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Showing posts from January, 2024

गोपाल का इलाज (कहानी) : गोपाल भाँड़

 गोपाल भांड नहुत ही बुद्धिमान और मेहनती आदमी था। उसकी बुद्धि और व्यवहार कुशलता के बहुत चर्चे थे। लोगों की हर समस्या का हल वह चुटकियों में करता था। इसलिए उसके पास लोग अपनी – अपनी मुश्किलें लेकर आते ही रहते थे। किस्मत की बात है – उसके पड़ोस में एक निहायत कमअक्ल दम्पति रहता था। उस पर तुर्रा यह कि पति और पत्नी – दोनों ही दिन में सपने देखने के शौक़ीन थे। अपने वर्तमान को बेहतर बनाने की अपेक्षा, दोनों अपना अधिकतर समय भविष्य के सुनहरे सपने देखने में बिताते थे। एक दिन वह आदमी अपनी पत्नी से बोला कि वह एक गाय खरीदना चाहता है जिससे कि उनके घर में दूध कि नदियां बहें। फिर क्या था! दोनों ने एक अदद गाय खरीदने की योजना बना डाली और देखते ही देखते उसके सपनों में खो गए। बात करते – करते उन्हें ख्याल आया कि अगर वे कुछ ज्यादा पैसा बचना शुरू कर दे, तो जल्दी वे एक गाय के मालिक होंगे। पर सच तो यह था कि उनकी जमा – पूँजी इतनी कम थी कि निकट भविष्य में गाय खरीदना तो दूर, गाय का नाम तक नही ले सकते थे। पर सपने देखने के पैसे तो लगते नही। इसलिए पति – पत्नी का गाय – संवाद चलता ही रहा। वे एक सुंदर व् दुधारू गाय खरीदेंग...

गोपाल ने नापी धरती (कहानी) : गोपाल भाँड़

 एक दिन गोपाल भांड जब कृष्‍णनगर के राजा कृष्‍णचंद्र राय के दरबार में पहुंचा, तो उसे वहां का वातावरण कुछ बदला–बदला सा लगा। राजा कृष्‍णचंद्र उदास भाव से अपने सिंहासन पर बैठे हुए थे। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। सारे दरबारी चिंतित भाव में अपने स्‍वामी की तरफ ही देख रहे थे। गोपाल ने अपनी विशिष्‍ट हास्‍य शैली में राजा को हंसाने की कोशिश की, लेकिन राजा के चेहरे पर मुस्‍कान पैदा न हुई। गोपाल समझ गया कि अवश्‍य ही कोई गंभीर समस्‍या पैदा हो गई है, तभी महाराज इतने गंभीर हैं। जब बहुत देर तक महाराज की चुप्‍पी न टूटी तो गोपाल ने पूछ लिया—‘अन्‍नदाता! आज आप कुछ ज्‍यादा ही चिंतित लग रहे हैं। क्‍या कोई गंभीर समस्‍या पैदा हो गई है? मुझे बताइए। शायद मैं आपकी समस्‍या का कोई हल निकाल सकूं।’ महाराज ने एक गहरी सांस भरी। बोले—‘तुमने ठीक अंदाजा लगाया है, गोपाल। सचमुच मैं एक गंभीर समस्‍या से घिर गया हूं। समझ में नहीं आता कैसे निपट पाऊंगा इस समस्‍या से।’  ‘पर समस्‍या क्‍या है, अन्‍नदाता? वही तो मैं जानना चाहता हूं, क्‍योंकि आपको चिंतित देखकर मुझे भी उलझन हो रही है।’ गोपाल ने कहा। ‘तो सुनो। मुर्शिद...

मुख बंद रखने की कीमत (कहानी) : गोपाल भाँड़

 एक समय की बात है। एक दिन महाराज कृष्णचन्द्र ने गोपाल भाड़ से कहा, “एक मैं ही हूँ जिससे तुम हँसी-मजाक करके बड़ी सहजता से आये दिन रुपये लेकर चले जाते हो। यदि मेरी बुआ से तुम्हारा पाला पड़ता, तब तुम्हें पता चलता कि तुम कितने पानी में हो।" यह सुनते ही गोपाल भाड़ की जिज्ञासा बढ़ गयी। उसने पूछा, “आपने ऐसा क्यों कहा महाराज? आपकी बुआ तो खूब दयालु महिला हैं। मुझसे जब भी भेंट होती है, मेरा हाल-चाल बड़े प्रेम से पूछती हैं।" महाराज ने गोपाल भाड़ के भ्रम को तोड़ना चाहा। कहा, “यह सब तो ऊपरी दिखावा मात्र है। यदि तुम उनसे कुछ रुपये निकाल कर ला सको, तब हम समझेंगे कि वे कितनी दयालु महिला हैं।" महाराज के इस कथन से गोपाल भांड की जिज्ञासा और बढ़ गयी। उसने कहा, “आप ऐसा क्यों कह रहे हैं महाराज? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। " "समझोगे, समझोगे। ...तो जाओ न चमड़ी जाये पर दमड़ी न जाये कहावत पर खरी उतरने वाली उस बुढ़िया की गाँठ से कुछ रुपये निकालकर ले आओ। तब हम तुम्हें मान लेंगे।" महाराज की बात सुनकर गोपाल भांड गम्भीर हो गया। कहा, “क्या आप मेरी परीक्षा लेना चाहते हैं?" इस ...

