Sunday, July 23, 2023

Manipur Unrest: मणिपुर में जातीय हिंसा होते हुए 80 दिन से ज्यादा बीत गए. हिंसा के दौरान महिलाओं के साथ दरिंदगी की कई घटनाएं सामने आई हैं.

 Manipur Violence: मणिपुर में बीती 3 मई को जातीय हिंसी की आग भड़की, जो अभी तक सुलग रही है. 83 दिनों से जारी हिंसा में 160 लोग मारे जा चुके हैं. कई महिलाओं को अगवा कर उनके साथ गैंगरेप किया गया और फिर उनका कत्ल कर दिया गया. ऐसी ही एक महिला की मां ने अपनी बेटी के साथ हुई दरिंदगी की घटना की खौफनाक कहानी बताई है. उनकी बेटी उन दो महिलाओं में शामिल थी, जिनके साथ हिंसा शुरू होने के दो दिन बाद 5 मई को गैंगरेप किया गया था और बाद में हत्या कर दी गई.



एनडीटीवी से बातचीत में आदिवासी महिला की मां ने बताया कि फोन पर उनसे पूछा गया तुम अपनी बेटी को जिंदा देखना चाहती हो या मरा हुआ? फोन पर बात करने वाली भी महिला ही थी. बाद में उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी मर चुकी थी.


आज तक नहीं मिला बेटी का शव


परिवार को आज भी बेटी के शव का इंतजार है. महिला ने कहा, 'मैं आज भी विश्वास नहीं कर पा रही हूं कि मेरी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है. कभी-कभी उम्मीद होती है कि मेरी बेटी लौट आएगी, क्योंकि मैंने उसे अपनी आंखों से नहीं देखा है. मैं आज भी भरोसा नहीं कर पा रही कि मेरी बेटी के साथ क्या हुआ है.'


एक कमरे में कैद कर रखी गई थी बेटी


एनडीटीवी ने एक चश्मदीद के हवाले से लिखा कि दोनों को सात पुरुषों ने एक रूम में बंद कर रखा था. वो छोड़ देने के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन किसी को उन पर रहम नहीं आया. घटना को देखने वाले एक शख्स ने बताया कि महिलाओं की भीड़ ने पुरुषों को दोनों पर हमला करने के लिए उकसाया था.


महिला की मां ने बताया, हिंसा की वजह से मैं परेशान थी, इसलिए मैंने उसे कॉल किया. एक महिला ने फोन उठाया और पूछा कि मैं अपनी बेटी को मुर्दा देखना चाहती हूं या जिंदा. इसके बाद उसने फोन काट दिया.' इसके बाद मां ने अपने दूसरे बच्चों को फोन किया और उन्हें इस बारे में बताया. इस वाकये के कुछ दिन बात उन्हें फोन आया और बताया गया कि उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं है.



Manipur Violence Video: महिलाओं को बिना कपड़ों के घुमाए जाने के मामले में मणिपुर पुलिस ने अभी तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है.


मणिपुर में 4 मई को महिलाओं को बिना कपड़ों के भीड़ के साथ सरेआम घुमाने की घटना को लेकर पुलिस का एक्शन जारी है. मामले में पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है, जिसके बारे में पुलिस का मानना है कि इसी फोन का इस्तेमाल घटना का वीडियो बनाने में किया गया है. मोबाइल फोन को पुलिस की जांच में बेहद महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है.



मणिपुर पुलिस ने रविवार (23 जुलाई) की रात ट्वीट कर बताया कि गिरफ्तार किए गए 5 आरोपियों को 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी की जा रही है.


साइबर सेल को भेजा गया फोन


हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक फोन जब्त किया गया है और इसे साइबर सेल को भेजा गया है. हमें पूरा विश्वास है कि ये वही फोन है जिससे वीडियो रिकॉर्ड किया गया था.


पकड़े गए छह आरोपियों से पुलिस घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए पूछताछ कर रही है. 4 मई को कांगपोकपी जिले में भीड़ ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सरेआम घुमाया था. इस घटना का वीडियो दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद 19 जुलाई को वायरल हुआ था, जिसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद 20 जुलाई को पुलिस ने मामले में पहली गिरफ्तारी की थी. 


अधिकारी बोले- अफवाहों के चलते बढ़ी हिंसा


मणिपुर में तीन मई से भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हुई है. पीटीआई के अनुसार, राज्य में हालात पर नजर रखने वाली विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि हिंसा को बड़े पैमाने पर अफवाहों और फर्जी खबरों के कारण बढ़ावा मिला.


अधिकारियों के मुताबिक, दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने से संबंधित चार मई की घृणित घटना के पीछे भी एक अफवाह ही वजह बनी, जो पॉलीथिन में लिपटी एक महिला के शव की तस्वीर के सोशल मीडिया पर आने के बाद हुई थी. इस तस्वीर को लेकर झूठा दावा किया गया था कि पीड़िता की चुराचांदपुर में आदिवासियों ने हत्या कर दी थी. इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि बाद में पता चला कि तस्वीर राष्ट्रीय राजधानी में हत्या की शिकार एक महिला की है, लेकिन उस समय तक घाटी में हिंसा भड़क चुकी थी और अगले दिन जो देखा गया, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया.






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