भारत का सबसे पहला प्राचीन विश्वविद्यालय नालंदा संस्कृत के अनुसार नालंदा का अर्थ – “नालम् ददाति इति नालन्दा” मतलब कमल का फूल है. कमल के फूल के डंठल को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. “दा” का अर्थ देना है। अतः जहाँ ज्ञान देने का अंत न हो उसे नालंदा कहा गया है.

 बिहार राज्य की राजधानी पटना से 88 किलोमीटर तथा बिहार के प्रमुख तीर्थ स्थान राजगीर से 13 किमी की दूरी पर बड़ा गांव के पास प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर स्थित है.


नालंदा विश्वविद्यालय को दूसरा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है, प्राचीन काल में नालंदा में बौद्ध विश्वविद्यालय था, और एशिया में सबसे बड़ा स्नातकोत्तर शिक्षा का केन्द्र था. पांचवीं शताब्दी के आरम्भ से 700 वर्ष तक यहां बौद्ध धर्म दर्शन तथा अन्य विषयों की शिक्षा दी जाती थी. नालंदा की लाइब्रेरी में तकरीबन 90 लाख पांडुलिपियां और हजारों किताबें रखी हुई थी.


आज से लगभग ढाई हजार साल पहले एशिया में तीन विश्वविद्यालय थे. तक्षशिला, विक्रमशिला, नालंदा. तक्षशिला के बाद. नालंदा 800 साल तक अस्तित्व में रही. नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास चीन के ह्वेनसांग और इत्सिंग ने खोजा था. ये दोनों 7वीं शताब्दी में भारत आए थे. इन्होनें इसे दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय भी बताया था.


नालंदा विश्व की यह प्रथम पूर्णत: आवासीय विश्वविद्यालय थी और उस समय इसमें तकरीबन 10,000 विद्यार्थी और लगभग 2,000 अध्यापक थे. इसमें शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी आते थे. नागार्जुन, शीलमद्ध, आर्यदेव, संतरक्षित, वसुवंधु दिग्नाग, धर्मकीर्ति, कमलशील, अतिस, दीपकर, कुमारजीव, तथा पद्मसम्भव आदि आचार्यों ने यही से शिक्षा प्राप्त की थी, और विद्या की ज्योति विदेशों में ले गये थे.


नालंदा में लिटरेचर, एस्ट्रोलॉजी, साइकोलॉजी, लॉ, एस्ट्रोनॉमी, साइंस, वारफेयर, इतिहास, मैथ्स, आर्किटेक्टर, भाषा विज्ञानं, इकोनॉमिक, मेडिसिन आदि कई विषय पढ़ाएं जाते थे.


सम्राट अशोक ने 1200 गांव नालंदा विश्वविद्यालय के लिए दे दिए थे. कि इनसे जो भी आमदनी हो उससे विश्वविद्यालय का खर्च चलाया जाए. विद्यालय में विद्यार्थियों से कोई फीस नहीं ली जाती थीं, और उनको खाना पीना भी मुफ्त दिया जाता था. चीनी यात्री हवांग यांग के कथन के अनुसार नालंदा के विद्यार्थियों को खाने पीने के लिए भीक्षा नहीं मांगनी पड़ती थी. हवांग यांग के बाद इतिसंघ 673 ईसवी में भारत पहुंचा था उसने भी कई वर्ष तक नालंदा में विद्या ग्रहण की थी.


नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda Vishwavidyalaya) के अवशेष 1.5 लाख वर्ग फीट में मिले हैं. नालंदा विश्वविद्यालय सात मील लंबी और तीन मील चौडी भूमि में फैला हुआ था. ऐसा माना जाता है कि ये इस विश्वविद्यालय का सिर्फ 10% ही हिस्सा है. अर्थात ऐसा कहना गलत नहीं होगा की नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का दूसरा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है जिसे इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया था.


नालंदा विश्वविद्यालय का पतन कब और कैसे हुआ ?

अभिलेखों के अनुसार नालंदा विश्वविद्यालय को आक्रमणकारियों ने तीन बार नष्ट किया था.


पहला विनाश स्कंदगुप्त (455-467 ईस्वी) के शासनकाल के दौरान मिहिरकुल के तहत ह्यून के कारण हुआ था.


दूसरा विनाश 7वीं शताब्दी की शुरुआत में गौदास ने किया था.


तीसरा और सबसे विनाशकारी हमला 1193 में तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी और उसकी सेना ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda Vishwavidyalaya) को नष्ट कर दिया था.

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