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Showing posts from May, 2024

मोस्ट वॉन्टेड मानव तस्कर तक पहुंचने की कहानी

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 पूर्व सैनिक रॉब लॉरी, जो शरणार्थियों के लिए काम करते हैं, उनके साथ मैं 'स्कॉर्पियन' नाम से पहचाने जाने वाले शख़्स को ढूंढने और उससे सवाल करने निकली थी. स्कॉर्पियन यानी बिच्छू. उनके गैंग ने कई सालों तक नावों और लॉरी के ज़रिये इंग्लिश चैनल के पार मानव तस्करी के धंधे पर क़ब्ज़ा जमाया था. साल 2018 से अब तक नाव के जरिए इंग्लिश चैनल पार करते वक़्त 70 से ज़्यादा प्रवासियों की मौत हो चुकी है. पिछले महीने फ्रांसीसी तट पर पांच लोग मारे गए, इनमें सात साल की एक बच्ची भी थी. ये एक ख़तरनाक यात्रा है, लेकिन तस्करों के लिए ये लुभावनी हो सकती है. इंग्लिश चैनल नाव से पार कराने के लिए तस्कर हर प्रवासी से 6 हज़ार पाउंड (क़रीब 6 लाख 27 हज़ार रुपये) लेते हैं. साल 2023 में क़रीब 30 हज़ार लोगों ने इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश की थी. इससे आप मुनाफ़े का अंदाजा लगा सकते हैं. उत्तरी फ्रांस के एक प्रवासी कैंप में हमारी मुलाक़ात एक बच्ची से हुई थी, इसी मुलाक़ात के बाद हमारी दिलचस्पी स्कॉर्पियन में बढ़ी. वो छोटी बच्ची एक डोंगी में सवार होकर इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश में लगभग मरने ही वाली थी. वो डोंगी...

दूध से भागने वाली बिल्ली : गोनू झा

 मिथिला में एक बार चूहों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगों का जीना हराम हो गया । चूहे खेत- खलिहान में उत्पात मचाते । धान की कोठियों में बिल बनाते । चौका में उछल-कूद करते । राजमहल भी चूहों की आमद का शिकार हो गया था । एक रात चूहे ने महाराज की पगड़ी कुतर डाली और सुबह जब महाराज ने अपनी पगड़ी की हालत देखी तो उन्हें बहुत गुस्सा आया । उसी दिन महाराज ने बड़ी तादाद में बिल्लियाँ मँगाईं । अपने राज्य के समस्त परिवार को एक- एक बिल्ली पालने का हुक्म दिया । गरीब प्रजा इस फरमान के विरुद्ध खड़ी हो गई । दरबार में इस समस्या पर विचार-विमर्श हुआ। महराज की चिन्ता का विषय था कि मिथिला के लोग मृदुभाषी होते हैं । विरोध या विद्रोह से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है फिर बिल्ली पालने के राजाज्ञा का उल्लंघन करने पर वे कैसे आमादा हो गए ? निष्कर्ष निकला कि लोग अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण बहुत मुश्किल से कर पाते हैं । ऐसे में वे बिल्ली पालने के लिए दूध कहाँ से लाएँगे ? मूल बात महाराज को भी समझ में आ गई और उन्होंने नया फरमान जारी किया कि जिन लोगों को बिल्लियाँ दी गई हैं, वे उन बिल्लियों के लालन-पालन के लिए राज्य गौशाला...

पाकिस्तान और चीन के छूटेंगे पसीने; भारत का ये है प्लान पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब देने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि ईरान और भारत के बीच महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। इसके लिए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सोमवार को ईरान के लिए रवाना हो गए है। बता दें कि इस समझौते के बाद भारत एक दशक के लिए चाबहार बंदरगाह का प्रबंधन संभालेगा।

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 पाकिस्तान और चीन की टेंशन बढ़ाने के लिए भारत सोमवार को ईरान के साथ चाबहार पोर्ट के प्रबंधन से जुड़े समझौते पर मुहर लगाएगा। इसके लिए केंद्रीय बंदरगाह और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सोमवार को ईरान के लिए रवाना हो गए है।  जानकारी के लिए बता दें कि इस समझौते के बाद भारत अगले 10 सालों तक चाबहार बंदरगाह का प्रबंधन संभालेगा। यह रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक कराची के साथ-साथ पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाहों को दरकिनार करते हुए, ईरान के माध्यम से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच एक नया व्यापार मार्ग खोलेगा। कनेक्टविटी के मामले में अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशियन क्षेत्रों के बीच चाबहार पोर्ट काफी अहम साबित होगा।  भारत के लिए बड़ी उपलब्धि  चाबहार पोर्ट ऑपरेशंस का अनुबंध इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच की एक और बड़ी उपलब्धि होगी। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ठीक एक साल पहले -मई 2023 में म्यांमार में सिटवे बंदरगाह का उद्घाटन किया था। बता दें कि दोनों का ही उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ती चीनी उपस्थिति को बेअसर करना है।  भारत का लक्ष्य सीआईएस (स्वतंत्र राज्यों के ...