Friday, June 9, 2023

फिल्म 'ब्लडी डैडी' review

 


फिल्म 'ब्लडी डैडी' उन हिंदी भाषी दर्शकों के लिए है जो अपनी पसंद कभी 'द घोस्ट राइडर' तो कभी 'जॉन विक' सीरीज की फिल्मों से पूरी करते हैं। यहां शाहिद कपूर का किरदार देसी जॉन विक सरीखा है। वह नारकोटिक्स विभाग में काम करता है। ड्रग्स पकड़ता भी है और उसे हजम कर जाने के ख्वाब भी देखता है बस इस बार बीच में उसका बेटा आ जाता है। वह जंग लड़ने निकलता है उसके अपने विभाग के लोग उसे कदम-कदम पर धोखा देते रहते हैं। जबकि, उसका टारगेट है दिल्ली एनसीआर का एक ऐसा ड्रग माफिया किंग जिसकी जान 50 करोड़ रुपये की कोकीन में अटकी है। सुमैर के किरदार में शाहिद कपूर फिर से अपने अतरंगी मूड में हैं। अली अब्बास जफर ने एक विदेशी फिल्म को अपनी फिल्म का विषय बनाया है,


यह खबर जब से सार्वजनिक हुई है तब से इस फिल्म पर सबकी निगाहें लगी रही हैं। जियो सिनेमा ने इसे सिनेमाघरों में रिलीज क्यों नहीं किया, यह तो इसके कर्ता-धर्ता ही जानें, लेकिन सिनेमाघरों में जाने वाले दर्शकों का इन दिनों जो माहौल है, उसे सुधारने के लिए यह फिल्म बिल्कुल सही हिंदी फिल्म होती। अली की पिछली फिल्म 'जोगी' भी कमाल की फिल्म रही है और फिल्म 'ब्लडी डैडी' का कमाल उससे बिल्कुल अलहदा है। अली ने अपने कलाकारों का चयन भी फिल्म में बिल्कुल सटीक किया है। पहले 50 मिनट कब गुजर जाते हैं, पता भी नहीं चलता। यह फिल्म इस सप्ताहांत का परफेक्ट बिंज वॉच है। अली के सिनेमा में सामाजिक सटायर की जो एक अंतर्धारा हर फिल्म में बहती रहती है, उसका एक स्रोत यहां भी है। स्टीवन बर्नाड का संपादन और मारसिन लास्काविएक की सिनेमैटोग्राफी इस फिल्म के असल मस्तूल हैं। और, इनकी ऊंचाई इतनी शानदार है कि यह दिल्ली एनसीआर को भी लॉस वेगास बना देती हैं। क्लाइमेक्स के बीच में बादशाह का गाना बहुत चतुराई से बुना गया है। खालिस एक्शन फिल्मों के शौकीनों को यह फिल्म खूब पसंद आएगी।

Movie Review

ब्लडी डैडी

कलाकार

शाहिद कपूर , डायना पेंटी , रोनित रॉय , राजीव खंडेलवाल , विवान भटेना , अंकुर भाटिया और और संजय कपूर आदि

लेखक

अली अब्बास जफर और आदित्य बसु (फ्रेडरिक जार्डेन की फ्रेंच फिल्म ‘नुई ब्लॉन्श’ पर आधारित)

निर्देशक

अली अब्बास जफर

निर्माता

ज्योति देशपांडे , हिमांशु किशन मेहरा और अली अब्बास जफर

ओटीटी

जियो सिनेमा

रिलीज

9 जून 2023

रेटिंग

 3.5/5

No comments:

Post a Comment

महिलाओं को राजनीति में आरक्षण प्रतिनिधित्व या प्रतीकात्मकता?

 भारत में महिलाओं को राजनीति में आरक्षण देने का उद्देश्य केवल उनकी संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्हें वास्तविक सत्ता और निर्णय लेने की ताकत...