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अथ श्रीबैल कथा (कहानी) : गोनू झा

 "अरे वाह, पंडित जी ! बहुत शानदार बैल लिए जा रहे हैं ! कितने में मिला ?" गोनू झा अभी पशु मेले से निकले ही थे कि एक व्यक्ति ने उनसे पूछा । गोनू झा ने उस व्यक्ति की ओर देखा किन्तु उसे पहचान नहीं पाए। फिर भी अपने चेहरे पर औपचारिक मुस्कान लाकर बोले -" बस, संयोग से मिल गया-दस रुपए में । अच्छा लगा सो ले लिया । जरूरत भी थी ।" “आइसा । लेकिन पंडित जी, आपको बैल मिला बहुत शानदार मगर एक ही क्यों, कम से कम एक जोड़ी बैल लेते...” उस अजनबी ने गोनू झा से पूछा । गोनू झा भी उससे बात करते हुए चल रहे थे – “अरे, क्या बताएँ भाई, मेरे पास एक जोड़ी बैल था । दस दिन हुए एक बैल बीमार पड़ा । दवा-दारू की मगर बचा नहीं पाया मर गया । इसीलिए एक बैल की जरूरत थी । ठीक-ठाक मिल गया इसलिए ले लिया । मेरे पास एक बैल इसी कद-काठी का है।" कुछ दूर चलने के बाद वह व्यक्ति अपनी राह चला गया । गोनू झा सोचते रहे कि यह व्यक्ति कौन था, लेकिन वे उस व्यक्ति को याद नहीं कर पाए । राजदरबार में होने के कारण गोनू झा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी । उन्हें जानने-पहचानने वाले लोग भी बहुत थे। उन्होंने सोचा-छोड़ो, रहा होग...

अन्धों की सूची में महाराज (कहानी)

 गोनू झा के साथ एक दिन मिथिला नरेश अपने बाग में टहल रहे थे। उन्होंने यूँ ही गोनू झा से पूछा कि देखना और दृष्टि-सम्पन्न होना एक ही बात है या अलग-अलग अर्थ रखते हैं ? गोनू झा में बातें करने की अद्भुत सूझ थी । उन्होंने कहा-“महाराज, देखना एक क्रिया भर है, जैसे आप मुझे देख रहे हैं किन्तु दृष्टि में सूझ भी होती है जिससे भविष्य के लिए मार्गदर्शन मिल सकता है ।" मिथिला नरेश को गोनू झा की बात पसन्द आई। उन्होंने गोनू झा से फिर पूछा-“मिथिला में दृष्टि-सम्पन्न कितने लोग होंगे ?" गोनू झा ने तत्परता से कहा-“महाराज ! दृष्टिवान् व्यक्ति विरल होते हैं । आसानी से मिलते कहाँ हैं ?" लेकिन महाराज का जिज्ञासु भाव बना रहा। उन्होंने पूछा-“फिर भी, कुछ तो होंगे ?" गोनू झा ने महाराज से कहा-“मुझे कुछ दिनों की मोहलत दें तो मैं आपको ठीक -ठीक बता सकूँगा कि मिथिला में दृष्टि-सम्पन्न हैं भी या नहीं।" महाराज शान्त हो गए । दूसरे दिन महाराज घोड़े पर सवार होकर गोनू झा के गाँववाले मार्ग से गुजर रहे थे। उन्होंने एक अजीब माजरा देखा । उन्होंने देखा कि सड़क के बीचोबीच कुछ लोग एक व्यक्ति को घेरे खड़े हैं ...

