Monday, June 19, 2023

क्रिया किसे कहते हैं?

 क्रिया परिभाषा: जिस शब्द से किसी काम (कार्य) को करने या होने का बोध हो अथवा किसी स्थिति का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं।

जैसे-

हाथी धीरे-धीरे चलता है।

मीरा झूला झूल रही है।

हवा बह रही है।

उपयुक्त उदाहरण में चलना, झूलना क्रिया है। क्योंकि इन शब्दों से किसी काम को करने या होने का बोध हो रहा है।

नोट- क्रिया के बिना वाक्य अधूरा होता है। वाक्य को पूरा करने के लिए क्रिया का होना अति आवश्यक है।


क्रिया कितने प्रकार के होते हैं?

क्रिया के दो प्रकार से भेद होते हैं।


1. कर्म के अनुसार

2. रचना के अनुसार

कर्म के अनुसार क्रिया के निम्नलिखित दो भेद होते हैं।


1. सकर्मक क्रिया

2. अकर्मक क्रिया

Kriya Kise Kahate Hain

रचना के अनुसार क्रिया के निम्नलिखित पाँच भेद होते हैं।


1. सामान्य क्रिया

2. संयुक्त क्रिया

3. नामधातु क्रिया

4. प्रेरणार्थक क्रिया

5. पूर्वकालिक क्रिया

Kriya Kise Kahate Hain

कर्म के अनुसार क्रिया के भेद


सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया के काम का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़े उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह रोटी खाता है।

उपर्युक्त उदाहरण में खाने (क्रिया) का फल रोटी (कर्म) पर पड़ रहा है।

कुछ और उदाहरण इस प्रकार हैं।

भोजन, देना, देखना, हंसना, पढ़ना आदि।


सकर्मक क्रिया के निम्नलिखित दो भेद होते हैं


1. एक कर्मक

2. द्विकर्मक

Kriya Kise Kahate Hain

एक कर्मक किसे कहते हैं?

जिस सकर्मक क्रिया का एक ही कर्म हो उसे एक कर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह किताब पढ़ता है।

उपयुक्त उदाहरण में पढ़ना “क्रिया” का एक ही कर्म “किताब” है।



द्विकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जो सकर्मक क्रिया दो प्रकार के कर्म को दर्शाता है उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।

द्विकर्मक क्रिया में पहला कर्म प्राणी वाचक तथा दूसरा कर्म में निर्जीववाचक होता है। इस तरह के वाक्य में प्राणीवाचक कर्म गौण होता है। जबकि निर्जीववाचक में मुख्य रूप से कर्म होता है ।

जैसे- शिक्षक छात्र को गणित पढ़ाते हैं।

उपयुक्त उदाहरण में “छात्र” पहला तथा प्राणीवाचक में है जबकि “गणित” दूसरा निर्जीववाचक कर्म है।

अकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया के काम का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पड़ता है उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे- राम खाता है।

सीता गाती है।

उपयुक्त उदाहरण में खाने, गाने का फल कर्ता पर पड़ रहा है।


रचना के अनुसार क्रिया के भेद


सामान्य क्रिया किसे कहते हैं?

जिस वाक्य में केवल एक ही क्रिया का प्रयोग होता है, उसे सामान्य क्रिया कहते हैं।

जैसे- रमेश गाया।

वह पढ़ा।


संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

जब दो या दो से अधिक धातुओं के मिलने से क्रिया बनती है तो, उसे संयुक्त क्रिया कहत हैं।

जैसे- रमेश घर पहुंच गया।

वह पढ़ने लगा।

उपयुक्त उदाहरण में पहुंच गया, पढ़ने लगा सभी क्रियाएं एक साथ मिलकर एक कार्य को पूर्ण कर रहे है। अतः यह सभी क्रियाएं संयुक्त क्रिया है।

संयुक्त क्रिया के मुख्यतः 11 भेद होते हैं।

1. आरंभ बोधक

2. समाप्ति बोधक

3. अवकाश बोधक

4. अनुमति बोधक

5. आवश्यकता बोधक

6. नित्यता बोधक

7. निश्चय बोधक

8. इच्छा बोधक

9. अभ्यास बोधक

10. शक्ति बोधक

11. पुनरुक्त संयुक्त क्रिया

Kriya Kise Kahate Hain

आरंभ बोधक किसे कहते हैं?

