Thursday, July 27, 2023

G20 के जरिए भारत ने की है अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी पहल, नए जमाने के क्राइम को कैसे रोके दुनिया

 भारतीय गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों ‘NFT, AI और मेटावर्स के दौर में अपराध और सुरक्षा’ पर G-20 सम्मेलन आयोजित किया। अपनी तरह के इस पहले आयोजन ने G-20 सदस्य देशों की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संगठनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सीनियर ऑफिसरों एवं प्रतिनिधियों को साथ बैठने का मौका दिया। बैठक में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, डार्कनेट और क्रिप्टोकरंसी से उपजी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मौके जैसे अलग-अलग मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। अमूमन इस ग्रुप का ध्यान फाइनेंस, डिवेलपमेंट और ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर रहता है। इस लिहाज से यह बैठक खास कही जा सकती है क्योंकि ग्रुप ने साइबर सिक्यॉरिटी और नए दौर के अपराधों से पैदा हुई चुनौतियों पर गौर किया।


जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह ने अपने उद‌्घाटन भाषण में कहा, आज टेक्नॉलजी एक दोधारी तलवार बन गई है। बेशक, इसके बहुत सारे फायदे हैं, लेकिन यह भी सच है कि बुरी नीयत रखने वालों ने इसके जरिए हिंसा फैलाई है और काफी नुकसान पहुंचाया है। सचाई यह है कि दुनिया भर में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां साइबर स्पेस से आ रही चुनौतियों का सामना कर रही हैं।


सबसे बड़ी चुनौती आती है डार्कनेट के मार्केटप्लेस (बाजार) से। अनियन राउटर टेक्नॉलजी की बदौलत जेनेसिस मार्केट और हाइड्रा (दोनों ही अब बंद की जा चुकी हैं) जैसी वेबसाइट्स क्रिमिनल्स को साइबरस्पेस में ड्रग्स, चोरी के पर्सनल और फाइनेंशल डेटा बेचने का स्पेस तो मुहैया कराती ही हैं, उन्हें साइबर क्राइम के साधन भी उपलब्ध कराती हैं।

वैश्विक स्तर पर लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों ने ऐसे कई बाजारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इन्हें बंद कराया है। निश्चित रूप से इसका असर इनकी कमाई पर पड़ा है। चैनालिसिस (Chainalysis) के मुताबिक, 2022 में डार्कनेट बाजारों ने 1.5 अरब डॉलर की कमाई की, जो 2021 की उनकी कमाई (3.1 अरब डॉलर) के आधे से भी कम थी।

लेकिन सच यह भी है कि ऐसी कार्रवाइयों का असर कुछ समय तक ही रहता है। पुराने मार्केटप्लेस की जगह नए मार्केटप्लेस ले लेते हैं, जिनसे साइबर क्रिमिनल्स को साइबर क्राइम को अंजाम देने के लिए और भी बेहतर टूल मिलते हैं।

बिजनेस और नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले साइबर क्राइम में हाल के वर्षों में आई जबर्दस्त बढ़ोतरी में रैनसमवेयर का हाथ रहा, जहां साइबर क्रिमिनल और हैकर्स राष्ट्रों और कंपनियों की कंप्यूटर नेटवर्क्स की चौबीसों घंटे चलते रहने की जरूरत का फायदा उठाते हैं। फिरौती चुकाने की बढ़ती घटनाओं के कारण रैनसमवेयर हमला साइबर क्रिमिनल्स के लिए आकर्षक बिजनेस बन गया है। इसने ‘RaaS’ (रैनसमवेयर एज ए सर्विस) जैसी सेवाओं को भी फलने-फूलने का मौका दिया है, जिसके तहत मैलवेयर कोडर्स रैनसमवेयर और इसका इन्फ्रास्ट्रक्चर साइबर क्रिमिनल्स को हमलों और डेटा घुसपैठ के लिए रेंट पर देते हैं।


डार्कनेट मार्केटप्लेसेज पर रैनसमवेयर जैसी घटनाओं में भुगतान क्रिप्टोकरंसी में की जाती है। इसकी भी कुछ ठोस वजहें हैं।

क्रिप्टोकरंसी की ट्रेल का पता लगाना मुश्किल होता है। इसके ट्रांजेक्शन की गोपनीयता को लेकर किसी के मन में कोई संदेह नहीं है।

इसकी वैल्यू में तीव्र उतार-चढ़ाव भी साइबर क्राइम के लिए इसके इस्तेमाल को आसान बनाता है।

इन्हीं वजहों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन पर नजर रखना मुश्किल भी हो जाता है।


बहरहाल, ऑनलाइन गेमिंग से भी हैकिंग, साइबर स्टॉकिंग, डॉक्सिंग आदि के लिए उपजाऊ जमीन मिली है। दूसरी ओर, मेटावर्स है जो बाल सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ा रहा है। यूरोपियन पुलिस संगठन (यूरोपोल) पहले ही आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रचार, प्रशिक्षण और भर्ती आदि के लिए मेटावर्स के संभावित इस्तेमाल को लेकर आगाह कर चुका है।


टेक्नॉलजी के मोर्चे पर इस तरह के लगातार होते बदलाव से सुरक्षा एजेंसियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत बढ़ जाती है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तीन पहलू हैं : सूचनाएं साझा करना, फॉरेंसिक जांच, कुशलता और क्षमता में बढ़ोतरी। देश के अंदर सरकारी एजेंसियों के बीच सूचनाएं साझा करने पर भारत का जोर रहा है। यही नहीं, सरकार ने साइबर फॉरेंसिक कपैबिलिटी बढ़ाने पर भी काफी ध्यान दिया है। गृह मंत्रालय की साइबर फॉरेंसिक लैबोरेटरीज और ट्रेनिंग सेंटर्स स्थापित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है।


भारत ने पिछले साल नवंबर में नई दिल्ली में तीसरी मंत्रिस्तरीय ‘नो मनी फॉर टेरर’ कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें भारतीय ऑफिसरों ने टेरर फाइनेंसिंग के आधुनिक तौर-तरीकों पर रोक लगाने की जरूरत की ओर ध्यान दिलाया। इस बैठक के बाद भारत में अक्टूबर 2022 में ही दो और सम्मेलन हुए: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष आतंवाद विरोधी बैठक और इंटरपोल की 90 वीं जेनरल असेंबली की बैठक। इन बैठकों ने उभरती टेक्नॉलजी के खतरनाक पहलुओं की ओर ध्यान खींचने में मदद की।


G-20 की सार्थकता


गृह मंत्रालय की मेजबानी में पिछले दिनों हुई G-20 बैठक को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कानून-व्यवस्था की एजेंसियों के लिहाज से उभरती तकनीकों के निहितार्थों और साइबर सुरक्षा के कड़े कानूनी प्रावधानों पर बहस शुरू करके इस बैठक ने नए दौर के अपराधों से निपटने में G-20 की सार्थकता साबित की। अब तक यह समूह साइबर सुरक्षा के मसले को डिजिटल इकॉनमी के नजरिए से देखता था। बेशक यह नजरिया महत्वपूर्ण है, लेकिन आज की दुनिया में साइबर सुरक्षा के कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पूर्वी और पश्चिमी खेमों में भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के चलते ग्लोबल साइबर सहयोग की अनिश्चितता को देखते हुए G-20 की जिम्मेदारी बढ़ गई है। इस समूह को साइबर सुरक्षा के कानून-व्यवस्था से जुड़े आयामों पर ध्यान देते हुए सदस्य राष्ट्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान करना चाहिए।

मैतेई और कुकी के बीच की लड़ाई क्या है जिसमें जल रहा है मणिपुर

 मणिपुर में मार्च 2023 में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा जनजाति का दर्जा मिलने से परेशान नागा-कुकी आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन में बहुत से लोग मारे गए हैं। मणिपुर में कुकी जनजाति म्यांमार (बर्मा) से शरणार्थी बनकर आई थी और 1700 ई. से मणिपुर के चूडाचंद्रपुर इलाके में बसी हुई है। और भी नए लोग म्यांमार से शरणार्थी बनकर लगातार आ रहे हैं। कुकी और नागा जनजाति दोनों मिलकर मणिपुरी जनसंख्या का लगभग 40% (25% और 15%) है। दोनों ईसाई हैं और उनको जनजाति का दर्जा और आर्थिक आरक्षण की सुविधा प्राप्त है। मैतेई समुदाय जनसंख्या के 50% से थोड़े अधिक हैं और अधिकांश हिन्दू हैं। मैतेई जनसंख्या का 8% मुस्लिम है जिसे ‘मैतेई पंगल’ कहते हैं।


1993 में नागा-कुकी समुदाय के बीच भी झगड़े में भारी हिंसा हुई जिसमें नागाओं ने कुकी को मारा था। किन्तु मैतेई समाज का विरोध ये दोनों साथ मिलकर करते हैं क्योंकि जनजातियों का मानना है कि उनके पहाड़ों में रहने के कारण आर्थिक विकास उन तक पहुँच नहीं पाता और सारा लाभ समतल में रहने वाले मैतेई को मिलता है। मैतेई जनसंख्या के 50% से थोड़े ही अधिक हैं पर उनके लिए विधान सभा में 60% सीटें भी सुरक्षित हैं। इसलिए जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने मैतेई जाति को अनुसूचित जनजाति में डालने का आदेश दिया तो इन समुदायों के बीच भयानक द्वंद्व छिड़ गया। दंगों को रोकने के लिए राज्य में सेना तैनात करनी पड़ी और देखते ही गोली मारने (शूट एट साइट) के आदेश जारी किए गए। किन्तु मई 2023 में बहुसंख्यक मैतेई द्वारा कुकी जनजाति की महिलाओं पर बर्बरता की वीभत्स और नृशंस घटना ने देश-दुनिया को हिलाकर रख दिया। मई 2023 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित आदेश के लिए हाई कोर्ट को फटकार भी लगाई और जून 2023 में मणिपुर उच्च न्यायालय ने अपने आदेश का ‘रिव्यू’ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जुलाई में सुनवाई शुरू हुई है।


इस भयंकर समस्या का दूसरा पक्ष देखें तो कई लोगों का मानना है कि अंग्रेजों ने कुकी समाज को बर्मा से लाकर मणिपुर में बसाया। ईसाइयों ने जगह-जगह अपने स्कूल खोले और कुकी समाज को ईसाई धर्म में परिवर्तित करना शुरू किया। उन्हें नागाओं के खिलाफ खड़ा किया क्योंकि ये नागा अंग्रेजों को मारते थे। धीरे-धीरे वहां के मूल लोगों की संस्कृति नष्ट होने लगी। मैतेई समाज का दुखड़ा यह भी है कि वे मूलतः आदिवासी थे किन्तु वर्षों पहले हिन्दू धर्म अपनाने के कारण उन्हें ‘सामान्य’ श्रेणी में रखा गया और वे जनजाति का आरक्षण पाने से चूक गए। मंडल कमीशन के बाद मैतेई को ‘ओबीसी‘ की श्रेणी में रखा गया। किन्तु वे अभी भी पहाड़ी भूमि नहीं खरीद सकते जबकि कुकी और नागा अपने जनजाति होने के कारण पहाड़ी और समतल- दोनों में भूमि खरीद सकते हैं। ये भी आरोप है कि कुकी और नागा जनजाति-आदिवासी आरक्षण का लाभ लेकर मणिपुर के 90% भूभाग पर कब्जा करके अमीर हो गए हैं और बहुसंख्यक मैतेई के पास केवल 10% भूभाग रह गया है। इससे आर्थिक असमानता उत्पन्न हो गई है। कई लोगों का यह भी आरोप है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी मैतेई समाज को उनका अधिकार देने के बजाय कुकी जनजातियों द्वारा म्यांमार आतंकवादियों की मदद से और चीन के आधुनिक हथियारों से मारा जा रहा है।


यदि विदेशी मूल के प्रवासियों की बात करें तो गोगोई जाति भी बर्मा से आकर असम में बसी है। कितने ही बांग्लादेशी शरणार्थी और घुसपैठिए दयालु देश भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष रूप से और देश की राजधानी के अन्दर भी उपस्थित हैं। बर्मा से ही आए हुए रोहिंग्या मुस्लिम भी देश में भर रहे हैं। हम इस विषय में क्या कार्रवाई कर रहे हैं? प्रशासन को देश में आने वाली प्रवासी आबादी के लिए नागरिकता और आरक्षण की एक स्पष्ट और कड़ी नीति बनानी होगी। पहले हम अपनी दयालुता दिखाकर किसी अज्ञात कुलगोत्र को शरण दे दें और फिर उसकी समृद्धि या शक्ति में वृद्धि देखकर उसे गालियाँ दें, यह दोनों ही बातें सही नहीं हैं। हिन्दू भी ईसाई देशों में प्रवासी बनकर जाते हैं, बसते हैं और कभी जातिगत टकराव होने पर उन्हें भी खतरा हो सकता है। फिर जब मॉरिशस और इंग्लैंड में भारतीय मूल का प्रधानमंत्री बनता है या यूएसए में भारतीय मूल की उपराष्ट्रपति बनती हैं, तब देश में प्रसन्नता की लहर और विजय की उमंग क्यों दौड़ जाती है? क्या विदेशी मूल के व्यक्तियों के बढ़ते कद और आर्थिक समृद्धि से सिर्फ हमें ‘प्रॉब्लम’ होती है, दूसरों को नहीं?


मणिपुर की समस्या का जो भी कारण हो, उसका शीघ्र निदान ढूंढना नीतिकारों का दायित्व है। अपने आर्थिक हित के सरंक्षण के लिए मनुष्यों के समूहों में और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में टकराव सदा से होते आए हैं। भारत में पहले भी जनजाति की आरक्षण सुविधा के लिए राजस्थान में मीणा और गुर्जर समूहों में टकराव हुआ है। पर मणिपुर का टकराव बिल्कुल अलग है। यहाँ मूल निवासी बनाम प्रवासी और हिन्दू बनाम ईसाई के भी मुद्दे दिखते हैं। भला आर्थिक आरक्षण का महिला की इज्जत उछालने से क्या सम्बन्ध? पुलिस ने भी पीड़ित का साथ नहीं दिया और बहुसंख्यक के हाथों छोड़ दिया। इसका कारण कुछ और ही लगता है। यहाँ पीड़ित कुकी जनजाति ईसाई धर्म मानती है और आक्रमणकर्ता मैतेई अधिकांश हिन्दू हैं। बर्बरता की वीभत्स और नृशंस घटना सर्वथा निंदनीय है और चाहे कोई भी तर्क, सुझाव या स्पष्टीकरण दें, इसे उचित नहीं बताया जा सकता। यह घोर अपराध जल्द से जल्द बहुत कड़ी सजा की मांग कर रहा है। इस नृशंस घटना ने भारत का ‘विश्वगुरु’ बनने का दावा ख़त्म कर दिया है। जिस ‘गुरुकुल’ में बच्चियों के साथ यह बर्ताव हो, वहां कैसा गुरु? हम सावधान रहें कि कृष्णा की प्रेमलीलाओं से ‘प्रेम गुरु’ का सम्मानप्राप्त देश महिलाओं पर बर्बरता के कारण कहीं ‘दुराचार गुरु’ का मेडल न जीत जाए। यदि ऐसे अपराध रोके न गए तो भारत फिर से महाभारत की और बढ़ेगा। इस ब्रह्मांड की कई शक्तियां हमारे देश पर पैनी निगाहें टिकाए हुई हैं जिन्हें अपने हथियारों के खेल के लिए एशिया महाद्वीप का ‘प्लेग्राउंड’ विशेष रूप से पसंद है।

नॉर्वे की एक महिला और उनके नेपाली गाइड ने दुनिया के सभी 8,000 मीटर से ऊंचे पहाड़ों पर सबसे तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड बनाया है. महिलाओं के लिए यह कर पाना काफी मुश्किल है.

 


ऊंचे पहाड़ों पर सरपट चढ़ने का रिकॉर्ड


नॉर्वे की एक महिला और उनके नेपाली गाइड ने दुनिया के सभी 8,000 मीटर से ऊंचे पहाड़ों पर सबसे तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड बनाया है. महिलाओं के लिए यह कर पाना काफी मुश्किल है.



लामा 16 की उम्र से एक गाइड हैं और इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग यात्रा के दौरान हरिला के साथी रहे. 

लामा 16 की उम्र से एक गाइड हैं और इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग यात्रा के दौरान हरिला के साथी रहे.



विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए क्रिस्टिन हारिला और तेनजिन शेरपा ने पूरी दुनिया में ऐसे 14 पहाड़ों पर सबसे तेजी से चढ़ाई की है. इसमें इन्हें तीन महीने और एक दिन का समय लगा. इनके लिए पाकिस्तान की के2 चोटी आखिरी पड़ाव था. उनके टीम ने एक बयान में कहा कि यह रिकॉर्ड "इस विशाल प्रयास के दौरान उनके अटूट दृढ़ संकल्प, टीम वर्क और अडिग दृढ़ता" को दिखाता है. उन्होंने कहा, "हरिला और लामा का साथ आना पर्वतारोहण की एकता, सीमाओं और संस्कृतियों के पार जा कर साथ में महानता हासिल करने की मूल भावना को दिखाया है." शेरपा को लामा भी कहते हैं.


