Saturday, May 20, 2023

जोड़ों का दर्द कही गठियाँ रोग तो नही


सरल शब्दों में गठिया का अर्थ है जोड़ों में सूजन। सूजन में दर्द, सूजन, लालिमा और उस स्थान पर गर्मी का अनुभव होता है। हड्डी के जोड़ का सूजन (ऑस्टियोआर्थराइटिस) जिसमें जोड़ों में दर्द का कारण सूजन नहीं होता है, के अलावा गठिया के कारण होने वाली अधिकांश बीमारियां स्वप्रतिरक्षा के कारण होती हैं। स्वप्रतिरक्षा एक अजेय रोग प्रक्रिया है जो हमारे सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं और रसायनों के कारण होती है, जो हमारे स्वयं के जोड़ों पर हमला और नुकसान पहुंचाती रहती हैं। गठिया के कारण होने वाले इन स्वप्रतिरक्षा क्षति को मोटे तौर पर रुमेटोलॉजिकल रोग कहा जाता है और इनकी पहचा रूमेटाइड अर्थराइटिस है। रुमेटोलॉजिकल रोग किसी भी आयु वर्ग को नहीं छोड़ता है। यह 2 साल की उम्र में शुरू हो सकता है और यहां तक कि 80 साल की उम्र के रोगी में भी पहली बार हो सकता है। रुमेटोलॉजी के के अंतर्गत 300 से अधिक रोग प्रकार हैं।     


                                                             दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रुमेटोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉ. रंजन गुप्ता बताते हैं कि गठिया की एक स्थिति एकिलोगिंग स्पॉन्डिलाइटिस न भी है यह बीमारी मरीज को आजीवन रहती है। इसमें असहनीय दर्द होता है, पैरों में कंपन, कूल्हे में सूजन रहती है। शुरुआत में कुछ साल तक मरीज को हल्का दर्द रह सकता है, लेकिन शरीर में विटामिन, कैल्शियम की कमी होने, प्रोटीन और ईएसआर बढ़ने से उसकी हालत बिगड़ने लगती है। दीवार पकड़ कर चलना, करवट न ले पाना, रोड़ का आगे की ओर झुकना, जैसी समस्याएं हमेशा रहती हैं।                                             डॉक्टरों के अनुसार, गठिया की बीमारी सिर्फ 40 साल या उससे अधिक आयु वालों में नहीं रह गई है, अब 20 से 22 साल तक की आयु के युवा भी इसकी चपेट में है। गठिया का एक प्रकार ऐसा भी है, जो नवजात शिशुओं में हो सकता है। अगर मरीजों के आंकड़े देखें तो भारत में 22 करोड़ से ज्यादा गठिया रोगी हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं को है।                                                                  नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निर्देशक डॉ. अजय कुमार शुक्ला बताते हैं. उनके पास ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनकी इतिहास देखने के बाद पता चलता है कि वह रुमेटोलॉजी का रोगी है और उसने अपना इलाज बीच में ही छोड़ दिया। कुछ साल बाद फिर से दर्द होने लगता है तो वह अस्पताल आते हैं।                                                                               सालों तक भ्रम में रहते हैं मरीज

इन ऑटोइम्यून बीमारियों का सबसे बड़ा नुकसान पर रोग की पहचान नहीं होना है। एक मरीज सालों तक इसी भ्रम में रहता है कि उसे दर्द या फिर मांसपेशियों में खिचाव की वजह से हो रहा है। वह दर्द निवारक गोलियों का सेवन करता है। व्यायाम करता है। जब इनमें से किसी से आराम नहीं मिलता, तब इलाज कराने डॉक्टर के पास पहुंचता है। तब तक यह बीमारियां उसके शरीर खासतौर पर जोड़ों को काफी नुकसान पहुंचा चुकी होती हैं         

                        गठिया को पछाड़ पछाड़ कर दूर भगाएं, ये दमदार और बेजोड़ घरेलू उपाय;:;:;;:

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अदरक अदरक भी गठिया रोग में फायदेमंद होता है. ...
सरसों का तेल ...
हल्दी ...
लहसुन ...
दालचीनी का सेवन करने से आराम मिलता है.

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