Thursday, July 6, 2023

झारखंड में 2019 के एक लिंचिंग मामले में जिला अदालत ने 10 आरोपियों को 10 साल के कैद की सजा सुनाई है. एक मुसलमान युवक को खंभे से बांध कर पीटा गया था और उससे 'जय श्रीराम' के नारे लगवाए गए थे.

 


चार साल पुराने इस मामले में गुरुवार को अदालत ने सजा सुनाई है. अदालत ने इस केस में हरे एक दोषी पर 15-15 हजार का जुर्माना भी लगाया है. इसी मामले से जुड़े दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है जबकि एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई. इस फैसले पर पीड़ित परिवार ने असंतोष जताया है और इस मामले को ऊंची अदालत में चुनौती देने की बात कही है.


सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भी नहीं थमी मॉब लिंचिंग


पूरा मामला

2019 में झारखंड के सरायकेला खारस्वान जिले में तबरेज अंसारी नाम के एक युवक की मौत हुई थी. तबरेज अंसारी पुणे में काम करता था और ईद मनाने अपने घर आया था. 18 जून को ढाकीडीह गांव की घटना में अंसारी को खंभे से बांध कर बुरी तरह पीटा गया था और उससे 'जय श्रीराम' और 'जय हनुमान' के नारे लगवाए गए थे. इस घटना का वीडियो देश भर में वायरल हुआ था जिसमें उसे हाथ जोड़ कर लोगों से गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगते देखा जा सकता था. बाद में पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया. पुलिस ने उसका बयान रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने कथित रूप से चोरी की बात कबूल की थी.


अदालती कार्रवाई

चार दिन बाद जेल में उसकी तबियत बिगड़ गई और फिर उसे जमशेदपुर के अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने लिंचिंग का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करना शुरू किया. लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने 10 लोगों को इस मामले में दोषी करार दिया था. अदालत ने आरोपियों को आईपीसी की धारा 304 के तहत 'गैरइरादतन नरसंहार (हत्या नहीं)' का दोषी माना है. हालांकि तबरेज अंसारी की मौत के बाद आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 295 ए (जानबूझ कर किसी वर्घ विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करना) के तहत शिकायत दर्ज की गई थी.



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