Saturday, May 20, 2023

विराट-अनुष्का, मार्क जकरबर्ग, स्टीव जॉब्स हैं जिनके भक्त 🙏नीम करोली बाबा की कहानी

 


नीम करोली बाबा का नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था और उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में साल 1900 के आसपास हुआ था और मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ज्ञान की प्राप्ति कर ली थी। इनके पिताजी का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था उन्होंने बाबा की शादी मात्र 11 वर्ष की उम्र में करवा दी।                                     नीम करोली बाबा जिन्हें उस समय बाबा लक्ष्मण दास के नाम से जाना जाता था, ने 1958 में अपना घर छोड़ दिया। राम दास एक कहानी बताते हैं कि बाबा लक्ष्मण दास बिना टिकट के ट्रेन में चढ़े और कंडक्टर ने ट्रेन को रोकने का फैसला किया और फर्रुखाबाद जिले (यूपी) के नीम करोली गांव में नीम करोली बाबा को ट्रेन से उतार दिया।


बाबा को ट्रेन से उतार देने के बाद कंडक्टर ने पाया कि ट्रेन फिर से शुरू नहीं हुई। ट्रेन शुरू करने के कई प्रयासों के बाद किसी ने कंडक्टर को सुझाव दिया कि वे साधु को वापस ट्रेन में चढ़ने दें।                                     नीम करोली दो शर्तों पर ट्रेन में सवार होने के लिए सहमत हुए पहला रेलवे कंपनी ने नीम करोली गाँव में एक स्टेशन बनाने का वादा किया और दूसरा रेलवे कंपनी अब से साधुओं के साथ बेहतर व्यवहार करे। अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की और नीम करोली बाबा ने मजाक करते हुए ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में चढ़ने के तुरंत बाद ट्रेन चलने लगी।


लेकिन ट्रेन चालक तब तक आगे नहीं बढ़े जब तक कि साधु ने उन्हें आगे बढ़ने का आशीर्वाद नहीं दिया। बाबा ने आशीर्वाद दिया और ट्रेन आगे बढ़ गई। बाद में नीम करोली गांव में एक रेलवे स्टेशन बनाया गया। बाबा कुछ समय तक नीम करौली गाँव में रहे और स्थानीय लोगों द्वारा उनका नामकरण किया गया।इसके बाद वह पूरे उत्तर भारत में व्यापक रूप से घूमते रहे। इस दौरान उन्हें कई नामों से जाना जाता था, जिनमें – ”लक्ष्मण दास, हांडी वाला बाबा और तिकोनिया वाला बाबा”। जब उन्होंने गुजरात में मोरबी के ववनिया गांव में तपस्या और साधना की तो उन्हें तलैया बाबा के नाम से जाना जाने लगा।   


                                                                        नीम करोली बाबा के शब्द;:;:_;;

बाबा ने एक भारतीय लडक़ी से चार बार पूछा - ‘‘तुम्हें आनंद पसंद है या दु:ख?’’ हर बार लडक़ी ने जवाब दिया - ‘‘मैंने कभी आनंद महसूस ही नहीं किया, महाराजजी, बस दु:ख ही महसूस किया है।’’ आखिर में महाराजजी ने बोला - ‘‘मुझे दु:ख पसंद है। यह मुझे भगवान के पास ले जाता है।                                  ’’


भारत में, योग लोगों की रगों में बहता है। - नीम करोली बाबा


अगर आप अपनी मौत के समय एक आम की इच्छा करेंगे, तो आप एक कीड़े के रूप में जन्म लेंगे। अगर आप अगली सांस की भी इच्छा रखेंगे, तो आप दुबारा जन्म लेंगे। - नीम करोली बाबा       


                                                                         एक किताब से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान:::


नीम करोरी की रोचक घटना के बाद बाबा बहुत अधित प्रसिद्ध हो गए थे और कैंची धाम आश्रम में जाकर रहने लगे थे। 1967 में उनसे प्रभावित होकर एक शिष्य रामदास मिले थे जो एक अमेरिकी निवासी थे और उनका मूल नाम भी रिचर्ड अल्पर्ट था। रिचर्ड अल्पर्ट बाबा के कार्यों से इतने अधिक प्रभावित हुए थे कि वे उनसे दीक्षा लेकर, उनके शिष्य बन गए और अपना नाम अल्पर्ट रामदास कर लिया। अल्पर्ट रामदास ने लगभग 15 पुस्तकें लिखी थीं जो की बाबा नीम करोरी पर आधारित थी। मिरिकल ऑफ लव उनकी बहुत प्रसिद्ध रही पुस्तक रही थी। इस प्रसिद्ध पुस्तक के बाद से ही बाबा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। पुस्तक में कई प्रसिद्ध कहानियों की चर्चा की गयी है।       


         हनुमान के अवतार माने जाते है बाबा नीम करौली

बाबा नीम करौली को भक्तो के द्वारा हनुमान जी का अवतार माना जाता है। बचपन से ही हनुमान भक्ति में रमे होने के कारण बाबा नीम करौली को हनुमान जी से अत्यंत प्रेम था। हनुमान जी की कृपा से बाबा नीम करौली को असीम चमत्कारी सिद्धियाँ प्राप्त थी। सदैव हनुमान भक्ति में रमे रहने वाले बाबा नीम करौली हमेशा सादगी में रहते थे एवं बिना किसी बाह्य आडम्बर के भक्तो के कष्टों को दूर करते थे। बाबा नीम करौली किसी को भी अपने चरण स्पर्श नहीं करने देते थे एवं भक्तों को हनुमान जी के चरण छूने का आदेश देते थे।   


                                                                        PM मोदी से मार्क जुकरबर्ग ने किया था जिक्र:                                                                                  पीएम मोदी ने साल 2015 में अमेरिका की यात्रा की थी। इस दौरान उनकी फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से मुलाकात भी हुई थी। तब मार्क ने पीएम मोदी से नीम करोली बाबा का जिक्र किया था। मार्क ने बताया था कि इस मंदिर में जाने के लिए उन्हें एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स ने कहा था।                                                          उत्तराखंड स्थि​त कैंची धाम में जब जून में वार्षिक समारोह होता है तो उनके भक्तों की खूब भीड़ लगती है. कैंची धाम में न केवल भारत के विभिन्न राज्यों, बल्कि विदेशों से भी उनके अनुयायी यहां पहुंचते हैं. पीएम मोदी, हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां भी बाबा के भक्तों में शामिल हैं. ये लोग कैंची धाम आश्रम भी आ चुके हैं.

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