गढ़कुंडार किला | Garh Kundar Fort
बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में स्थित गढ़कुंडार किला मध्य भारत के राज्य के उत्तर दिशा में स्थित एक छोटे से गांव की पहाड़ी पर बना हुआ है गढ़ कुंडार किला ओरछा से केवल 70 किलोमीटर दूर है।
मध्यप्रदेश को विरासत में मिला यह किला प्रेम लालच और भयानक तोड़फोड़ का महान इतिहास संजोए हुए है। गढ़कुंडार का किला इतिहास नागदेव, रूपकंवर और उनकी प्रेमिका के व्यक्तित्व से बना है। इनके प्रेम की कहानियां आज भी बुंदेलखंड के लोकगीतों में शामिल है।
गढ़कुंडार किला 12 किलोमीटर दूर से आंखों से दिखता है लेकिन जब किले के पास पहुंच जाते हैं तो यह विलीन हो जाता है और किले को ढूंढना मुश्किल दिखता है।
सन 1539 इसवी तक गढ़कुंडार का किला राज्य की राजधानी हुआ करता था जिसको बाद में बेतवा नदी के तट पर ओरछा में स्थानांतरित कर दिया गया था।
पूरी बारात हो गई थी गायब | Garh Kundar Fort History In Hindi
गढ़कुंडार का किला के बारे में कई भूतिया कहानियां कहीं जाते है। स्थानीय लोगों के द्वारा भी गढ़कुंडार लेकर किले को लेकर कई कहानियां प्रचलित है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि आन 1 सालों पहले गढ़कुंडार किले में घूमने के लिए आई बारात गायब हो गई थी बारात का आज तक कोई भी सुराग सबूत नहीं मिल पाया है गढ़कुंडार किले में गायब हुई है बरात आज भी रहस्य बनी हुई है।
कैसे एक व्यक्ति बताते है कि यहां गांव में एक बारात आई थी जिसमें करीब 50 लोग शामिल थे सभी लोग गढ़कुंडार किले को घूमने के लिए गए बताते हैं कि बारात घूमते घूमते अंदर चले गए जहां कोई नहीं पहुंच सकता था।
गढ़कुंडार किले का जमीन के भीतर भी कुछ हिस्सा बताया जाता है। गढ़कुंडार किले में जाने की बात बारात कभी वापस नहीं आई। पूरी की पूरी बारात यहां गायब हो गई कुछ लोग बताते है कि इस घटना के बाद जमीन से जुड़े सभी दरवाजों को बंद कर दिया गया।
गढ़कुंडार किले के बारे में स्थानीय लोग ज्यादा कुछ नहीं बताते लेकिन उन लोगों गढ़कुंडार किले का नाम आते ही स्थानीय लोगों के चेहरों पर एक अजीब सी अजीब सा को पसर जाता है। जिससे यह दिखाई यह प्रतीत होता है कि गढ़कुंडार किला रहस्य से भरा पड़ा है।
एक मुख्य रहस्य यह भी है की किला भूल भुलैया और अंधेरा होने के कारण दिन में भी बहुत डरावना लगता है।
जीनागढ़ के महल से था प्रचलित | Garhkundar Fort Haunted History In Hindi
प्रथवीराज चौहान की प्रमुख और उनके करीबी दोस्त खेत सिंह थे जो मूल रूप से गुजरात राज्य से थे जिन्होंने युद्ध में परमल शासक शिव को हराया और गढ़कुंडार के लिए पर कब्जा कर खंगार वंश की नींव रखी। गढ़कुंडार किला जूनागढ़ के महल के नाम से प्रचलित था। खेत सिंह खंगर था जिसने गढ़कुंडार किले की नींव रखी और जीजा का भक्ति क्षेत्र में खंगर के शासन को मजबूत किया।
साल 1212 ईसवी में खेत सिंह की मृत्यु हो गई और उनकी मृत्यु के बाद खंगार वंश की पांचवी पीढ़ी ने गढ़कुंडार किले में शासन किया। कई सालों बाद खेत सिंह के पोते राजा खूबसिंह खंगर में जीनागढ महल को मजबूत किया और इसका नाम बदलकर गढ़कुंडार किला रख दिया।
खंगर शासक ने गढ़कुंडार किले पर 1347 तक शासन किया। जिसके बाद मोहम्मद तुगलक इस किले पर अपना कब्जा कर लिया। बुंदेल शासकों को प्रभारी नियुक्त कर दिया। नागदेव खंगर वंश के आखिरी शासक थे जिनको खंगार सेना के जनरल के साथ मार दिया गया। जिसमें कई शासकों ने भाग लिया था। उस समय मुगल शासकों ने मुगलों की छत्रछाया में अपना राज शासन चलाया था। बुंदेल राजा वीर सिंह देव ने गढ़कुंडार किले के नवीनीकरण का काम किया और इसके वर्तमान रूप को बनाया।
गढ़कुंडार किले की दंग करने वाली विशेषता | Garh Kundar Fort Story
गढ़कुंडार किले की दीवारों की उचाईन डेढ़ सौ फीट है। जहां 400 फीट चौड़ाई का और 20 फुट ऊंचाई का प्रवेश द्वार है। परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाहरी दीवार में टावर है। गढ़कुंडार का किला के बारे में मुगल शासक की प्रसिद्ध किताब अकबरनामा में भी बताया है उनका कहना है कि गढ़कुंडार किला एक हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है जिसको इस तरह से बनाया गया है कि नए आगंतुकों किले में आने वालों के लिए यह एक पहेली बनी रहे।
गढ़कुंडार का किला खुले विशाल आंगन की पास बनाया है। गढ़कुंडार किला रेत से निर्मित है जो स्थानीय क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध है। इसके कमरों को इस तरह से बनाया गया है कि कमरे के अंदर से बाहर के लोगों को देखा जा सकता है लेकिन बाहर से अंदर के व्यक्तियों को नहीं देखा जा सकता। महल में किले में कुछ और चट्टानों पर शिलालेख भी मौजूद है।
गढ़कुंडार का किला में जाते हैं तो आपको बाई तरफ एक छोटा सा सैनिक बैरक होता है दक्षिणी सेना में किले के मुख्य पहाड़ टावर परिषद के दक्षिण पूर्व पर है। गढ़कुंडार किला स्तंभों पर खड़ा है और बहुमंजिला बहुमंजिला परिसर है प्रत्येक मंजिल के निर्माण में प्राकृतिक सूर्य प्रकाश जल आपूर्ति शौचालय घास भंडारण आदि का विशेष ध्यान रखा गया है।
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