Friday, June 16, 2023

सफलता का रहस्य

 एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है ?


सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो.वो मिले।


फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया ।


लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा ।


फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हॉफते-हाँफते तेजी से सांस लेना ।


सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे ?”


लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना” सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है।

बादशाह और माली

फारस देश का बादशाह नोंशेरवा अपनी न्यायप्रियता के लिए बहुत प्रसिद्ध हो गया था ।

वह बहुत धनी भी था।

एक दिन वह अपने मंत्रियों के साथ घूमने निकला ।

उसने देखा कि एक बगीचे में एक बहुत बूढ़ा माली अखरोट के पेड़ लगा रहा है।

बादशाह उस बगीचे में गया उसने मालि से पूछा – ” तुम यहां नौकर हो या यह तुम्हारा ही बगीचा है ?”

माली – ” मैं नौकरी नहीं करता | यह बगीचा मेरे ही बाप-दादों का लगाया है ।

बादशाह – ” तुम यह अखरोट के पेड़ लगा रहे हो | क्या तुम समझते हो कि इनका फल खाने के लिए तुम जीवित रहोगे ।

” अखरोट का पेड़ लगाने के बीस बरस बाद फलता है| यह बात प्रसिद्ध है ।

बूढ़े माली ने बादशाह की बात सुनकर कहा – ” मैं अब तक दूसरों के लगाए पेड़ों के बहुत फल खा चुका हूं।

इसलिए मुझे भी दूसरों के लिए पेड़ लगाने चाहिए ।

अपने फल खाने की आशा से ही पेड़ लगाना तो स्वार्थपरता है।

बादशाह माली के उत्तर से बहुत प्रसन्न हुए।

उसने उसे पुरस्कार में दो अशरफिया दी।

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