Saturday, November 18, 2023

First Arghya Today: चारदिवसीय छठ पर्व का आज तीसरा दिन है। आज आज संध्याकाल में सूर्यदेव को पहला अर्ध्य दिया जाएगा, जिसके लिए घाटों पर अभी से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। मालूम हो कि शनिवार को खरना के बाद से व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ हो गया था, जो कि सोमवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देने के बाद ही खत्म होगा।

 आपको बता दें कि ये पूजा काफी मानक है और इस पूजा का वर्णन महाभारत और रामायण दोनों में हैं। कहते हैं कि भगवान राम को रावण वध के पाप से मुक्त कराने के लिए माता सीता ने चार दिवसीय छठ की पूजा की थी और उन्हें हत्या वाले भाव से मुक्त करवाया था ।


महाभारत में भी छठ पूजा का जिक्र

तो वहीं महादानवीर कर्ण जो कि सूर्य पुत्र थे, वो सूर्यदेव की पूजा पानी में रोज खड़े होकर करते थे, तब से ही ये पानी में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा होने लगी। यही नहीं पांडव जब अपना सबकुछ कौरवों से जुएं में हार गए थे तब द्रोपदी ने ही कार्तिक मास में षष्ठी तिथि को सूर्य देव की उपासना की थी और इसके बाद पांडवों को अपना वैभव प्राप्त हुआ था।



संकल्पमय उपवास


आपको बता दें कि छठ जहां लोगों को प्रकृति से जोड़ता है वहीं ये एकता का पाठ पढ़ाता है। दरअसल ये व्रत इंसान को समाज से जोड़ता है। इस व्रत को सफल बनाने के लिए व्रती के साथ पूरा परिवार और समाज जुड़ जाता है। इसलिए यह व्रत संकल्पमय उपवास भी कहलाता है।


अर्घ्य के समय जपें यह मंत्र

'ॐ सूर्याय नम:,

ॐ भास्कराय नम:,

ॐ मित्राय नम:,

ॐ भानवे नम:,

ॐ खगय नम:,

ॐ पुष्णे नम:,

ॐ मारिचाये नम:,

ॐ आदित्याय नम,

ॐ सावित्रे नम:,

ॐ आर्काय नम:,

ॐ हिरण्यगर्भाय नम।

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