तियों का उचित सम्मान नहीं करते, वे राजा का सम्मान पाने के बाद भी दंतिल की तरह दुःख भोगते हैं।''


संजीवक ने पूछा, “यह दंतिल कौन था? !


दमनक कथा सुनाने लगा--



बन्दर और लकड़ी का खूंटा : पंचतंत्र की कहानी

 एक समय शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण किया जा रहा था। मंदिर में लकड़ी का काम बहुत था इसलिए लकड़ी चीरने वाले बहुत से मज़दूर काम पर लगे हुए थे। यहां-वहां लकड़ी के लठ्टे पडे हुए थे और लठ्टे व शहतीर चीरने का काम चल रहा था। सारे मज़दूरों को दोपहर का भोजन करने के लिए शहर जाना पड़ता था, इसलिए दोपहर के समय एक घंटे तक वहां कोई नहीं होता था। एक दिन खाने का समय हुआ तो सारे मज़दूर काम छोड़कर चल दिए। एक लठ्टा आधा चिरा रह गया था। आधे चिरे लठ्टे में मज़दूर लकड़ी का कीला फंसाकर चले गए। ऐसा करने से दोबारा आरी घुसाने में आसानी रहती है।

तभी वहां बंदरों का एक दल उछलता-कूदता आया। उनमें एक शरारती बंदर भी था, जो बिना मतलब चीजों से छेड़छाड़ करता रहता था। पंगे लेना उसकी आदत थी। बंदरों के सरदार ने सबको वहां पड़ी चीजों से छेड़छाड़ न करने का आदेश दिया। सारे बंदर पेड़ों की ओर चल दिए, पर वह शैतान बंदर सबकी नजर बचाकर पीछे रह गया और लगा अड़ंगेबाजी करने।

उसकी नजर अधचिरे लठ्टे पर पड़ी। बस, वह उसी पर पिल पड़ा और बीच में अड़ाए गए कीले को देखने लगा। फिर उसने पास पड़ी आरी को देखा। उसे उठाकर लकड़ी पर रगड़ने लगा। उससे किर्रर्र-किर्रर्र की आवाज़ निकलने लगी तो उसने गुस्से से आरी पटक दी। उन बंदरो की भाषा में किर्रर्र-किर्रर्र का अर्थ ‘निखट्टू’ था। वह दोबारा लठ्टे के बीच फंसे कीले को देखने लगा।

उसके दिमाग में कौतुहल होने लगा कि इस कीले को लठ्टे के बीच में से निकाल दिया जाए तो क्या होगा? अब वह कीले को पकड़कर उसे बाहर निकालने के लिए ज़ोर आजमाईश करने लगा। लठ्टे के बीच फंसाया गया कीला तो दो पाटों के बीच बहुत मज़बूती से जकड़ा गया होता हैं, क्योंकि लठ्टे के दो पाट बहुत मज़बूत स्प्रिंग वाले क्लिप की तरह उसे दबाए रहते हैं।

बंदर खूब ज़ोर लगाकर उसे हिलाने की कोशिश करने लगा। कीला जोर लगाने पर हिलने व खिसकने लगा तो बंदर अपनी शक्ति पर खुश हो गया।

वह और ज़ोर से खौं-खौं करता कीला सरकाने लगा। इस धींगामुश्ती के बीच बंदर की पूंछ दो पाटों के बीच आ गई थी, जिसका उसे पता ही नहीं लगा।

उसने उत्साहित होकर एक जोरदार झटका मारा और जैसे ही कीला बाहर खिंचा, लठ्टे के दो चिरे भाग फटाक से क्लिप की तरह जुड़ गए और बीच में फंस गई बंदर की पूंछ। बंदर चिल्ला उठा।

तभी मज़दूर वहां लौटे। उन्हें देखते ही बंदर ने भागने के लिए ज़ोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गई। वह चीखता हुआ टूटी पूंछ लेकर भागा।


..............................

कहानी सुनाकर करटक बोला, “इसीलिए कहता हूँ कि जिस काम से कोई अर्थ न सिद्ध होता हो, उसे नहीं करना चाहिए। व्यर्थ का काम करने से जान भी जा सकती है। अरे, अब भी पिंगलक जो शिकार करके लाता है, उससे हमें भरपेट भोजन तो मिल ही जाता है। तब बेकार ही झंझट में पड़ने से क्या फायदा!"



दमनक बोला, “तो तुम क्या केवल भोजन के लिए ही जीते हो? यह तो ठीक नहीं। अपना पेट कौन नहीं भर लेता! जीना तो उसका ही उचित है, जिसके जीने से और भी अनेक लोगों का जीवन चलता हो। दूसरी बात यह कि शक्ति होते हुए भी जो उसका उपयोग नहीं करता और उसे यों ही नष्ट होने देता है, उसे भी अंत में अपमानित होना पड़ता है!"


करटक ने कहा, “लेकिन हम दोनों तो ऐसे भी मंत्रीपद से च्युत हैं। फिर राजा के बारे में यह सब जानने की चेष्टा करने से क्या लाभ? ऐसी हालत में तो राजा से कुछ कहना भी अपनी हँसी उड़वाना ही होगा। व्यक्ति को अपनी वाणी का उपयोग भी वहीं करना चाहिए, जहाँ उसके प्रयोग से किसीका कुछ लाभ हो!"


“भाई, तुम ठीक नहीं समझते। राजा से दूर रहकर तो रही-सही इज्जत भी गँवा देंगे हम। जो राजा के समीप रहता है, उसीपर राजा की निगाह भी रहती है और राजा के पास होने से ही व्यक्ति असाधारण हो जाता है।''


करटक ने पूछा, “तुम आखिर करना क्या चाहते हो?"


“हमारा स्वामी पिंगलक आज भयभीत है।'' दमनक बोला, “उसके सारे सहचर भी डरे-डरे-से हैं। मैं उनके भय का कारण जानना चाहता हूँ।"


“तुम्हें कैसे पता कि वे डरे हुए हैं?''


“लो, यह भी कोई मुश्किल है! पिंगलक के हाव-भाव, चाल-ढाल, उसकी बातचीत, आँखों और चेहरे से ही स्पष्ट जान पड़ता है कि वह भयभीत है। मैं उसके पास जाकर उसके भय के कारण का पता करूँगा। फिर अपनी बुद्धि का प्रयोग करके उसका भय दूर कर दूँगा। इस तरह उसे वश में करके मैं फिर से अपना मंत्रीपद प्राप्त करूँगा।''


करटक ने फिर भी शंका जताई, “तुम इस विषय में तो कुछ जानते नहीं कि राजा की सेवा किस प्रकार करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे वश में कैसे कर लोगे?''


दमनक बोला, “राजसेवा के बारे में मैं नहीं जानता, यह तुम कैसे कह सकते हो? बचपन में पिता के साथ रहकर मैंने सेवाधर्म तथा राजनीति के विषय में जो कुछ भी सुना, सब अच्छी तरह सीख लिया है। इस पृथ्वी में अपार स्वर्ण है; उसे तो बस शूरवीर, विद्वान्‌ तथा राजा के चतुर सेवक ही प्राप्त कर सकते हैं।''


करटक को फिर भी विश्वास नहीं आ रहा था। उसने कहा, “मुझे यह बताओ कि तुम पिंगलक के पास जाकर कहोगे क्या?"


