Wednesday, May 24, 2023

सत्यवादी व सदाचारी से बड़ा कोई धर्मात्मा नहीं

 


खानदेश (महाराष्ट्र) के जिलाधीश लक्ष्मणराव देशमुख ईश्वर में दृढ़ विश्वास रखने वाले अधिकारी थे। वह अंग्रेज अफसरों के अन्यायपूर्ण आदेशों को निर्भीकता के साथ मानने से इन्कार कर देते थे। वह दयानंद सरस्वती के वेद संबंधी विचारों से प्रभावित थे। मई, 1883 में देशमुख स्वामी दयानंद सरस्वती के सत्संग के लिए अजमेर गए। स्वामी जी अजमेर से जोधपुर जा रहे थे। देशमुख ने अपना परिचय देते हुए कहा, मैं आपसे योग विद्या सीखने और सत्संग के लिए आया हूं। स्वामी जी ने उन्हें साथ कर लिया और रास्ते में उन्हें वैदिक धर्म के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया, सत्य पर सदैव अटल रहना चाहिए

सच कहने में हिचकना नहीं चाहिए। सत्यवादी व सदाचारी से बड़ा कोई धर्मात्मा नहीं होता। देशमुख जोधपुर में एक सप्ताह तक स्वामी जी के साथ रहे। स्वामी जी ने उनसे कहा, आप जिलाधीश हैं। किसी के साथ अन्याय न होने पाए और किसी असहाय का उत्पीड़न न हो इसका पूरा गायल ध्यान रखना आपका परम धर्म और दायित्व है।


देशमुख जब लौटने लगे, तो स्वामी जी के चरण स्पर्श कर बोले, जो वर्षों की साधना से नहीं मिल सकता, वह मुझे आपके पावन सान्निध्य से मिल गया है। मैं आजीवन आपके •बताए सद्मार्ग पर चलता रहूं, ऐसा आशीर्वाद दें।

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