Google Free AI Course: सर्च इंजन गूगल अपने यूजर्स के लिए कई तरह की सुविधाएं लाता रहता है. गूगल ने फ्री ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं. आज के ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए गूगल के फ्री एआई कोर्स की पढ़ाई करना बेहतरीन फैसला साबित हो सकता है. इसके लिए Google Cloud Skills Boost (cloudskillsboost.google) पर एनरोल कर सकते हैं.

  Google Free AI Course: गूगल बिल्कुल मुफ्त में सिखा रहा है AI, नहीं देना होगा 1 भी रुपये, आज से ही शुरू करें पढ़ाई Google Free AI Course: गूगल बिल्कुल मुफ्त में सिखा रहा है AI, नहीं देना होगा 1 भी रुपये, आज से ही शुरू करें पढ़ाई Google Free AI Course: सर्च इंजन गूगल अपने यूजर्स के लिए कई तरह की सुविधाएं लाता रहता है. गूगल ने फ्री ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं. आज के ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए गूगल के फ्री एआई कोर्स की पढ़ाई करना बेहतरीन फैसला साबित हो सकता है. इसके लिए Google Cloud Skills Boost (cloudskillsboost.google) पर एनरोल कर सकते हैं. Google Free AI Course: गूगल के फ्री कोर्स में दाखिला लेकर एआई के बेसिक्स सीख सकते हैं Google Free AI Course: गूगल के फ्री कोर्स में दाखिला लेकर एआई के बेसिक्स सीख सकते हैं नई दिल्ली (Google Free AI Course). एआई के दौर में हर कोई इसमें एक्सपर्ट बनना चाहता है. टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से बदल रही है, इतना तो तय है कि आने वाले कुछ सालों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाएगा (AI Courses). इसीलिए गूगल ने ...

ये अरबपति हर दिन एक करोड़ रुपये खर्च करें तो इन्हें अपनी पूरी दौलत खत्म करने में 476 साल लग जाएंगे।

 दुनिया के अरबपतियों के पास इतना पैसा है जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। अमेरिकी संस्था ऑक्सफैम ने असमानता पर नई रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के पांच सबसे अमीर व्यक्तियों की संपत्ति 2020 के बाद से 114 फीसदी बढ़ गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पांच सबसे अमीर एलन मस्क, बर्नार्ड अरनॉल्ट, जेफ बेजोस, लैरी एलिसन और मार्क जुकरबर्ग हैं। ये अरबपति आज 2020 की तुलना में 3.3 खरब डॉलर अधिक अमीर हैं। अगर ये अरबपति हर दिन एक करोड़ रुपये खर्च करें तो इन्हें अपनी पूरी दौलत खत्म करने में 476 साल लग जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के इन पांच अरबपतियों ने हर घंटे 1.4 करोड़ अमरीकी डॉलर यानी 116 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है। एलन मस्क की साल 2020 की शुरुआत में नेटवर्थ करीब 27 अरब डॉलर थी। आज एलन मक्स का साम्राज्य 206 अरब डॉलर के करीब है। दुनिया के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों के पास 43 फीसदी दौलत है। अमीरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर शुमार जेफ बेजोस की नेटवर्थ 179 अरब डॉलर है। साल 2020 में जेफ की संपत्ती 113 अरब डॉलर थी। जेफ ने हर घंटे करोड़ों रुपयों की कमाई की है। दुनिया के ...

आज हम आपको एक ऐसे पोर्टल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से आप एक, दो नहीं, पूरे 1185 कोर्सेज कर सकते हैं वह भी घर बैठे बिल्‍कुल फ्री में.