“अभी से मैं क्या कहूँ! वार्ततालाप के समय तो एक बात से दूसरी बात अपने आप निकलती जाती है। जैसा प्रसंग आएगा वैसी ही बात करूँगा। उचित-अनुचित और समय का विचार करके ही जो कहना होगा, कहूँगा। पिता की गोद में ही मैंने यह नीति-वचन सुना है कि अप्रासंगिक बात कहनेवाले को अपमान सहना ही पड़ता है, चाहे वह देवताओं के गुरु बृहस्पति ही क्यों न हों।''


करटक ने कहा, “तो फिर यह भी याद रखना कि शेर-बाघ आदि हिंस्र जंतुओं तथा सर्प जैसे कुटिल जंतुओं से संपन्न पर्वत जिस प्रकार दुर्गण और विषम होते हैं उसी प्रकार राजा भी क्रूर तथा दुष्ट व्यक्तियों की संगति के कारण बड़े कठोर होते हैं। जल्दी प्रसन्‍न नहीं होते और यदि कोई भूल से भी राजा की इच्छा के विरुद्ध कुछ कर दे तो साँप की तरह डसकर उसे नष्ट करते उन्हें देर नहीं लगती।”



दमनक बोला, ''आप ठीक कहते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति को स्वामी की इच्छा के अनुकूल कार्य करके उसे प्रसन्‍न करना चाहिए। इसी मंत्र से उसे वश में किया जा सकता है।"


करटक ने समझ लिया कि दमनक ने मन-ही-मन पिंगलक से मिलने का दृढ़ निश्चय कर लिया है। वह बोला, “ऐसा विचार है तो अवश्य जाओ। बस, मेरी एक बात याद रखना कि राजा के पास पहुँचकर हर समय सावधान रहना। तुम्हारे साथ ही मेरा भविष्य भी जुड़ा है। तुम्हारा पथ मंगलमय हो।''


करटक की अनुमति पाकर दमनक उसे प्रणाम करके पिंगलक से मिलने के लिए चल पड़ा।


सुरक्षा के लिए व्यूह के बीचोबीच बैठे पिंगलक ने दूर से ही दमनक को अपनी ओर आते देख लिया। उसने व्यूह के द्वार पर नियुक्त प्रहरी से कहा, “मेरे पूर्व महामंत्री का पुत्र दमनक आ रहा है। उसे निर्भय प्रवेश करने दो और उचित आसन पर बैठाने का प्रबंध करो।"


दमनक ने बेरोक-टोक पिंगलक के पास पहुँचकर उसे प्रणाम किया। साथ ही उसका संकेत पाकर वह निकट ही दूसरे मंडल में बैठ गया।


सिंहराज पिंगलक ने अपना भारी पंजा उठाकर स्नेह दिखाते हुए दमनक के कंधे पर रखा और आदर के साथ पूछा, “कहो, दमनक, कुशल से तो रहे? आज बहुत दिनों के बाद दिखाई पड़े। किधर से आ रहे हो?'


दमनक बोला, ''महाराज के चरणों में हमारा क्या प्रयोजन हो सकता है! किंतु समय के अनुसार राजाओं को भी उत्तम, मध्यम तथा अधम-हर कोटि के व्यक्ति से काम पड़ सकता है। ऐसे भी हम लोग महाराज के सदा से ही सेवक रहते आए हैं। दुर्भाग्य से हमें हमारा पद और अधिकार नहीं मिल पाया है तो भी हम आपकी सेवा छोड़कर कहाँ जा सकते हैं। हम लाख छोटे और असमर्थ सही, किंतु कोई ऐसा भी अवसर आ सकता है, जब महाराज हमारी ही सेवा लेने का विचार करें।”


पिंगलक उस समय उद्विग्न था। बोला, “तुम छोटे-बड़े या समर्थ-असमर्थ की बात छोड़ो, दमनक। तुम हमारे मंत्री के पुत्र हो, अत: तुम जो भी कहना चाहते हो, निर्भय होकर कहो।''


अभयदान पाकर भी चालाक दमनक ने राजा के भय के विषय में सबके सामने बात करना ठीक नहीं समझा। उसने अपनी बात कहने के लिए एकांत का अनुरोध किया।


पिंगलक ने अपने अनुचरों की ओर देखा। राजा की इच्छा समझकर आसपास के जीव-जंतु हटकर दूर जा बैठे।


एकांत होने पर दमनक ने बड़ी चतुराई से पिंगलक की दुखती रग ही छेड़ दी। बोला, “स्वामी, आप तो यमुना-तट पर पानी पीने जा रहे थे, फिर सहसा प्यासे ही लौटकर इस मंडल के बीच इस तरह चिंता से व्यग्र होकर क्यों बैठे हैं? ''



दमनक की बात सुनकर सिंह पहले तो सकुचा गया। फिर दमनक की चतुराई पर भरोसा करके उसने अपना भेद खोल देना उचित समझा। पल-भर सोचकर बोला, “दमनक, यह जो रह-रहकर गर्जना-सी होती है, इसे तुम भी सुन रहे हो न?


“सुन रहा हूँ, महाराज!"


“बस, इसीके कारण मैं क्षुब्ध हूँ।तट पर यही गर्जना बार-बार हो रही थी। लगता है, इस वन में कोई विकट जंतु आ गया है। जिसकी गर्जना ही इतनी भयंकर हैं, वह स्वयं कैसा होगा! इसीके कारण मैं तो यह जंगल छोड़कर कहीं और चले जाने का विचार कर रहा हूँ।''


दमनक ने कहा, ''लेकिन मात्र शब्द सुनकर भय के मारे अपना राज्य छोड़ना तो उचित नहीं है, महाराज! शब्द अथवा ध्वनि का क्या है। कितने ही बाजों की ध्वनि भी गर्जना की-सी बड़ी गंभीर होती है और अपने पुरखों का स्थान छोड़ने से पहले पता तो करना ही चाहिए कि ध्वनि का कारण कया है। यह तो गोमायु गीदड़ की तरह डरने की बात हुई, जिसे बाद में पता चला कि ढोल में तो पोल-ही-पोल है।''


पिंगलक ने पूछा, '“गोमायु गीदड़ के साथ कया घटना हुई थी?'' दमनक गोमायु की कहानी सुनाने लगा--



प्रारंभ की कथा-मित्रभेद : पंचतंत्र की कहानी

 महिलारोप्य नाम के नगर में वर्धमान नाम का एक वणिक्‌-पुत्र रहता था । उसने धर्मयुक्त रीति से व्यापार में पर्याप्त धन पैदा किया था; किन्तु उतने से सन्तोष नहीं होता था; और भी अधिक धन कमाने की इच्छा थी । छः उपायों से ही धनोपार्जन किया जाता है---भिक्षा, राजसेवा, खेती, विद्या, सूद और व्यापार से । इनमें से व्यापार का साधन ही सर्वश्रेष्ठ है । व्यापार के भी अनेक प्रकार हैं । उनमें से सबसे अच्छा यही है कि परदेस से उत्तम वस्तुओं का संग्रह करके स्वदेश में उन्हें बेचा जाय । यही सोचकर वर्धमान ने अपने नगर से बाहिर जाने का संकल्प किया । मथुरा जाने वाले मार्ग के लिए उसने अपना रथ तैयार करवाया । रथ में दो सुन्दर, सुदृढ़ बैल लगवाए । उनके नाम थे -संजीवक और नन्दक ।


वर्धमान का रथ जब यमुना के किनारे पहुँचा तो संजीवक नाम का बैल नदी-तट की दलदल में फँस गया । वहाँ से निकलने की चेष्टा में उसका एक पैर भी टूट गया । वर्धमान को यह देख कर बड़ा दुःख हुआ । तीन रात उसने बैल के स्वस्थ होने की प्रतीक्षा की । बाद में उसके सारथि ने कहा कि "इस वन में अनेक हिंसक जन्तु रहते हैं । यहाँ उनसे बचाव का कोई उपाय नहीं है । संजीवक के अच्छा होने में बहुत दिन लग जायंगे । इतने दिन यहाँ रहकर प्राणों का संकट नहीं उठाया जा सकता । इस बैल के लिये अपने जीवन को मृत्यु के मुख में क्यों डालते हैं ?"


