सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग | Sabse Bada Rog Kya Kahenge Logदुनिया को छोड़ो पहले उसे खुस रखो जिसको तुम रोजाना आईने में देखते हो।

 लोगो का क्या है वो कुछ कुछ न कुछ बोलते ही रहेंगे। कुछ करो तब भी बोलेंगे और कुछ न करो तब भी बोलेंगे।


कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना, छोडो बेकार कि बाते कही बीत न जाए रैना। इसलिए सुनो सबकी और करो अपने मन कि जो आपका दिल कहे लेकिन आपकी वजह से किसी को कष्ट न पहुचे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।


मनुष्य का स्वभाव ऐसा है की वह अपने आप को न देख कर दुसरो की ओर पहले देखता है की लोग क्या कह रहे है उसके बारे में?, क्या बाते करते है उसके और उसके काम के बारे में? मनुष्य जब भी कुछ नया करने जाता है तो वह पहले ये सोचने लगता है की लोग क्या कहेंगे। इसी कारण वह बहोत सारे काम छोड़ देता है लोगो के डर से।


यह कहना गलत नहीं होगा की हमारे समाज में ऐसे कुछ दोगले इंसान बस्ते है जिनका काम सिर्फ दुसरो की पैरो की ज़ंजीर बनना होता हैं। वे स्वयं तो कोई कार्य करते तो नहीं है पर जब कोई दूसरा व्यक्ति करने जाता है तो सवाल खड़े करने लगते है ताने मारने लगते है जैसे की अगर किसी दूसरे की बहु नौकरी करने लगे तो उसके काम करने पे ऐतराज जताने लगते है, पहनावे पे उल्टी उल्टी बाते करने लगते है।


गलती उनकी नहीं है जो कमेंट पास करते है बल्कि गलती तो उनकी है जो उनकी बातो में आकर अपना काम नहीं करते है और स्वयं का नुक्सान कर बैठते है। चलिये एक उदाहरण के माध्यम से समझाता हूँ।


बहुत समय पहले कि बात है। एक गॉंव में एक परिवार रहता था, जिसमे एक बाप और बेटे रहते थे। जिनके पास एक गधा था, जिसपर वे सामान लादकर ले जाते आते थे। एक बार वह बाप बेटे किसी काम से अपने गधे को लेकर बाज़ार जा रहे थे। बाप बेटे दोनों पैदल ही जा रहे थे और गधे पर कोई सामान भी नहीं रखा था गधा भी आराम से चल रहा था।


क्यू न हम इस गधे पर बैठ कर शहर जाए। फिर सोचने लगे कि अब इसपर बैठेगा कौन? फिर उस आदमी ने अपने बेटे को उस गधे पर बिठा दिया और चलने लगे। फिर कुछ दूर जाने पर रस्ते में कुछ लोग फिर कहने लगे कि देखो कितना स्वार्थी बेटा है खुद गधे पर बैठकर आराम से जा रहा है और बुढा बाप पैदल जा रहा है इसको अपने बाप कि बिलकुल भी चिंता नहीं है।


यह सब सुनने के बाद वह बाप और उसका बेटा फिर आपस में बात करने लगे और सोचने लगे कि अब क्या किया जाए लोग बोल रहे है। तभी कुछ देर सोचने के बाद बेटा गधे पर से उतर जाता है और उसका बाप उस गधे पर बैठ जाता और फिर वे बाज़ार कि तरफ जाने लगते है।


कुछ दुरी तय करने के बाद और कुछ लोग उन्हें रास्ते में मिलते है और वे बोलते है कि देखो कितना स्वार्थी बाप है, देखो खुद तो मजे से गधे पर बैठकर जा रहा है और बेटे को पैदल लेकर जा रहा है इसे अपने बेटे कि बिलकुल चिंता नहीं है। यह सब सुनने के बाद वे दोनों फिर आपस में बाते करते है और कुछ सोचने लगते है थोड़ी देर सोचने के बाद वे दोनों बाप और बेटे गधे पर बैठ कर बाज़ार कि ओर जाने लगते है।


और कुछ दूर जाने के बाद फिर से कुछ लोग रास्ते में दीखते है और बोलते है कि देखो ये कितने स्वार्थी लोग इन्हें इस बेजुबान गधे पर बिलकुल भी दया नहीं आ रही है दोनों इसपर बैठ कर जा रहे है। ये बिचारा गधा कैसे इनका बोझ लेकर जा रहा है। यह बात सुनकर बाप और बेटे दोनों गधे से उतर जाते है और फिर से पैदल चलने लगते है।

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