 आईआईएम, आईआईटी संस्‍थानों के कोर्स अगर फ्री में करने को मिल जाएं तो क्‍या कहने. सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा संभव कैसे है, तो आपको बता दें कि यह संभव हुआ है केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एजुकेशनल पोर्टल स्‍वयं (SWAYAM) से. बता दें कि इस पोर्टल पर लगभग 203 संस्‍थानों की ओर से 1185 कोर्सेज ऑफर किए गए है. इस पोर्टल पर अब तक 3.9 करोड़ उम्‍मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है. यही नहीं लगभग 39.9 लाख अभ्‍यर्थियों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. बता दें कि अब तक इस पोर्टल के जरिये लगभग 25.2 लाख उम्‍मीदवार अलग-अलग कोर्सेज करके इसका सर्टिफिकेट भी ले चुके हैं. यहां से कोर्स पूरा होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानि एनटीए की ओर से 390 कोर्सेज की परीक्षाएं कराई जाती हैं. जिसके बाद उम्‍मीदवारों को सर्टिफिकेट दिया जाता है. अगर आप भी फ्री कोर्सेज करना चाहते हैं तो तुरंत आप इस पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. ये हैं नोडल एजेंसियां बता दें कि इस पोर्टल के लिए आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्‍निकल एजुकेशन (AICTE), यूनिवर्सिटी ग्रांटस कमीशन (UGC), अंडरग्रेजुएट एजुकेशन के लिए ...

समोसे की कहानी : गोपाल भाँड़

 "इन दिनों महाराज कृष्णचंद्र को बात-बेबात गुस्सा क्यों आता है ?" राजदरबार में लाख टके का प्रश्न था । प्रजा भी डरी हुई थी कि कहीं उन्हें महाराज का कोप-भाजन न बनना पड़े। महाराज के गुस्से आगे सबकी बोलती बंद हो गई थी। उन दिनों किसी कारण सुबह - सुबह दरबार लग रहा था। महाराज और दरबारी सुबह का नाश्ता दरबार में ही कर रहे थे। एक सुबह महाराज ने राज- हलवाई को कहलवा भेजा कि उन्हें गरमा-गरम फुलको-लूची (मैदे की पतली पूड़ी) और आलू-दम चाहिए। हलवाई ने बड़े ही यतन से पूड़ी और आलू- दम बनाकर दरबार में भेजा। लेकिन महाराज ने यह कहकर लौटा दिया कि पूड़ी ठंडी पड़ गई है। अब तो हलवाई इतना डरा कि काटो तो खून नहीं! दोबारा, तिबारा, भेजा लेकिन वही शिकायत ! अब हलवाई ने महाराज को प्रसन्न करने की योजना निकाली। उसे स्मरण हो आया कि महाराज तो मिष्ठान्न पसंद करते हैं, क्यों न उन्हें मिष्ठान्न बनाकर भेजी जाए, क्योंकि मिष्ठान्न तो गरम खाने का नियम ही नहीं है। उसने दरबार में अनुमति पाने के लिए संदेश भेजा। लेकिन महाराज को पसंद होने पर भी वे मिष्ठान्न नहीं खा सकते थे। उन दिनों वे मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त थे। राज चिकि...

रंक से राजा (कहानी) : गोपाल भाँड़

 एक दिन महाराज कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे थे । राज-काज का काम सम्पन्न हो चुका था । उस दिन महाराज बहुत खुश दरबारी भी महाराज की खुशमिजाजी भाँपकर अपने-अपने आस पर बिराजमान थे । महाराज ने अचानक दरबारियों से सवाल किया - "बादल क्या करता है?" दरबारियों ने एक स्वर में कहा- “पानी बरसाता है । " महाराज ने फिर पूछा - "बादल कैसे बनता है ? ” "पानी जब गर्म होता है तब वह भाप में बदल जाता है और वही भाप आकाश में जाकर बादल बन जाती है।” दरबारियों ने फिर एक स्वर में जवाब दिया । महाराज इसी तरह कुछ-कुछ पूछते रहे और सभी दरबारी उसका जवाब देते रहे। इस बतकही के दौरान महाराज ने अचानक पूछा - "यह दुनिया किसने बनाई ?” दरबारियों ने जवाब दिया- “भगवान ने ।" महाराज ने फिर पूछा - "भगवान क्या करते हैं?" इस प्रश्न के साथ ही दरबार में सन्नाटा छा गया। महाराज कृष्णदेव कुछ देर तक दरबारियों को देखते रहे, लेकिन जब कोई भी दरबारी कुछ नहीं बोला, तब उन्होंने दरबारियों को प्रेरित करते हुए कहा – “भाई, आप सभी इतने विद्वान हैं, कोई तो कुछ बोलिए।” इसके बाद भगवान के कार्य को लेकर दरबारियों...

