मानव कि उत्पत्ति का इतिहास सच या काल्पनिक?“पहले अंडा आया या मुर्गी“ इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

 जैसा कि हमें बताया गया है, हमने पढा भी है कि हम बंदरो से इंसान बने है। और इस बन्दर कि प्रजाति से मनुष्य बनने कि प्रक्रिया में हजारो वर्षो का समय लगा है। मनुष्य कि जीवन शैली भी पहले जानवरों कि तरह ही हुआ करती थी। वे भी अन्य जानवरों कि तरह ही जंगलो और गुफाओ में रहते थे। जानवरों को मारकर खाते थे। शिकार के लिए यहाँ वहा भटकते थे। शिकार कि खोज में बहुत दूर तक निकल जाते थे। जानवरों कि तरह रहना, जानवरों कि तरह खाना, जानवरों कि तरह शिकार करना यह सब तो संभव है। क्योकि आज भी कई ऐसे पिछड़े इलाके है जहा के आदिवासी लोग आदिमानव कि तरह जीवन व्यतीत करते है। ऐसा कई लेखको और वैज्ञानिको द्वारा बताया गया है।


प्रमाण के तौर पर केवल हड्डियों के अवशेष के आलावा कुछ भी नहीं है जो यह साबित करे कि हम बन्दर से मनुष्य बने है। यह सब एक काल्पनिक कथा, कहानी बनायी गयी है, कि हम बन्दर से मनुष्य बने है। या अनुमान लगाया गया है कि शायद ऐसा हुआ होगा और इस तरह परिवर्तन हुआ होगा। हा बंदरो के शरीर कि रचना हम इंसानों के शरीर रचना जैसी ही दिखती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम यह मान ले कि हम बन्दर से ही मनुष्य बने है। यह सब लेखको कि कल्पना मात्र है और कुछ भी नहीं। सबने अपने अपने तर्क दिए है जिनको यह तर्क उचित लगा उन्होंने इस तर्क को सत्य मान लिया। यह सब एक रहस्य है जो किसी को भी नहीं पता है। प्रकृति अपने अन्दर असंख्य रहस्य समेटे हुए है, जिसे इंसान कभी समझ ही नहीं सकता है।


उदहारण के तौर पर बरमूडा ट्रेंगल को ही ले लीजिये। बरमूडा ट्रंगल भी एक रहस्यमयी जगह है जहा से कोई लौटकर नहीं आता। और भी कई अनेक रहस्य है। प्रकृति ने सबके ऊपर किसी न किसी को बिठाया है जिससे वह अपना संतुलन बना सके। जैसे कि घास को खाने के लिए शाकाहारी जानवर और उन शाकाहारी जानवरों को खाने के लिए मांसाहारी जानवर और उन मांसाहारी जानवरों को खाने के लिए छोटे छोटे जीव जंतु। इसी तरह प्रकृति ने एक एक श्रंखला बनायीं है, हम उससे बहार नहीं है और न ही उससे बहार जा सकते है। इसी तरह पृथ्वी अपना संतुलन बनाये रखती है। पृथ्वी के रहस्य को जान पाना समझ पाना संभव नहीं है इसके लिए पूरा जीवन भी कम पड़ जायेगा।


आज मनुष्य ने विज्ञान के क्षेत्र में बहुत तरक्की कर ली है लेकिन अभी भी प्रकृति के नियम को पूरी तरह नहीं समझ सका है, और न ही कभी समझ पायेगा। आज भी मनुष्य समुद्र के अन्दर का रहस्य सिर्फ पांच प्रतिशत ही देख और समझ पाया है। आज भी असंख्य प्रजाति के पशु पक्षी, कीड़े मकोड़े और जानवरो कि प्रजातियो को मनुष्य देख नहीं पाया है। आज भी हमें कही कही ऐसी प्रजाति के प्राणियों के मृत शरीर समुद्र से प्राप्त होते है जिसे हमने या किसी ने पहले कभी नहीं देखा होता है। जो आकार में विशालकाय होते है और इतने सालो से कहा थे इसका पता भी नहीं लगा पाया है। केवल मृत होने पर उनका मृत शरीर समुद्र के किनारे मिलता है तब पता चलता है कि ऐसा भी कोई जिव मौजूद था पृथ्वी पर।