तब वर्धमान ने संजीवक की रखवाली के लिए रक्षक रखकर आगे प्रस्थान किया । रक्षकों ने भी जब देखा कि जंगल अनेक शेर-बाघ-चीतों से भरा पड़ा है तो वे भी दो-एक दिन बाद ही वहाँ से प्राण बचाकर भागे और वर्धमान के सामने यह झूठ बोल दिया "स्वामी ! संजीवक तो मर गया । हमने उसका दाह-संस्कार कर दिया ।" वर्धमान यह सुनकर बड़ा दुःखी हुआ, किन्तु अब कोई उपाय न था ।


इधर, संजीवक यमुना-तट की शीतल वायु के सेवन से कुछ स्वस्थ हो गया था । किनारे की दूब का अग्रभाग पशुओं के लिये बहुत बलदायी होता है । उसे निरन्तर खाने के बाद वह खूब मांसल और हृष्ट-पुष्ट भी हो गया । दिन भर नदी के किनारों को सींगों से पाटना और मदमत्त होकर गरजते हुए किनारों की झाड़ियों में सींग उलझाकर खेलना ही उसका काम था ।


एक दिन उसी यमुना-तट पर पिंगलक नाम का शेर पानी पीने आया । वहाँ उसने दूर से ही संजीवक की गम्भीर हुंकार सुनी । उसे सुनकर वह भयभीत-सा हो सिमट कर झाड़ियों में जा छिपा ।




शेर के साथ दो गीदड़ भी थे - करटक और दमनक । ये दोनों सदा शेर के पीछे पीछे रहते थे । उन्होंने जब अपने स्वामी को भयभीत देखा तो आश्‍चर्य में डूब गए । वन के स्वामी का इस तरह भयातुर होना सचमुच बडे़ अचम्भे की बात थी । आज तक पिंगलक कभी इस तरह भयभीत नहीं हुआ था । दमनक ने अपने साथी गीदड़ को कहा -’करटक ! हमारा स्वामी वन का राजा है । सब पशु उससे डरते हैं । आज वही इस तरह सिमटकर डरा-सा बैठा है । प्यासा होकर भी वह पानी पीने के लिए यमुना-तट तक जाकर लौट आया; इस डर का कारण क्या है ?"


करटक ने उत्तर दिया - "दमनक ! कारण कुछ भी हो, हमें क्या ? दूसरों के काम में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं । जो ऐसा करता है वह उसी बन्दर की तरह तड़प-तड़प कर मरता है, जिसने दूसरे के काम में कौतूहलवश व्यर्थ ही हस्तक्षेप किया था ।"


दमनक ने पूछा - "यह क्या बात कही तुमने ?"


करटक ने कहा - "सुनो!'

साइबर क्या है?

 साइबर' शब्द का प्रयोग कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी और आभासी वास्तविकता की संस्कृति के संबंध में किया जाता है। इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संबंध साइबरस्पेस बनाता है। साइबरस्पेस पर खतरा एक समस्या को जन्म देता है और साइबर सुरक्षा की आवश्यकता को जन्म देता है


साइबरस्पेस के लिए खतरा:


सेक्टरों का परस्पर जुड़ाव

एक्सपोज़र पॉइंट की संख्या में वृद्धि

संपत्ति का संकेन्द्रण

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार , पिछले 10 वर्षों में साइबरस्पेस पर खतरे नाटकीय रूप से बढ़े हैं। साइबर हमलों के कारण निम्न उजागर होते हैं:


संवेदनशील जानकारी

व्यक्तिगत जानकारी और

व्यवसाय जानकारी

साइबर सुरक्षा की आवश्यकता

साइबर सुरक्षा साइबरस्पेस को निम्नलिखित से बचाती है:


साइबर हमले

साइबरस्पेस को नुकसान

साइबरस्पेस का दुरुपयोग

आर्थिक जासूसी





साइबर सुरक्षा - विकास

साइबर हमलों की शुरुआत के साथ, साइबर सुरक्षा पहल विकसित हुई हैं। उनका उल्लेख नीचे दी गई तालिका में किया गया है:


साइबर सुरक्षा का विकास

समस्याएँ साइबर सुरक्षा पहल

वायरस (1990) 

एंटी वायरस

फ़ायरवाल

कीड़े (2000) घुसपैठ का पता लगाना और रोकथाम

बॉटनेट (2000 - वर्तमान) डीएलपी, एप्लिकेशन-जागरूक फ़ायरवॉल, सिम

एपीटी अंदरूनी सूत्र (वर्तमान) नेटवर्क प्रवाह विश्लेषण

साइबर खतरे और साइबर सुरक्षा

कुछ प्रकार के साइबर हमले हैं जो समय के साथ विकसित हुए हैं:


वायरस - यह एक मैलवेयर है जो स्व-प्रतिकृति बनाता है और अन्य निष्पादन योग्य कोड या दस्तावेज़ों में अपनी प्रतियां डालकर फैलता है।

वेबसाइटों को हैक करना - व्यक्तिगत या व्यावसायिक क्षेत्र से संबंधित किसी भी वेबसाइट तक अनधिकृत पहुंच

दुर्भावनापूर्ण कोड - यह एक प्रकार का सुरक्षा खतरा है जहां सॉफ़्टवेयर में मौजूद कोई भी कोड हानिकारक प्रभाव लाता है, सिस्टम की सुरक्षा का उल्लंघन करता है, या सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

उन्नत वर्म और ट्रोजन - यह फिर से एक मैलवेयर है जो एक नियमित सॉफ़्टवेयर के रूप में छिपता है, हालांकि एक बार एक्सेस होने पर, हार्ड ड्राइव, बैकग्राउंड सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और आवंटन सिस्टम को भ्रष्ट कर देता है।

पहचान की चोरी और फ़िशिंग - यह एक साइबर हमला है जिसमें लोगों को उनकी जानकारी (व्यक्तिगत और पेशेवर) प्रकट करने के लिए प्रेरित करने के लिए अधिकृत संस्थाओं के रूप में धोखाधड़ी वाले ईमेल शामिल हैं।

DOS, DDOS - DOS का मतलब डिनायल-ऑफ-सर्विस अटैक है, और DDOS का मतलब डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस अटैक है। हमलावर सिस्टम को ओवरलोड करने के लिए अनावश्यक अनुरोधों की बाढ़ के माध्यम से होस्ट नेटवर्क की सेवाओं को बाधित करके मशीन या नेटवर्क को अनुपलब्ध बना देते हैं। और जब विभिन्न छोरों से अनुरोधों की ऐसी बाढ़ आती है, तो इसे डीडीओएस कहा जाता है।

साइबर जासूसी - आमतौर पर जब गोपनीय जानकारी प्राप्त करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क के अवैध उपयोग के कारण किसी सरकार या महत्वपूर्ण संगठन की गोपनीयता खतरे में पड़ जाती है।

साइबर युद्ध - विशेष रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए राज्य की गतिविधियों को बाधित करने के लिए कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से सूचना प्रणालियों पर जानबूझकर हमला करना।




भारत में साइबर हमले

साइबर हमलों के सबसे प्रमुख कारण हैं:


फ़िशिंग और सोशल इंजीनियरिंग

मैलवेयर

भाला फ़िशिंग

सेवा की मनाई

पुराना सॉफ्टवेयर रैनसमवेयर

नीचे दी गई तालिका उन साइबर हमलों की सूची देती है जो भारत ने अतीत में देखे हैं:


भारत में साइबर हमले साइबर हमलों का विवरण

कोरोनावायरस महामारी आधारित साइबर हमला माइक्रोसॉफ्ट ने बताया है कि साइबर बदमाश 2020 में भारत और दुनिया में फ़िशिंग और रैंसमवेयर के माध्यम से लोगों को धोखा देने के लिए कोविड -19 स्थिति का उपयोग कर रहे हैं।

फ़िशिंग जुलाई 2016 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में डकैती

वानाक्राई रैनसमवेयर मई 2017 में, फिरौती मांगने वाले हैकरों द्वारा भारत में विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्क को बंद कर दिया गया था।

डेटा चोरी मई 2017 में फूड टेक कंपनी जोमैटो को 17 मिलियन यूजर्स की जानकारी चोरी होने का सामना करना पड़ा था।

पेट्या रैंसमवेयर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में डेनिश फर्म एपी मोलर-मार्सक द्वारा संचालित टर्मिनल पर कंटेनर हैंडलिंग कार्य प्रभावित हुआ।

मिराई बॉटनेट सितंबर 2016 में, मिराई मैलवेयर ने एक प्रसिद्ध सुरक्षा विशेषज्ञ की वेबसाइट पर DDoS हमला किया।




साइबर सुरक्षा - साइबर हमलावर कौन हैं?