गुण का महत्त्व (कहानी) : गोपाल भाँड़

 राजा कृष्णदेव का दरबार मनोरंजक तथा विद्वत्तापूर्ण चर्चाओं के लिए प्रसिद्ध था । महाराज अपने खाली समय में तरह-तरह की बातें कर अपने दरबारियों की बुद्धि की परीक्षा लेते रहते थे। एक दिन महाराज कृष्णदेव अपने दरबार में बैठे थे । उन्होंने यूँ ही दरबारियों से पूछ लिया- “सबसे बड़ा पत्ता किसका होता है ?" दरबारियों ने तरह-तरह की अटकलें लगानी शुरू कर दीं। किसी ने अरबी के पत्ते को बड़ा बताया तो किसी ने ढाक के पत्ते को। किसी ने केले के पत्ते को बड़ा कहा तो किसी ने मान कच्चू के पत्ते को सभी वनस्पतियों में सबसे बड़ा पत्ता बताया । दरबार में तरह-तरह की राय आने लगी मगर गोपाल भाँड़ अपने आसन पर चुपचाप बैठा रहा । महाराज कृष्णदेव ने उसे चुप देखकर कहा- “गोपाल ! क्या बात है? तुम चुप क्यों बैठे हो ? तुम भी तो कुछ बताओ !” तब गोपाल ने कहा- "महाराज ! मेरे दरबारी मित्रों ने अब तक जो कुछ भी बताया, उससे मैं सहमत नहीं हूँ।” महाराज ने पूछा - "फिर तुम ही बताओ, सबसे बड़ा पत्ता किसका होता है?" गोपाल अपने आसन से उठकर महाराज के आसन तक आया और उनसे विनम्रतापूर्वक कहा - "महाराज! मैं कद में आपसे लम्बा ह...

अतिथि की भाषा (कहानी) : गोपाल भाँड़

 18वीं सदी की बात है। तब कृष्णचंद्र बंगाल के नदिया के राजा हुआ करते थे। उनके दरबार में गोपाल भांड एक नवरत्न थे। वह अपनी समझदारी और चतुराई से किसी भी समस्या का हल ढूंढ लेते थे। एक बार राजा कृष्णचंद्र के दरबार में बाहर से कोई विद्वान पंडित आया। राजा ने परिचय पूछा तो उस विद्वान पुरुष ने अपना परिचय संस्कृत, अरबी और फारसी समेत कई प्राचीन भाषाओं में दिया। जब वह चुप हुए तो राजा कृष्णचंद्र ने अपने दरबारियों की ओर प्रश्न भरी नजरों से देखा कि बताओ इसकी मातृभाषा क्या है? लेकिन दरबारी यह अनुमान न लगा सके कि दरबार में पधारे पंडित जी की मातृभाषा क्या है? सभी चुप, दरबार में सन्नाटा छा गया। राजा कृष्णचंद्र ने गोपाल भांड से पूछा, ‘क्या तुम कई भाषाओं के ज्ञाता अतिथि पंडित की मातृभाषा बता सकते हो?’ गोपाल भांड ने बड़ी विनम्रता के साथ कहा, ‘महाराज, मैं तो भाषाओं का जानकार नहीं हूं, फिर भी यदि मुझे अपने हिसाब से पता करने की छूट दे दी जाए तो शायद मैं यह काम कर सकता हूं।’ राजा कृष्णचंद्र ने स्वीकृति दे दी। सभा समाप्त होने के बाद सभी दरबारी सीढ़ियों से उतर रहे थे। तभी गोपाल भांड अतिथि पंडित के पीछे गए और उ...

प्रथम पुरुष (कहानी) : गोपाल भाँड़

 बहुत समय पहले बंगाल में महाराजा कृष्णचन्द्र का राज्य था। उनके दरबार में बहुत सारे विदूषक थे। सबसे ज्यादा लोकप्रिय था – गोपाल। गोपाल नाई था लेकिन सब लोग उसे गोपाल भांड कहकर बुलाते थे। भांड यानी मसखरा, जो लोगों को हंसा सकता हो। अपने चुटकलों, हावभाव, टीका – टिप्पणी और महाराज या अन्य लोगों को मूर्ख बनाने के तरीको ने गोपाल को प्रसिद्ध कर दिया था। गोपाल से पार पाना नामुनकिन था। न ही उसके हाथ कोई चालाकी – चुस्ती कर सकता था। गोपाल को सारा खेल पहले ही पता चल जाता और वह चतुराई से पासा पलट देता था। उस जमाने में लोग अजीबोगरीब अंधविश्वास पालते थे। एक तो खुद ही वे कुछ जानते – बुझते नही थे और वह जमाना भी ज्ञान – विज्ञान का नही था। कई लोगों की तरह महाराजा भी यह मानते थे कि सुबह उठते ही जिस व्यक्ति का चेहरा वह सबसे पहले देखेंगे, वही व्यक्ति उनके उस दिन का समय निर्धारित करेगा। यदि उनका दिन अच्छा निकलता तो वह व्यक्ति शुभ माना जाता। अगले दिन उसे इनाम दिया जाता था। और अगर दिन में कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हो जाता था, तो वह व्यक्ति अमंगल का प्रतीक या राज्य के लिए खतरा हो जाता। अगले दिन महाराजा उसे दंड देते। स...