एवरेस्ट की चोटी पर 23 बार चढ़ने वाले शेरपा



"पुरुष होती तो ज्यादा आसान रहता"

वैसे तो दुनिया में 40 से ज्यादा लोगों ने इन 14 चोटियां पर चढ़ाई की है, लेकिन इनमें महिलाएं बहुत कम हैं. अपनी चढ़ाई करने की क्षमता को सिद्ध करने के बावजूद 37 वर्षीय हरिला को पिछले साल को प्रायोजक ढूंढने के लिए संघर्ष करना पड़ा था. इसके लिए उन्हें अपना अपार्टमेंट भी बेचना पड़ा. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को मई में दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मुझे लगता है कि अगर मैं पुरुष होती तो यह प्रोजेक्ट करना मेरे लिए बहुत आसान होता. दुनिया में एक महिला होना बिल्कुल अलग है, और यह केवल प्रायोजक ना मिलने की बात नहीं है.


हरिला वाडसो की मूल निवासी हैं, जो नॉर्वे के सबसे उत्तरी भाग में बैरेंट्स सागर पर स्थित है. वाडसो में सबसे ऊंची चोटी महज 633 मीटर की है. बचपन में उन्हें चढ़ाई का शौक नहीं था. उस वक्त वह ज्यादा फुटबॉल, हैंडबॉल और क्रॉस-कंट्री स्कीइंग करती थीं. 2015 में उन्होंने किलिमंजारो की चढ़ाई की. यह ट्रिप उन्हें अपनी कंपनी के खर्चे पर मिली थी. यहीं से उन्हें अपने चढ़ाई के जुनून का पता लगा.


के2 की चढ़ाई एवरेस्ट से ज्यादा मुश्किल

लामा 16 की उम्र से एक गाइड हैं और इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग यात्रा के दौरान हरिला के साथी रहे. उनकी टीम ने बयान में कहा, "लामा की अनमोल विशेषज्ञता और पहाड़ों के साथ गहरा संबंध दुर्गम इलाकों में नेविगेट करने और कठोर मौसम की स्थिति का सामना करने में उनकी सफलता का अभिन्न अंग रहा है." दुनिया की 14 "सुपर चोटियों" में से पांच पाकिस्तान में ही है. इन सभी चोटियों पर चढ़ना किसी भी पर्वतारोही के लिए खासी उपलब्धि मानी जाती है. एवरेस्ट की तुलना में के2 पर चढ़ाई अधिक कठिन मानी जाती है. इसके कारण है के2 पर मौसम का बेहद अस्थिर होना. 1954 के बाद से केवल 425 लोग ही इस पर चढ़ सके हैं. इनमें करीब 20 महिलाएं भी शामिल हैं.


इससे पहले यह रिकॉर्ड नेपाल में जन्मे ब्रिटेन की निर्मल पुर्जा के नाम था. उन्होंने यह रिकॉर्ड 2019 में बनाया था और सभी 14 चोटियों की चढ़ाई में उनको छह महीने और छह दिन का समय लगा था. पुर्जा फिलहाल नया रिकॉर्ड बनाने में व्यस्त हैं. इसमें वे बिना सप्लीमेंटल ऑक्सीजन केसभी चोटियों पर सबसे तेज चढ़ाई करना चाहते हैं.  

भारत में 2014 में ही सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर लोगों के खुद अपना जेंडर तय करने के हक को सुरक्षित कर दिया था. लेकिन आज भी जन्म प्रमाणपत्र से लेकर पासपोर्ट तक, सरकारी दस्तावेजों में जेंडर बदलवाना आसान नहीं हो पाया है.

 नूर शेखावत 19 जुलाई को ऐसा महसूस कर रही थी जैसा उनका नया जन्म हुआ हो. 31 साल की नूर को उसी दिन जयपुर नगरपालिका ने एक नया जन्म प्रमाणपत्र जारी किया था जिसमें उनका चुना हुआ जेंडर ट्रांसजेंडर दर्ज किया गया था.


राजस्थान में पहली बार इस तरह का प्रमाणपत्र दिया गया था. नूर को जन्म के समय पुरुष जेंडर दिया गया था और उनके पुराने जन्म प्रमाणपत्र में यही जेंडर दर्ज था. लेकिन अब नए प्रमाणपत्र ने उनकी चुनी हुई लैंगिक पहचान पर मोहर लगा दी है.


सुप्रीम कोर्ट ने दिया अधिकार

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में कहा था कि ट्रांसजेंडरों को अपना जेंडर तय करने का अधिकार है और राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को उनके तय किये हुए जेंडर को मान्यता देनी होगी.


इसके बावजूद असलियत यह है कि अभी भी ट्रांसजेंडरों को अलग अलग आवश्यक दस्तावेजों में अपना जेंडर बदलवाने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है. कई सरकारी विभाग लिंग बदलने की सर्जरी का मेडिकल सर्टिफिकेट भी मांगते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि ऐसी सर्जरी के प्रमाण पर जोर देना अनैतिक और गैर-कानूनी है.


नूर लम्बे समय से अपने सभी दस्तावेजों में अपना जेंडर बदलवाना चाहती थीं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वो अपने राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस पाने वाली पहली ट्रांसजेंडर भी हैं. अब को अपने स्कूल की 10वी और 12वी की मार्कशीटों में भी अपना जेंडर बदलवाना चाहती हैं और ग्रेजुएशन पूरी करना चाहती हैं.


ट्रांसजेंडरों को अपनी पहचान को लेकर कई मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ती है. पहले तो खुद को ही अपनी पहचान समझाने का संघर्ष, उसके बाद परिवार और समाज से स्वीकृति पाने की चिंता और उसके बाद सरकारी दस्तावेजों में भी अपनी पहचान दर्ज कराने की लड़ाई.


कई मोर्चों पर जंग

नूर ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि उनके परिवार ने उन्हें कभी एक ट्रांसजेंडर के रूप में स्वीकार नहीं किया, जिसकी वजह से उन्हें छोटी उम्र में ही अपना घर छोड़ देना पड़ा. उन्हें कॉलेज भी पहले ही साल में छोड़ना पड़ा क्योंकि दूसरे छात्र उन्हें लगातार परेशान करते थें.


लेकिन बाद में उन्होंने आगे बढ़ने की ठानी और नए जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन भरा, जिसे मंजूर कर लिया गया. यह राजस्थान का पहला ऐसे जन्म प्रमाणपत्र है जिसमें जेंडर के तौर पर ट्रांसजेंडर लिखा हुआ है.


2019 में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों के संरक्षण) अधिनियम नाम से एक कानून लाया गया, जिसके तहत एक ट्रांसजेंडर पहचान पत्र जारी किया जाता है. लेकिन आज भी कई सरकारी दस्तावेजों में जेंडर बदलने को लेकर अलग अलग विभागों और अलग अलग राज्यों में अलग नियम हैं.


ट्रांसजेंडर ऐक्टिविस्टों के मुताबिक सबसे ज्यादा दिक्कत पासपोर्ट पर अपना जेंडर बदलवाने में आती है, जिसके लिए कई लोगों को अदालतों के दरवाजे भी खटखटाने पड़े हैं.



भारत में अहमदिया समुदाय मुसलमान हैं या नहीं इसे लेकर एक बार फिर चर्चा छिड़ी है. वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव को जमीयत उलेमा ए हिन्द ने सही बताया है तो केंद्र सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.

 आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम बताने वाले प्रस्ताव के बाद यह बहस शुरु हुई है. साल 2012 में आंध्र प्रदेश स्टेट वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर के सुन्नी मुसलमानों की एक उप-शाखा अहमदिया या अहमदी को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था. वक्फ बोर्ड के इस प्रस्ताव को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और उच्च न्यायालय ने प्रस्ताव पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी.


इस रोक के बावजूद इसी साल फरवरी में वक्फ बोर्ड ने फिर से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि अहमदी लोग मुसलमान नहीं हैं. वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव में कहा गया, "जमीयत उलेमा, आंध्र प्रदेश के 26 मई, 2009 के फतवे के परिणामस्वरूप, 'कादियानी समुदाय' (अहमदिया) को 'काफिर' घोषित किया जाता है, ना कि मुस्लिम.”


इसी हफ्ते प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी एक बयान जारी करके आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के अहमदिया समुदाय के संबंध में अपनाए गए दृष्टिकोण को सही ठहराया और कहा कि आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने जो कहा है वह मुस्लिम समुदाय के लोगों की सर्वसम्मत राय है.


अहमदी को क्यों मुसलमान नहीं मानता जमीयत

इस बारे में जमीयत ने कहा कि इस्लाम धर्म की बुनियाद दो महत्वपूर्ण मान्यताओं पर है जो एक अल्लाह को मानना और पैगंबर मोहम्मद को अल्लाह का रसूल और अंतिम नबी मानना है. बयान में कहा गया है कि ये दोनों आस्थाएं इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में भी शामिल हैं.


जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय सचिव मौलाना नियाज फारूकी का कहना है कि अहमदिया के साथ मुसलमान शब्द जोड़ना ही गलत है. डीडब्ल्यू से बातचीत में फारूकी कहते हैं, "सारी दुनिया में मुसलमानों के हर तबके ने उन्हें गैर-मुस्लिम माना है. रसूल हमारे आखिरी नबी हैं और जो उन्हें आखिरी नबी नहीं मानता है, वो काफिर है, वो मुसलमान है ही नहीं. यह बात कुरान की आयत कहती है. ऐसे व्यक्ति के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है. दूसरी बात यह, कि ये लोग अहमदिया के नाम से धोखा देते हैं. ये कादियानी हैं लेकिन अपने आपको मुसलमान कहकर और अहमदिया नाम के जरिए धोखा देते हैं.”


जमीयत ने अपने बयान में भी कहा है कि साल 1974 में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के सम्मेलन में सर्वसम्मति से अहमदिया समुदाय के संबंध में प्रस्ताव पारित कर घोषणा की गई थी कि इसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है. इस सम्मेलन में 110 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था.


मुसलमान या गैर मुसलमान कौन बताएगा

जमीयत के इस बयान के बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि वक्फ बोर्ड के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह किसी को मुसलमान या गैर-मुसलमान घोषित कर सकें. उनका कहना था, "देश का हर वक्फ बोर्ड एक्ट ऑफ पार्लियामेंट के अधीन है. किसी भी वक्फ बोर्ड के पास यह अधिकार नहीं है कि वो किसी फतवे को गवर्नमेंट ऑर्डर में तब्दील कर दे. हमने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है क्योंकि मुझसे अहमदिया समुदाय के लोगों ने इस बारे में अपील की थी.”


अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा गया है कि अहमदिया मुस्लिम समुदाय ने 20 जुलाई को मंत्रालय को जानकारी दी थी कि कुछ वक्फ बोर्ड अहमदिया समुदाय का विरोध कर रहे हैं और समुदाय को इस्लाम के दायरे से बाहर घोषित करने के लिए अवैध प्रस्ताव पारित कर रहे हैं.


इस बारे में अहमदिया समुदाय के लोगों से बात करने की भी कोशिश की गई लेकिन किसी से बातचीत संभव नहीं हो सकी. कुछ वक्फ बोर्डों के मामलों की पैरवी करने वाले अहमदिया समुदाय से जुड़े एक वरिष्ठ वकील ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया कि पाकिस्तान में तो अहमदी लोग खुद को मुसलमान कह ही नहीं सकते हैं लेकिन भारत में भी अक्सर अपनी पहचान छिपाते हैं. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, "वैचारिक स्तर पर तो इस्लाम की मुख्य धारा से उनकी सोच अलग है ही, कई बार लोग पैसे लेकर भी कादियानी बन जाते हैं लेकिन समाज के डर से खामोश रहते हैं. मुस्लिम समाज में उन्हें अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता यानी उन्हें मुसलमान समझा ही नहीं जाता.”


कौन है अहमदिया मुसलमान

अहमदिया समुदाय मुस्लिम समाज में ही एक पंथ है. दरअसल, 19वीं सदी में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों और उनमें शिक्षा का प्रसार करने के मकसद से मिर्जा गुलाम अहमद कादियानी ने 1889 में एक आंदोलन चलाया था जिसे उन्हीं के नाम पर अहमदिया आंदोलन कहा जाता है.


मिर्जा गुलाम अहमद का जन्म ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत में 13 फरवरी 1835 को हुआ था. मिर्जा गुलाम अहमद का कहना था कि ना तो हजरत मोहम्मद आखिरी नबी हैं और ना ही कुरान आखिरी किताब. मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को नबी घोषित किया था. उनके इन्हीं विचारों के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग ना सिर्फ उनका विरोध करते हैं बल्कि उन्हें और उनके अनुयायियों को मुसलमान मानने से भी इनकार करते हैं.


दूसरी तरफ अहमदिया समुदाय के लोग खुद को प्रगतिशील मुस्लिम बताते हैं. अहमदिया समुदाय की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस समुदाय को मानने वाले लोग दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में रहते हैं. यही नहीं, इन देशों में इस समुदाय के लोगों के पास हजारों मस्जिदें, स्कूल और अस्पताल भी हैं.


सबसे ज्यादा अहमदी पाकिस्तान में

ना सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा अहमदी पाकिस्तान में रहते हैं जहां इनकी आबादी 40 लाख बताई जाती है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का 2.2 फीसदी है. पंजाब प्रांत में रबवाह शहर अहमदिया समुदाय का वैश्विक मुख्यालय हुआ करता था लेकिन फिलहाल यह इंग्लैंड से ऑपरेट किया जाता है.


पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा अहमदी नाइजीरिया में रहते हैं. वहां इनकी संख्या करीब 25 लाख है. भारत में भी करीब 10 लाख अहमदी रहते हैं. इसके अलावा जर्मनी, तंजानिया, केन्या जैसे कई देशों में भी बड़ी संख्या में अहमदी समुदाय के लोग रहते हैं.


पाकिस्तान में मई 1974 में दंगे भड़के थे जिनमें अहमदिया समुदाय के 27 लोगों की मौत हो गई थी. घटना के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने अहमदिया मुसलमानों को ‘नॉन-मुस्लिम माइनॉरिटी' घोषित कर दिया था. यही नहीं, पाकिस्तान अहमदिया समुदाय के लोगों को खुद को मुस्लिम कहने और अपने धर्म का प्रचार करने पर भी रोक है. ऐसा करने पर 3 साल तक की सजा का भी प्रावधान है. वे अपने प्रार्थना स्थल को मस्जिद नहीं कह सकते हैं और ना ही अजान शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं.

सिक्किम जल्द एक साल का मातृत्व अवकाश देने वाला भारत का पहला राज्य बन सकता है. करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने के इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए और भी कदम उठाये जाने की जरूरत है.

 सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने घोषणा की है कि अब से राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों को 12 महीनों का मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही पुरुष कर्मचारी एक महीने का पितृत्व अवकाश ले सकेंगे.


तमांग ने आश्वासन दिलाया कि इसके लिए राज्य के सेवा नियमों में बदलाव किये जाएंगे ताकि सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों और अपने परिवारों का बेहतर ख्याल रख सकें. नया नियम लागू हो जाने पर सिक्किम भारत में सबसे लंबा मातृत्व अवकाश देने वाला राज्य बन जाएगा.


छह महीने काफी नहीं

भारत के प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम के तहत 26 सप्ताह या करीब छह महीनों के मातृत्व अवकाश का प्रावधान है. 2017 से पहले सिर्फ 12 हफ्तों का अवकाश मिला करता था. कई ऐक्टिविस्ट और संगठन लंबे समय से मांग करते आए हैं कि मातृत्व अवकाश को कानूनी रूप से कम से कम नौ महीनों का कर देना चाहिए.


नीति आयोग ने भी हाल ही में इसकी अनुशंसा की थी. आयोग के सदस्य वीके पॉल ने मई 2023 में कहा था कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौ महीनों का मातृत्व अवकाश दिया जाना चाहिए. हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि सिर्फ कानूनी रूप से मातृत्व अवकाश की अवधि तय कर देना अधूरा कदम है.


कई जानकारों का मानना है कि मातृत्व अवकाश देने और उस दौरान उस महिला कर्मचारी का काम करने के लिए किसी अस्थायी कर्मचारी को नौकरी पर रखने का खर्च पूरी तरह से कंपनी को ही उठाना होता है. कंपनियां इससे कतराती हैं जिसका असर महिलाओं को नौकरी मिलने की संभावनाओं पर पड़ता है.


कई सर्वेक्षणों ने दावा किया है कि कानून के इन प्रावधानों की वजह से लाखों महिलाओं की नौकरी चली जाती है. नई नौकरियों के लिए भी महिलाओं का चयन गिर जाता है. इससे अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी की दर उठ नहीं पाती.


पिता की भूमिका भी जरूरी

दूसरा पहलू पितृत्व अवकाश का भी है. भारत में पितृत्व अवकाश के लिए कानूनी प्रावधान बस 15 दिनों का है. बड़ी संख्या में ऐसी निजी कंपनियां है जो पितृत्व अवकाश देती भी नहीं हैं. यह सुविधा सरकारी और निजी क्षेत्र की कुछ नौकरियों में उपलब्ध है.


हालांकि जानकारों का कहना है कि पिताओं के लिए सिर्फ 15 दिनों की छुट्टी का मतलब है उसके बाद बच्चे की देखरेख की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मां के ऊपर डाल देना. इन्क्लूसिविटी विशेषज्ञ मुग्धा कालरा ने एक लेख में लिखा है कि इस वजह से पिता तो तुरंत काम पर लौट जाता है लेकिन मां को छह महीनों के लिए अपने करियर को रोक देना पड़ता है.