ऐसे कई साइबर खिलाड़ी हैं जो साइबर सुरक्षा को नुकसान पहुंचाते हैं:


साइबर अपराधी

साइबर आतंकवादी

साइबर जासूसी

साइबर हैक्टिविस्ट

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा उल्लंघनों के पीछे निम्नलिखित समूह हैं:


आउटसाइडर्स

आंतरिक अभिनेता

राज्य-संबद्ध अभिनेता

एकाधिक पार्टियाँ

साझेदारी में आक्रमण

संगठित आपराधिक समूह

लिंक किए गए लेख पर जाकर मैलवेयर और वायरस के बीच अंतर खोजें ।


साइबर सुरक्षा - साइबर स्वच्छता केंद्र

यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) के तहत बॉटनेट सफाई और मैलवेयर विश्लेषण केंद्र है। साइबर स्वच्छता केंद्र का उद्देश्य भारतीय नागरिकों के बीच कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता को बढ़ावा देना है।



साइबर सुरक्षा - भारतीय कानून और सरकारी पहल

भारत में साइबर सुरक्षा का समर्थन करने वाले विभिन्न कानून हैं। नीचे दी गई तालिका में इनका उल्लेख है:


भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित कानून महत्वपूर्ण तथ्य

सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 

अक्टूबर 2000 में लागू हुआ

इसे भारतीय साइबर अधिनियम भी कहा जाता है

सभी ई-लेनदेन को कानूनी मान्यता प्रदान करें

ऑनलाइन गोपनीयता की रक्षा करना और ऑनलाइन अपराधों पर अंकुश लगाना

सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 (आईटीएए) आईटी अधिनियम में संशोधन का उल्लेख:

'डाटा प्राइवेसी'

सूचना सुरक्षा

साइबर कैफे की परिभाषा

अंगुली का हस्ताक्षर

CERT-In की भूमिका को पहचानना

जिस डीएसपी को पहले प्रभार दिया गया था, उसके खिलाफ साइबर अपराध की जांच के लिए इंस्पेक्टर को अधिकृत करना

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति 2020 भारत सरकार राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति 2020 लेकर आ रही है जिसमें भारत में साइबरस्पेस को सुरक्षित करने के प्रावधान शामिल हैं। कैबिनेट की मंजूरी लंबित है और यह जल्द ही जनता के लिए सामने आएगा।

साइबर सुरक्षित भारत पहल राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के सहयोग से एमईआईटीवाई ने साइबर-लचीला आईटी सेट अप बनाने के लिए 2018 में इस पहल की शुरुआत की।




साइबर सुरक्षा से संबंधित यूपीएससी प्रश्न

Q1

कौन सा भारतीय साइबर कानून विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों को कवर करता है?

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 भारत में साइबर कानून है जिसमें भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

Q2

साइबर क्राइम क्या है?

एक अपराध जिसमें किसी व्यक्ति, व्यवसाय और सरकार की गोपनीयता पर हमला करने के लिए कंप्यूटर और नेटवर्क शामिल होता है। लिंक किए गए लेख में साइबर अपराध के बारे में और पढ़ें ।


Saturday, October 28, 2023

वानरराज का बदला : पंचतंत्र की कहानी

 एक नगर के राजा चन्द्र के पुत्रों को बन्दरों से खेलने का व्यसन था । बन्दरों का सरदार भी बड़ा चतुर था । वह सब बन्दरों को नीतिशास्त्र पढ़ाया करता था । सब बन्दर उसकी आज्ञा का पालन करते थे । राजपुत्र भी उन बन्दरों के सरदार वानरराज को बहुत मानते थे ।


उसी नगर के राजगृह में छो़टे राजपुत्र के वाहन के लिये कई मेढे भी थे । उन में से एक मेढा बहुत लोभी था । वह जब जी चाहे तब रसोई में घुस कर सब कुछ खा लेता था । रसोइये उसे लकड़ी से मार कर बाहिर निकाल देते थे ।


वानरराज ने जब यह कलह देखा तो वह चिन्तित हो गया । उसने सोचा ’यह कलह किसी दिन सारे बन्दरसमाज के नाश का कारण हो जायगा कारण यह कि जिस दिन कोई नौकर इस मेढ़े को जलती लकड़ी से मारेगा, उसी दिन यह मेढा घुड़साल में घुस कर आग लगा देगा । इससे कई घोड़े जल जायंगे । जलन के घावों को भरने के लिये बन्दरों की चर्बी की मांग पैदा होगी । तब, हम सब मारे जायंगे ।’


इतनी दूर की बात सोचने के बाद उसने बन्दरों को सलाह दी कि वे अभी से राजगृह का त्याग कर दें । किन्तु उस समय बन्दरों ने उसकी बात को नहीं सुना । राजगृह में उन्हें मीठे-मीठे फल मिलते थे । उन्हें छोड़ कर वे कैसे जाते ! उन्होंने वानरराज से कहा कि "बुढ़ापे के कारण तुम्हारी बुद्धि मन्द पड़ गई है । हम राजपुत्र के प्रेम-व्यवहार और अमृतसमान मीठे फलों को छोड़कर जंगल में नहीं जायंगे ।"


वानरराज ने आंखों में आंसू भर कर कहा - "मूर्खो ! तुम इस लोभ का परिणाम नहीं जानते । यह सुख तुम्हें बहुत महंगा पड़ेगा ।" यह कहकर वानरराज स्वयं राजगृह छो़ड़्कर वन में चला गया ।


उसके जाने के बाद एक दिन वही बात हो गई जिस से वानरराज ने वानरों को सावधान किया था । एक लोभी मेढा जब रसोई में गया तो नौकर ने जलती लकड़ी उस पर फैंकी । मेढे के बाल जलने लगे । वहाँ से भाग कर वह अश्‍वशाला में घुस गया । उसकी चिनगारियों से अश्‍वशाला भी जल गई । कुछ़ घोड़े आग से जल कर वहीं मर गये । कुछ़ रस्सी तुड़ा कर शाला से भाग गये ।


तब, राजा ने पशुचिकित्सा में कुशल वैद्यों को बुलाया और उन्हें आग से जले घोड़ों की चिकित्सा करने के लिये कहा । वैद्यों ने आयुर्वेदशास्त्र देख कर सलाह दी कि जले घावों पर बन्दरों की चर्बी की मरहम बना कर लगाई जाये । राजा ने मरहम बनाने के लिये सब बन्दरों को मारने की आज्ञा दी । सिपाहियों ने सब बन्दरों को पकड़ कर लाठियों और पत्थरों से मार दिया ।


वानरराज को जब अपने वंश-क्षय का समाचार मिला तो वह बहुत दुःखी हुआ । उसके मन में राजा से बदला लेने की आग भड़क उठी । दिन-रात वह इसी चिन्ता में घुलने लगा । आखिर उसे एक वन मेम ऐसा तालाब मिला जिसके किनारे मनुष्यों के पदचिन्ह थे । उन चिन्हों से मालूम होता था कि इस तालाब में जितने मनुष्य गये, सब मर गये; कोई वापिस नहीं आया । वह समझ गया कि यहाँ अवश्य कोई नरभक्षी मगरमच्छ है । उसका पता लगाने के लिये उसने एक उपाय किया । कमल नाल लेकर उसका एक सिरा उसने तालाब में डाला और दूसरे सिरे को मुख में लगा कर पानी पीना शुरु कर दिया ।


थोड़ी देर में उसके सामने ही तालाब में से एक कंठहार धारण किये हुए मगरमच्छ निकला । उसने कहा- "इस तालाब में पानी पीने के लिये आ कर कोई वापिस नहीं गया, तूने कमल नाल द्वारा पानी पीने का उपाय करके विलक्षण बुद्धि का परिचय दिया है । मैं तेरी प्रतिभा पर प्रसन्न हूँ । तू जो वर मांगेगा, मैं दूंगा । कोई सा एक वर मांग ले ।"


वानरराज ने पूछा - -"मगरराज ! तुम्हारी भक्षण-शक्ति कितनी है ?"