रास्ते का पत्थर (कहानी) : गोपाल भाँड़

 (जब गोपाल भांड ने महाराज कृष्णचंद्र को सिखलाया प्रजावत्सलता का पाठ और वह भी सरोवर किनारे पड़े पत्थर की मदद से।) एक दिन महाराज कृष्णचंद्र ने सुबह-सुबह गोपाल भांड को अपने महल में बुलाकर कहा, ‘गोपाल, आज मुझे सरोवर में स्नान करने ही इच्छा हो रही है। मैं सामान्य औपचारिकताओं से मुक्त होकर एक सामान्य व्यक्ति की तरह जल-क्रीड़ा करना चाहता हूं। मेरी इच्छा है कि मैं तैरकर सरोवर के मध्य तक जाऊं और वहां से रक्तकमल के कुछ पुष्प स्वयं तोड़ लाऊं। ऐसा करो तुम स्वयं जाओ और देखकर आओ कि इस समय सरोवर के आसपास कितने आदमी हैं।’ गोपाल सुबह-सुबह बुलाए जाने से खीझा हुआ था। उसने महाराज की बातें सुनीं और बिना कुछ बोले सरोवर की ओर चल पड़ा। थोड़ी ही देर में वह सरोवर के पास पहुंच गया। उस समय स्नान करने के लिए अनेक आदमी सरोवर की ओर जा रहे थे। गोपाल उन लोगों को देर तक देखता रहा, फिर वहां से लौटकर महाराज के समक्ष उपस्थित हुआ। महाराज कृष्णचंद्र ने गोपाल को देखते ही पूछा, ‘कहो गोपाल, सब कुछ देख आए? सरोवर में स्नान के लिए मैं निकल सकता हूं या नहीं?’ गोपाल ने धैर्यपूर्वक उत्तर दिया, ‘महाराज, आपने मुझे यह देखकर आने को कहा थ...

भविष्यवाणी (कहानी) : गोपाल भाँड़

 गोपाल भाँड़ बचपन से ही प्रखर बुद्धि का था। साहस और पराक्रम की उसमें कमी नहीं थी। दीन-दुखियों को देखकर द्रवित हो जाना और उसकी सहायता के लिए तत्पर हो जाना उसका स्वभाव था। एक बार गोपाल को उसकी माँ मेला घुमाने के लिए ले गई। गोपाल गाँव से पहली बार बाहर निकला था। उसे अनेक ऐसी चीजें देखने को मिलीं जिन्हें उसने पहले कभी देखा नहीं था। उसने पहली बार शहर की चैड़ी सड़कें देखीं। कई सड़कें ऐसी थीं जिन पर ईंट और पत्थर के चौकोर टुकड़े बिछाए गए थे। धूप में ये सड़कें तप सी जातीं। गोपाल भाँड़ और उसकी माँ नंगे पाँव थे। ऐसे भी उस जमाने में जूते जमींदार-साहूकार, राजा-महाराजा आदि ही पहनते थे। गोपाल का मन चिकनी सड़क पर सरपट भागने को हो रहा था मगर धूप के कारण तपती सड़क पर पाँव रखने पर उसके तलवे जलते से महसूस होते। गोपाल की बेचैनी और उसकी हसरत दोनों को उसकी माँ समझ रही थी। अपना आँचल गोपाल के सिर पर रखते हुए उसने बहुत प्यार से उससे कहा-‘‘बेटा! सड़क के दोनों किनारों को देखो। कितने अच्छे सायेदार पेड़ लगे हैं! ये पेड़ इसलिए ही लगाए गए हैं कि इस सड़क से गुजरनेवाले पैदल यात्रियों को इन पेड़ों की छाया मिल सके। तुम सड़क के बीच म...

