Tuesday, July 4, 2023

Supreme Court: दिल्ली सेवा अध्यादेश पर केंद्र-एलजी को नोटिस जारी, DERC चेयरमैन के शपथग्रहण पर हफ्तेभर की रोक

 भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग मामले में लाए गए अध्यादेश की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर आज सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) के चेयरमैन के तौर पर रिटायर्ड जस्टिस उमेश कुमार के शपथग्रहण पर भी 11 जुलाई तक के लिए रोक लगा दी है।


चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मामले पर सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख मुकर्रर की और केंद्र तथा अन्य से सुनवाई से एक दिन पहले अपने जवाब दाखिल करने को कहा।


एलजी ने दिया था 10 बजे तक शपथ दिलाने का निर्देश

उपराज्यपाल वीके सक्सेना के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के नामित अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उमेश कुमार को मंगलवार सुबह 10 बजे तक शपथ दिलाने का निर्देश देने के बावजूद उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई। दिल्ली की विद्युत मंत्री आतिशी कुमार को पद की शपथ दिलाने वाली थीं, लेकिन अचानक उन्हें कुछ ‘‘स्वास्थ्य संबंधी’’ समस्याएं होने के कारण कार्यक्रम छह जुलाई तक के लिए टाल दिया गया।


अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली सरकार ने लगाई याचिका

गौरतलब है कि अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग मामले में केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। दिल्ली सरकार ने कहा था कि केंद्र सरकार का अध्यादेश असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आप सरकार ने केंद्र सरकार के अध्यादेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई।


अब तक क्या-क्या हुआ? 

पहले दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग उप-राज्यपाल करते थे। इसके खिलाफ दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार को दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली में ग्रुप-ए अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण गठित करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया। इस अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश निष्क्रिय हो गया। अरविंद केजरीवाल की सरकार इस अध्यादेश का विरोध कर रही है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं मान रही और ये अध्यादेश असंवैधानिक है। 


अदालत के साथ राजनीति के मैदान में भी लड़ रहे हैं केजरीवाल

केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल दो तरह से लड़ रहे हैं। पहला वह इसके खिलाफ विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरा सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मसले पर समर्थन के लिए आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कई विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात भी कर चुके हैं। 


NHRC में खाली पदों को भरने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस 

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में खाली तीन पदों को भरने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने योग्य नोटिस जारी किया है। 


शीर्ष अदालत ने कहा कि मौजूदा सीटें 11 सितंबर, 2021, 4 जनवरी, 2023 और 4 अप्रैल, 2022 को खाली हो गईं। शीर्ष अदालत वकील राधाकांत त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें एनएचआरसी में रिक्त पदों को भरने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।


पीठ ने कहा कि एनएचआरसी में तीन सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की विफलता आयोग के कामकाज को प्रभावित कर रही है। इसका सीधा असर कानून के शासन और न्याय प्रशासन पर पड़ता है।


सुप्रीम कोर्ट में कल होगी याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में तीस्ता सीतलवाड़ की उस अर्जी पर बुधवार को सुनवाई होगी। जिसमें गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। गुजरात हाई कोर्ट ने शनिवार को तीस्ता को तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उसी दिन देर रात में सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई कर तीस्ता को राहत प्रदान की थी। 

एम3एम मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की कठोर शक्तियों पर लगाम की जरूरत


सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गुरुग्राम स्थित रियल्टी समूह एम3एम से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की गई। इस मामले में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ सुनवाई कर रही थी। इस दौरान रियल्टी समूह एम3एम के निदेशकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने शीर्ष कोर्ट से केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों पर लगाम लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के लिए कड़ी शक्तियां दी गई हैं। इन शक्तियों पर लगाम लगाने की जरूरत है।


 वकील हरीश साल्वे ने कहा कि ईडी को दी गई कठोर शक्तियां पर अगर अदालत लगाम नहीं लगाती है, तो इस देश में कोई भी सुरक्षित नहीं है। इस दौरान उन्होंने कंपनी के निदेशकों की गिरफ्तारी के तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल धन शोधन मामले की जांच में सहयोग कर रहे थे। उसके बाद भी उनकी गिरफ्तारी की गईय़ यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है। इन शक्तियों पर लगाम लगाने की जरूरत है।


इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने अपना आदेश सुनाया। पीठ ने बंसल बंधुओं को अग्रिम जमानत के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट जाने के लिए कहा। जहां उनकी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।


साल्वे और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी एम3एम के निदेशकों बसंत बंसल और पंकज बंसल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। दोनों को एक पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ रिश्वत मामले से संबंधित मनी-लॉन्ड्रिंग जांच में गिरफ्तार किया गया था। बंसल बंधुओं को ईडी ने 14 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें हरियाणा के पंचकुला में एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।


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