कुल मिलाकर जानकारों की राय यह है कि करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें को कानूनी रूप से और समर्थन दिए जाने की जरूरत है.



भारत प्रशासित कश्मीर में हजारों की संख्या में शिया मुसलमानों ने मुहर्रम का जुलूस निकाला. कई दशकों से यहां मुहर्रम का जुलूस निकालने पर प्रतिबंध था.

 इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से वर्तमान में मुहर्रम का महीना चल रहा है. शिया मुसलमानों के लिए यह पूरी दुनिया में पवित्र माना जाता है जब पैगंबर मुहम्मद के पोते हुसैन की शहादत की स्मृति में बड़े जुलूस निकाले जाते हैं. हुसैन की शहादत सातवीं सदी में हुई थी. हालांकि अधिकारियों ने कश्मीर में 1990 से ही इन जुलूसों पर प्रतिबंध लगा रखा था. इसके एक साल पहले कश्मीर के कई हिस्सों में सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ था खासतौर से उन इलाकों में जिन पर पाकिस्तान अपना दावा जताता है.


कैसे निकला जुलूस

चार साल पहले कश्मीर का प्रशासन सीधे अपने हाथ में लेने के बाद भारतकी केंद्रीय सरकार कश्मीर में सुरक्षा हालात के सुधरने का श्रेय लेने के लिए आतुर है. कई दशकों से यहां चली आ रही अशांति ने कश्मीरी लोगों को बहुत परेशान किया है. जुलूस के दौरान श्रीनगर की सड़कों पर जब लोग छाती पीटते और झंडे लहराते चले तो उनके साथ साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी सुरक्षा के लिए मौजूद थे. इससे पहले अधिकारियों और मौलवियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई जिसके बाद जुलूस की अनुमति दी गई.


जुलूस के शांति से गुजर जाने के बाद नगर प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मोहम्मद एजाज ने पत्रकारों से कहा, "यह शांति का लाभांश है." 1990 के बाद कुछ छोटे जुलूसों की अनुमति दी गई है लेकिन अकसर इसका नतीजा हिंसा के रूप में सामने आया. जुलूस निकालने वाले आजादी की मांग करने लगते हैं जिसके बाद सुरक्षा बल भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं.


कश्मीर के सुरक्षा हालात

कश्मीर में शिया मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, यहां बड़ी संख्या सुन्नी मुसलमानों की है. हालांकि अधिकारियों का मानना है कि करीब 1.4 करोड़ की आबादी वाले इस इलाके में 10 फीसदी आबादी शियाओं की है. इस साल का जुलूस मौजूदा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा था और इसमें बड़ी संख्या में लोगों को हिस्सा लेने दिया गया. अधिकारियों ने शर्त रखी थी कि जुलूस की अनुमति तभी दी जाएगी जब लोग "राष्ट्रविरोधी नारे और प्रचार" नहीं करेंगे ना ही विद्रोही गुटों या "प्रतिबंधित संगठनों" का कोई जिक्र करेंगे.


कश्मीर में 1989 में भारत के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह के बाद दसियों हजार आम लोग, सैनिक और विद्रोहियों की जान गई है. भारत सरकार ने कश्मीर को मिला विशेषाधिकार 2019 में खत्म कर दिया. इसके बाद भारतीय पर्यटकों का यहां आना काफी ज्यादा बढ़ गया है. कई दशकों तक बंद रहने के बाद पिछले साल यहां सिनेमा हॉल खुल गये. इस साल मई में यहां जी20 की बैठक भी हुई. हालांकि आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अशांति रोकने की कोशिश में नागरिक स्वतंत्रता में भारी कटौती की है. यहां पत्रकारों, सार्वजनिक विरोध और धार्मिक गतिविधियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गये हैं.

इंसानों से सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करवाना बंद करने की सालों से उठ रही मांगों के बावजूद यह अमानवीय काम आज भी जारी है. भारत सरकार ने यह संसद में माना है और बताया है कि इसमें हर साल कई लोगों की जान जा रही है.

 लोक सभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया है कि पिछले पांच सालों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करने के दौरान पूरे देश में 339 लोगों की मौत के मामले दर्ज किये गए. इसका मतलब है इस काम को करने में हर साल औसत 67.8 लोगमारे गए.


सभी मामले 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं. 2019 इस मामले में सबसे भयावह साल रहा. अकेले 2019 में ही 117 लोगों की मौत हो गई. कोविड-19 महामारी और तालाबंदी से गुजरने वाले सालों 2020 और 2021 में भी 22 और 58 लोगों की जान गई.


कुछ राज्यों में समस्या भयावह

2023 में अभी तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नौ लोग मारे जा चुके हैं. महाराष्ट्र में तस्वीर सबसे ज्यादा खराब है, जहां सीवर की सफाई के दौरान पिछले पांच सालों में कुल 54 लोग मारे जा चुके हैं. उसके बाद बारी उत्तर प्रदेश की है जहां इन पांच सालों में 46 लोगों की मौत हुई.


दिल्ली की स्थिति भी शर्मनाक है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी और महाराष्ट्र या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मुकाबले एक छोटा केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद वहां इन पांच सालों में 35 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. सरकार का कहना है कि इन लोगों की मौत का कारण है सीवरों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक तरीकों से सफाईकरवाना.


इसके साथ ही कानून में दी गई सुरक्षात्मक सावधानी को ना बरतना. सफाई के दौरान सीवरों से विषैली गैसें निकलती हैं जो व्यक्ति की जान ले लेती हैं.


क्यों नहीं सुधरते हालात

कानून के मुताबिक सफाई एजेंसियों के लिए सफाई कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने जैसे सुरक्षात्मक उपकरण देना अनिवार्य है, लेकिन एजेंसियां अकसर ऐसा नहीं करतीं. कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा के सीवरों में उतरना पड़ता है.

सीवर और सेप्टिक टैंकों की इंसानों के हाथों सफाई मैन्युअल स्कैवेंजिंग या मैला ढोने की प्रथा का हिस्सा है, जो भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित है. कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या एजेंसी को एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दो साल जेल की सजा हो सकती है. हालांकि जमीन पर इस प्रतिबंध का पालननहीं होता है जिसकी वजह से यह प्रथा चलती चली जा रही है.


इस प्रथा में शामिल लोगों को रोजगार के दूसरे मौके उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार एक योजना भी चलाती है, जिसके तहत हर साल करोड़ों रुपये आबंटित किये जाते हैं. इन पांच सालों में इस योजना के लिए कुल 329 करोड़ रुपये दिए गए हैं, लेकिन नतीजा संसद में दिए आंकड़े खुद ही बयान कर रहे हैं.


जाति का आयाम

जाती व्यवस्था में मैला सफाई का काम परंपरागत रूप से तथाकथित निचली जाती के लोगों से करवाया जाता रहा है. माना जाता है कि अंग्रेजों ने जब शहरों में सीवर बनाये तो उन्होंने भी शोषण की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सफाई के लिए दलित जातियों के लोगों को ही नौकरी पर रखा.


आजादी के बाद अस्पृश्यता पर प्रतिबंध लगा दिए जाने के साथ ही आजाद भारत में यह प्रथा बंद हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा हो ना सका और यह आज तक चली आ रही है. आज भी इस तरह की सफाई का काम दलितों से ही करवाया जाता है.


कई ऐक्टिविस्ट और संगठन इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे हैं. इनमें मैग्सेसे पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन भी शामिल हैं. विल्सन सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापक हैं और पिछले कई महीनों से भारत के कोने कोने में इस मुद्दे को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए यात्रा कर रहे हैं


विल्सन का कहना है कि इन 'जहरीले गड्ढों' में चली जाने वाली मासूम जानों पर चुप्पी तोड़ने की कहीं कोई इच्छा भी नजर नहीं आती.



Wednesday, July 26, 2023

Meghalaya Winter Capital Row: मेघालय में तुरा को राज्य की शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग तेजी हो गई है. ऐसे में सवाल यह भी है कि तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है?

 मेघालय के कुछ समूह तुरा को शीतकालीन राजधानी करने की मांग कर रहे हैं. इस मांग के कारण भीड़ ने सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय पर उस समय हमला किया जब वो तुरा में मीटिंग कर रहे थे. हमले में 5 पुलिस कर्मी घायल हुए. यह नया मामला नहीं है. इससे पहले ही तुरा को राजधानी बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए. हिंसा और झड़प की खबरें आईं.


कुछ समूहों की मांग के कारण मेघालय में नई बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई तुरा राज्य की शीतकालीन राजधानी होनी चाहिए या नहीं. ऐसे में सवाल यह भी है कि तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है और इसका क्या मतलब है.


तुरा को राजधानी बनाने के लिए क्या तर्क दिए गए?

तुरा को शीतकालीन राजधानी बनाने की मांग प्रमुखतौर पर दो संगठन ने की. ACHIK (कॉन्शियस होलिस्टिकली इंटीग्रेटेड क्रिमा) और GHSMC (गारो हिल्स स्टेट मूवमेंट कमेटी). 11 जुलाई को ACHIK नेताओं ने तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की और अक्टूबर से मार्च तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी घोषणा की. इस ऐलान के बाद राज्य में हिंसा और झड़प की खबरें आने लगीं. इस ऐलान से पहले अप्रैल में संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांग रखी. संगठन का कहना था कि मुख्ममंत्री ने उनकी मांग को मानने का वादा भी किया.


तुरा को राजधानी बनाने के लिए पत्र में कई तर्क दिए गए. ACHIK का कहना है कि इससे पूरे राज्य में विकास की रफ्तार तेज होगी. सुविधाओं का बंटवारा होगा. विकास एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. ट्रांसपोर्ट की सुविधाओं में तेजी आएगा. सर्दी में यहां का मौसम भी बेहतर रहता है कि इसलिए इसे शीतकालीन राजधानी बनाना बेहतर फैसला साबित होगा.


ACHIK का तर्क है राजधानी बनने से यहां के स्थानीय समूहों के बीच आपसी संवाद और सद्भाव बढ़ेगा. तर्क यह भी दिया कि इससे गारो पहाड़ी वाले हिस्से में सामाजिक और आर्थिक विकास होगा. शिलांग को सर्दियों में राहत मिलेगी जब पर्यटन अपने पीक पर होता है. अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी.


अब हालिया विवाद की वजह भी समझ लेते हैं

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ACHIK और GHSMC समूह के साथ इनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठक कर रहे थे. इसी दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय के बाद भीड़ पहुंची और नारे लगाने लगे. भीड़ हिंसात्मक रूप लेने लगी और मुख्यमंत्री कार्यालय पर पथराव करने लगे. मामला आगजनी और तोड़फोड़ तक पहुंच गया. हालांकि सुरक्षा बलों के जरिए मुख्यमंत्री को बचाया गया.


प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने एक्शन लेते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े. लाठी चार्ज करके प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा. इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए. तुरा में कर्फ्यू लगा दिया गया. शहर के कई हिस्सों में भी उग्र प्रदर्शन की खबरें आईं.


हर कोई सहमत नहीं

संगठन की मांग से राज्य में हर कोई सहमत नहीं नजर आ रहा है. मेघालय की स्वास्थ्य मंत्री अम्पारीन लिंगदोह ने ACHIK की मांग को खारिज किया है. उनका कहना है कि शिलांग पहले से राजधानी है. अगर हर जिला यह कहने लगा यह इस जिले में लाओ और वो मेरे जिले में लाओ, तो मुश्किल हो जाएगी. प्रशासन के लिए इसे संभालना दिक्कतभरा हो जाएगा

दूध भी बिगाड़ेगा घर का बजट, ये है बड़ी वजह लगभग हर साल दूध की कीमतों में बढ़ोतरी होती है. खास कर पिछले 12 साल में दूध के दाम 57 प्रतिशत बढ़े हैं. लेकिन, सबसे ज्यादा साल 2022 के दौरान कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

 महंगाई का बोझ आम आदनी के ऊपर से कम होने का नाम नहीं ले रहा है. हरी सब्जी, दाल, चावल और मसालों के बाद अब दूध भी रसोई का बजट बिगाड़ने वाला है. एक अगस्त से कर्नाटक में लोगों के लिए दूध खरीदना महंगा हो जाएगा. कर्नाटक सरकार ने नंदिनी दूध की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की दर से बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. खास बात यह है कि बढ़ी हुईं कीमतें 1 अगस्त से लागू होंगी. हालांकि, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) ने भी दूध के दाम बढ़ाने को लेकर सरकार मांग की थी. उसने कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ोतरी करने की मांग की थी.


इस बढ़ोतरी के बाद भी कर्नाटक में दूसरे राज्यों के मुकाबले दूध का रेट सस्ता ही रहेगा. यहां पर दूध की शुरुआती कीमत 39 रुपये प्रति लीटर है. जबकि, आंध्र प्रदेश में सबसे सस्ता दूध 56 रुपये लीटर बिकता है. इसी तरह से तमिलनाडु में 44 रुपये तो केरल में की स्टार्टिंग प्राइस 50 रुपये लीटर है. जबकि दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में टोंड दूध 54 रुपये प्रति लीटर बिकता है.


पिछले साल रोज 94 लाख लीटर दूध खरीदा जाता था


वहीं, जानकारों का कहना है कि नंदिनी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का असर दूसरे ब्रांडों पर भी पड़ सकता है. देखा- देखी दूसरे राज्य में दूसरी डेयरी कंपनियां भी दूध की कीमतों में इजाफा कर सकती हैं. इससे इस महंगाई में जनता का बजट और बिगड़ जाएगा. हालांकि, केएमएफ अधिकारियों का कहना है कि दूध की खरीद में पिछले साल के मुकाबले भारी गिरावट आई है. पिछले साल रोज 94 लाख लीटर दूध खरीदा जाता था, जो अब घटकर 86 लाख लीटर पर पहुंच गया है. उनका कहना है कि किसान ज्यादा कीमत मिलने की वजह से निजी कंपनियों के हाथों दूध बेच रहे हैं. इससे दूध का क्राइसिस हो गया है. यही वजह है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी करने का निर्यण लिया गया.


इसलि एकंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं


खैर, केएमएफ के अधिकारियों की जो भी दलीले हों, लेकिन उत्तर भारत में भी आने वाले दिनों में दूध की कीमतों में 3 रुपये लीटर के हिसाब से बढ़ोतरी हो सकती है. क्योंकि उत्तर भारत में चारे के साथ- साथ पशु आहार भी 25% तक महंगे हो गए हैं. इसका सीधा असर दूध के उत्पादन पर पड़ रहा है. अब किसानों को दुधारू मवेशियों के चारे पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. ऐसे में वे लागत निकाल कर डेयरी कंपनियों को महंगे रेट पर दूध बेच रहे हैं. यही वजह है कि महंगी खरीद होने की वजह से डेयरी कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.


किचन का बजट बहुत ज्यादा खराब हो जाएगा


बात दें कि लगभग हर साल दूध की कीमतों में बढ़ोतरी होती है. खास कर पिछले 12 साल में दूध के दाम 57 प्रतिशत बढ़े हैं. लेकिन, सबसे ज्यादा पिछले साल कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. साल 2022 में दूध 10 रुपये महंगा हो गया. इसके अलावा इस साफ भी फरवरी महीने में दूध की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई. ऐसे में लोगों को डर सता रहा है कि नंदिनी को देखर कहीं अन्य कंपनियां भी दूध का रेट न बढ़ा दे. अगर ऐसा होता है, तो इस महंगाई में किचन का बजट बहुत ही ज्यादा खराब हो जाएगा.


चारा महंगा होने पर दूध के कीमतें भी बढ़ जाएंगी


ऐसे भी पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों में बाढ़ की वजह से धान की फसल बर्बाद हो गई है, जिसका सीधा असर आने वाले महीनों में चारे पर पड़ेगा. क्योंकि धान की पराली का सबसे ज्यादा इस्तेमाल चारे में रूप में किया जाता है. वहीं, दक्षिण भारत में औसत से काफी कम बारिश हुई है, जिससे धान के रकबे में कमी आने की संभावना बढ़ गई है. इसका असर भी मवेशियों के चारे पर पड़ेगा. ऐसे में चारा हद से ज्यादा महंगा होने पर दूध की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है.



नोएडा से बॉयफ्रेंड को बुलाया, फिर साथ में दे दी जान हरदोई में एक प्रेमी युगल ने पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली. प्रेमी युगल के घरवाले दोनों के संबंधों से नाराज थे और शादी नहीं होने देना चाहते थे. इसी वजह से दोनों ने यह कदम उठाया.

 उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक पेड़ पर एक ही दुपट्टे से लटक कर प्रेमी युगल ने आत्महत्या कर ली. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए और शवों को पेड़ से उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. जानकारी के मुताबिक, दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे, लेकिन परिवारी जनों को उनका ये रिश्ता नामंजूर था. इसी के चलते दोनों ने एक साथ लटक कर आत्महत्या कर ली.


बता दें कि बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के महसोनामाऊ गांव स्थित एक पेड़ की डाल में प्रेमी युगल का शव फांसी के फंदे पर लटकता हुआ पाया गया. क्षेत्रीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पहले तो शवों की शिनाख्त की. पुलिस को युवक की जेब से एक मोबाइल मिला, जिससे पता चला कि युवक कुदौली गांव, शहर कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला है. युवक का नाम अनूप पुत्र सतीश चंद्र है. साथ ही लड़की की कलाई पर रुचि नाम लिखा हुआ है.


