Thursday, July 13, 2023

आज के दिन भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की उपासना करने से जीवन धन समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और कई प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है। जानते हैं तुलसी से जुड़े कुछ प्रभावशाली वास्तु उपाय।

 Vastu Upay: आज यानी 13 जुलाई के दिन कामिका एकादशी व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन में आ रहे कष्ट दूर हो जाते हैं और जातकों को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बता दें कि आज के दिन तुसली की पूजा का भी विशेष महत्व है।


मान्यता है कि आज के दिन विधि-विधान से तुलसी पूजन करने से और ज्योतिष में बताए गए कुछ नियमों का पालन करने से, माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साधक को धन-धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं तुलसी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम, जिनका करना चाहिए नियमित रूप से पालन


तुलसी के वास्तु नियम (Tulsi ke Vastu Niyam)

वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी को किसी भी अपवित्र स्थान पर नहीं रखना चाहिए। साथ ही तुलसी पौधे के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर-परिवार में सकरात्मक उर्जा का संचार निरंतर बना रहता है।


तुलसी के पौधे को हर समय घर के ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। साथ ही पूर्व दिशा या उत्तर दिशा भी उपयुक्त मानी जाती है। लेकिन पौधे को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए।


घर या बगीचे में तुलसी का पौधा लगाने के लिए शुक्रवार, शनिवार या गुरुवार का दिन बहुत उपयुक्त है। इसके साथ रविवार के दिन तुलसी का पौधा कभी न लगाएं ऐसा करना नुकसानदेह हो सकता है।


तुलसी के पौधे को एकादशी अथवा रविवार के दिन भूलकर नहीं छूना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु क्रोधित हो सकते हैं। साथ ही जीवन में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि घर के बागीचे में मुरझाए हुए तुलसी के पौधे को नहीं रखना चाहिए। ऐसा होना अशुभ माना जाता है। इसलिए मुरझाए हुए पौधे की देखभाल करें और मृत पौधे को जल में प्रवाहित कर उसकी जगह नया पौधा लगा दें।

No comments:

Post a Comment

महिलाओं को राजनीति में आरक्षण प्रतिनिधित्व या प्रतीकात्मकता?

 भारत में महिलाओं को राजनीति में आरक्षण देने का उद्देश्य केवल उनकी संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्हें वास्तविक सत्ता और निर्णय लेने की ताकत...