रंग-बिरंगी मिठाइयां : तेनालीराम की कहानी

 वसंत ऋतु छाई हुई थी। राजा कृष्णदेव राय बहुत ही खुश थे। वह तेनालीराम के साथ बाग में टहल रहे थे। वह चाह रहे थे कि एक ऐसा उत्सव मनाया जाए, जिसमें उनके राज्य के सारे लोग शामिल हों। पूरा राज्य उत्सव के आनंद में डूब जाए। इस विषय में वह तेनालीराम से भी राय लेना चाहते थे। तेनालीराम ने राजा की इस सोच की प्रशंसा की और इसके बाद राजा ने विजयनगर में राष्ट्रीय उत्सव मनाने का आदेश दे दिया। शीघ्र ही नगर को स्वच्छ करवा दिया गया, सड़कों व इमारतों में रोशनी की व्यवस्था कराई गई। पूरे नगर को फूलों से सजाया गया। सारे नगर में उत्सव का वातावरण था। इसके बाद राजा ने घोषणा की कि राष्ट्रीय उत्सव मनाने के लिए हलवाई की दुकानों पर रंग-बिरंगी मिठाइयां बेची जाएं। घोषणा के बाद नगर के सारे हलवाई रंगीन मिठाइयां बनाने में व्यस्त हो गए। इस घोषणा के बाद कई दिनों तक तेनालीराम दरबार में नजर नहीं आए। किसी को भी उनके बारे में कुछ नहीं पता था। राजा कृष्णदेवराय ने तेनालीराम को ढूंढ़ने के लिए सिपाहियों को भेजा, लेकिन वे भी तेनालीराम को नहीं ढूंढ़ पाए। उन्होंने राजा को इस बारे में बताया। यह सुनकर राजा और भी अधिक चिंतित हो गए। उन्...

मृत्युदंड की धमकी : तेनालीराम की कहानी

 थट्टाचारी कृष्णदेव राय के दरबार में राजगुरु थे। वे तेनालीराम से बहुत ईर्ष्या करते थे। उन्हें जब भी मौका मिलता तो वे तेनालीराम के विरुद्ध राजा के कान भरने से नहीं चूकते थे। एक बार क्रोध में आकर राजा ने तेनालीराम को मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी, परंतु अपनी विलक्षण बुद्धि और हाजिरजवाबी से तेनालीराम ने जीवन की रक्षा की। एक बार तेनालीराम ने राजा द्वारा दी जाने वाली मृत्युदंड की धमकी को हमेशा के लिए समाप्त करने की योजना बनाई। वे थट्टाचारी के पास गए और बोले, 'महाशय, एक सुंदर नर्तकी शहर में आई है। वह आपके समान किसी महान व्यक्ति से मिलना चाहती है। उसने आपकी काफी प्रशंसा भी सुन रखी है। आपको आज की रात उसके घर जाकर उससे अवश्य मिलना चाहिए, परंतु आपकी बदनामी न हो इसलिए उसने कहलवाया है कि आप उसके पास एक स्त्री के रूप में जाइएगा।' थट्टाचारी तेनालीराम की बातों से सहमत हो गए। इसके बाद तेनालीराम राजा के पास गए और वही सारी कहानी राजा को सुनाई। राजा की अनेक पत्नियां थीं तथा वे एक और नई पत्नी चाहते थे अतः वे भी स्त्री के रूप में उस नर्तकी से मिलने के लिए तैयार हो गए। शाम होते ही तेनालीराम ने उस भव...

11 नारे जिन्होंने चीन को बदल दिया

 चीन में कम्युनिस्ट शासन के संस्थापक रहे माओत्से तुंग ने राजनीतिक नारेबाज़ी को एक कला में तब्दील कर दिया था. वैसे तो, माओ के बाद के चीन के नेताओं ने उनके कई कट्टर सिद्धांतों को बदल डाला है. लेकिन, आज भी ऐसे कई नारे हैं, जिन्हें माओ के राजनीतिक वारिस बार-बार दोहराते रहे हैं. ऐसे ही 11 नारों के बारे में आपको बताते हैं, जिन्होंने चीन को बदल डाला. 100 फूल खिलने दो (1956) जुमलेबाज़ी चीन की रोज़मर्रा की बोलचाल का अटूट हिस्सा है. चीन में ये माना जाता है कि अगर कोई बात काफ़िए या तुकबंदी में कही जाए, तो वो बिल्कुल सटीक मालूम होती है. ऐसे वाक्यों को चीन की भाषा के चार अक्षरों के ज़रिए पूरा किया जाता है. पिछले दो हज़ार साल से चीन के नेता ऐसी तुकबंदी वाले जुमले इस्तेमाल करते आए हैं. माओत्से तुंग अक्सर चीन के ऐसे पुराने जुमलों में हेर-फेर करके अपनी बात जनता को समझाया करते थे. 'सौ फूल खिलने दो; सौ विचारों में मुक़ाबला होने दो.' ये नारा माओ ने ईसा से 221 साल पहले ही ख़त्म हो गए चीन के 'सूबों के संघर्ष' के दौर से लिया था. माओ ये इशारे देते रहते थे कि कम्युनिस्ट पार्टी की आलोचना की इजाज...