मगरराज- -"जल में मैं सैंकड़ों, सहस्त्रों पशु या मनुष्यों को खा सकता हूँ; भूमि पर एक गीडड़ भी नहीं ।"


वानरराज- -"एक राजा से मेरा वैर है । यदि तुम यह कंठहार मुझे दे दो तो मैं उसके सारे परिवार को तालाब में लाकर तुम्हारा भोजन बना सकता हूँ ।"


मगरराज ने कंठहार दे दिया । वानरराज कंठहार पहिनकर राजा के महल में चला गया । उस कंठहार की चमक-दमक से सारा राजमहल जगमगा उठा । राजा ने जब वह कंठहार देखा तो पूछा- "वानरराज ! यह कंठहार तुम्हें कहाँ मिला ?"


वानरराज- -"राजन् ! यहाँ से दूर वन में एक तालाब है । वहाँ रविवार के दिन सुबह के समय जो गोता लगायगा उसे वह कंठहार मिल जायगा ।"


राजा ने इच्छा प्रगट की कि वह भी समस्त परिवार तथा दरबारियों समेत उस तालाब में जाकर स्नान करेगा, जिस से सब को एक-एक कंठहार की प्राप्ति हो जायगी ।"


निश्चित दिन राजा समेत सभी लोग वानरराज के साथ तालाब पर पहुँच गये । किसी को यह न सूझा कि ऐसा कभी संभव नहीं हो सकता । तृष्णा सबको अन्धा बना देती है । सैंकड़ों वाला हजा़रों चाहता है; हजा़रों वाला लाखों की तृष्णा रखता है; लक्षपति करोड़पति बनने की धुन में लगा रहता है । मनुष्य का शरीर जराजीर्ण हो जाता है, लेकिन तृष्णा सदा जवान रहती है । राजा की तृष्णा भी उसे उसके काल के मुख तक ले आई ।


सुबह होने पर सब लोग जलाशय में प्रवेश करने को तैयार हुए । वानरराज ने राजा से कहा- "आप थोड़ा ठहर जायं, पहले और लोगों को कंठहार लेने दीजिये । आप मेरे साथ जलाशय में प्रवेश कीजियेगा । हम ऐसे स्थान पर प्रवेश करेंगे जहां सबसे अधिक कंठहार मिलेंगे ।"


जितने लोग जलाशय में गये, सब डूब गये; कोई ऊपर न आया । उन्हें देरी होती देख राजा ने चिन्तित होकर वानरराज की ओर देखा । वानरराज तुरन्त वृक्ष की ऊँची शाखा पर चढ़कर बोला- -"महाराज ! तुम्हारे सब बन्धु-बान्धवों को जलाशय में बैठे राक्षस ने खा लिया है । तुम ने मेरे कुल का नाश किया था; मैंने तुम्हारा कुल नष्ट कर दिया । मुझे बदला लेना था, ले लिया । जाओ, राजमहल को वापिस चले जाओ ।"


राजा क्रोध से पागल हो रहा था, किन्तु अब कोई उपाय नहीं था । वानरराज ने सामान्य नीति का पालन किया था । हिंसा का उत्तर प्रतिहिंसा से और दुष्टता का उत्तर दुष्टता से देना ही व्यावहारिक नीति है ।


राजा के वापिस जाने के बाद मगरराज तालाब से निकला । उसने वानरराज की बुद्धिमत्ता की बहुत प्रशंसा की ।


(सीख : लोभ बुद्धि पर परदा डाल देता है।)


Friday, October 27, 2023

प्रश्न - कंप्यूटर नेटवर्क

 उम्मीदवारों की सहायता करने और उन्हें इस अवधारणा से पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार को समझने में मदद करने के लिए, नीचे कंप्यूटर नेटवर्क पर आधारित कुछ प्रश्न और उत्तर दिए गए हैं। उम्मीदवार इन्हें देख सकते हैं और अपनी तैयारी शुरू कर सकते हैं।


Q 1. निम्नलिखित में से कौन सा नेटवर्क टोपोलॉजी का एक प्रकार नहीं है?


अँगूठी

तारा

घेरा

बस

उपरोक्त सभी एक प्रकार की नेटवर्क टोपोलॉजी हैं

उत्तर: (2) वृत्त


Q 2. नेटवर्क डिवाइस डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में परिवर्तित करता है और इसे टेलीफोन के माध्यम से जोड़ा जा सकता है, इसे _____ कहा जाता है


मोडम

हॉटस्पॉट

रूटर

पुल

बदलना

उत्तर: (1) मॉडेम


Q 3. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द उपग्रह को डेटा भेजने से संबंधित है?


अपलिंक

मोडम

बदलना

मॉड्यूलर

डाउनलिंक

उत्तर: (1) अपलिंक


Q 4. ______ टोपोलॉजी सबसे सरल टोपोलॉजी है जो दो नोड्स को एक आम लिंक के साथ सीधे जोड़ती है।


बिंदु से बिंदु तक

रेखा

अँगूठी

तारा

इनमे से कोई भी नहीं

उत्तर: (1) प्वाइंट टू प्वाइंट


Q 5. सबसे छोटा नेटवर्क कवरिंग नेटवर्क कौन सा है?


लैन

आदमी

ज़र्द

कड़ाही

वीपीएन

उत्तर: (4) पर्सनल एरिया नेटवर्क (पैन)


Q 6. जब दो या दो से अधिक टोपोलॉजी एक साथ जुड़ती हैं, तो उन्हें ______ कहा जाता है


वृक्ष टोपोलॉजी

क्लस्टर टोपोलॉजी

हाइब्रिड टोपोलॉजी

मेष टोपोलॉजी

लाइन टोपोलॉजी

उत्तर: (3) हाइब्रिड टोपोलॉजी


Q 7. एटीएम _____ का एक रूप है


लोकल एरिया नेटवर्क

वृहत् क्षेत्र जालक्रम

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क

निजी क्षेत्र नेटवर्क

आभासी निजी संजाल

उत्तर: (3) मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क


Q 8. _______ एक छोटा हार्डवेयर उपकरण है जो एक ही LAN के साथ कई कंप्यूटरों को जोड़ता है।


मोडम

बदलना

मॉड्यूलर

रूटर

पुल

उत्तर: (2) स्विच


Q 9. एक क्लाइंट को प्रदान किए गए एकल सुसंगत सिस्टम में विभिन्न कंप्यूटरों का संग्रह _______ कहलाता है।


वितरित प्रणाली

संगणक संजाल

व्यवस्थित नेटवर्क

सामूहिक नेटवर्क

इनमे से कोई भी नहीं

उत्तर: (1) वितरित प्रणाली


Q 10. एक नेटवर्क जो निजी नेटवर्क से कनेक्ट करने के लिए सार्वजनिक तारों का उपयोग करके बनाया जाता है उसे ______ कहा जाता है


लोकल एरिया नेटवर्क

वृहत् क्षेत्र जालक्रम

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क

निजी क्षेत्र नेटवर्क

आभासी निजी संजाल

उत्तर: (5) वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क


ऊपर दिए गए सभी प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनाए जाने वाले समान पैटर्न के हैं। कंप्यूटर नेटवर्क एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिससे अंतिम परीक्षा में प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ऐसे में इसे अच्छे से तैयार करना बेहद जरूरी है।


Sample Questions Related To Computer Abbreviations

 For the reference of candidates, given below are the sample questions based on computer abbreviations.


Q 1. What does “U” stand for in “URL”?


Uniform

United

Unicode

Universal

Unit

Answer: (1) Uniform


Q 2. What does COBOL stand for?