नोएडा में नौकरी करता था युवक, बिना बताए लड़की से मिलने आया

अनूप नोएडा में रहकर काम कर रहा था. परिवारी जनों ने बताया कि वह नोएडा से कब आया, इसकी जानकारी नहीं है. एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि युवती बगल के गांव जफरपुर की रहने वाली है. उसकी उम्र 19 वर्ष है. जानकारी के मुताबिक, दोनों एक-दूसरे से मोहब्बत करते थे. पर परिवारी जनों ने शादी कराने से इनकार कर दिया था. इसी के चलते दोनों ने पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है.


दोनों के घरवालों से पुलिस ने की पूछताछ

पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया गया है. पूरे मामले में परिवारी जनों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस पूरे मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई कर रही है. घटना के बाद से परिवारी जनों में कोहराम मचा हुआ है. घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है.


इश्क के बाद शादी न होना बनी आत्महत्या की वजह

अनूप और रुचि एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. वह एक-दूसरे के साथ जीने और मरने की कसमें खा चुके थे, लेकिन घरवालों को उनकी यह मोहब्बत कबूल नहीं थी. शादी में अड़चन बने घरवाले एक-दूसरे को एक नहीं होने देना चाहते थे. इसी के चलते दोनों ने एक साथ पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली. कुल मिलाकर पुलिस बेइंतहा मोहब्बत और फिर शादी में नाकामी आत्महत्या की वजह मान रही है.

मोदी ने दी बड़ी गारंटी! कहा-मेरे तीसरे कार्यकाल में दुनिया की तीन अर्थव्यवस्थाओं में एक नाम भारत का होगा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान में G20 की मीटिंग के लिए कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन करते हुए यह दावा किया कि उनके तीसरे कार्यकाल में दुनिया की पहली तीन अर्थव्यवस्था में एक नाम भारत का होगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विकासयात्रा रुकनेवाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जनता ने मुझे जिम्मेदारी सौंपी तो उस वक्त विश्व अर्थव्यवस्था में भारत 10 वें नंबर पर था। मेरे दूसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। और ये मोदी की गारंटी है कि तीसरे कार्यकाल में दुनिया की पहली तीन अर्थव्यवस्था में एक नाम भारत का होगा।


पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है

पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। भारत आज वो हासिल कर रहा है जो पहले अकल्पनीय है। विकसित होने के लिए बड़ा सोचना होगा, बड़े लक्ष्य हासिल करना होगा। उन्होंने कहा-'इतने ऊंचे उठो कि जितना उठा गगन है'.. हम पहले से बेहतर और तेज गति से निर्माण कर रहे हैं। 


दुनिया ये मान रही है भारत 'लोकतंत्र की जननी' 

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया यह स्वीकार कर रही है कि भारत 'लोकतंत्र की जननी' है। आज जब हम आज़ादी के 75 वर्ष होने पर 'अमृत महोत्सव' मना रहे हैं, यह 'भारत मंडपम' हम भारतीयों द्वारा अपने लोकतंत्र को दिया एक खूबसूरत उपहार है। कुछ हफ्तों बाद यहां G20 से जुड़े आयोजन होंगे। दुनिया के बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष यहां उपस्थित होंगे। भारत के बढ़ते कदम और भारत का बढ़ता कद इस 'भारत मंडपम' से पूरी दुनिया देखेगी।


कुछ लोगों की फितरत होती है हर अच्छे काम को रोकने की

प्रगति मैदान में कन्वेशन सेंटर के निर्माण में आई बाधाओं का भी पीएम मोदी ने जिक्र किया। उन्होंने कहा-' इस निर्माण को रोकने के लिए नकारात्मक सोच वालों ने क्या-क्या कोशिशें नहीं की, अदालतों के चक्कर काटे थे। कुछ लोगों की फितरत होती है हर अच्छे काम को रोकने, टोकने की। जब कर्तव्य पथ पर बन रहा था तो न जाने क्या क्या कथाएं चल रही थीं। अखबार, ब्रेकिंग न्यूज में न जाने क्या-क्या चल रहा था। कर्तव्य पथ बनने के बाद वे लोग भी दबी ज़ुबान में कहने लगे कि अच्छा हुआ है।'

कबाड़ भी बना सोना! बेकार डिब्बों को बेचकर होती है हजारों करोड़ रुपये की कमाई हर साल ट्रेन के सैकड़ों डिब्बे खराब हो जाते हैं और रेलवे के इन कबाड़ हो चुके डिब्बों की कीमत भी लाखों में होती है।

 हाल ही में आई कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि रेलवे ने स्क्रैप बेचकर हजारों करोड़ रुपये की कमाई की थी, अब सेंट्रल रेलवे की भी एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य रेल ने अप्रैल 2022 से जून 2023 तक 138 मेल या एक्सप्रेस डिब्बों को उनके कोडल लाइफ के बाद रद्द कर दिया और उन्हें स्क्रैप बिक्री के लिए भेज दिया। रेलवे को इससे प्रति डिब्बे 12.73 लाख की औसत कमाई के साथ 17.58 करोड़ की आय दर्ज हुई। मध्य रेल ने संरक्षा सुनिश्चित करते हुए और रेलवे की कंडमनेशन नीति का अनुपालन करते हुए अप्रैल 2022 से जून 2023 तक 138 कोचों को उनकी 25 साल के कोडल लाइफ के बाद रद्द कर दिया था।


कोचों का अधिकतम जीवन 25 साल होता है

रेलवे ने कुर्ला कोच कंडमनेशन यार्ड में कोचों के टूटने के बाद उन्हें नीलामी के लिए स्क्रैप यार्ड में भेज दिया। पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान 14 एसी कोचों सहित कुल 79 कोचों को नष्ट कर दिया गया था और इन 79 कोचों की बिक्री से रु. 11.71 करोड़ की राशि अर्जित की गई। पिछले 3 महीनों में यानी अप्रैल 2023 से जून 2023 तक, कुल 59 कोच कंडम हो गए, जिनमें 11 कोच एसी कोच थे, इन कोचों के स्क्रैप की बिक्री से 5.87 करोड़ रुपये की आय अर्जित हुई। बता दें कि कोच के कंडमनेशन के संबंध में निर्णय आयु-सह-स्थिति के आधार पर लिया जाता है, जिसमें अधिकतम 25 वर्ष का जीवन होता है।


स्क्रैप की बिक्री से 11,645 करोड़ की कमाई

पूरे रेलवे की बात करें तो CAG की लेखा परीक्षा में पाया गया था कि भारतीय रेल ने 2017 से 21 के दौरान स्क्रैप से 11,645 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यानी कि रेलवे ने कबाड़ बेचकर हर साल हजारों करोड़ रुपये की कमाई की थी। रेलवे इसके अलावा पार्किंग, मोबाइल फूड यूनिट्स, बेस किचन, सेल किचन, फूड प्लाजा आदि से भी करोड़ों रुपये कमाई करता है। हाल में आई कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि रेलवे की गैर यात्रा किराया स्रोतों से होने वाली कमाई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाई थी, लेकिन स्क्रैप बेचकर उसने अच्छी कमाई की थी।



दिल्ली हाईकोर्ट ने बंगाली मार्केट मस्जिद और तकिया बब्बर शाह मस्जिद को रेलवे की तरफ से दिए गए नोटिस पर स्टे लगाया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने रेलवे से इन दो मस्जिदों पर नोटिस लगाने को लेकर जवाब भी मांगा है।

 दिल्ली हाईकोर्ट ने बंगाली मार्केट मस्जिद और तकिया बब्बर शाह मस्जिद को रेलवे की तरफ से दिए गए नोटिस पर स्टे लगाया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने रेलवे से इन दो मस्जिदों पर नोटिस लगाने को लेकर जवाब भी मांगा है। दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 6 अगस्त को करेगी। बता दें कि इन दो मस्जिदों को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बताते हुए रेलवे ने हटाने का नोटिस दिया था, दिसके बाद दिल्ली वक्फ बोर्ड रेलवे के इस नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट गया था। 


क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पिछले हफ्ते ही उत्तर रेलवे ने बंगाली मार्केट मस्जिद और तकिया बब्बर शाह मस्जिद पर हटाने का नोटिस चस्पा किया था। इस नोटिस पर लिखा था कि 15 दिनों में खुद हटा लें मस्जिद वरना रेलवे हटा देगा। इन नोटिस में रेलवे ने लिखा है कि ये मस्जिदें उनकी जमीन पर बनी हैं। इन दो बड़ी मस्जिदों के अलावा तकिया बब्बर शाह मस्जिद के करीब मौजूद नगर निगम के मलेरिया विभाग के ऑफिस को भी रेलवे ने हटाने का नोटिस दिया है और 15 दिन में इस विभाग के ऑफिस को भी हटाने की बात कही है। 


"1945 में हुआ था कानूनी तौर पर एग्रीमेंट"

जब रेलवे की ओर से इन दोनों मस्जिदों को हटाने का नोटिस दिया गया तो दिल्ली वक्फ बोर्ड हरकत में आया था। वक्फ ने इस मामले पर जवाब देते हुए कहा था कि मस्जिद की जमीन साल 1945 में कानूनी तौर पर एग्रीमेंट के तहत ट्रांसफर की गई थी। मस्जिद कमेटी का दावा है कि ये 250 और 500 साल पुरानी है मस्जिदे हैं। वक्फ ने कहा था कि ये मस्जिद जिसके अंदर हुजरे, आंगन, शौचालय, चबूतरे आदि का कुल माप 0.095 एकड़ भूमि दिनांक 06.03.1945 को एक एग्रीमेंट के माध्यम से सुन्नी मजलिस औकाफ को काउंसिल में गवर्नर जनरल के मुख्य आयुक्त के द्वारा हस्तांतरित कर दी गई थी। इतना ही नहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस जवाब में ये भी कहा कि मौजूदा मामले में जिस मस्जिद की बात हो रही है वह 400 साल से भी अधिक समय से अस्तित्व में है।


मस्जिदों को रेलवे ने हटाने का दिया नोटिस, वक्फ बोर्ड ने कहा- 1945 का कानूनी अग्रीमेंट है, कोई अतिक्रमण नहीं

मस्जिद कमेटी का दावा है कि ये 250 और 500 साल पुरानी है मस्जिदे हैं। इस मामले पर कहा कि ये मस्जिद जिसके अंदर हुजरे, आंगन, शौचालय, चबूतरे आदि का कुल माप 0.095 एकड़ भूमि दिनांक 06.03.1945 को एक एग्रीमेंट के माध्यम से सुन्नी मजलिस औकाफ को काउंसिल में गवर्नर जनरल के मुख्य आयुक्त के द्वारा हस्तांतरित कर दी गई थी। ये एग्रीमेंट अतिरिक्त पुस्तक संख्या 1, खंड 95 में पृष्ठ 49 से 51 पर 278 नंबर से रजिस्टर्ड है। इस एग्रीमेंट से ये भी पता चलता है कि हुजरे (कमरे) और एक कुआं और एक स्नानघर वाली मस्जिद समझौते की तारीख पर पहले से ही अस्तित्व में थी।


यह भी ध्यान दें कि संदर्भ के तहत वक्फ संपत्ति दिल्ली प्रशासन के राजपत्र दिनांक 16.04.1970 में विधिवत अधिसूचित है। नोटिस में उल्लेख की गई संपत्ति 123 वक्फ संपत्तियों का हिस्सा है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिनांक 05.03.2014 को दिल्ली वक्फ बोर्ड के पक्ष में डिनोटिफाई किया गया था।


400 साल पुरानी है मस्जिद, कोई अतिक्रमण नहीं  

इतना ही नहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस जवाब में ये भी कहा कि मौजूदा मामले में जिस मस्जिद की बात हो रही है वह 400 साल से भी अधिक समय से अस्तित्व में है। इसलिए, यह कहना कि संदर्भित मस्जिद रेलवे भूमि पर अतिक्रमण है, तथ्यों और कानून के विरुद्ध है। न तो ये जमीन रेलवे की है और न ही संदर्भित मस्जिद अतिक्रमण है।


उपरोक्त सामग्री और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, आपको (रेलवे) सलाह दी जाती है कि संबंधित नोटिस को तत्काल प्रभाव से वापस लें/निरस्त करें और दिल्ली वक्फ बोर्ड को सूचित करें कि संबंधित नोटिस रद्द कर दिया गया है।


मस्जिदों के अलावा मलेरिया विभाग के ऑफिस को भी नोटिस

वहीं दिल्ली में दो बड़ी मस्जिदों को रेलवे के जरिए दिए गए नोटिस मामले में एक नई जानकारी यह भी सामने आई है कि तकिया बब्बर शाह मस्जिद और बंगाली मार्केट की मस्जिद को ही नोटिस नहीं दिया गया है, बल्कि तकिया बब्बर शाह मस्जिद के करीब मौजूद नगर निगम के मलेरिया विभाग के ऑफिस को भी रेलवे ने हटाने का नोटिस दिया है और 15 दिन में इस विभाग के ऑफिस को भी हटाने की बात कही है। उत्तर रेलवे ने इस मामले में ये तो माना है कि नोटिस उन्हीं का है लेकिन कोई बयान देने से मना कर दिया है।

News: तिरुपति में निर्माणधीन पुल का हिस्सा गिरा, 2 मजदूरों की मौत

 News Live Update: पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने प्रगति मैदान में बने नए इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर से अपनी सरकार के तीसरे कार्यकाल का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि तीसरे टर्म में भारत दुनिया की पहली तीन इकोनॉमी में गर्व के साथ खड़ा होगा. मेरे तीसरे कार्यकाल में आप लोग अपनी आंखों के सामने सपने पूरे होते देखेंगे. दूसरी खबर सदन के मानसून सत्र (Monsoon Session) से जुड़ी हुई है जहां आज विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ने अपने सभी सांसदों को काले कपड़े पहन कर आने को कहा है. कांग्रेस ने भी अपने सभी राज्यसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है और कहा है कि सुबह 11 बजे से सदन के स्थगन तक बिना रुके सदन में उपस्थित रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें. तीसरी खबर ED डायरेक्टर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जा चुकी है और सरकार की इस अपील पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. ED डायरेक्टर एसके मिश्रा का कार्यकाल 31 जुलाई को खत्म हो रहा है. हर बड़ा अपडेट यहां जानिए.



यूं तो उबासी लेना आम बात है और लोग आपको अक्सर उबासी लेते दिख जाएंगे लेकिन अगर कोई बार बार उबासी लेता दिखे तो हो सकता है कि उसके शरीर को कुछ परेशानियां हो सकती हैं.

 उबासी लेना थके हुए शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है. जब हम थक जाते हैं या फिर किसी चीज से ऊब होने लगती है तो हम उबासी लेने लगते हैं. आमतौर पर लोग जब थक जाते हैं तो उनके हार्मोन्स शरीर को अलर्ट करने के लिए उबासी को ट्रिगर करते हैं. ये एक सामान्य मेडिकल प्रोसेस है लेकिन अगर आपको बार बार उबासी आ रही है तो इसे नॉर्मल कहना गलत हो सकता है. दरअसल बार बार उबासी लेना या फिर दिन भर उबासी आना कई हेल्थ प्रॉबलम्स की तरह संकेत देता है. चलिए आज जानते हैं कि अगर आपको बार बार उबासी आ रही है तो ये किस तरह से शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है. 

 

पांच मिनट में तीन से ज्यादा उबासी है असामान्य   

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर कोई दिन में तीन चार बार उबासी लेता है तो वो सामान्य हो सकता है लेकिन अगर आपको पांच मिनट में तीन से ज्यादा बार उबासी आ रही है तो ये असामान्य प्रोसेस है. इसके पीछे का पहला संकेत ये है कि आपके शरीर को भरपूर नींद की जरूरत है जो पूरी नहीं हो रही है. ये स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है.कई बार कामकाज के प्रेशर, इन्सोम्निया, खर्राटे या थकान के चलते लोग पूरी औऱ बेहतर नींद नहीं ले पाते और उनको स्लीपिंग डिसऑर्डर हो जाता है. ऐसे में बार बार उबासी आती है. 

 

ज्यादा दवाई खाने से भी आ सकती है उबासी 

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आप लंबे समय से कुछ दवाइयों का सेवन कर रहे हैं तो इसकी वजह से भी आपको लगातार उबासी आ सकती हैं. दरअसल ऐसी दवाओं में एंटीसाइकोटिक्स या एंटीडिप्रेसेंट के गुण होते हैं जिनकी वजह उबासी ज्यादा आती है. कई बार ब्रेन के डिसऑर्डर के चलते भी बार बार उबासी आती हैं. दिमाग संबंधी बीमारियों जैसे पर्किंसंस, माइग्रेन, मल्टीपल स्केलेरोसिस के चलते भी व्यक्ति को बार बार उबासी आती है. अगर किसी को एंजाइटी या स्ट्रेस की दिक्कत है तो भी बार बार उबासी आती है. 

 

ऑक्सीजन की कमी के चलते भी आती है उबासी  

बार बार उबासी आना आपके दिल के खतरे में होने का संकेत हो सकता है. दरअसल जब शरीर को ऑक्सीजन की कमी होती है तो बार बार उबासी आती है. ऑक्सीजन की कमी के चलते दिल के दौरे का सबसे ज्यादा खतरा होता है. हालांकि ज्यादा उबासी आना दिल के दौरे का डायरेक्ट संकेत नहीं है लेकिन ये शरीर को ऑक्सीजन की कम सप्लाई का संकेत दे सकती है.