मोस्ट वॉन्टेड मानव तस्कर तक पहुंचने की कहानी

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 पूर्व सैनिक रॉब लॉरी, जो शरणार्थियों के लिए काम करते हैं, उनके साथ मैं 'स्कॉर्पियन' नाम से पहचाने जाने वाले शख़्स को ढूंढने और उससे सवाल करने निकली थी. स्कॉर्पियन यानी बिच्छू. उनके गैंग ने कई सालों तक नावों और लॉरी के ज़रिये इंग्लिश चैनल के पार मानव तस्करी के धंधे पर क़ब्ज़ा जमाया था. साल 2018 से अब तक नाव के जरिए इंग्लिश चैनल पार करते वक़्त 70 से ज़्यादा प्रवासियों की मौत हो चुकी है. पिछले महीने फ्रांसीसी तट पर पांच लोग मारे गए, इनमें सात साल की एक बच्ची भी थी. ये एक ख़तरनाक यात्रा है, लेकिन तस्करों के लिए ये लुभावनी हो सकती है. इंग्लिश चैनल नाव से पार कराने के लिए तस्कर हर प्रवासी से 6 हज़ार पाउंड (क़रीब 6 लाख 27 हज़ार रुपये) लेते हैं. साल 2023 में क़रीब 30 हज़ार लोगों ने इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश की थी. इससे आप मुनाफ़े का अंदाजा लगा सकते हैं. उत्तरी फ्रांस के एक प्रवासी कैंप में हमारी मुलाक़ात एक बच्ची से हुई थी, इसी मुलाक़ात के बाद हमारी दिलचस्पी स्कॉर्पियन में बढ़ी. वो छोटी बच्ची एक डोंगी में सवार होकर इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश में लगभग मरने ही वाली थी. वो डोंगी...

दूध से भागने वाली बिल्ली : गोनू झा

 मिथिला में एक बार चूहों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगों का जीना हराम हो गया । चूहे खेत- खलिहान में उत्पात मचाते । धान की कोठियों में बिल बनाते । चौका में उछल-कूद करते । राजमहल भी चूहों की आमद का शिकार हो गया था । एक रात चूहे ने महाराज की पगड़ी कुतर डाली और सुबह जब महाराज ने अपनी पगड़ी की हालत देखी तो उन्हें बहुत गुस्सा आया । उसी दिन महाराज ने बड़ी तादाद में बिल्लियाँ मँगाईं । अपने राज्य के समस्त परिवार को एक- एक बिल्ली पालने का हुक्म दिया । गरीब प्रजा इस फरमान के विरुद्ध खड़ी हो गई । दरबार में इस समस्या पर विचार-विमर्श हुआ। महराज की चिन्ता का विषय था कि मिथिला के लोग मृदुभाषी होते हैं । विरोध या विद्रोह से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है फिर बिल्ली पालने के राजाज्ञा का उल्लंघन करने पर वे कैसे आमादा हो गए ? निष्कर्ष निकला कि लोग अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण बहुत मुश्किल से कर पाते हैं । ऐसे में वे बिल्ली पालने के लिए दूध कहाँ से लाएँगे ? मूल बात महाराज को भी समझ में आ गई और उन्होंने नया फरमान जारी किया कि जिन लोगों को बिल्लियाँ दी गई हैं, वे उन बिल्लियों के लालन-पालन के लिए राज्य गौशाला...

पाकिस्तान और चीन के छूटेंगे पसीने; भारत का ये है प्लान पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब देने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि ईरान और भारत के बीच महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। इसके लिए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सोमवार को ईरान के लिए रवाना हो गए है। बता दें कि इस समझौते के बाद भारत एक दशक के लिए चाबहार बंदरगाह का प्रबंधन संभालेगा।

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 पाकिस्तान और चीन की टेंशन बढ़ाने के लिए भारत सोमवार को ईरान के साथ चाबहार पोर्ट के प्रबंधन से जुड़े समझौते पर मुहर लगाएगा। इसके लिए केंद्रीय बंदरगाह और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सोमवार को ईरान के लिए रवाना हो गए है।  जानकारी के लिए बता दें कि इस समझौते के बाद भारत अगले 10 सालों तक चाबहार बंदरगाह का प्रबंधन संभालेगा। यह रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक कराची के साथ-साथ पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाहों को दरकिनार करते हुए, ईरान के माध्यम से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच एक नया व्यापार मार्ग खोलेगा। कनेक्टविटी के मामले में अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशियन क्षेत्रों के बीच चाबहार पोर्ट काफी अहम साबित होगा।  भारत के लिए बड़ी उपलब्धि  चाबहार पोर्ट ऑपरेशंस का अनुबंध इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच की एक और बड़ी उपलब्धि होगी। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ठीक एक साल पहले -मई 2023 में म्यांमार में सिटवे बंदरगाह का उद्घाटन किया था। बता दें कि दोनों का ही उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ती चीनी उपस्थिति को बेअसर करना है।  भारत का लक्ष्य सीआईएस (स्वतंत्र राज्यों के ...

