महामारी में आया एक आइडिया, बना दी करोड़ों की कंपनी श्रेयन डागा कहते हैं कि वह 8 साल की उम्र से उद्यमिता केे क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं. वह जब स्कूल में थे तो उन्होंने बच्चों को 45 परसेंट ब्याज पर लोन देना शुरू कर दिया था.
कामयाब होने की कोई उम्र नहीं होती. श्रेयन डागा ने इस बात को सही साबित कर के दिखाया है. जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद रहे होते हैं उस उम्र में डागा ने अपनी पहली सैलरी कमा ली थी. 3 साल की उम्र से पेंटिंग कर रहे श्रेयन ने 10 साल की उम्र में कोडिंग सीख ली और अपनी पहली वेबसाइट भी बना ली. श्रेयन ने इसी समय अपनी पहली पेटिंग बेचकर 9000 रुपये भी कमा लिए. श्रेयन पिछले साल शार्क टैंक इंडिया में भी नजर आए थे. उन्होंने तब बताया कि था वह स्कूल में बच्चों को लोन दिया करते थे. लोन पर ब्याज की दर 40-50 फीसदी थी.
डागा जब 13 साल के थे और 7वीं क्लास में पढ़ रहे थें तभी उन्होंने स्टॉक मार्केट में इंटर्नशिप शुरू कर दी थी. डागा बताते हैं कि उनके पिता भी निवेशक हैं. उन्होंने अपने पिता से 2 लाख रुपये लेकर एक स्टार्टअप शुरू किया और उन्हें वो पैसे कई गुना रिटर्न के साथ लौटा दिए. डागा ने 10वीं के बाद स्कूल छोड़ दिया और पूरी तरह अपने स्टार्टअप के लिए समर्पित हो गए.
क्या है डागा का स्टार्टअप
महामारी के दौरान डागा को एक आइडिया जिससे वह टीचर्स को वैरिफाइड कोर्स शुरू करने में मदद करने वाले थे. इन कोर्सेज को एक्सट्रा करिकुलर एक्विटीज की तरह बच्चों को पढ़ाया जाना है. ऐसा दावा है कि एक्स्ट्रा करिकुलर होने के साथ-साथ ये कोर्सेज भविष्य में एक जरूरी स्किल के रूप में बच्चों के काम आएंगे. डागा ऑनलाइन लाइव लर्निंग सेशन में स्कूल और बच्चों के अभिभावकों को कनेक्ट करते थे और बताते थे कि उनके बच्चे भविष्य को ध्यान में रखते हुए कौन से स्किल डेवलपमेंट कोर्स चुन सकते हैं.
हर घंटे 2000 की कमाई
हर लाइव सेशन में 5-15 बच्चे होते हैं. इसकी फीस 133 रुपये प्रति व्यक्ति है. अगर एक सेशन में 15 लोग हैं तो उन्हें हर सेशन से करीब 2000 रुपये हासिल होते हैं. डागा का यह आइडिया शार्क टैंक में भी पसंद किया गया और पिछले साल उन्हें विनीता सिंह और पियूष बंसल से 5 परसेंट इक्विटी पर 30 लाख रुपये की फंडिंग भी मिली थी. उनकी कंपनी का वैल्युएशन तब 6 करोड़ रुपये हो गया था
Comments
Post a Comment