ज्योतिष में बुध ग्रह को एक तटस्थ ग्रह माना जाता है जो दूसरे ग्रहों की संगति के अनुसार ही फल देता है. यह ग्रह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है.

 Budh Grah Upay: बुध ग्रह को बुद्धि, संचार और निर्णय क्षमता का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को महत्वपूर्ण ग्रह का दर्जा प्राप्त है. 25 जुलाई को बुध ने सिंह राशि में गोचर किया है. सिंह रचनात्मकता का कारक है जबकि बुध को कौशल का ग्रह कहा जाता है. कुंडली में बुध ग्रह मजबूत हो तो लोग मृदुभाषी और मजाकिया स्वभाव के होते हैं. 

मजबूत बुध के प्रभाव से व्यक्ति व्यापार के क्षेत्र में खूब लाभ कमाता है. वहीं कमजोर बुध बुद्धि को भ्रमित करता है. कुंडली के द्वितीय भाव में नीच ग्रह के साथ बुध की स्थिति होने पर बुध कमजोर होता है. 


कमजोर बुध के लक्षण (Weak Mercury)




कुंडली के आठवें भाव में बुध हो तो जातकों को तमाम तरह की बीमारियां झेलनी पड़ती हैं. यहां बुध के साथ राहु भी मौजूद होता है तो ऐसे व्यक्तियों को कानूनी मुकदमें झेलने पड़ते हैं. बुध के साथ मंगल हो तो जातकों को व्यापार में नुकसान, आंखों की समस्या, नसों की समस्या झेलनी पड़ती है. नवम भाव में नीच ग्रह के साथ बुध की स्थिति हो तो जातकों को मानसिक बेचैनी उठानी पड़ती है.


ग्यारहवें भाव में बुध की स्थिति बुरे परिणाम देती है और व्यक्ति को मान- सम्मान जाने की हानि होती है. कुंडली में बुध कमजोर हो तो आर्थिक तंगी, मान सम्मान, यश में कमी, पढ़ाई में मन ना लगने की परेशानी, बुद्धि भ्रष्ट होने की समस्या, आदि परेशानियां झेलनी पड़ती हैं.


बुध मजबूत करने के ज्योतिषीय उपाय (Astro Remedies)


जिन लोगों की कुंडली (Kundali) में बुध कमजोर हो उन्हें भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए. बुधवार के दिन गणेश मंदिर में जाकर लड्डुओं का भोग लगाना शुभ रहता है. बुधवार का व्रत रखना अति उत्तम होता है. इस दिन गायों को हरी घास खिलानी चाहिए. पन्ना रत्न धारण करने से भी जातकों को विशेष लाभ मिलता है. किन्नरों को वस्त्र और हरी चूड़ियां दान करें.


बुध के कमजोर होने पर लोगों को तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए. बुधवार के दिन तुलसी के पत्ते का सेवन करना लाभकारी होता है. बुध के कमजोर होने पर शराब, अंडे और मांस का सेवन नहीं करना चाहिए. मंदिर में जाकर दूध और चावल का दान करें.




Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध व पिंडदान किए जाते हैं. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते है.जानें इस साल कब से शुरू हो रहा पितृपक्ष.

 Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध किए जाते हैं. हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध का विशेष महत्व होता है. इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनका पिंडदान, तर्पण या श्राद्ध कर्म करते हैं. मान्यता है कि पितृपक्ष में पितरों का पिंडदान या तर्पण करने से उन्हें मोक्ष प्रदान होता है. जानते हैं इस साल कब से शुरू होंगे पितृपक्ष और क्या है श्राद्ध की तिथियां.


पितृपक्ष का महत्व (Pitru Paksha 2023 Importance)

पितृपक्ष का समय पितरों को समर्पित होता है. इसमें पूरे 16 दिनों तक पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म होते हैं. पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं. मान्यता है कि पितृपक्ष में पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है. ऐसी मान्यता है कि, पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों के पूर्वजों की आत्माएं पितृलोक (स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के बीच) में निवास करती है. ऐसे समय में अगर आप पितरों का श्राद्ध करेंगे तो उन्हें मुक्ति मिलेगी और वे स्वर्ग चले जाएंगे.


कब शुरू हो रहा पितृपक्ष 2023 (Pitru Paksha 2023 Date)


इस साल पितृपक्ष की शुरुआत शुक्रवार 29 सितंबर 2023 से हो रही है और शनिवार 14 अक्टूबर 2023 को यह समाप्त हो जाएगा. पंचांग के अनुसार, हर साल पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह के पूर्णिमा से शुरू होती है और अश्विन माह की अमावस्या तिथि को समाप्त हो जाती है. इस तरह से पूरे 16 दिनों तक पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म किए जाते हैं.


पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथियां (Pitru Paksha 2023 Shradh Tithi)


पितृपक्ष के दौरान 16 दिनों कर पितरों के निमित्त श्राद्ध होते हैं. लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करते हैं. मान्यता है कि जिस तिथि में पूर्वज की मृत्यु हुई हो उसी तिथि में श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करना चाहिए. वहीं ऐसे पितर जिनके मृत्यु की तिथि पता न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या यानी अश्विन माह की अमावस्या तिथि पर किया जाता है. पितृपक्ष में कुश, अक्षत, जौ और काला तिल लेकर प्रार्थना और क्षमायाचना करते हुए तर्पण किया जाता है.


  पितृपक्ष की तिथियां 2023                                 

तिथि (Date) दिन (Day) श्राद्ध (Shradh)

29 सितबंर 2023 शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध/ प्रतिपदा श्राद्ध

30 सितबंर 2023 शनिवार द्वितीया श्राद्ध

01 अक्टूबर 2023 रविवार तृतीया श्राद्ध

02 अक्टूबर 2023 सोमवार चतुर्थी श्राद्ध

03 अक्टूबर 2023 मंगलवार पंचमी श्राद्ध

04 अक्टूबर 2023 बुधवार षष्ठी श्राद्ध

05 अक्टूबर 2023 गुरुवार सप्तमी श्राद्ध

06 अक्टूबर 2023 शुक्रवार अष्टमी श्राद्ध

07 अक्टूबर 2023 शनिवार नवमी श्राद्ध

08 अक्टूबर 2023 रविवार दशमी श्राद्ध

09 अक्टूबर 2023 सोमवार एकादशी श्राद्ध

10 अक्टूबर 2023 मंगलवार मघा श्राद्ध

11 अक्टूबर 2023 बुधवार द्वादशी श्राद्ध

12 अक्टूबर 2023 गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध

13 अक्टूबर 2023 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध

14 अक्टूबर 2023 शनिवार सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध

Puja Niyam: हिंदू धर्म में नियमित रूप से देवी-देवताओं की पूजा का महत्व है. लेकिन गलत समय पर किए पूजा से पूजा अधूरी मानी जाती है और इसका फल नहीं मिलता. इसलिए जान लीजिए क्या है पूजा-पाठ का सही समय.

 Puja Niyam: घर हो या मंदिर हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की प्रतिदिन पूजा की जाती है. पूजा-पाठ करने से ना सिर्फ मन को शांति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में शुभता का आगमन होता है और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है.


लेकिन पूजा का पुण्य फल आपको तभी प्राप्त होगा, जब आप सही समय और नियम से पूजा करेंगे. गलत समय पर किए पूजा से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं और ऐसे में पूजा अधूरी मानी जाती है. शास्त्रों में पूजा-पाठ से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है. इसलिए जान लीजिए क्या है पूजा का सही समय.


सही समय पर करें पूजा


आप अपने घर पर नियमित रूप से पूजा करते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना भी करते हैं. लेकिन भगवान आपकी पूजा को तभी स्वाकीर करेंगे जब पूजा सही समय पर की गई हो. इसलिए हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के लिए समय निर्धारित किए गए हैं.


इस समय न करें पूजा


शास्त्रों के अनुसार, दोपहर में पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए. यह समय पूजा के लिए निषेध माना जाता है. इस समय की गई पूजा भगवान स्वीकर नहीं करते हैं. इसलिए दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक पूजा नहीं करनी चाहिए. इस समय की नहीं पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है.

वहीं अगर आपने आरती कर ली है तो इसके बाद पूजा की विधि न करें. मान्यता है कि आरती पूजा के सबसे आखिर में की जाती है और इसके बाद देवी-देवता सो जाते हैं.

महिलाओं को ऐसे समय पर भी कभी पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए, जब माहवारी चल रही हो. इस दौरान न ही मंदिर जाकर भगवान के दर्शन-पूजन करें और न ही घर पर पूजा-पाठ करें. साथ ही माहवारी के दौरान देवी-देवताओं की मूर्ति, पवित्र पेड़-पौधे और पूजा सामग्री को छूना भी नहीं चाहिए.

ऐसे समय में भी पूजा न करें जब घर पर सूतक और पातक लगा हो. यानी जब घर पर किसी नवजात का जन्म हुआ हो या किसी की मृत्यु हुई हो. इस समय पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है.

इसके साथ ही ग्रहण आदि में भी पूजा-पाठ न करें. लेकिन इस दौरान आप ईश्वर का ध्यान और मंत्रों का जाप कर सकते हैं.

क्या है पूजा का सही समय


ज्योतिष के अनुसार, पूरे दिन में आप 5 बार पूजा कर सकते हैं. इसके लिए शास्त्रों में समय भी निर्धारित किए गए हैं. इस समय का पालन करते हुए आप दिन में एक बार, दो बार या अपनी श्रद्धानुसार पांच बार भी पूजा कर सकते हैं.


पहली पूजा का समय- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:30 से 5:00 बजे तक

दूसरी पूजा- सुबह 09 बजे तक

मध्याह्न पूजा- दोपहर 12 बजे तक

संध्या पूजा- शाम 04:30 से 6:00 बजे तक

शयन पूजा - रात 9:00 बजे तक

Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani: रॉकी और रानी की प्रेम कहानी 28 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म पहले दिन इतना कलेक्शन कर सकती है.

 Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani BO Prediction: आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की मोस्ट अवेटिड फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी रिलीज के लिए तैयार है. ये फिल्म 28 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. फिल्म से फैंस को काफी उम्मीदें हैं और ट्रेलरस प्रोमो देखने के बाद लोगों को लग रहा है कि ये फिल्म लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी. फिल्म में आलिया और रणवीर के साथ धर्मेंद्र, शबाना आजमी और जया बच्चन अहम किरदार निभाते नजर आने वाले हैं. रिपोर्ट्स की माने तो फिल्म पहले दिन अच्छा कलेक्शन कर सकती है.


प्रोड्यूसर और फिल्म एक्सपर्ट गिरीश जौहर का कहना है कि ओपनिंग डे पर फिल्म के अच्छे कलेक्शन की उम्मीद की जा रही है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गिरीश जौहर का कहना है कि पठान के बाद ये बड़ी फिल्म है. इस साल जरा हटके जरा बचके और सत्यप्रेम की कथा रिलीज हुई है जो मिड बजट की फिल्म है.


पहले दिन करेगी इतना कलेक्शन

गिरीश जौहर ने आगे कहा- रॉकी और रानी की प्रेम कहानी पहले दिन 8-10 करोड़ का बिजनेस कर सकती है. हालांकि ये कलेक्शन वीकेंड तक बढ़ जाएगा. अगर ऑडियन्स को फिल्म पसंद आई तो ये पहले दिन ही डबल डिजीट का कलेक्शन कर सकती है. अगर ऐसा ही फिल्म मेंटेन कर पाई तो दूसरे दिन ये कलेक्शन 12 करोड़ तक बढ़ सकता है और वीकेंड तक ये 35-40 करोड़ हो सकता है. अगर कलेक्शन इससे आगे जाता है तो ये बहुत शानदार होगा और अगर फिल्म इससे कम कलेक्शन करती है तो ये ऑडियन्स की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएगी.


रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की बात करें तो इस फिल्म को करण जौहर ने डायरेक्ट किया है. करण जौहर ने इस फिल्म से लंबे समय के बाद डायरेक्शन में कदम रखा है. करण ने आखिरी बार ऐ दिल है मुश्किल फिल्म को डायरेक्ट किया था.

Shiv Dhyan Stotra भगवान शिव महज जलाभिषेक से प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी कृपा से भक्तों का कल्याण होता है। अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो सावन महीने में प्रतिदिन भगवान शिव का जल या गंगाजल से अभिषेक करें। इस समय शिव ध्यान स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। इस स्तोत्र के पाठ से साधक के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।

 Shiv Dhyan Stotra: भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय है। इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का आगमन पृथ्वी पर होता है। इस शुभ अवसर पर देवी-देवता, भूत, प्रेत, गन्धर्व, अप्सरा, स्वर्ग नरेश इंद्र, वायु देव, वरुण देव, ब्रह्मा जी, मां लक्ष्मी और शारदे संग सभी ऋषि-मुनि भगवान शिव और माता पार्वती का अभिवादन करते हैं। प्रकृति जल बरसाकर भगवान शिव का अभिषेक करती है। महादेव के भक्त सावन के महीने में शिवमय हो जाते हैं। धूमधाम से बाबा की पूजा-उपासना करते हैं। कुल मिलाकर कहें तो तीनों लोकों में भगवान शिव के जयकारे गूंजते हैं। भगवान शिव बेहद दयालु और कृपालु हैं। इसलिए उन्हें भोला भी कहा जाता है। भगवान शिव महज जलाभिषेक से प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी कृपा से भक्तों का कल्याण होता है। अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन महीने में प्रतिदिन भगवान शिव का जल या गंगाजल से अभिषेक करें। इस समय 'शिव ध्यान स्तोत्र' का पाठ अवश्य करें। इस स्तोत्र के पाठ से साधक के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। आइए, 'शिव ध्यान स्तोत्र' का पाठ करें-


शिव ध्यान स्तोत्रम्

स्फटिकप्रतिभटकान्त विरचितकलिमलशान्त ।

शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


गंगाधरपिंगलजट हृतशरणागतसङ्कट ।

शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


बालसुधाकरशेखर भाललसद्वैश्वानर ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


पद्मदलायतलोचन दृढभवबन्धनमोचन ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


मन्दमधुरहासवदन निर्जितदुर्लसितमदन ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


सनकादिकवन्द्यचरण दुस्तरभवसिन्धुतरण ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


लालितबालगजानन कलितमहापितृकानन ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


सच्चिद्घनसुखसार लीलापीतमहागर ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


गिरिजाश्लिष्टार्धतनो कल्पितगिरिराजधनो ।


शिव शंकर शिव शंकर जय कैलासपते ॥


शिवाष्टकम् स्तोत्र

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम् ।


भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकालकालं गणेशाधिपालम् ।


जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम् ।


अनादिह्यपारं महामोहहारं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


वटाधोनिवासं महाट्टाट्टहासं महापापनाशं सदासुप्रकाशम् ।


गिरीशं गणेशं महेशं सुरेशं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


गिरिन्द्रात्मजासंग्रहीतार्धदेहं गिरौ संस्थितं सर्वदा सन्नगेहम् ।

परब्रह्मब्रह्मादिभिर्वन्ध्यमानं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


कपालं त्रिशूलं कराभ्यां दधानं पदाम्भोजनम्राय कामं ददानम् ।


बलीवर्दयानं सुराणां प्रधानं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


शरच्चन्द्रगात्रं गुणानन्द पात्रं त्रिनेत्रं पवित्रं धनेशस्य मित्रम् ।


अपर्णाकलत्रं चरित्रं विचित्रं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


हरं सर्पहारं चिता भूविहारं भवं वेदसारं सदा निर्विकारम् ।


श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥


स्तवं यः प्रभाते नरः शूलपाणे पठेत् सर्वदा भर्गभावानुरक्तः ।


स पुत्रं धनं धान्यमित्रं कलत्रं विचित्रं समासाद्य मोक्षं प्रयाति ॥


डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'

Netweb Technologies IPO Listing Today अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो ये खबर आपके लिए बहुत अहम है। आज शेयर बाजार में Netweb Technologies का आईपीओ लिस्ट होने जा रहा है। कई एक्सपर्ट के मुताबिक इस आईपीओ से निवेशकों को बंपर मुनाफा हो सकता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

 Share Market: आज शेयर बाजार में इस Netweb Technologies का आईपीओ लिस्ट होने जा रहा है। आज निवेशकों के लिए काफी अहम दिन है। कई एक्सपर्ट के मुताबिक नेटवेब टेक्नोलॉजीज का आईपीओ की लिस्टिंग के बाद निवेशकों को शानदार मुनाफा हो सकता है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के मुताबिक आज बाजार में नेट वेब टेक्नोलॉजीज का आईपीओ लिस्ट होगा। आपको बता दें कि कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की तरफ से शानदार प्रक्रिया मिली है। आईपीओ के अंतिम दिन तक इश्यू 90.36 गुना सब्सक्राइब हो गया था।


नेटवेब टेक्नोलॉजीज के शेयर गुरुवार यानी कि आज बीएसई और एनएसई (National Stock Exchange) पर एक विशेष प्री-ओपन सत्र (SPOS) में लिस्ट होंगे। कंपनी के शेयर 'बी' ग्रुप्स में ट्रेड करेंगे। 