Common Business Organised Language

Common Business Oriented Language

Code for Business Oriented Langauge

Code of Business Organised Language

Computer Basic Language

Answer: (2) Common Business Oriented Language


Q 3. What is the full form of WiFi?


Wireless Fidelity

Wireless Internet Federation

Wireless Internet

Wireless Internet Facility

None of the Above

Answer: (1) Wireless Fidelity


Q 4. What does “L” stand for in “XML”?


Link

Language

Loading

Linux

Laser

Answer: (2) Language


Q 5. What does PNG stand for?


Portable Graphics

Processed Network Graphics

Personal Network Graphics

Picture Network Graphic

None of the Above

Answer: (3) Personal Network Graphics


Aspirants must know all the terms and abbreviations related to computer as questions may be framed from this topic. With the advancement in the field of technology, candidates must stay updated with the latest computer abbreviations and acronyms as questions based on them may be asked in the final exam.



कंप्यूटर शॉर्टकट कुंजियाँ - नमूना प्रश्न

 नीचे कुछ नमूना प्रश्न दिए गए हैं जो उम्मीदवारों को इस विषय के संबंध में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार को समझने में मदद करेंगे।


Q 1. एमएस वर्ड में लिखे टेक्स्ट के एक हिस्से को काटने के लिए "ctrl" कुंजी के साथ-साथ क्या दबाना पड़ता है ?


एक्स

सी

वैकल्पिक

ऑल्ट+सी

जेड

उत्तर: (1) एक्स; MS Word दस्तावेज़ से टेक्स्ट या छवि का एक भाग काटने के लिए "ctrl+X" दबाना पड़ता है


Q 2. किसी दस्तावेज़ की शुरुआत में स्थानांतरित करने के लिए दिए गए कुंजियों के किस जोड़े को दबाने की आवश्यकता होती है?


एफ1+ए

ctrl+alt+home

ऑल्ट+ए

Ctrl+होम

ऑल्ट+होम+ए

उत्तर: (4) ctrl+home


Q 3. संपूर्ण पंक्ति का चयन करने के लिए _________ शॉर्टकट कुंजियों का उपयोग किया जाना चाहिए।


Ctrl+स्पेस

Ctrl+Alt+Shift

शिफ्ट+स्पेस

Ctrl+L

ऑल्ट+शिफ्ट+एल

उत्तर: (3) शिफ्ट+स्पेस


Q 4. दो और MS Excel फ़ाइलों के बीच जाने के लिए कौन सी शॉर्टकट कुंजियों का उपयोग किया जा सकता है?


Ctrl+टैब

Ctrl+V

ऑल्ट+स्पेस

Ctrl+T

ऑल्ट+टैब

उत्तर: (1) ctrl+Tab


Q 5. Shift+ctrl+___ कुंजियों का उपयोग फ़ॉन्ट के आकार को एक नंबर कम करने के लिए किया जाता है। रिक्त स्थान के स्थान पर क्या आना चाहिए?


+

>

<

डी

उत्तर: (4) <


प्रश्न 6. F2 कुंजी का क्या कार्य है?


सिस्टम की चमक बढ़ाने के लिए

किसी फ़ाइल को सहेजने के लिए

किसी फ़ाइल का नाम बदलने के लिए

MS Excel में एक अतिरिक्त शीट जोड़ने के लिए

फ़ाइल को किसी अन्य ड्राइव पर कॉपी करने के लिए

उत्तर: (3) किसी फ़ाइल का नाम बदलना



Q 7. वर्तमान पृष्ठ को बुकमार्क करने के लिए कौन सी शॉर्टकट कुंजियों का उपयोग किया जा सकता है?


Ctrl+D

Ctrl+X

शिफ्ट+डी

ऑल्ट+डी

ऑल्ट+एक्स

उत्तर: (1) Ctrl+D


Q 8. शॉर्टकट कुंजी “ctrl+shift+T” का क्या कार्य है?


टेक्स्ट को एक फोल्डर से दूसरे फोल्डर में कॉपी करने के लिए

समय दर्ज करने के लिए

फ़ाइल में टेक्स्ट ब्रेक रखने के लिए

दस्तावेज़ में किसी भी टेक्स्ट ब्रेक को छोड़ने के लिए

इंटरनेट एक्सप्लोरर में एक नया टैब खोलने के लिए

उत्तर: (2) समय प्रविष्ट करने के लिए


Q 9. चयनित टेक्स्ट में हाइपरलिंक जोड़ने के लिए दिए गए विकल्पों में से कौन सी शॉर्टकट कुंजियों का उपयोग किया जा सकता है?


Ctrl+H

Ctrl+U

Ctrl+P

Ctrl+L

Ctrl+K

उत्तर: (5) Ctrl+K


प्रश्न 10. एमएस-एक्सेल में, सभी सेल्स का योग करने के लिए फॉर्मूला बनाने के लिए किस शॉर्टकट कुंजियों का उपयोग किया जा सकता है?


Alt+योग

ऑल्ट+=

ऑल्ट+एफ

ऑल्ट+F4

alt+ctrl+F4

उत्तर: (2) alt+=


System Commands

 Type the following commands in your Run Box (Windows Key + R) or Start Run


devmgmt.msc — Device Manager

msinfo32 — System Information

cleanmgr — Disk Cleanup

ntbackup — Backup or Restore Wizard (Windows Backup Utility)

mmc — Microsoft Management Console

excel — Microsoft Excel (If Installed)

msaccess — Microsoft Access (If Installed)

powerpnt — Microsoft PowerPoint (If Installed)

winword — Microsoft Word (If Installed)

frontpg — Microsoft FrontPage (If Installed)

notepad — Notepad

wordpad — WordPad

calc — Calculator

msmsgs — Windows Messenger

mspaint — Microsoft Paint

wmplayer — Windows Media Player

rstrui — System Restore

netscp6 — Netscape 6.x

netscp — Netscape 7.x

netscape — Netscape 4.x

waol — America Online

control — Opens the Control Panel

control printers — Opens the Printers Dialog

cmd — Command Prompt



iexplore + “web address” — Internet Explorer

compmgmt.msc — Computer Management

dhcpmgmt.msc — DHCP Management

dnsmgmt.msc — DNS Management

services.msc — Services

eventvwr — Event Viewer

dsa.msc — Active Directory Users and Computers

dssite.msc — Active Directory Sites and Services

Internet Explorer Shortcut Keys

Alt + Left Arrow — Back a page

Backspace — Back a page

Alt + Right Arrow — Forward a page

F5 — Refresh current page, frame, or tab

F11 — Display the current website in full screen mode. Pressing F11 again will exit this mode

Esc — Stop page or download from loading

Ctrl + (- or +) — Increase or decrease the font size, pressing ‘-‘ will decrease and ‘+’ will increase

Ctrl + Enter — Quickly complete an address. For example, type google in the address bar and press CTRL + ENTER to get http://www.google.com

Ctrl + D — Add a Favorite for the page currently opened

Ctrl + I — Display available bookmarks

Ctrl + N — Open New browser window

Ctrl + P — Print current page / frame

Ctrl + T — Opens a new tab

Ctrl + F4 — Closes the currently selected tab

Ctrl + Tab — Moves through each of the open tabs

Spacebar — Moves down a page at a time

Shift + Spacebar — Moves up a page at a time

Alt + Down arrow — Display all previous text entered in a text box and/or available options on drop down menu

Mozilla Firefox Shortcut Keys

 Alt + Left Arrow — Back a page

Backspace — Back a page

Alt + Right Arrow — Forward a page

F5 — Refresh current page, frame, or tab

F11 — Display the current website in full screen mode. Pressing F11 again will exit this mode

Esc — Stop page or download from loading

Ctrl + (- or +) — Increase or decrease the font size, pressing ‘-‘ will decrease and ‘+’ will increase

Ctrl + Enter — Quickly complete an address. For example, type google in the address bar and press CTRL + ENTER to get http://www.google.com