क्रिया के आरंभ होने का बोध कराने वाले संयुक्त क्रिया को आरंभ बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह रोने लगा।

सीता गाने लगी।

बारिश होने लगी।


समाप्ति बोधक किसे कहते हैं?

क्रिया के समाप्त होने का बोध कराने वाले संयुक्त क्रिया को समाप्ति बोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह सो चुका है।

राम जा चुका है।


अवकाश बोधक किसे कहते हैं?

जिस संयुक्त क्रिया से कर्ता (कारक) के किसी काम के लिए पहले से तैयार किया जाता है,उसे अवकाश बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- रुपए बहुत मेहनत से प्राप्त किए हैं, यह खोने ना पाए।


अनुमति बोधक किसे कहते हैं?

जिस क्रिया से कार्य करने की अनुमति लिया जाता है, उसे अनुमति बोधक कहते हैं।

जैसे- मैं खाना खा लूं?

मैं खेल लूं?


आवश्यकता बोधक किसे कहते हैं?

जिस संयुक्त क्रिया से कार्य की आवश्यकता का बोध हो उसे आवश्यकता बोधक कहते हैं।

जैसे- परीक्षा के लिए मुझे पढ़ाई करना आवश्यक है।

नित्यता बोधक किसे कहते हैं?

संयुक्त क्रिया से कर्ता के कर्म की निरंतरता का बोध हो उसे नित्यता बोधक कहते हैं।

जैसे- नदियाँ बहती रहती है।

दिन-रात निरंतर चलती रहती है।

उपयुक्त उदाहरण में क्रिया के साथ चलना, रहना जोड़ देने से हमें नित्यता का बोध होता है।


निश्चय बोधक किसे कहते हैं?

जिस संयुक्त क्रिया से कर्ता के क्रिया के निश्चितता का बोध हो अर्थात वह काम जो निश्चित रूप से किया जाए, उसे निश्चय बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- मैं कल अवश्य जाऊँगा।

मैं परीक्षा में अवश्य सफल होऊँगा।


इच्छा बोधक किसे कहते हैं?

जिस संयुक्त क्रिया से कर्ता के कार्य करने की इच्छा का बोध हो उसे इच्छा बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- मैं आम खाना चाहता हूं।

मैं घूमना चाहता हूं।


अभ्यास बोधक किसे कहते हैं?

संयुक्त क्रिया से कर्ता के अभ्यास करने का बोध हो उसे अभ्यास बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- मैं यह पाठ याद करता हूं।

मैं दौड़ने का अभ्यास करता हूं।


शक्ति बोधक किसे कहते हैं?

संयुक्त क्रिया से किसी कार्य को करने के लिए शक्ति का बोध हो उसे शक्ति बोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह पढ़ सकता है।

मैं वहाँ जा सकता हूं।

मैं पहाड़ पर चढ़ सकता हूं।


पुनरुक्त संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

जब दो सहचर शब्द अर्थात एक जैसे सुनने वाले क्रियाओं के सहयोग से होता है तो उसे पुनरुक्त संयुक्त क्रिया कहते हैं।

जैसे- वह रोटी-वोटी खाता है।

मैं वहाँ आता-जाता रहता हूं।

उपयुक्त उदाहरण में रोटी-वोटी,आता-जाता सहचर शब्द है।


नामधातु क्रिया किसे कहते हैं?

संयुक्त क्रिया में संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण शब्दों से युक्त क्रिया पदों को नामधातु क्रिया कहते हैं।

जैसे- हाथ-हथियाना

बात-बतियाना

पढ़ना-पढ़वाना


प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया से यह पता चलता है कि कोई कार्य कर्ता न करके किसी दूसरे से करवाता है या करने की प्रेरणा देता है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहता है।

जैसे- वह सीता से किताब पढवाती है।

राम बाजार से सब्जी मंगवाता है।

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