कितना रहेगी एक शेयर की कीमत

कंपनी के आईपीओ पर निवेशकों की शानदार प्रक्रिया के बाद शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आज बाजार में कंपनी के शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है। कंपनी के शेयर 900 रुपये प्रति शेयर पर खुल सकते हैं। अगर बाजार में मंदी जैसी स्थिति बनी रही तो नेटवेब टेक्नोलॉजीज का शेयर 850-870 रुपये प्रति शेयर पर भी खुल सकते हैं।


नेटवेब टेक्नोलॉजीज के आईपीओ में सबसे ज्यादा दिलचस्पी क्वॉलीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने दिखाई है। इनकी तरफ से 220.69 गुना आईपीओ सब्सक्राइब हुआ है।


नेटवेब टेक्नोलॉजीज का आईपीओ

कंपनी का आईपीओ निवेशकों के लिए 17 जुलाई से 19 जुलाई की बीच खुला था। कंपनी ने इस आईपीओ के जरिये 631 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। कंपनी ने इसके लिए 206 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू जारी किया था।


आईपीओ का उद्देश्य

कंपनी इस आईपीओ के जरिये फ्रेश इश्यू में से 32.3 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर करेगा। वहीं, 128.02 करोड़ रुपये का उपयोग लॉन्ग टर्म वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगा। इसके साथ ही कंपनी 22.5 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने के लिए खर्च करेगा।



BSP बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती का प्रत‍िशोध भरा अंदाज सात द‍िन के अंदर ही बदल गया। सात द‍िन पूर्व द‍िल्‍ली में बैठक के दौरान बसपा सुप्रीमो ने कहा था क‍ि हम क‍िसी भी गठबंधन के साथ नहीं हैंं। इतना ही नहीं मायावती ने यहां तक बोला था क‍ि इनकी मजबूत नहीं मजबूर सरकार बने। जबक‍ि अब मायावती ने सरकार में शाम‍िल होने की बात कही है।

 लोकसभा चुनाव 2024 से पहले चार राज्‍यों में होने वाले व‍िधानसभा चुनाव को लेकर सियासी रण में INDIA और NDA एक दूसरे से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वहीं बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती के गठबंधन को लेकर मात्र सात द‍िनों के बाद ही बदलने लगे हैं। इसे पूर्व 19 जुलाई को बैठक के दौरान बसपा प्रमुख ने कहा था क‍ि वह दोनों गठबंधनों से अलग हैं।


अब लखनऊ में 25 जुलाई को हुई बैठक में मायावती ने कहा क‍ि कई राज्यों में बैलेंस ऑफ पावर बनने के बावजूद जातिवादी तत्व द्वारा साम, दाम, दंड, भेद आदि अनेकों घिनौने हथकंडे अपना कर बीएसपी के विधायकों को तोड़ लेते हैं। जिससे जनता के साथ विश्वासघात करके घोर स्वार्थी जनविरोधी तत्व सत्ता पर काबिज हो जाते हैं। आगे विधानसभा आमचुनाव के बाद बैलेंस ऑफ पावर बनने पर लोगों की चाहत के हिसाब से, सरकार में शामिल होने पर विचार संभव है


मायावती ने राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले व‍िधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यकों व मुस्लिम समाज का भला तभी हो सकता है जब मजबूत व अहंकारी सरकार नहीं बल्कि गठबंधन की मजबूर सरकार होगी। इस समाज के लोगों पर अत्याचार की खबरें लगातार आती हैं। यह दुखद है। इसका समाधान तभी होगा जब सरकार में उनके हितैषी प्रतिनिधि होंगे। मायावती ने सरकार से बाढ़ पीड़ितों की भी मदद करने की अपील की। कहा, पार्टी के लोगों को जो भी संभव हो मदद करनी चाहिए।


19 जुलाई को जारी क‍िये गए बयान में मायावती ने कहा था क‍ि कांग्रेस पार्टी अपने जैसी जातिवादी और पूंजीवादी सोच रखने वाली पार्टी के साथ गठबंधन कर फिर से सत्ता में आने की सोच रख रही है साथ ही NDA फिर से सत्ता में आने का दावा ठोक रही है लेकिन इनकी कार्यशैली यही बताती है कि इनकी नीति और सोच लगभग एक जैसी ही रही है। यही कारण है कि BSP ने इनसे दूरी बनाई है।


मायावती ने कहा था क‍ि 'गठबंधन की मजबूत नहीं, मजबूर सरकार बने'

2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद अपने 19 प्रतिशत वोटों के जनाधार को बचाने में सफल रहीं मायावती ने अपनी इस ताकत को दिखाने का भी संकेत प्रतिशोध के अंदाज में दिया था। बसपा मुखिया (Mayawati in Lok Sabha Election 2024) ने कमजोर वर्गों के लोगों का आहृवान किया है कि आपसी भाईचारा के आधार पर व अपना अकेले ही मजबूत गठबंधन बनाकर बसपा को मजबूती देनी है, ताकि फिर यहां कोई भी गठबंधन केंद्र व राज्यों की सत्ता में पूरी मजबूती के साथ न आ सके। इनकी मजबूत नहीं, मजबूर सरकार बने। ताकि किसी गठबंधन को पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में बसपा की अहमियत कायम रहे।


क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने ओर क‍िया था इशारा

मायावती 19 जुलाई को हुई बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट कर दिया था कि अब वह राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी किसी बड़े दल के साथ हाथ मिलाना नहीं चाहतीं, अकेले चुनाव लड़ेंगी। पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प खुला है बशर्ते उनका एनडीए या इंडिया गठबंधन से कोई संबंध न हो।

UGC CSIR NET Result 2023 दोनों ही परीक्षाओं सफल घोषित उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि एनटीए द्वारा नेट ई-सर्टिफिकेट और जेआरएफ अवार्ड लेटर अलग से जारी किए जाएंगे। एजेंसी ने मंगलवार को जारी यूजीसी नेट रिजल्ट नोटिस में जानकारी दी कि कैंडिडेट्स के ई-सर्टिफिकेट और जेआरएफ अवार्ड लेटर जल्द ही जारी किए जाएंगे। दोनों परीक्षाओं के नतीजे एनटीए ने मंगलवार 25 जुलाई को घोषित किए।

 UGC, CSIR NET Result 2023: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC NET) जून 2023 के परिणाम और वैज्ञानिक तथा अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (CSIR NET) के नतीजों की घोषणा एक ही दिन मंगलवार, 25 जुलाई 2023 को कर दी। इसके साथ ही, एजेंसी ने दोनों ही परीक्षाओं में सम्मिलित हुए लाखों उम्मीदवारों के नतीजों को देखने और स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के लिए लिंक को सम्बन्धित परीक्षा पोर्टल, ugcnet.nta.nic.in और csirnet.nta.nic.in पर एक्टिव कर दिया है। उम्मीदवार इन वेबसाइट पर असिस्टेंट प्रोफेसर और जेआरएफ के लिए परिणाम व स्कोर कार्ड देख सकते हैं।


UGC, CSIR NET Result 2023: ई-सर्टिफिकेट और JRF अवार्ड लेटर NTA जल्द करेगा जारी

हालांकि, दोनों ही परीक्षाओं सफल घोषित उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि एनटीए द्वारा नेट ई-सर्टिफिकेट और जेआरएफ अवार्ड लेटर अलग से जारी किए जाएंगे। एजेंसी ने मंगलवार को जारी यूजीसी नेट रिजल्ट नोटिस में जानकारी दी कि कैंडिडेट्स के ई-सर्टिफिकेट और जेआरएफ अवार्ड लेटर जल्द ही जारी किए जाएंगे। हालांकि, एनटीए ने किसी निश्चित तारीख की जानकारी साझा नहीं की है। ऐसे में उम्मीदवारों को एनटीए के ई-सर्टिफिकेट पोर्टल, ecertificate.nta.ac.in पर समय-समय पर विजिट करते रहना चाहिए।


UGC, CSIR NET Result 2023: ई-सर्टिफिकेट और JRF अवार्ड लेटर ऐसे करें डाउनलोड

UGC NET और CSIR NET में सफल घोषित उम्मीदवार अपना ई-सर्टिफिकेट और JRF अवार्ड लेटर एनटीए के सर्टिफिकेट पोर्टल से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को पोर्टल पर विजिट करने के बाद होम पेज पर ही दिए डाउनलोड सेक्शन में अपनी सम्बन्धित परीक्षा का चुनाव करना होगा और फिर अपना अप्लीकेशन नंबर, डेट ऑफ बर्थ और एग्जाम सेशन की डिटेल भरकर सबमिट करनी होगी। इसके बाद उम्मीदवार अपना UGC/CSIR NET ई-सर्टिफिकेट और JRF अवार्ड लेटर स्क्रीन पर देख सकेंगे, जिसका प्रिंट लेने के बाद सॉफ्ट कॉपी भी उम्मीदवारों को सेव कर लेनी चाहिए।



Aaj Ka Rashifal 27 July Today Horoscope आज यानि 27 जुलाई का दिन सभी राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आज कुछ राशियां हैं व्यवसाय आदि में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। वही कुछ राशियों को इस क्षेत्र में सफलता भी प्राप्त होगी और इस क्षेत्र में आय के नए स्रोत बनेंगे। आइए पंडित हर्षित शर्मा जी से जानते हैं कैसा रहेगा गुरुवार का दिन?

 Aaj Ka Rashifal 27 July 2023: ज्योतिष शास्त्र में राशिफल को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। बता दें कि राशिफल का आंकलन दैनिक राशिफल के अनुसार, आज यानी 27 जुलाई 2023, गुरुवार का दिन कुछ राशियों के लिए तनावपूर्ण रहने वाला है। आज कुछ राशियों को व्यापार-व्यवसाय में घाटा मिल सकता है। वहीं कुछ राशियों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पंचांग के अनुसार, आज श्रावन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि दोपहर 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और इसके बाद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। आइए पंडित हर्षित शर्मा जी से जानते हैं, सभी राशियों के लिए गुरुवार का दिन, कैसा रहने वाला है?



मेष दैनिक राशिफल (Aries Today Horoscope)


आज का दिन आपका उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। स्वास्थ्य को लेकर कुछ परेशान रह सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विरोधी वर्ग सक्रिय होंगे। परिवार में आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। पत्नी से वाद-विवाद हो सकता है।


वृषभ दैनिक राशिफल (Taurus Today Horoscope)


आज का दिन आपका सामान्य रहेगा। सोचे हुए कार्य पूर्ण होंगे। स्वास्थ्य में कुछ उतार-चढ़ाव बना रहेगा। परिवार में मांगलिक कार्य के योग बनेंगे। व्यापार-व्यवसाय में आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। किसी बात को लेकर परिवार में मतभेद की स्थिति निर्मित होगी।


मिथुन दैनिक राशिफल (Gemini Today Horoscope)


आज का दिन आपका अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य ठीक रहेगा और व्यापार-व्यवसाय में कोई नया कार्य शुरू करेंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। परिवार समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। परिवार में पैतृक संपत्ति मिलने से मन प्रसन्न रहेगा।


कर्क दैनिक राशिफल (Cancer Today Horoscope)


आज का दिन बहुत अच्छा रहने वाला है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। पत्नी से चल रहे मतभेद दूर होंगे। व्यापार-व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। किसी विशेष व्यक्ति के संपर्क से कोई बड़ा कार्य आपको आज मिल सकता है। परिवार में मान सम्मान बढ़ेगा। कोई सुखद समाचार परिवार में प्राप्त होगा।


सिंह दैनिक राशिफल (Leo Today Horoscope)


आज के दिन आप किसी वाद-विवाद में फंस सकते हैं। आपके किसी विशेष कार्य में रूकावट आ सकती है। स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। किसी लंबी यात्रा आदि पर जाने का योग बनेगा। वाहन आदि के चलाने में सावधानी बरतें। पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में मतभेद बढ़ सकता है। व्यापार-व्यवसाय में हानी का सामना करना पड़ सकती है।


कन्या दैनिक राशिफल (Virgo Today Horoscope)


आज के दिन आप किसी मानसिक तनाव से गुजर सकते हैं। इन्हीं बातों को लेकर अपने मित्रों या रिश्तेदारों से वाद-विवाद भी हो सकता है। व्यापार-व्यवसाय में आज आपको हानी हो सकती है। आर्थिक स्थिति में गिरावट महसूस होगी। परिवार में अपनों से मनमुटाव की स्थिति बनेगी। किसी अपने का दुखद समाचार आज प्राप्त होगा।


तुला दैनिक राशिफल (Libra Today Horoscope)


आज के दिन आप अपने स्वास्थ्य के कारण कुछ परेशान रह सकते हैं। किसी लंबी यात्रा पर जाने का योग बनेगा। किसी कार्य विशेष के लिए आज आपको अपने विरोधियों के सामने झुकना पड़ सकता है। व्यापार-व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। कोई नया कार्य शुरू कर सकते हैं। परिवार में अपनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।


वृश्चिक दैनिक राशिफल (Scorpio Today Horoscope)


आज के दिन आपको अपनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में गिरावट महसूस करेंगे। व्यापार-व्यवसाय में अपने साथियों से धोखा उठाना पड़ सकता है। कोई नया कार्य शुरू न करें। किसी अपरिचित व्यक्ति को उधार ना दें, नहीं तो हानि उठानी पड़ सकती है। परिवार में अपनों से मतभेद बढ़ेंगे। पत्नी से विवाद हो सकता है।


धनु दैनिक राशिफल ( Sagittarius Today Horoscope)


आज के दिन आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। आप किसी षड्यंत्र का शिकार हो सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में हानी हो सकती है। कोई नया कार्य यदि शुरू करना चाहते हैं तो यह समय उपयुक्त नहीं है। परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद का माहौल बनेगा। आप अपने मान सम्मान में गिरावट महसूस करेंगे। वाहन आदि को चलाने में सतर्कता रखें। दुर्घटना हो सकती है।


मकर दैनिक राशिफल (Capricorn Today Horoscope)

आज का दिन आपका सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य में लाभ महसूस करेंगे। किसी अपने का दुखद समाचार प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में हानि उठाना पड़ सकती है। कोई नया वाहन आदि आज ना लें नया कार्य शुरू ना करें। परिवार में मतभेद की स्थिति पर वाद-विवाद से दूर रहें। वाणी पर संयम रखें।


कुंभ दैनिक राशिफल (Aquarius Today Horoscope)

आज का दिन आपका अच्छा रहने वाला है। सोचे हुए कार्य पूर्ण होंगे। किसी विशेष व्यक्ति के मिलने से व्यापार क्षेत्र में नया कार्य मिल सकता है। जिससे लाभ होगा। परिवार में मांगलिक कार्य का योग बनेगा। परिवार में सभी आपका सम्मान करेंगे। आप अपने परिवार के साथ किसी लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। कोई नया मकान वाहन खरीद सकते हैं।


मीन दैनिक राशिफल (Pisces Today Horoscope)

आज का दिन आपका कुछ समस्याओं से भरा रहेगा। स्वास्थ्य में गिरावट महसूस करेंगे। कोई नया कार्य जो शुरू करना चाह रहे हैं, उसमें अवरोध होगा। किसी अपने का दुखद समाचार प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में हानी उठाना पड़ सकता है। परिवार में पत्नी का विवाद हो सकता है। वाणी पर संयम रखें और वाद-विवाद से दूर रहें।


डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/जयोतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देंश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिकत, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेंगी।

When to Seek Treatment for Brain-Related Symptoms: Recognizing Signs

 The rise in brain-related conditions has become a pressing issue in recent years. Moreover, research has shown an alarming increase in people suffering from these conditions. However, there is hope, as the medical field has made significant advancements in recent years in the treatment of brain-related ailments. Researchers have developed new medications and therapies that can slow the progression of these diseases and improve the quality of life for patients. Now, let us understand some effective Neurological Treatments for Brain Disorders.


Types of Brain-Related Conditions

Some common brain conditions include:


Epilepsy: a neurological condition that causes convulsions & seizures.

Guillain-Barré syndrome: a condition in which the immune system starts attacking the Central Nervous System

Traumatic brain injury (TBI): caused due to a blow or jolt to the head

Brain tumours: tumours are abnormal growth in the brain that can cause a variety of symptoms and complications

Signs and Symptoms of Brain Conditions

There are some common signs and symptoms that may indicate the presence of Brain conditions:


Change in cognitive function. For instance: Difficulty with Memory, attention and concentration, as well as changes in personality and behaviour.

Physical symptoms like headaches, dizziness, balance problems, or seizures. Note: Patients can experience weakness or paralysis on one side of the body; this can indicate damage to the brain’s motor pathways.

Mood and emotional changes like depression, anxiety, irritability, or mood swings. Changes in brain chemistry or damage to certain brain areas can cause this.

Sensory changes like changes in vision, hearing, or sensation. This might be due to the deterioration of the brain’s sensory pathways.


Types of Effective Neurological Treatments for Brain Conditions

Neurological care involves the ongoing management of neurological conditions, including medications, monitoring, and support services. Read a few important types of Common Neurological Treatments below:


Brain therapy uses various techniques to stimulate the brain and improve brain function. These techniques can comprise transcranial magnetic stimulation (TMS), which stimulates brain nerve fibres using magnetic properties. Also, electroconvulsive therapy (ECT) uses electrical currents to stimulate the brain and improve mood.


Neurorehabilitation is a treatment that aims to help patients recover from neurological injuries or diseases. This can include physical therapy, occupational therapy, speech therapy and other forms of rehabilitation designed to help patients regain function and improve their quality of life.


Neural interventions treat neurological conditions by directly affecting the nerves or neural pathways in the body. These can include nerve blocks, which are injections of local anaesthetics that can aid in relieving pain.


