कहते है अच्छी संगत का अच्छा नतीजा। जिसकी जैसी सोच होती है उसके दोस्त भी वैसे ही होते है।
आज हम २१ सदी में जी रहे है | २१ सदी में तकनीक (technology) अत्यधिक तेज गति से बढ़ती जा रही है। आज के युग में ज्यदातर लोगो कि दुनिया उनके मोबाइल फोन से ही सुरु होकर मोबाइल फोन में ख़तम हो रही है। अब सबकुछ मोबाइल फोन में ही सिमित हो गया है। कहने को सब सोशल मीडिया में एक्टिव है लेकिन सिर्फ डिजिटल तरीके से। सोशल मीडिया पर सबके पास हजारो मित्र होते है। लेकिन असल जिंदगी में एक भी मित्र नहीं होते है। २१ सदी के इस युग में सभी का जीवन इतनी तेज गति से चल रहा है कि किसी के पास किसी और से मिलने का समय ही नहीं मिल रहा है।
इसलिए हमें भी चाहिए कि हम सोशल मीडिया से बहार निकलकर भी देखे। सोशल मीडिया के बाहर भी बहुत ही खूबसूरत दुनिया है। और इस खूबसूरत दुनिया में अनेक खूबसूरत लोग भी है। जिसके लिए हमें सबसे एक सम्बन्ध बनाना चाहिए जो भी हमारे जीवन में आये। जिसमे सबसे अच्छा सम्बन्ध होता मित्रता का। जो किसी से भी किया जा सकता है। सम्बन्ध हो या रिश्ता इसका नियम भी पैसो कि तरह ही है। रिश्ते या संबंधो को भी कमाना पड़ता है और निभाना भी पड़ता है। नहीं तो सम्बन्ध या रिश्ते भी ख़तम हो जाते है।
इसी युग में एक और वर्ग के लोग भी रहते है। जो कि 60 वर्ष से अधिक हो गये है, रिटायर्ड हो चुके है। जिनके पास करने के लिए कुछ भी नहीं रहता है। उनके पास समय ही समय रहता है। इसलिए वे समय बिताने के लिए घंटो अपना समय गार्डन में बैठकर बिताते है।
ऐसे ही एक व्यक्ति है, जिनका नाम जीवनलाल है। जीवनलाल बहुत ही अच्छे स्वाभाव के व्यक्ति है और काफी समझदार भी है। वे भी रिटायर्ड हो चुके है। रिटायर्ड होने के बाद उन्हें जो भी पैसा मिला था उससे उन्होंने एक दूकान लेकर किराये पर चढ़ा दिये थे और कुछ पैसे बैंक में जमा कर दिये थे जिससे भी उनको कुछ रूपये ब्याज के रूप में मिल जाते थे जिससे उनका खर्चा आराम से चल जाता था। जीवनलाल के पास भी अब कुछ करने के लिए नहीं है। उनकी पत्नी का देहांत भी कुछ वर्ष पहले ही हो गया था, और उनकी कोई संतान भी नही थी। इसलिए वे काफी समय से अपना जीवन अकेले ही बिता रहे थे।
जीवनलाल काफी समझदार व्यक्ति है इसलिए वे संबंधो को भी अच्छी तरह से समझते थे। और उन्होंने अपने जीवन में सबसे अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखे थे। जरुरत पड़ने पर वे अपने दोस्तों कि मदद भी किया करते थे। उन्होंने अपने दोस्तों को यह भी बता दिया था कि उनके पास अब कितने पैसे है और कहा रखे है यह सब उन्होंने एक डायरी में लिख कर उसे अलमारी में रखा है। और साथ ही उन्होंने अपने लिए एक स्वास्थ्य बीमा (health insurance) लेकर रखा था और उसका पेपर भी अलमारी में है यह भी अपने सभी दोस्तों को बता दिया था। इसलिए वे हमेशा निश्चिन्त रहते थे।
जीवनलाल भी अपना समय बिताने के लिए गार्डन में जाया करते थे। वहा गार्डन में उनके कुछ मित्र भी आते थे। उनका यह सब रोज का कार्यक्रम था रोज सुबह शाम गार्डन जाना वहा घंटो बैठकर एक दुसरे से बाते करना, हसी मजाक और योगासन भी किया करते थे। यह सिलसिला कुछ वर्षो तक चलता रहा। सबकुछ ठीक चल रहा था। एक दिन ऐसा भी आया कि जीवनलाल गार्डन नहीं आये और उनके सभी मित्र अपने रोज के समय पर गार्डन में आ गये और रोज कि तरह बैठकर अपनी बाते करने लगे। कुछ देर के बाद जीवनलाल के मित्र उनको याद करने लगे और आपस में बाते करने लगे कि आज जीवनलाल अभी तक नहीं आये क्या हुआ होगा ? वे आपस में कुछ सोचने और अनुमान लगाने लगे कि शायद कुछ काम होगा या कही गए होंगे इसलिए नहीं आये।