Shift + Enter — Complete a .net instead of a .com address

Ctrl + Shift + Enter — Complete a .org address

Ctrl + Shift + Del — Open the Clear Data window to quickly clear private data

Ctrl + D — Add a bookmark for the page currently opened

Ctrl + I — Display available bookmarks




Ctrl + J — Display the download window

Ctrl + N — Open New browser window

Ctrl + P — Print current page / frame

Ctrl + T — Opens a new tab

Ctrl + F4 — Closes the currently selected tab

Ctrl + Shift + T — Undo the close of a window

Ctrl + Tab — Moves through each of the open tabs

Spacebar — Moves down a page at a time

Shift + Spacebar — Moves up a page at a time

Alt + Down arrow — Display all previous text entered in a text box and/or available options on drop down menu

Microsoft Excel Shortcut Keys

 F2 — Edit the selected cell

F5 — Go to a specific cell. For example, C6

F7 — Spell check selected text and/or document

F11 — Create chart

Ctrl + Shift + — Enter the current time

Ctrl + — Enter the current date

Alt + Shift + F1 — Insert New Worksheet

Shift + F3 — Open the Excel formula window

Shift + F5 — Bring up search box

Ctrl + A — Select all contents of the worksheet

Ctrl + B — Bold highlighted selection

Ctrl + I — Italic highlighted selection

Ctrl + K — Insert link

Ctrl + U — Underline highlighted selection

Ctrl + 5 — Strikethrough highlighted selection

Ctrl + P — Bring up the print dialog box to begin printing

Ctrl + Z — Undo last action

Ctrl + F9 — Minimize current window

Ctrl + F10 — Maximize currently selected window

Ctrl + F6 — Switch between open workbooks / windows

Ctrl + Page up — Move between Excel work sheets in the same Excel document

Ctrl + Page down — Move between Excel work sheets in the same Excel document

Ctrl + Tab — Move between Two or more open Excel files

Alt + = — Create a formula to add all of the above cells

Ctrl + ‘ — Insert the value of the above cell into cell currently selected

Ctrl + Shift + ! — Format number in comma format

Ctrl + Shift + $ — Format number in currency format

Ctrl + Shift + # — Format number in date format




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Home » Click Yojna » Computer Keyboard Shortcut A To Z keys in Hindi कंप्यूटर शॉर्टकट की

CLICK YOJNACOMPUTERGK

Computer Keyboard Shortcut A To Z keys in Hindi कंप्यूटर शॉर्टकट की

by webcollection.co.in

कंप्यूटर कीबोर्ड की A to Z शॉर्टकट की


ऍम एस ऑफिस एवं अन्य सॉफ्टवेर में उपयोग की जाने वाली शॉर्टकट की


Ctrl + A : Select All

Ctrl + B : Bold

Ctrl + C: Copy

Ctrl + D: Font

Ctrl + E: Center

Ctrl + F: Find

Ctrl + G: Go to

Ctrl + I : italic

Ctrl + J: Justified

Ctrl + K: hyperlink

Ctrl + L: Left alignment

Ctrl + M: Move

Ctrl + N: New file

Ctrl + O: Open file

Ctrl + P: Print

Ctrl + Q: Close

Ctrl + R: Reload / Right alignment

Ctrl + S: Save

Ctrl + U : Underline

Ctrl + V: Pest

Ctrl + X: Cut

Ctrl + Y : Redo

Ctrl + Z : Undo

Prt Sc Sysrq: इस कमांड के द्वारा हमारे कंप्यूटर की स्क्रीन कॉपी की जा सकती है

Computer Keyboard Shortcut A To Z keys कंप्यूटर शॉर्टकट की - Computer Keyboard Shortcut A To Z keys in Hindi कंप्यूटर शॉर्टकट की

Computer Keyboard Shortcut A To Z keys कंप्यूटर शॉर्टकट की

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस की-बोर्ड शार्टकट हिंदी में

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में तेजी से काम करने के लिये आप यह की-बोर्ड शार्टकट इस्‍तेमाल कर सकते हैं,


यह इसमें से कई की-बोर्ड शार्टकट वर्ड, एक्‍सल और पावरपाइंट तीनों में काम करते हैं – 


Ctrl+A – पूरे पेज को एक साथ सलैक्‍ट करने के लिये 

Ctrl+B – टेक्स्ट बोल्‍ड करने के लिये 

Ctrl+C – टेक्स्ट कॉपी करने के लिये 

Ctrl+D – डिफाल्‍ट फान्‍ट सेंटिग बदलने के लिये 

Ctrl+E – टेक्स्ट को सेंटर करने के लिये 

Ctrl+F – फाइंड करने के लिये 

Ctrl+G – सीधे किसी पेज या लाइन पर पहुॅचने के लिये 

Ctrl+H – किसी शब्‍द को रिप्‍लेस करने के लिये 

Ctrl+I – टेक्स्ट इटैलिक करने के लिये 

Ctrl+J – पैराग्राफ को जस्टीफाई करने के लिये 

Ctrl+K- पेज पर हाईपरलिंक लगाने के लिये 

Ctrl+L – अलाइन टेक्स्ट लेफ्ट करने के लिये 

Ctrl+M – इंडेंट बढाने के लिये 

Ctrl+N – नई फाइल बनाने के लिये 

Ctrl+O – फाइल ओपन करने के लिये 

Ctrl+P – प्रिंट निकालने के लिये 

Ctrl+Q – इंडेंट समाप्‍त करने के लिये 

Ctrl+R – अलाइन टेक्स्ट राइट करने के लिये 

Ctrl+S – फाइल सेव करने के लिये 

Ctrl+T – पेज पर हैंडिग इंडेंट बढाने के लिये 

Ctrl+U – अण्‍डरलाइन के लिये 

Ctrl+V – टेक्‍स्‍ट पेज करने के लिये 

Ctrl+W – फाइल क्‍लोज करने के लिये 

Ctrl+X – टेक्‍स्‍ट कट करनेे केे लिये 

Ctrl+Z – अंडू करने के लिये  

Ctrl+] – फान्‍ट साइज बढाने के लिये 

Ctrl+[- फान्‍ट साइज घटाने के लिये





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Window+D : विंडो की के साथ D दबाने से सारी विंडो एक साथ मिनीमाईज़ हो जाती है.

Window+R : विंडो की के साथ R दबाने से Run कमांड खुल जाती है.

Shift+Del : शिफ्ट के साथ डिलीट की दबाने से कोई भी फाइल परमानेंटली डिलीट की जा सकती है..

Ctrl+Shift+space : इन 3 की को एक साथ दबाकर टास्कबार सीधा खोला जा सकता है..

Alt+Tab :इन दोनों की को एक साथ दबाकर एक विंडो से दूसरी विंडो पर जाया जा सकता है.

Shift+Tab : जिस तरह TAB दबाकर आगे बड़ा जाता है उसी तरह शिफ्ट के साथ Tab दबाने से पीछे जा सकते हैं.

Ctrl+alt+delete : ये 3 की एक साथ दबाकर बहुत से कार्य जैसे रिस्टार्ट, लॉगऑफ, शट डाउन, स्लीप और टास्कबार आदि कार्य किये जा सकते है. इस कमांड का उपयोग कंप्यूटर हैंग होने की स्थिति में भी किया जाता है.

Alt+Space :इस कमांड के माध्यम से Minimize, maximize, restore, close जैसे कार्य किये जा सकते है.

Shift + → : इस कमांड से कंटेंट select किया जा सकता है

Window + L : इस कमांड को कंप्यूटर लॉक करने के लिए किया जाता है.

Window + E :माय कंप्यूटर एक्स्प्लोरर ओपन करने के लिए किया जाता है.

Function Key

F1 : F1 हेल्प के लिए यह की उपयोग में लाई जाती है.

F2 : F2 रीनेम करने के लिए यह की उपयोग में लाई जाती है.