Importance of Seeking Early Treatment for Brain Conditions

Here listed are some of the reasons why it is important to seek early Neurological treatment for brain conditions:


Preventing disease progression: Early treatment can help slow or prevent disease progression, improving long-term outcomes.

Managing symptoms: Early treatment can help manage these symptoms and improve quality of life.

Improving treatment effectiveness: certain medications may be more effective when started early.

Reducing the risk of complications: Early management of symptoms can help reduce the risk of these complications.

Enhancing overall health: Early care can help individuals manage their condition and maintain their physical and mental well-being.

Better access to resources: Seeking early treatment can help individuals and their families access resources and support, such as rehabilitation services, counselling, and financial assistance.


Recent Medical Advancements in Brain-Related Conditions

Some latest and notable medical advancements in Brain Conditions are:


Gene therapy is a promising new approach to treating brain-related conditions. It involves delivering genes directly into the brain to help repair or replace damaged or malfunctioning genes.

Deep brain stimulation is a surgical technique that involves implanting electrodes into particular brain regions.

Immunotherapy is a new approach to treating brain tumours. It involves using the body’s immune system to target and destroy cancer cells.

Artificial intelligence is now being used to create new & latest tools for diagnosing and treating brain-related conditions.


Frequently Asked Questions

Q. What are some common brain conditions and their symptoms?

A. Few Brain conditions and their symptoms are


Alzheimer’s disease: a degenerative condition of the brain that harms memory, cognition, and behaviour. Symptoms include mild memory loss with progress to severe memory impairment, confusion, mood swings, and difficulty with basic tasks such as eating, dressing, and bathing.

Parkinson’s disease: a neurodegenerative condition that impairs movement. Symptoms include tremors, stiffness, slow movement and difficulty with balance and coordination. Note: This disease can cause mood disorders.

A Stroke happens when the brain’s blood supply is disrupted, resulting in brain impairment. Symptoms include sudden numbness or weakness on one side of the body, difficulty speaking or understanding speech, severe headache, and loss of vision in one or both eyes.

Q. What is neurological treatment, and how does it help with brain conditions?

A. Neurological treatment refers to the medical management of brain-related conditions that affect the central and peripheral nervous systems. Neurological treatment aims to manage and improve symptoms, prevent disease progression, and enhance the quality of life for individuals with Brain-related conditions. By using a combination of medications, therapies and interventions, individuals can experience significant improvements in symptoms and functional independence.


Q, How do I know if I have a brain condition that requires neurological treatment?

A. Here are some common ways to detect a brain condition that requires neurological treatment:


Sudden or gradual changes in vision. This can include blurry vision, double vision and complete sight or vision loss.

Difficulty with speech, including slurring or stuttering.

Memory loss interferes with daily activities, such as forgetting important events or appointments.

Seizures can indicate a neurological condition such as epilepsy or a brain tumour.


Q. What are the risks and benefits of neurological treatment for brain conditions?

A. Neurological treatment can help improve symptoms associated with brain-related conditions, such as tremors, seizures, and cognitive impairments. This can help individuals to regain functional independence, improve their ability to perform daily activities, and enhance their overall quality of life.


But, there will always be risk factors at play. Medications can have side effects such as dizziness, nausea, and fatigue. At extremes, some neurological treatments may not be effective for all individuals, particularly those with advanced or progressive conditions.


Q. What should I expect during neurological treatment for a brain condition?

A. Here are some general expectations for individuals undergoing neurological treatment:


Medical evaluation: Before treatment begins, individuals will typically undergo a medical evaluation, which may include imaging studies such as MRI or CT scans

Treatment planning: A treatment plan will be developed according to the medical evaluation results.

Medications: If medications are part of the treatment plan, individuals may need to take them regularly.

Therapy: Neurological treatment may involve therapy depending on the specific condition and individual needs.

Surgery: If surgery is part of the treatment plan, individuals must prepare for the procedure and recovery.

Follow-up care: After treatment, individuals must continue follow-up care with their healthcare provider.

Rehabilitation: Depending on the severity of the condition and treatment, individuals might need rehabilitation to regain function and independence.

Tuesday, July 25, 2023

Diarrhoea In Kids मानसून के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है लेकिन यह मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है। बारिश के मौसम में बच्चों में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। इस वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिससे बच्चे काफी कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में आपको बच्चों की डाइट पर खास ध्यान देना चाहिए।

 Diarrhoea In Kids: आजकल डायरिया बहुत की आम समस्या है, लेकिन डायरिया होने से बच्चे की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इस बीमारी से बच्चे काफी कमजोर हो जाते हैं। मानसून सीजन में डायरिया की समस्या और बढ़ जाती है।


डायरिया आमतौर पर संक्रमण की वजह से होता है। बारिश के मौसम में बैक्टीरिया बहुत आसानी से और तेजी से बढ़ते हैं। इसलिए इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। डायरिया के कारण बच्‍चों में डिहाइड्रेशन होने की समस्‍या बढ़ जाती है। आइए जानते हैं, इस समस्या से बचने के लिए क्या करें।



बच्चों को मानसून सीजन में डायरिया से इस तरह बचाएं

बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए उन्हें अच्छे से हाथ धोना सिखाएं।

खाने से पहले और बाथरुम जाने के बाद हाथ धोने की आदत बच्चों में डालें।

बच्चों को स्ट्रीट फूड खाने को न दें। उन्हें घर में ही ताजा खाना बनाकर खिलाएं।

बच्चों को जमे और गंदे पानी से न खेलने दें। इससे डेंगू होने का खतरा रहता है।

बच्चों को पानी उबालकर पिलाएं या वॉटर प्यूरिफायर का पानी पीने के लिए दें।

बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए घर में स्वच्छता बनाए रखें। खासकर बाथरूम और किचन की अच्छे से सफाई करें।

घर को ह्यूमिडिटी से बचाने के लिए दिन में खिड़कियां खोलकर रखें, जब भी धूप निकले, तो घर के दरवाजे और खिड़कियां खोल दें।


डायरिया से बचाने के लिए बच्चों की डाइट में शामिल करें ये चीजें

मानसून के मौसम में बच्चों की डाइट सीजनल फ्रूट्स, सब्जियां, नट्स, सीड्स आदि शामिल करें।

बच्चों के खाने में दही जरूर शामिल करें। इससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।

बारिश के मौसम में घर का बना गरम और ताजा खाना खाएं। बाहर का जंक फूड का सेवन कम कर दें।

खाने में पाचन को दुरुस्त करने वाली चीजें जैसे जीरा, हींग, अदरक और धनिया का अधिक इस्तेमाल करें।

घर पर डायरिया का इलाज कैसे करें

बच्चा अगर डायरिया से पीड़ित है तो उसे लिक्विड डाइट दें, साथ ही पानी पिलाते रहें, क्योंकि इस दौरान शरीर मे पानी की कमी हो जाती है।

बच्चों को ओआरएस का घोल दे सकते हैं।

बच्चों को डायरिया होने पर केला, चावल, दही और सेब खिलाएं।

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि वह यूक्रेन को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सैन्य सहायता भेज रहा है। इस सैन्य सहायता में एडवांस वायु रक्षा प्रणालियों तोपखाने और बख्तरबंद वाहनों के लिए विभिन्न प्रकार के युद्ध सामग्री शामिल हैं। ब्लिंकन ने कहा कि इस पैकेज में रक्षा विभाग के स्टॉक से कुल 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के हथियार और उपकरण की सैन्य सहायता शामिल है।

 रूस-यूक्रेन युद्ध करीब पिछले डेढ़ साल से जारी है और यूक्रेन को अमेरिका लगातार सैन्य मदद भेज रहा है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने नए सैन्य सहायता की घोषणा की है।



यूक्रेन को 400 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त सैन्य सहायता

अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि वह यूक्रेन को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सैन्य सहायता भेज रहा है। इस सैन्य सहायता में एडवांस वायु रक्षा प्रणालियों, तोपखाने और बख्तरबंद वाहनों के लिए विभिन्न प्रकार के युद्ध सामग्री शामिल हैं।


विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा

मैं यूक्रेन के लिए हमारे 43वें ड्राडाउन को अधिकृत कर रहा हूं। इस सहायता पैकेज में वायु रक्षा युद्ध सामग्री, तोपखाने राउंड, बख्तरबंद वाहन और बुलेट प्रुफ जैकेट शामिल हैं। साथ ही युद्ध के मैदान पर यूक्रेन की बहादुर सेनाओं को मजबूत करने, यूक्रेन को उसके हिस्से पर पुनः कब्जा करने और अपने नागरिकों की रक्षा करने में मदद करने के लिए आवश्यक उपकरण भेज रहे हैं।


रूस रोक सकता था युद्धः अमेरिका

ब्लिंकन ने कहा कि इस पैकेज में रक्षा विभाग के स्टॉक से कुल 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के हथियार और उपकरण की सैन्य सहायता शामिल है। उन्होंने कहा कि रूस अब यूक्रेनी बंदरगाहों पर हमला कर रहा है।



विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा

रूस किसी भी समय यूक्रेन से अपनी सेना हटाकर, यूक्रेन के शहरों और लोगों के खिलाफ अपने क्रूर हमलों को रोक सकता था। अगर रूस चाहता तो इस युद्ध को समाप्त कर सकता था, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है अमेरिका और हमारे सहयोगी यूक्रेन के साथ एकजुटता से खड़े रहेंगे, चाहे जितना भी समय लगे।


जून में भी अमेरिका ने भेजा था सैन्य सहायता

बता दें कि इससे पहले जून में अमेरिकी रक्षा विभाग ने यूक्रेन को उसकी महत्वपूर्ण सुरक्षा और रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त सुरक्षा सहायता पैकेज की घोषणा की थी। सुरक्षा पैकेज में यूक्रेन के लिए हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की महत्वपूर्ण क्षमताएं सहित अन्य सहायता शामिल थीं।

इस कार में फीचर्स के तौर पर स्टीयरिंग व्हील रियर एसी वेंट्स ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ORVM और 10 स्पोक 15-इंच के अलॉय व्हील्स भी मिलता है। इसके साथ ही इसमें डुअल फ्रंट एयरबैग्स EBD के साथ एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) ब्रेक असिस्ट मिलता है।ये एक सब 4 मीटर कॉम्पैक्ट सेडान है। इसके सीएनजी मॉडल की डिमांड भी काफी अधिक है।

 भारतीय बाजार में मारुति सबसे अधिक कारों की सेल करने वाली कंपनी में से एक है इसकी कार इसलिए भी अधिक होती है क्योंकि ये लोगों के बजट में भी आ जाती है। आपको बता दें मारुति सुजुकी की और टाइम हाई डिमांड कार डिजायर हर महीने अपनी कंपनी को अच्छी बिक्री दिलाती है। इस कार की शुरुआती कीमत 6.51 लाख रुपए है। इसका के हाई डिमांड के कारण ही वेटिंग पीरियड काफी लंबा चल रहा है। अगर आप इस कार को खरीदना चाहते हैं तो आज हम आपको बताएंगे इसके किस वेरिएंट पर कितना वेटिंग पीरियड है।



Maruti Dzire वेटिंग पीरियड

इस कार की वास्तव में वेटिंग पीरियड हाई है। इस कार के लिए आपको 4 से 32 सप्ताह का इंतजार करना होगा। आपको बता दें ये मॉडल कुल LXi, VXi, ZXi और ZXi+ के चार वैरिएंट में आता है। अगर आप इस कार को खरीदना चाहते हैं तो आप इस कार के सीएनजी ऑप्शन VXi और ZXi वेरिएंट को भी खरीद सकते हैं।


Maruti Dzire फीचर्स

इस कार में फीचर्स के तौर पर स्टीयरिंग व्हील, रियर एसी वेंट्स, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ORVM और 10 स्पोक 15-इंच के अलॉय व्हील्स भी मिलता है। इसके साथ ही इसमें डुअल फ्रंट एयरबैग्स, EBD के साथ एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ब्रेक असिस्ट, ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट मिलता है। इस कार के टॉप वेरिएंट में रिवर्स पार्किंग कैमरा और सेंसर भी मिलता है।


ये एक सब 4 मीटर कॉम्पैक्ट सेडान है। इसके सीएनजी मॉडल की डिमांड भी काफी अधिक है। ये कार 31.12 किमी/किलोग्राम की माइलेज देती है। इसमें आपको 1.2 लीटर K12C डुअलजेट इंजन मिलता है। इस सीएनजी वेरिएंट की कीमत 8.22लाख रूपये है। इस कार में आपको 7 इंच स्मार्टप्ले टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम भी मिलता है। इसमें एंड्राइड ऑटो, एपल कारप्ले और मिररलिंक को सपोर्ट करता है।




IGNOU December TEE 2023 Date Sheet इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने स्नातक परास्नातक पीजी डिप्लोमा डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों के लिए दिसंबर 2023 सत्रांत परीक्षाओं की तारीखों का एलान मंगलवार 25 जुलाई को कर दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी डेटशीट के अनुसार दिसंबर सत्र की परीक्षाओं का आयोजन 1 दिसंबर 2023 से से 5 जनवरी 2024 तक किया जाएगा।

 इग्नू के यूजी, पीजी, डिप्लोमा व अन्य कोर्सेस के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने तमाम स्नातक, परास्नातक, पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों के लिए दिसंबर 2023 सत्रांत परीक्षाओं की तारीखों का एलान कर दिया है। विश्वविद्यालय ने इन कोर्सेस के लिए आयोजित की जाने वाली दिसंबर 2023 टर्म-ईंड-एग्जाम के लिए डेटशीट मंगलवार, 25 जुलाई को जारी करते हुए परीक्षाओं का आयोजन 1 दिसंबर 2023 से किए जाने की घोषणा की। डेटशीट के मुताबिक परीक्षाएं 5 जनवरी 2024 तक चलेंगी।



IGNOU December TEE 2023: दिसंबर टर्म-ईंड-एग्जाम की Date Sheet ऐसे करें डाउनलोड

ऐसे में विभिन्न कोर्सेस के जिन छात्र-छात्राओं ने दिसंबर सत्रांत परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरा है, वे अपनी परीक्षा तिथियों जानने के लिए डेटशीट इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट, ignou.ac.in से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए छात्र-छात्राओं को आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करने के बाद होम पेज पर ही दिए गए लेटेस्ट सेक्शन में डेटशीट से सम्बन्धित लिंक पर क्लिक करना होगा। फिर नये पेज पर स्टूडेंट्स डेटशीट डाउनलोड लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद टाइम-टेबल पीडीएफ फॉर्मेट में ओपेन होगा। इसका प्रिंट लेने के बाद स्टूडेंट्स को डेटशीट की सॉफ्ट कॉपी भी सेव कर लेनी चाहिए।



इग्नू द्वारा जारी दिसंबर टीईई 2023 डेटशीट के अनुसार परीक्षाओं का आयोजन निर्धारित तिथियों पर 3-3 घंटों की दो पालियों में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की जाएगी, जबकि दूसरी पाली का आयोजन दोपहर 2 बजे शुरू होगी और शाम 5 बजे तक किया जाएगा।


स्टूडेंट्स को ध्यान देना चाहिए कि इग्नू ने दिसंबर 2023 सत्रांत परीक्षाओं के लिए तिथियों की घोषणा के साथ-साथ एग्जाम में सम्मिलित होने के लिए जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं, जिसे डेटशीट में देख सकते है। वहीं, विश्वविद्यालय की तरफ से कहा गया है कि जारी कार्यक्रम संभावित है। ऐसे में स्टूडेंट्स समय-समय पर वेबसाइट पर विजिट करते रहें।




Parliament Monsoon Session 2023 सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और ऐसे में किसी भी अविश्वास प्रस्ताव का कोई अर्थ नहीं होगा लेकिन विपक्ष इस प्रस्ताव के जरिये प्रधानमंत्री से बयान की अपनी जिद जरूर पूरी कर सकता है। अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब प्रधानमंत्री को देना होता है जबकि मणिपुर पर चर्चा हुई तो उसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह देंगे।

 मणिपुर पर संसद में गतिरोध के बीच विपक्ष बुधवार को मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रहा है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार रात ये एलान किया। उन्होंने कहा कि सुबह 10 बजे नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। इस बीच पार्टी ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है।


सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और ऐसे में किसी भी अविश्वास प्रस्ताव का कोई अर्थ नहीं होगा लेकिन विपक्ष इस प्रस्ताव के जरिये प्रधानमंत्री से बयान की अपनी जिद जरूर पूरी कर सकता है। अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब प्रधानमंत्री को देना होता है जबकि मणिपुर पर चर्चा हुई तो उसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह देंगे।



विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल दलों ने यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री के सदन में बयान के बाद ही मणिपुर पर चर्चा शुरू करने के अपने रुख पर वे कायम हैं। सूत्रों ने बताया कि ‘इंडिया’ के नेताओं की मंगलवार सुबह संसद भवन में राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव लाने के विकल्प पर चर्चा हुई।


संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव लाने के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन अगर वे ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें पता होना चाहिए कि पिछली बार जब वे अविश्वास प्रस्ताव लाए थे तो भाजपा 300 से अधिक सीटों के साथ मजबूत बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई थी। इस बार अविश्वास प्रस्ताव लाए तो हमें 350 से अधिक सीटें मिलेंगी।