फिर उनमे से एक मित्र ने जीवनलाल को फोन मिलाया, फोन कि घंटी बज रही थी लेकिन जीवनलाल ने फोन नहीं उठाया। जीवनलाल के मित्रो ने सोचा कि शायद वो कही व्यस्त होंगे इसलिए नहीं आये शाम को तो आ ही जायेंगे तब बात होगी। वक्त बीतता गया शाम हो गयी। शाम को भी जीवनलाल गार्डन में नही आये तब फिर उनके मित्रो ने उनको फोन मिलाया लेकिन फिर शाम भी जीवनलाल ने फोन नहीं उठाया। तब जीवनलाल के मित्र सोचने लगे कि शायद जीवनलाल कही बाहर गये होंगे इसलिए अभी तक घर नही लौटे होगे इसलिए नहीं आये यह समझकर वह बात वहीं ख़तम कर दिये।
अगले दिन फिर सुबह जब सब मित्र गार्डन में आये और देखा कि जीवनलाल आज भी गार्डन में नहीं आये है। फिर वही सिलसिला चला उनके दोस्तों ने फिर से फोन किया, फोन बजा और किसी जीवनलाल ने फोन नही उठाया। फिर से सब सोचने लगे कि शायद अभी तक वे बहार से नही लौटे होंगे इसलिए अभी तक नही आये। फिर उसी दिन शाम को भी सब जीवनलाल का इंतजार करने लगे। लेकिन शाम को भी जीवनलाल गार्डन में नही आये फिर उनके दोस्तों ने उनको फिन किया और जीवनलाल ने फोन नहीं उठाया। इस तरह पुरे दो दिन बीत गए।
अगले दिन सुबह जब जीवनलाल के सब मित्र गार्डन में इकठ्ठा हुए और जीवनलाल का इंतजार करने लगे, लेकिन जीवनलाल का कही कोई अता पता नहीं था। फिर सभी दोस्तों ने निर्णय लिया कि वे सब जीवनलाल के घर जायेंगे और जीवनलाल का पता लगायेंगे। फिर सभी दोस्त जीवनलाल के घर पहुच गए। वहा जाकर उन्होंने जीवनलाल के दरवाजे कि घंटी बजाई लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। उन्होंने काफी देर तक इन्तजार भी किया लेकिन किसी ने दरवाजा नही खोला। फिर उन्होंने जीवनलाल के पड़ोसियों को बुलाया। उनको भी कुछ पता नहीं था कि क्या मामला है। जीवनलाल को दो दिन से उनके पड़ोसियों ने भी नहीं देखा था। जीवनलाल ने अपने पडोसी के पास अपने घर कि एक डुप्लीकेट चाभी दे कर रखी थी। इसलिए जीवनलाल के पडोसी ने तुरंत जाकर उनके घर कि चाभी लायी और दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही घर के अन्दर का दृश्य देखते ही सब चौक गए थे।
सबने देखा कि जीवनलाल अपने बिस्तर पर पड़े थे और न ही कुछ बोल पा रहे थे और न ही हिल पा रहे थे क्योकि उनको पैरालिसिस का अटैक आया था। इसलिए वे दो दिन से ऐसे ही पड़े थे। जीवनलाल के दोस्तों ने उन्हें तुरंत उठाया और अस्पताल लेकर गए। जैसा कि जीवनलाल ने पहले ही अपने दोस्तों को अपने पैसो और एक स्वास्थ्य बीमा (health insurance) के बारे में बताया था। इसलिए जीवनलाल के दोस्तों ने उनके एक स्वास्थ्य बीमा का पालिसी का उपयोग किया और उन्हें अच्छे और बड़े अस्पताल में भर्ती कराया। और अपने जेब से भी जितना बन सका सबने पैसा लगाया और बारी बारी से उनकी सेवा भी की। तिन चार महीनो के इलाज़ और सेवा कि बदौलत जीवनलाल फिर से स्वस्थ हो गये। अपने समझदारी और अपने दोस्तों कि समझदारी बदौलत एक बार उनको फिर से नयी जिंदगी मिल गयी। उन्होंने अपने दोस्तों का धन्यवाद किया और उनके जो भी रूपये खर्च हुए थे उनके पीछे उसे भी लौटाया।
Comments
Post a Comment