कुछ बुद्धिजीवी ऐसे भी मौजूद है इस पृथ्वी पर जो थोडा सा ज्ञान प्राप्त कर लेने पर या कुछ पुस्तके पढ़ लेने के बाद अपने आप को सृष्टि का पालनहार भी समझने लगते है उन्हें लगता है कि जो वे देखते, सोचते और कहते है वही सच है। और उनके जैसा बुद्धिमान इस दुनिया में और कोई नहीं है। वे अपने आप को दुनिया से अलग समझने लगते है, अपने आप को सर्वश्रेठ समझने लगते है और सबसे अलग रहना सुरु कर देते है।


उदहारण के तौर पर देखे तो बिल्ली और बाघ कि बनावट भी एक जैसी ही दिखती है इसका मतलब यह नहीं है कि बिल्ली बाघ की पूर्वज है या बाघ बिल्ली का पूर्वज है। या बाघ समय परिवर्तन के साथ बिल्ली बन गए या बिल्ली में परिवर्तन होकर बाघ बन गए। क्योकि इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण किसी के पास नहीं है और न ही कोई वहां उस समय मौजूद था यह सब बन्दर से मनुष्य के रूप में बदलने कि प्रक्रिया देखने के लिए।


यदि हम बंदर से मनुष्य बने होते तो आज बन्दरो कि प्रजाति मौजूद नहीं होनी चाहिए थी? बंदरो कि सभी प्रजातिया या उनमे से कोई एक प्रजाति जो बन्दर से मनुष्य बन रही थी वह विलुप्त हो जानि चाहिए थी? लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। क्योकि जब बन्दर से मनुष्य बनने कि प्रक्रिया सुरु हुई तो अब वर्तमान समय में जो बन्दर और उसके कई प्रजातीया मौजूद है वे सब मनुष्य क्यों नहीं बने? आज के समय कोई बन्दर या बंदरो कि कोई प्रजाति मनुष्य में परिवर्तित होती क्यू नहीं दिख रही है? जो परिवर्तन हजारो लाखो साल पहले हुआ था मनुष्य बन्दर से इंसान बन रहा था वह प्रक्रिया अब क्यू नहीं हो रही है? वर्तमान समय में भी कई बंदरो कि प्रजातीया है। उनमे बदलाव क्यू नहीं आ रहा है? कही ऐसा तो नहीं कि यह बंदर से मनुष्य बनने कि प्रक्रिया केवल एक बार हो कर बंद हो गयी? उसके बाद मशीन में खराबी आ गयी और फिर उसके बाद बन्दर से बन्दर ही बनकर रह गये? दोबारा बन्दर से मनुष्य बनने कि कोशिश आज तक नहीं कि?


यह सब मात्र एक कल्पना है और कुछ भी नही। क्योकि बन्दर से मनुष्य बनने कि प्रक्रिया का उल्लेख और कही भी नहीं किया गया है। यह एक पहेली कि तरह है जैसे कि “पहले अंडा आया या मुर्गी“ इसका जवाब किसी के पास नहीं है। उसी प्रकार यह भी सत्य नहीं लगता है कि मनुष्य बंदरो से मनुष्य बना है।


कई लेखको ने तो यह भी कहा है कि मनुष्यों का पहला विकास लगभग पच्चीस लाख साल पहले पूर्वी अफ्रीका में वानरों के एक आरंभिक जींस औस्त्रलोपिथिकास से हुआ था जिसका मतलब है दक्षिणी वानर। लगभग बीस लाख साल पहले इनमे से कुछ आदिम पुरुष और स्त्रिया अफ्रीका, यूरोप और एशिया के इलाको में बसने के लिए चले गए। अब आप ही सोचिए पच्चीस लाख साल पीछे कैसे कोई जा कर यह सब देख सकता है क्या यह संभव है? यह केवल मात्र एक कल्पना है, एक अनुमान है या एक तर्क दिया है। यहाँ वास्तविक जीवन में बीस सेकेण्ड बाद में क्या होगा? कुछ नहीं कह सकते। परन्तु यहाँ लोगो ने एक दो वर्ष नहीं पच्चीस लाख वर्ष पहले कि बात कही है और लोग उनकी बातो को सच भी मन लेते है। किसी लेखक ने यह भी कहा है कि समाज को जोड़े रखने के लिए विभिन्न धर्म बनाए गए है और उन धर्मो पर आधारित विभिन्न कहानिया बनायी गयी है ताकि लोग आपस में जुड़े रहे। चलिए मान लिया क्योकि किसी में प्रत्यक्ष रूप से किसी भी धर्म के देवताओ को नहीं देखा है इसलिए उनकी बात सत्य हो सकती है। लेकिन यह भी तो हो सकता है कि जिस प्रकार धर्म कि कहानी बयानी गयी है, उसी प्रकार मानव जाती कि उत्पति कि भी कहानी बनायीं गयी हो कि मनुष्य बंदरो से मनुष्य बने है। क्योकि यह बंदरो से मनुष्य बनाने कि कहानी भी हम बचपन से ही सुन रहे है और यही बन्दरो मनुष्य बनाने कि कहानी हमारे पूर्वजो ने भी सुनि और सुनाई है। जिस तरह हम उनके द्वारा धर्म कि बाते सुनते है।