17वीं लोकसभा में अभी तक नहीं आया है कोई अविश्वास प्रस्ताव


17वीं लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अभी तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया है। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में कोई भी सांसद पेश कर सकता है। प्रस्ताव सूचीबद्ध होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष सदन के भीतर इसकी जानकारी देंगे और उसी समय कम से कम 50 सांसदों को प्रस्ताव के समर्थन में हामी भरनी होगी।


सदन में प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ वोटिंग की तारीख की घोषणा करते हैं। नियमानुसार प्रस्ताव स्वीकार होने के दिन से 10 दिनों के भीतर अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा होना जरूरी है। लोकसभा की 543 सीटों में से फिलहाल पांच अभी रिक्त हैं।


राजग के पास लोकसभा में 330 से अधिक सदस्य हैं जबकि बहुमत का आंकड़ा 272 का है। वहीं ‘इंडिया’ में शामिल दलों के पास लगभग 150 सांसद हैं। वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी, भारत राष्ट्र समिति जैसे दलों के 60 से अधिक सांसद हैं और वे इन दोनों खेमों से बाहर हैं।

UP के कुंडा से विधायक राजा भैया उर्फ रघुराज प्रताप सिंह और उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह के बीच तलाक का मामले दिल्ली की साकेत कोर्ट में सुनवाई हुई है। भानवी कुमारी सिंह ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से और समय मांगा है। कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों से लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई की 3 अगस्त को होगी।

 उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ के कुंडा से विधायक राजा भैया उर्फ रघुराज प्रताप सिंह और उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह के बीच तलाक का मामले दिल्ली की साकेत कोर्ट में सुनवाई हुई है। राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से और समय मांगा है।


कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों से लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 3 अगस्त तय की है। रघुराज ने अपनी पत्नी भानवी कुमारी से तलाक लेने के लिए दिल्ली साकेत कोर्ट में अर्जी लगाई थी।



देश के कई राज्यों में आज के समय तेज बारिश हो रही है। महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई जिलों में आज भारी बारिश की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में अगले तीन दिन झमाझम वर्षा होने के आसार हैं। भारी बारिश के मद्देनजर रायगढ़ जिला प्रशासन ने 26 जुलाई को सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी है।

 देश के कई राज्यों में इन दिनों झमाझम बारिश हो रही है। बुधवार सुबह से दिल्ली-एनसीआर में मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिसकी वजह से पिछले एक हफ्ते से गर्मी की मार झेल रहे दिल्लीवासियों को काफी राहत मिली है। वहीं, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई जिलों में आज भारी बारिश की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में अगले तीन दिन झमाझम वर्षा होने के आसार हैं।



रायगढ़ में स्कूल, कॉलेज बंद

भारी बारिश के मद्देनजर रायगढ़ जिला प्रशासन ने 26 जुलाई को सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी है। मौसम विभाग ने बुधवार को रायगढ़ जिले के लिए 'रेड' अलर्ट जारी किया है। मुंबई ने सोमवार को भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी की थी और 27 जुलाई तक महाराष्ट्र के छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था।


बारिश की वजह से तेलंगाना का हाल बेहाल

तेलंगाना के कई हिस्सों में बीते 24 घंटे के दौरान हुई तेज बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव हो गया और सड़क संपर्क अवरूद्ध हो गया।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के केंद्र ने बुधवार को ‘तेलंगाना के जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी’ में कहा कि करीमनगर, पेद्दापल्ली और अन्य जिलों में अलग-अलग स्थानों पर 25 जुलाई तड़के एक बजे से 26 जुलाई सुबह साढ़े आठ बजे तक भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में भी 25 और 27 जुलाई को भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है।


ओडिशा से लेकर पंजाब तक बारिश की आशंका


मौसम विभाग ने मंगलवार को जानकारी दी कि उत्तर पश्चिम भारत में उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश होने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश में भी शुक्रवार तक बारिश की आशंका है।


ओडिशा के दक्षिणी तट और बंगाल की खाड़ी के पास एक चक्रवात की आशंका जताई जा रही है, जिसकी वजह से ओडिशा और बंगाल के कई जिलों में तेज बारिश की आशंका है। आईएमडी ने बुधवार को ओडिशा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।



यहां कुछ अनगिनत चीज़ें दी गई हैं जो आप iPad के साथ कर सकते हैं।

 iPad इतना बहुमुखी है कि यह किसी भी कार्य के लिए कहीं अधिक उपयुक्त है। चाहे आप किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हों, अपनी रचनात्मकता व्यक्त कर रहे हों, या कोई इमर्सिव गेम खेल रहे हों, iPad इसे पूरा करने का एक मज़ेदार और शक्तिशाली तरीका है। 



कठिन काम भी आसानी से कर लें.


शक्तिशाली ऐप्स को सहजता से चलाएं.

iPad उन शक्तिशाली ऐप्स के साथ काम करता है जिनसे आप परिचित हैं, जैसे Adobe Photoshop या Microsoft Office, उन्हें स्पर्श के साथ उपयोग करने में अतिरिक्त आसानी होती है।




एक साथ कई ऐप्स का उपयोग करें और उनके बीच काम करें।

आईपैड के साथ मल्टीटास्किंग पहले से कहीं अधिक सहज और शक्तिशाली है। सभी ऐप्स पर निर्बाध रूप से कार्य करें। एक ही समय में कई ऐप्स के साथ काम करने के लिए स्लाइड ओवर या स्प्लिट व्यू का उपयोग करें, और यहां तक कि टच या ट्रैकपैड वाले ऐप्स के बीच सामग्री को खींचें और छोड़ें। और iPad Pro और iPad Air पर, आप ऐप विंडो को ओवरलैप, स्टैक और आकार बदलने के लिए स्टेज मैनेजर का उपयोग कर सकते हैं।




वाई-फाई जब आपके पास हो।

जब आप नहीं करते तो सेलुलर।

सेल्युलर क्षमता का मतलब है कि iPad आपको कहीं से भी कनेक्टेड रखता है। इसलिए, भले ही आप वाई-फ़ाई से दूर हों, फिर भी आप एक भी मौका न चूकें।




फ़ाइलों के साथ अपना सारा सामान संग्रहीत और साझा करें।

आप फ़ाइलें ऐप से अपना सारा सामान व्यवस्थित, साझा और प्राप्त कर सकते हैं। अपने iPad पर, iCloud में, या Box जैसी क्लाउड सेवाओं पर जो कुछ है उसे प्रबंधित करें। थंब ड्राइव या अन्य बाहरी डिवाइस पर संग्रहीत फ़ाइलों तक भी आसानी से पहुंचें।




एप्पल पेंसिल से अद्भुत नोट्स लें।

चाहे आप क्लास नोट्स ले रहे हों, जर्नल रख रहे हों, या किसी समाधान पर विचार-मंथन कर रहे हों, iPad आपके सबसे प्रतिभाशाली विचारों को पकड़ने के लिए हमेशा तैयार रहता है। फिर आप उन्हें आसानी से साझा कर सकते हैं, उन पर निर्माण कर सकते हैं और उन्हें जीवन में ला सकते हैं।




अपने हस्तलिखित नोट्स को टाइप किए गए टेक्स्ट में बदलें।

iPad के साथ, आपकी लिखावट टाइप किए गए पाठ जितनी ही शक्तिशाली हो सकती है। अपने हस्तलिखित नोट से प्रारंभ करें, फिर कुछ टैप के साथ इसे टाइप किए गए टेक्स्ट के रूप में कॉपी और पेस्ट करें।




हाथ से उत्तम आकृतियाँ बनाएँ।

ऐप्पल पेंसिल से परिचित आकृतियाँ मुक्तहस्त बनाएं और देखें कि आकृति की पहचान उन्हें उनके आदर्श रूप में ले आती है।




दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करें. किसी भी चीज़ को चिह्नित करें.

सीधे iPad पर अपनी उंगलियों या Apple पेंसिल से एक फॉर्म भरें या किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करें, फिर उसे केवल एक टैप से भेजें। या एक स्क्रीनशॉट लें और उसे चिह्नित करें, किसी फोटो पर कुछ रीटचिंग नोट्स दें, या किसी दस्तावेज़ में संशोधन करें।




स्क्रिबल के साथ किसी भी टेक्स्ट फ़ील्ड में हस्तलिखित करें।

त्वरित संदेश लिखने या Safari में कुछ खोजने के लिए Apple पेंसिल का उपयोग करें। आपकी लिखावट स्वचालित रूप से टाइप किए गए पाठ में परिवर्तित हो जाएगी, इसलिए आपको अपना प्रवाह बाधित नहीं करना पड़ेगा।



कहीं भी एक त्वरित नोट लें.

क्विक नोट नोट बनाने या उस तक पहुंचने का एक तेज़ और आसान तरीका है, चाहे आप कुछ भी कर रहे हों। एक उंगली या ऐप्पल पेंसिल के स्वाइप से त्वरित नोट प्रारंभ करें, फिर किसी ऐप या स्क्रीन पर जानकारी लिखें। संदर्भ के लिए लिंक, हाइलाइट्स, टैग और उल्लेख जोड़ें।




एप्पल पेंसिल से एक उत्कृष्ट कृति बनाएं।

झुकाव और दबाव संवेदनशीलता, अगोचर अंतराल और पिक्सेल-परिशुद्धता के साथ, ऐप्पल पेंसिल एक खाली पृष्ठ को कला के प्रेरक काम में बदलने में मदद करने वाला अंतिम उपकरण है।




आपकी उंगलियों पर 3डी डिज़ाइन।

यहां तक कि सबसे गहन रचनात्मक परियोजनाएं भी iPad पर जीवंत हो जाती हैं। वस्तुओं को स्थानांतरित करने और हेरफेर करने के लिए स्पर्श का उपयोग करें। रेखाचित्र बनाने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए ऐप्पल पेंसिल। आप उन्हें एक ही डिवाइस पर AR में भी देख सकते हैं।




संगीत तैयार करें या पॉडकास्ट रिकॉर्ड करें।

iPad के लिए ऑडियो ऐप्स आपको आसानी से सीखने, अभ्यास करने, रिकॉर्ड करने और बनाने में मदद करते हैं। और आईपैड के लिए लॉजिक प्रो के साथ, आपके पास एक तैयार गीत और बहुत कुछ बनाने के लिए आवश्यक सभी चीजें हैं - यह आपके हाथ में एक पेशेवर रिकॉर्डिंग स्टूडियो होने जैसा है।




अपने स्वयं के एनिमेटेड पात्रों को जीवंत बनाएं।

सभी प्रकार के कलाकारों के लिए डिज़ाइन किए गए सहज एनीमेशन ऐप्स के साथ पात्रों को चित्रित करने और नई दुनिया बनाने के लिए ऐप्पल पेंसिल का उपयोग करें





आईपैड और मैक एक गंभीर रचनात्मक टीम बनाते हैं।

साइडकार के साथ, आप अपने मैक डिस्प्ले को वायरलेस तरीके से बढ़ा या मिरर कर सकते हैं। फिर सटीक कार्यों के लिए या अविश्वसनीय दूसरे डिस्प्ले के रूप में आईपैड का उपयोग करें। और यूनिवर्सल कंट्रोल के साथ, एक कीबोर्ड और माउस या ट्रैकपैड आपके मैक और आईपैड के बीच निर्बाध रूप से काम करता है।




3 महीने के Apple TV+ के साथ आता है।

प्रत्येक iPad में Apple TV+ की 3 महीने की सदस्यता शामिल है, जिसमें समीक्षकों द्वारा प्रशंसित Apple ओरिजिनल सीरीज़ और फ़िल्में शामिल हैं।5



अपनी सभी पसंदीदा सामग्री देखें और स्ट्रीम करें।

नवीनतम फ़िल्म और टीवी रिलीज़ देखें या अपने पसंदीदा को एक शानदार डिस्प्ले पर दोबारा देखें जो आपके साथ कहीं भी जाता है






संगीत, वीडियो और टीवी के लिए अद्भुत स्पीकर।

खाना पकाते समय पॉडकास्ट सुनें, अपनी पसंदीदा प्लेलिस्ट बनाएं या मूवी देखने जाएं।




नवीनतम समाचार देखें या बेस्ट सेलर पढ़ें।

आईपैड पढ़ने को आनंददायक बनाता है। पुस्तकें और समाचार ऐप्स के साथ अपने सभी पसंदीदा लेखकों, पुस्तकों और प्रकाशनों को देखें।



अपनी फ़ोटो और वीडियो तुरंत संपादित करें।

iPad आपके फ़ोटो और वीडियो को संपादित करना, आनंद लेना और साझा करना आसान बनाता है। सही शॉट कैप्चर करें और शक्तिशाली बिल्ट-इन या थर्ड-पार्टी संपादन ऐप्स के एक सूट के साथ इसे अपना बनाएं। और आप कहीं भी हों, पेशेवर वीडियो शूट करने, संपादित करने, समाप्त करने और वितरित करने के लिए आईपैड के लिए फाइनल कट प्रो का उपयोग करें।



जुड़े रहो।

परिवार, दोस्तों और कार्यालय से जुड़े रहने के लिए फेसटाइम और अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप्स का उपयोग करें। आप सेल्फी भी ले सकते हैं.




क्या आप जानते हैं एदस्तावेज़ स्कैनर ठीक से बनाया गया है?

किसी दस्तावेज़ को स्कैन करने के लिए बैक कैमरे का उपयोग करें, फिर उसे चिह्नित करें और भेजें। सभी एक ही डिवाइस से.




एआर के लिए सबसे अच्छा मंच.

उन्नत कैमरे, मोशन ट्रैकिंग और बड़ा डिस्प्ले iPad को संवर्धित वास्तविकता के लिए सर्वोत्तम उपकरण बनाते हैं। तो आप गहन वातावरण में सीख सकते हैं, देख सकते हैं और खेल सकते हैं।




ऐप स्टोर गेम जो अद्भुत दिखते हैं और चलते हैं।

केवल iPad के लिए डिज़ाइन किए गए हज़ारों गेम ब्राउज़ करें और उनका आनंद लें। हाई-स्पीड रेसिंग से लेकर जिग्सॉ पहेलियाँ तक, हर किसी के लिए एक गेम है।




गेम कंट्रोलर कनेक्ट करें.

एक अविश्वसनीय पोर्टेबल गेम कंसोल बनाने के लिए अपने PlayStation या Xbox कंट्रोलर को अपने iPad के साथ जोड़ें। मल्टीप्लेयर में दोस्तों के साथ अकेले खेलें या स्क्वाड अप करें।6




Apple Arcade.7 के निःशुल्क परीक्षण के साथ गेम की दुनिया का अन्वेषण करें

सैकड़ों दुनियाओं में अपना रास्ता खेलें और ऐप्पल आर्केड के साथ अंतहीन आनंद का अनुभव करें। एक सदस्यता, शून्य विज्ञापन, आप सब कुछ खेल सकते हैं।




खेल गति के साथ अधिक आकर्षक होते हैं।

आईपैड में निर्मित मोशन सेंसर के साथ गेम्स को एक नया आयाम मिलता है। एक अद्भुत हैंडहेल्ड गेमिंग डिवाइस के रूप में आईपैड के साथ चकमा दें, ड्राइव करें और निशाना साधें।




आपकी कक्षा कहीं भी हो सकती है.

आप जहां भी हों, वहां जाकर साइन इन करने की सीख लें। एक व्याख्यान में भाग लें, एक समूह परियोजना से निपटें, या बस सभी जगह के सहकर्मियों और सहपाठियों के साथ जुड़े रहें।




कुछ नया सीखें, चाहे वह खाना बनाना हो या कैंटोनीज़।

iPad सीखने के लिए एक आदर्श साथी है। किसी प्रशिक्षक के साथ कदम दर कदम आगे बढ़ें या अपने खाली समय में स्व-निर्देशित पाठ्यक्रम अपनाएं। हालाँकि आप सीखना पसंद करते हैं, उसके लिए एक ऐप है।




सभी प्रकार की शिक्षा के लिए एक बेहतरीन शुरुआत।

ऐप स्टोर में बच्चों के लिए कक्षा के बाहर सीखने के लिए शैक्षिक ऐप्स की एक विशाल श्रृंखला है। और स्क्रीन टाइम आपको यह देखने और सीमा निर्धारित करने की सुविधा देता है कि आप और आपके बच्चे ऐप्स, वेबसाइटों और अन्य चीजों पर कितना समय बिताते हैं।




अपने कोडिंग कौशल का निर्माण करें।

स्विफ्ट प्लेग्राउंड ऐप्पल द्वारा बनाई गई एक शक्तिशाली प्रोग्रामिंग भाषा स्विफ्ट के साथ सीखना और प्रयोग करना मजेदार बनाता है। कोड सीखें, स्विफ्टयूआई के साथ वास्तविक ऐप्स बनाएं और ऐप स्टोर पर अपने विचारों को साकार होते देखें।




एआर के साथ अपने आसपास की दुनिया को अनलॉक करें।

संवर्धित वास्तविकता शिक्षण ऐप्स के साथ अपने दिमाग का विस्तार करें। मानव शरीर की परतों में गोता लगाएँ या अपने iPad को तारों की ओर इंगित करें और अपने ऊपर तारामंडल देखें।

महिलाओं को राजनीति में आरक्षण प्रतिनिधित्व या प्रतीकात्मकता?

 भारत में महिलाओं को राजनीति में आरक्षण देने का उद्देश्य केवल उनकी संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्हें वास्तविक सत्ता और निर्णय लेने की ताकत...