नली का कमाल : तेनालीराम की कहानी

 राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। महाराज अपने दरबारियों के साथ किसी चर्चा में व्यस्त थे। अचानक से चतुर और चतुराई पर चर्चा चल पड़ी। महाराज कृष्णदेव के दरबार में दरबारियों से लेकर राजगुरु तक तेनालीराम से चिढ़ते थे। तेनालीराम को नीचा दिखाने के उद्देश्य से एक मंत्री ने खड़े होकर कहा – महाराज! आपके इस दरबार मे बुद्धिमान और चतुर लोगो की कमी नहीं। यदि अवसर दिया जाए तो हम भी अपनी बुद्धिमानी सिद्ध कर सकते हैं किंतु? “किन्तु क्या मंत्री जी”, महाराज कृष्णदेव ने आश्चर्य से पूछा। सेनापति अपने स्थान से उठकर बोला – मैं बताता हूं महाराज! मंत्री जी क्या कहना चाहते हैं। तेनालीराम के सामने किसी भी दरबारी को अपनी योग्यता सिद्ध करने की प्राथमिकता नहीं दी जाती। हर मामले में तेनालीराम आगे अड़ कर चतुराई का श्रेय स्वयं ले जाते हैं। जब तक अन्य लोगो को अवसर नही मिलेगा। वे अपनी योग्यता कैसे सिद्ध करेंगे। सेनापति की बात सुनकर महाराज समझ गए कि सभी दरबारी तेनालीराम के विरोध में हैं। महाराज कुछ क्षण के लिए शांत होकर सोचने लगे। तभी उनकी दृष्टि कोने में लगी ठाकुर जी की प्रतिमा पर गयी। प्रतिमा के सामने जलती धूपबत्...

दूध न पीने वाली बिल्ली : तेनालीराम की कहानी

 एक बार महाराज कृष्णदेव राय ने सुना कि उनके नगर में चूहों ने आतंक फैला रखा है। चूहों से छुटकारा पाने के लिए महाराज ने एक हजार बिल्लियां पालने का निर्णय लिया। महाराज का आदेश होते ही एक हजार बिल्लियां मंगवाई गयी। उन बिल्लियों को नगर के लोगों में बांटा जाना था। जिसे बिल्ली दी गयी उसे साथ में एक गाय भी दी गयी ताकि उसका दूध पिलाकर बिल्ली को पाला जा सके। चूहों से सभी लोग परेशान थे, अतः जब बिल्लियाँ बंट रही थी तो लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गयी थीं। इस अवसर पर तेनालीरामन भी एक कतार में खड़ा हो गया। जब उसकी बारी आयी तो उसे भी एक बिल्ली और साथ में एक गाय दे दी गई। बिल्ली को घर ले जाकर उसने गरमागरम एक कटोरा दूध उसे पीने को दिया। बिल्ली भूखी थी। बेचारी ने जैसे ही कटोरे में मुंह मारा तो गर्म दूध से उसका मुहँ बुरी तरह जल गया। इसके बाद बिल्ली के आगे जब दूध रखा जाता ,चाहे वह ठंडा ही क्यों न हो, बिल्ली वहां से भाग खड़ी होती। गाय का सारा दूध अब तेनालीराम व उसके परिवार के अन्य सदस्य ही पी जाते। बेचारी बिल्ली कुछ ही दिनों में इतनी कमजोर हो गयी कि उसमे चूहे पकड़ने की ताकत भी नहीं रही। 3 माह बाद महाराज न...

