शिक्षण का अर्थ – शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिससे छात्रों के लिए सीखना सरल होता है। शिक्षण में वे गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिन्हें विद्यार्थियों को सिखाने के लिए उपयोग किया जाता है। अध्यापक विद्यार्थियों को सिखाने हेतु प्रेरित करता है। इस प्रकार शिक्षण अध्यापक एवं छात्र के बीच होने वाली अन्तक्रिया है। अध्यापक एवं छात्र के बीच होने वाली अन्तक्रिया को आसानी से समझा जा सकता है
शिक्षण की अवधारणा में वे क्रियाएँ आती है जो छात्रों को शिक्षा दने हेतु प्रयुक्त की जाती हैं। शिक्षक छात्रों को बेहतर ज्ञान देने हेतु कई तरीके अपनाता है। वह छात्रों को विषय-बिन्दु बताने का प्रयास करता है तथा छात्रों को प्रेरणा देता है। शिक्षण प्रक्रिया से शिक्षक एवं छात्र सन्तुष्ट होते हैं तथा दोनों अपने उद्देश्यों को प्राप्त करते हैं।
शिक्षण की विशेषताएँ/प्रकृति निम्नलिखित है
1. शिक्षण एक विज्ञान है। शिक्षण से विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकरणों के बारे में कारण व वास्तविकता का ज्ञान प्रदान किया जाता है।
2. शिक्षण प्रभावाशाली तरीके से छात्रों को ज्ञान देने की एक कला होती है।
3. शिक्षण व्यक्तिगत, सामाजिक व शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रयत्न होता है।
4. शिक्षण में ज्ञान, दक्षता व गुणधर्म का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।
5. शिक्षण सतत्गामी प्रक्रिया होती है।
6. शिक्षण छात्रों को सामाजिक मूल्यों का अवबोध कराता है।
7. शिक्षण में परामर्श एवं निर्देशन शामिल होता है।
8. शिक्षक एवं छात्र के बीच होने वाली अन्तक्रिया को शिक्षण कहा जाता है।
9. अपने विषय का अच्छा ज्ञान रखने वाला शिक्षक अच्छा शिक्षण कार्य करने मे सक्षम हो सकता है।
10. शिक्षण औपचारिक व अनौपचारिक हो सकता है।
11. शिक्षण में सम्प्रेषण किया जाता है।
12. शिक्षण से छात्र वातावरण व समाज के साथ समायोजन स्थापित करने में सक्षम बनते हैं।
13. शिक्षण से छात्र ज्यादा से ज्यादा सीखने हेतु प्रेरित होते है।
14. शिक्षक, छात्र एवं शिक्षा तीनों शिक्षण के प्रमुख आयाम हैं।
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