कृतघ्न प्राणी (कहानी) : गोनू झा

 मिथिला नरेश की जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वे मनमौजी होते जा रहे थे। कई बार तो दरबारी उनके व्यवहार से चकित हो जाते और आपस में बतियाते कि महाराज तो इन दिनों सनकी होते जा रहे हैं । जब देखो तब बेतुकी बातें करने लगते हैं । एक दिन ऐसे ही मिथिला नरेश दरबार में बहक गए और दरबारियों से पूछा -" आप में से कोई बता सकता है कि संसार का सबसे कृतघ्न प्राणी कौन है?" दरबारी अटकलें लगाने लगे। एक ने कहा -" शेर महाराज, शेर। शेर से बड़ा कृतघ्न प्राणी भला कौन होगा ? बड़े से बड़ा जानवर उससे घबराता है । खरगोश हो या हाथी, सबको चटकर जाता है। एक बार पेट भर जाए तो पन्द्रह दिनों तक हिलता-डुलता नहीं। अघाया हुआ पड़ा रहता है।" दूसरे ने कहा “अरे महाराज ! यही आदत तो बाघ, चीता, तेंदुआ आदि में भी है। आखिर यह कैसे तय होगा कि इनमें से कौन कृतघ्न है ?" तीसरे ने कहा -" महाराज, सबसे कृतघ्न प्राणी लकड़बग्घा होता है । शरीर से कुछ और सिर से कुछ और दिखता है । छोटे जीवों और कमजोर बच्चों को अपना आहार बनाता है ।" मतलब यह कि दरबार में बतकही का दौर चला तो चलता ही रहा । गोनू झा इन बातों में र...

ठग उन्मूलन अभियान (कहानी) : गोनू झा

 मिथिला में चोर -उचक्कों और ठगों का कभी बहुत जोर था । चोर-उचक्कों के इस जोर के कारण ही कोई अजनबी न तो मिथिला जाना चाहता था और न वहाँ के लोगों से मेल -जोल बढ़ाने का ही साहस कर पाता था । मिथिलांचल नरेश ने चोरी और ठगी रोकने के कई उपाय किए लेकिन सारे विफल रहे । एक दिन उन्होंने गोनू झा से कहा -" अब आप ही कोई उपाय करें पंडित जी ! राज्य में चोरी और ठगी की घटनाएँ इतनी बढ़ गई हैं कि पड़ोस के राज्यों से कोई मिथिला भ्रमण के लिए आना ही नहीं चाहता । मिथिला की कलात्मक तस्वीरों के लिए पहले यहाँ पर्यटकों की भीड़ लगी रहती थी । मिथिला अपने प्राकृतिक रंग-निर्माण के लिए अपनी प्रसिद्धि के कारण व्यापारियों को भी आकर्षित करता था । मखाने की खेती में यह क्षेत्र अव्वल है लेकिन चोरों और ठगों के उत्पात के कारण अब मखाने के व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है । मिथिला की मछलियाँ दूर-दराज तक के खरीददार ले जाया करते थे लेकिन मछलियों की माँग भी कम होती जा रही है । यदि यही हाल रहा तो राजस्व में कमी आएगी और हमें नए कर लगाने होंगे। इससे हमारी प्रजा पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव आएगा । यह उचित नहीं होगा । मुझे विश्वास है पंडित ...