बूढ़ा भिखारी और महाराज कृष्णदेवराय की उदारता : तेनालीराम की कहानी

 सर्दियों का मौसम था। महाराज कृष्णदेव अपने कुछ मंत्रियों के साथ किसी काम से नगर से बाहर जा रहे थे। ठंड इतनी थी कि सभी दरबारी मोटे-मोटे ऊनी वस्त्र पहनने के बाद भी काँप रहे थे। चलते-चलते राजा की दृष्टि एक बूढ़े भिखारी पर पड़ी जो हाथ में कटोरा लिए इस कड़कड़ाती ठंड में एक पत्थर पर बैठा काँप रहा था। भिखारी की ऐसी स्थिति देखकर महाराज से रहा न गया। रथ रूकवाकर पहुँच गए उस स्थान पर जहाँ वह बूढ़ा भीख मांग रहा था। कुछ देर तक राजा कृष्ण देव भिखारी को देखते रहे और फिर अपना कीमती शॉल उतार कर बूढ़े भिखारी को ओढ़ा दिया। महाराज की ऐसी उदारता देख सभी दरबारी व आसपास के लोग राजा की प्रशंसा करते हुए जय-जयकार करने लगे। जब सब लोग महाराज की प्रशंसा करने में लगे थे तब केवल तेनालीरामन ही ऐसा व्यक्ति था जो चुप खड़ा हुआ था। तेनाली को चुप देख राजपुरोहित को बोलने का अवसर मिल गया। वह तपाक से बोला- क्या बात है तेनालीरामन यहाँ सभी महाराज के इस कार्य की प्रशंसा कर रहे हैं? केवल तुम ही चुप हो। क्या तुम्हें महाराज की उदारता पर कोई संदेह है? तेनाली फिर भी चुप रहे। अब महाराज को भी तेनालीराम की यह चुप्पी खलने लगी। वह वही से वाप...

तेनालीराम की मनपसन्द मिठाई : तेनालीराम की कहानी

 महाराज, राजपुरोहित और तेनालीराम राज उद्यान में टहल रहे थे कि महाराज बोले , “ऐसी सर्दी में तो खूब खाओ और सेहत बनाओ। वैसे भी इस बार तो कड़के की ठण्ड पड़ रही है। ऐसे में तो मिठाई खाने का मज़ा ही कुछ और है।” जैसे ही खाने पीने की बात शुरू हुई तो राजपुरोहित के मुंह में पानी आ गया और वह बोला, “महाराज ऐसे में तो मावे की मिठाई खाने में बड़ा ही आनंद आता है।” “सर्दियों की सबसे बढ़िया मिठाई कौन सी है ?”महाराज ने अचानक से पूछा तेनालीराम से पहले पुरोहित बोला, “ महाराज एक हो तो बताओ। काजू , पिस्ते की बर्फी, हलवा,रसगुल्ले आदि बहुत सी मिठाईयां हैं जो हम सर्दी में खा सकते हैं।” अब महाराज ने तेनालीराम से पूछा , “ अब तुम बताओ।” तेनालीराम बोला, “महाराज आज रात आप मेरे साथ चलना। मैं आपको अपनी पसंद की सर्दियों की मिठाई खिला दूंगा।” “कहाँ चलना है?” महाराज ने पूछा महाराज दरअसल मेरी पसंद की मिठाई यहाँ मिलती नही है। इसीलिए आपको मेरे साथ चलना होगा।” महाराज ने कहा, “ ठीक है हम तुम्हारे साथ चलेंगे।” रात होते ही महाराज ने साधारण मनुष्य का भेष बना लिया और तीनों निकल पड़े तेनालीराम की पसंद की मिठाई खाने के लिए। काफी देर...

सात जूते मारने वाली चमेली : तेनालीराम की कहानी

 चाननपुर गाँव में चांदकुमारी नाम की एक रूपवती कन्या रहती थी। वह विवाह के योग्य हो गई थी लेकिन अपनी माँ के व्यवहार के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।उसकी माँ का नाम चमेली था जो अपने पति माधो को रोज़ सात जूते मारा करती थी।यह बात दूर – दूर तक के लोगों को पता थी इसलिए कोई भी चांदकुमारी को अपनी बहु नहीं बनाना चाहता था। वहीँ दूसरी तरफ तेनालीराम की बुद्धिमत्ता के कारण दरबारियों के साथ – साथ उसके कुछ रिश्तेदार भी उससे जलते थे।एक बार तेनालीराम घर पर आराम फरमा रहा था कि अचानक उसका एक दूर का रिश्तेदार चाँदकुमारी का रिश्ता लेकर उसके घर पहुँच गया। वह भी तेनालीराम से जलनेवालों में से एक था। वह तेनालीराम के पास जाकर बोला , “मैं एक रिश्ता लेकर आया हूँ तुम अपने छोटे भाई का रिश्ता ले लो।वह ये नही जानता था की तेनालीराम का कोई भाई नहीं है। फिर भी तेनालीराम ने लड़की के बारे में पूछा, “आखिर लड़की कैसी है ?”उसके बारे में कुछ तो बताओ।” वह बोला, “ लड़की का नाम चांदकुमारी है। वह बहुत ही सुंदर है।” तेनालीराम ने भी उसकी माँ को बारे में बहुत कुछ सुन रखा था लेकिन फिर भी उसने रिश्ते के लिए हामी भर दी। अब वह रिश्त...