F3 : F3 सर्च कमांड ओपन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है

F4 : Alt+F4 से विंडो क्लोज की जाती है

F5 : रिफ्रेश करने के लिए F5 का उपयोग किया जाता है

F12 : कोई भी फाइल को सेव एस करने के लिए F12 का प्रयोग किया जाता है |

रन कमांड में चलाई जाने वाली कमांड

CALC : कैलकुलेटर ओपन करने के लिए

MSPAINT : पेंट ब्रश ओपन करने के लिए

NOTEPAD : नोटपैड ओपन करने के लिए.

WINWORD : ऍम एस वर्ड खोलने के लिए

EXCEL : एक्सेल ओपन करने के लिए

MS ACCESS : एक्सेस ओपन करने के लिए

C:, D:, E: किसी भी ड्राइव के सामने कालेन लगा कर उस ड्राइव को ओपन किया जा सकता है जैसे D ड्राइव ओपन करने के लिए आप d: इस तरह लिख सकते है.

 


Keyboard Shortcuts in Windows

[Alt] + [Esc] — Switch between running applications


[Alt] + letter — Select menu item by underlined letter


[Ctrl] + [Esc] — Open Program Menu


[Ctrl] + [F4] — Close active document or group windows (does not work with some applications)


[Alt] + [F4] — Quit active application or close current window


[Alt] + [-] — Open Control menu for active document


Ctrl] Lft. + Rt. arrow — Move cursor forward or back one word


Ctrl] Up + Down arrow — Move cursor forward or back one paragraph


[F1] — Open Help for active application


Windows + M — Minimize all open windows


Shift+Windows + M — Undo minimize all open windows


Windows + F1 —


Open Windows Help


Windows + Tab —


Cycle through the Taskbar buttons


Windows + Break —


Open the System Properties dialog box


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Accessibility Shortcuts

Right SHIFT for eight seconds — Switch FilterKeys on and off

Left ALT + left SHIFT + PRINT SCREEN — Switch High Contrast on and off

Left ALT + left SHIFT +NUM LOCK — Switch MouseKeys on and off

SHIFT five times — Switch StickyKeys on and off

NUM LOCK for five seconds — Switch Toggle Keys on and off

Explorer Shortcuts

END — Display the bottom of the active window

HOME — Display the top of the active window

NUM LOCK + ASTERISK — on numeric keypad (*) Display all subfolders under the selected folder

NUM LOCK + PLUS SIGN — on numeric keypad (+) Display the contents of the selected folder

NUM LOCK + MINUS SIGN — on numeric keypad (-) Collapse the selected folder

LEFT ARROW — Collapse current selection if it’s expanded, or select parent folder

RIGHT ARROW — Display current selection if it’s collapsed, or select first subfolder

System Commands

Type the following commands in your Run Box (Windows Key + R) or Start Run


devmgmt.msc — Device Manager

msinfo32 — System Information

cleanmgr — Disk Cleanup

ntbackup — Backup or Restore Wizard (Windows Backup Utility)

mmc — Microsoft Management Console

excel — Microsoft Excel (If Installed)

msaccess — Microsoft Access (If Installed)

powerpnt — Microsoft PowerPoint (If Installed)

winword — Microsoft Word (If Installed)

frontpg — Microsoft FrontPage (If Installed)

notepad — Notepad

wordpad — WordPad

calc — Calculator

msmsgs — Windows Messenger

mspaint — Microsoft Paint

wmplayer — Windows Media Player

rstrui — System Restore

netscp6 — Netscape 6.x

netscp — Netscape 7.x

netscape — Netscape 4.x

waol — America Online

control — Opens the Control Panel

control printers — Opens the Printers Dialog

cmd — Command Prompt




iexplore + “web address” — Internet Explorer

compmgmt.msc — Computer Management

dhcpmgmt.msc — DHCP Management

dnsmgmt.msc — DNS Management

services.msc — Services

eventvwr — Event Viewer

dsa.msc — Active Directory Users and Computers

dssite.msc — Active Directory Sites and Services

Internet Explorer Shortcut Keys

Alt + Left Arrow — Back a page

Backspace — Back a page

Alt + Right Arrow — Forward a page

F5 — Refresh current page, frame, or tab

F11 — Display the current website in full screen mode. Pressing F11 again will exit this mode

Esc — Stop page or download from loading

Ctrl + (- or +) — Increase or decrease the font size, pressing ‘-‘ will decrease and ‘+’ will increase

Ctrl + Enter — Quickly complete an address. For example, type google in the address bar and press CTRL + ENTER to get http://www.google.com

Ctrl + D — Add a Favorite for the page currently opened

Ctrl + I — Display available bookmarks

Ctrl + N — Open New browser window

Ctrl + P — Print current page / frame

Ctrl + T — Opens a new tab

Ctrl + F4 — Closes the currently selected tab

Ctrl + Tab — Moves through each of the open tabs

Spacebar — Moves down a page at a time

Shift + Spacebar — Moves up a page at a time

Alt + Down arrow — Display all previous text entered in a text box and/or available options on drop down menu

Mozilla Firefox Shortcut Keys




Alt + Left Arrow — Back a page

Backspace — Back a page

Alt + Right Arrow — Forward a page

F5 — Refresh current page, frame, or tab

F11 — Display the current website in full screen mode. Pressing F11 again will exit this mode

Esc — Stop page or download from loading

Ctrl + (- or +) — Increase or decrease the font size, pressing ‘-‘ will decrease and ‘+’ will increase

Ctrl + Enter — Quickly complete an address. For example, type google in the address bar and press CTRL + ENTER to get http://www.google.com

Shift + Enter — Complete a .net instead of a .com address

Ctrl + Shift + Enter — Complete a .org address

Ctrl + Shift + Del — Open the Clear Data window to quickly clear private data

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Ctrl + I — Display available bookmarks




Ctrl + J — Display the download window

Ctrl + N — Open New browser window

Ctrl + P — Print current page / frame

Ctrl + T — Opens a new tab

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Ctrl + Shift + T — Undo the close of a window

Ctrl + Tab — Moves through each of the open tabs

Spacebar — Moves down a page at a time

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Alt + Down arrow — Display all previous text entered in a text box and/or available options on drop down menu

Microsoft Excel Shortcut Keys

F2 — Edit the selected cell

F5 — Go to a specific cell. For example, C6

F7 — Spell check selected text and/or document

F11 — Create chart

Ctrl + Shift + — Enter the current time

Ctrl + — Enter the current date

Alt + Shift + F1 — Insert New Worksheet

Shift + F3 — Open the Excel formula window

Shift + F5 — Bring up search box

Ctrl + A — Select all contents of the worksheet

Ctrl + B — Bold highlighted selection

Ctrl + I — Italic highlighted selection

Ctrl + K — Insert link

Ctrl + U — Underline highlighted selection

Ctrl + 5 — Strikethrough highlighted selection

Ctrl + P — Bring up the print dialog box to begin printing

Ctrl + Z — Undo last action

Ctrl + F9 — Minimize current window

Ctrl + F10 — Maximize currently selected window

Ctrl + F6 — Switch between open workbooks / windows

Ctrl + Page up — Move between Excel work sheets in the same Excel document

Ctrl + Page down — Move between Excel work sheets in the same Excel document

Ctrl + Tab — Move between Two or more open Excel files

Alt + = — Create a formula to add all of the above cells

Ctrl + ‘ — Insert the value of the above cell into cell currently selected

Ctrl + Shift + ! — Format number in comma format

Ctrl + Shift + $ — Format number in currency format

Ctrl + Shift + # — Format number in date format




Ctrl + Shift + % — Format number in percentage format

Ctrl + Shift + ^ — Format number in scientific format

Ctrl + Shift + @ — Format number in time format

Ctrl + Arrow key — Move to next section of text

Ctrl + Space — Select entire column

Shift + Space — Select entire row

महिलाओं को राजनीति में आरक्षण प्रतिनिधित्व या प्रतीकात्मकता?

 भारत में महिलाओं को राजनीति में आरक्षण देने का उद्देश्य केवल उनकी संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्हें वास्तविक सत्ता और निर्णय लेने की ताकत...