कई लेखको ने छोटे और बौने इंसानों का तर्क भी दिया है कि कई इलाको में बौने इंसान होते थे और कई तो वहां के परिस्थिति के कारण कई पीढियों के दौरान बौने हो गए। लेकिन यह सत्य नहीं लगता क्योकि बौने और ऊँचे लोग आज हर जगह मौजूद है। हमारे आस पास और हमारे घर में भी ऊँचे और बौने सदस्य है। जबकि हम सभी का कद हमारे जींस पर आधारित होता है यह वांशिक होता है। यदि माता पिता लम्बे होते है तो संतान भी लम्बी होती है। यदि माता पिता बौने है तो संतान भी बौनी होगी।


बन्दर से मनुष्य बनने का इतिहास सत्य होगा भी तो, यह इतिहास विदेशियों का होगा हम भारतवासियों का नहीं। जिस समय विदेशी लोग पत्थर रगड़ कर आग जलाना सीख रहे थे उसी समय भारत में ऋषि मुनि रसायन और मंत्र पढ़कर यज्ञ कुंड में बिना माचिस जलाये अग्नि को प्रवेश करा देते थे। भारत में विरासते और राज घराने हुआ करते थे जिसके प्रमाण आज भी पाए जाते है। हमारे भारत का इतिहास अद्भुत और अकल्पनीय है भारत कि तुलना विदेशो से करना मुर्खता है। ईस्वी सदी कि सुरुआत में जब अखंड भारत से अलग दुनिया के अन्य हिस्सों में लोग पढ़ना लिखना और सभ्य होना सिख रहे थे तो दूसरी ओर भारत में विक्रमादित्य, पाणिनि, चाणक्य जैसे विद्वान् व्याकरण और अर्थशाश्त्र कि नयी नयी इमारतें खड़ी कर रहे थे। इसके बाद आर्यभट्ट, वराहमिहिर जैसे विद्वान् अन्तरिक्ष कि खाक छान रहे थे।


वसुबन्धु, धर्मपाल, सुविष्णु, असंग, धर्मकीर्ति, शांताराक्षिता, नागार्जुन, आर्यदेव, पद्मसंभव जैसे लोग उन विद्यालयों में पढ़ते थे जो सिर्फ भारत में ही थे। तक्षशिला, विक्रमशिला, नालंदा, आदि अनेक विश्वविद्यलयो में देश विदेश के लोग पढ़ने के लिए आते थे। यदि आप भारतीय है तो गर्व कीजिये आप एक महान विरासत का हिस्सा है। अपने धर्म ग्रंथो का अध्ययन कीजिये और उनके ज्ञान से स्वयं को उन्नत और सर्वश्रेस्ठ बनाये। भारत के किसी भी ग्रन्थ या पुराण में इस तरह से मानव उत्पत्ति के जिक्र या उल्लेख कही नहीं है। भारत के वेदों और पुराणों में मानव कि उत्पत्ति का अलग विश्लेषण दिया गया है। जिसका उल्लेख हम हमारे अगले ब्लॉग में विस्तार से करेंगे।

Comments

Popular posts from this blog

Google Free AI Course: सर्च इंजन गूगल अपने यूजर्स के लिए कई तरह की सुविधाएं लाता रहता है. गूगल ने फ्री ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं. आज के ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए गूगल के फ्री एआई कोर्स की पढ़ाई करना बेहतरीन फैसला साबित हो सकता है. इसके लिए Google Cloud Skills Boost (cloudskillsboost.google) पर एनरोल कर सकते हैं.

Sinhasan Battisi सिंहासन बत्तीसी

शाहरुख खान की 'बेटी' सलमान के शो में आएगी नजर? Sana Saeed: सना सईद को लेकर कहा जा रहा है कि एक्ट्रेस सलमान खान के शो 'बिग बॉस ओटीटी 3' में एंट्री ले सकती हैं