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Showing posts from October, 2024

अथ श्रीबैल कथा (कहानी) : गोनू झा

 "अरे वाह, पंडित जी ! बहुत शानदार बैल लिए जा रहे हैं ! कितने में मिला ?" गोनू झा अभी पशु मेले से निकले ही थे कि एक व्यक्ति ने उनसे पूछा । गोनू झा ने उस व्यक्ति की ओर देखा किन्तु उसे पहचान नहीं पाए। फिर भी अपने चेहरे पर औपचारिक मुस्कान लाकर बोले -" बस, संयोग से मिल गया-दस रुपए में । अच्छा लगा सो ले लिया । जरूरत भी थी ।" “आइसा । लेकिन पंडित जी, आपको बैल मिला बहुत शानदार मगर एक ही क्यों, कम से कम एक जोड़ी बैल लेते...” उस अजनबी ने गोनू झा से पूछा । गोनू झा भी उससे बात करते हुए चल रहे थे – “अरे, क्या बताएँ भाई, मेरे पास एक जोड़ी बैल था । दस दिन हुए एक बैल बीमार पड़ा । दवा-दारू की मगर बचा नहीं पाया मर गया । इसीलिए एक बैल की जरूरत थी । ठीक-ठाक मिल गया इसलिए ले लिया । मेरे पास एक बैल इसी कद-काठी का है।" कुछ दूर चलने के बाद वह व्यक्ति अपनी राह चला गया । गोनू झा सोचते रहे कि यह व्यक्ति कौन था, लेकिन वे उस व्यक्ति को याद नहीं कर पाए । राजदरबार में होने के कारण गोनू झा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी । उन्हें जानने-पहचानने वाले लोग भी बहुत थे। उन्होंने सोचा-छोड़ो, रहा होग...

अन्धों की सूची में महाराज (कहानी)

 गोनू झा के साथ एक दिन मिथिला नरेश अपने बाग में टहल रहे थे। उन्होंने यूँ ही गोनू झा से पूछा कि देखना और दृष्टि-सम्पन्न होना एक ही बात है या अलग-अलग अर्थ रखते हैं ? गोनू झा में बातें करने की अद्भुत सूझ थी । उन्होंने कहा-“महाराज, देखना एक क्रिया भर है, जैसे आप मुझे देख रहे हैं किन्तु दृष्टि में सूझ भी होती है जिससे भविष्य के लिए मार्गदर्शन मिल सकता है ।" मिथिला नरेश को गोनू झा की बात पसन्द आई। उन्होंने गोनू झा से फिर पूछा-“मिथिला में दृष्टि-सम्पन्न कितने लोग होंगे ?" गोनू झा ने तत्परता से कहा-“महाराज ! दृष्टिवान् व्यक्ति विरल होते हैं । आसानी से मिलते कहाँ हैं ?" लेकिन महाराज का जिज्ञासु भाव बना रहा। उन्होंने पूछा-“फिर भी, कुछ तो होंगे ?" गोनू झा ने महाराज से कहा-“मुझे कुछ दिनों की मोहलत दें तो मैं आपको ठीक -ठीक बता सकूँगा कि मिथिला में दृष्टि-सम्पन्न हैं भी या नहीं।" महाराज शान्त हो गए । दूसरे दिन महाराज घोड़े पर सवार होकर गोनू झा के गाँववाले मार्ग से गुजर रहे थे। उन्होंने एक अजीब माजरा देखा । उन्होंने देखा कि सड़क के बीचोबीच कुछ लोग एक व्यक्ति को घेरे खड़े हैं ...