Monday, July 10, 2023

BJP अध्यक्ष बदलने पर पार्टी ले सकती है फैसला, इस चेहरे को कमान मिलने के आसार,हरियाणा में

 साल 2024 में चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो चुकी हैं. कुछ दिन पहले ही BJP ने 4 राज्यों के अध्यक्ष बदलने की घोषणा की थी. हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष बदलने की भी सूचना मिल रही है. वहीं, हरियाणा में अध्यक्ष ओपी धनखड़ का कार्यकाल पूरा हो चुका है. इसके तहत, नए अध्यक्ष की घोषणा की जा सकती है.


इस बार जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद से सांसद कृष्णपाल गुर्जर और पूर्व मंत्री राम विलास शर्मा के नाम पर चर्चा हो रही है. सूत्र बताते हैं कि रामविलास शर्मा पहले भी हरियाणा बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं इसलिए इस बार कृष्णपाल गुर्जर पर दांव आजमाया जा सकता है.


देश में चुनावी मोड में BJP

देश में बीजेपी चुनावी मोड में है. लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, इसे लेकर हाईकमान लोकसभा के साथ- साथ विधानसभा चुनाव की भी तैयारी करने के मूड में है. यही वजह है कि राज्य में संगठन में बदलाव कर पार्टी समय रहते लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी कर सकती है. राज्य में जाट वोटरों को साधने के लिए ओम प्रकाश धनखड़ को कमान सौंपी गई थी.


प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए लेकिन जातीय समीकरण के लिहाज से कोई खास सफलता नहीं मिली. अब आलाकमान राज्य में आगामी चुनाव नए समीकरण के तहत लड़ सकता है.


क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों पर होगा काम

इस बार हरियाणा में लोकसभा चुनाव की तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है. पिछली बार मोदी कार्ड के चलते हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें बीजेपी की झोली में चली गई थीं लेकिन इस बार ये सिर्फ मोदी कार्ड के सहारे होता नहीं दिख रहा है. किसान आंदोलन से हरियाणा में एक वर्ग सरकार से नाराज है. इसीलिए सूत्र बताते हैं कि बीजेपी न सिर्फ कई लोकसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार बदल सकती है बल्कि क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों पर भी काम कर रही है.


बीजेपी फूंक- फूंक कर रख रही कदम

सूत्रों की मानें तो पार्टी के आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि प्रॉपर्टी आईडी और परिवार पहचान पत्र को लेकर लोगों को हो रही परेशानी से लोग राज्य सरकार से काफी नाराज हैं. इसलिए बीजेपी आगामी चुनाव में अपना कदम फूंक- फूंक कर रख सकती है ताकि राज्य सरकार की नाराजगी का असर लोकसभा चुनाव पर न पड़े. जिसके चलते संगठन बदलाव करने की तैयारी में है. पिछले कुछ महीनों से जिस तरह से हरियाणा में मौजूदा सांसदों ने अपने- अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रुकी हुई परियोजनाओं पर न केवल रिपोर्ट लेना शुरू कर दिया है.



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