ताजमहल की तर्ज पर अलीगढ़ की जामा मस्जिद में भी कई टन सोना जड़ा है। यह मस्जिद एशिया की इकलौती मस्जिद है, जिसके गुंबद और मीनारों पर सोना मढ़ा हुआ है। मस्जिद के 17 गुंबद ठोस सोने से बनाए गए है जबकि ताजमहल और स्वर्ण मंदिर में सिर्फ सोने की परत चढ़ाई गई है।
खासियत यह भी है कि इसका प्रेम के प्रतीक ताजमहल से भी कनेक्शन है। बताया जाता है कि ताजमहल के मुख्य इंजीनियर ईरान के अबू ईसा अंफादी के पोते ने जामा मस्जिद का निर्माण कराया था।
1857 की क्रांति से भी है संबंध
अलीगढ़ की जामा मस्जिद देश की ऐसी पहली मस्जिद है, जहां पर 1857 की क्रांति के 73 शहीदों की कब्रें है। इस वजह से इसे गंज-ए-शहीदान यानी शहीदों की बस्ती भी कहा जाता है।
जामा मस्जिद में करीब 5,000 लोग एक साथ बैठकर नमाज अदा कर सकते है। इसमें महिलाओं के लिए अलग से नमाज अदा करने की व्यवस्था है।
मस्जिद के गुंबद पर खास लेप
गाइड शम्सुद्दीन बताते हैं कि जामा मस्जिद गुंबद पर शीप व खास तरह के रंगीन पत्थरों का लेप किया गया है। इससे मस्जिद पर चढ़ना बड़ा मुश्किल है।
कारीगरी में समानता
ऊपरकोट में स्थित जामा मस्जिद का निर्माण हजरत नवाब साबत खां, मुगल तातार जंगे बहादुर ने करवाया था। मस्जिद का निर्माण 1714 में शुरू हुआ था और 1741 में बनकर तैयार हुई। गौर से देखेंगे तो जामा मस्जिद और ताजमहल की कारीगरी में बहुत समानताएं देखने को मिलती है।
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