Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल की धूल हवा में मंडराने के एक दिन बाद विपक्षी महा विकास अघाड़ी युद्ध के मूड में आ गई है. सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने भविष्यवाणी की है कि राज्य को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलेगा. मीडियाकर्मियों से बात करते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना के सीएम एकनाथ शिंदे के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं, उनकी सहयोगी बीजेपी को भी इस बात का एहसास हो गया है.
एकनाथ शिंदे को बताया अस्थायी मेहमान
राउत ने कहा, 'वह एक 'अस्थायी मेहमान' ('कुछ दिनों का मेहमान') हैं. शिंदे सहित 16 विधायकों की अयोग्यता पर स्पीकर का फैसला जल्द आना है. बीजेपी को एहसास हो गया है कि शिंदे की उपयोगिता खत्म हो गई है और एनसीपी में फूट पड़ गई है बाद में अपनी स्थिति को सुरक्षित रखना है.' सेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि अजित पवार रिकॉर्ड 5वीं बार डिप्टी सीएम बने हैं, 'लेकिन उनका लक्ष्य बड़ा है, सीएम का पद.
'राज्य में सत्ता परिवर्तन होगाः संजय राउत
राउत ने दोहराया, 'स्पीकर के फैसले के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा और अजीत पवार का सौदा शीर्ष पद के लिए है. राज्य को जल्द ही एक नया सीएम मिलेगा.' उन्होंने कहा कि मई में कर्नाटक में मिली हार से भाजपा बौखला गई है और हाल के सभी सर्वेक्षण यह संकेत दे रहे हैं कि जब भी यहां चुनाव होंगे तो महाराष्ट्र में उसकी और भी बुरी पराजय होगी.
'राज्य में अपनी स्थिति बचाने के लिए किया जा रहा'
उन्होंने घोषणा की, 'यह सब राज्य में अपनी स्थिति बचाने के लिए किया जा रहा है. पहले उन्होंने शिवसेना को तोड़ा और अब उन्होंने राकांपा को विभाजित कर दिया है, लेकिन राज्य के लोग यह सब देख रहे हैं और उन्हें नहीं बख्शेंगे.'
सरकार के कान खींचते हुए राउत ने अफसोस जताया कि रविवार (2 जुलाई) को शनिवार तड़के बुलढाणा बस त्रासदी के 25 (26 में से) पीड़ितों के शव, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों से थे, का सामूहिक दाह संस्कार किया जा रहा है.
राउत ने कहा, 'जैसे ही उनकी चिताएं जलीं, मुंबई में राजभवन में जहां नए उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों ने शपथ ली, वहां खुशियां मनाई गईं, हाथ मिलाया गया और गले मिले... यह अनुचित था, उन्हें कम से कम अपने जश्न से पहले दाह संस्कार की आग बुझने का इंतजार करना चाहिए था.'
अयोग्यता पर उचित कदम उठाऊंगा: महाराष्ट्र विस अध्यक्ष
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सोमवार को कहा कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की एकनाथ शिंदे नीत सरकार में शामिल होने वाले अजित पवार तथा पार्टी के आठ अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिका पर उचित कदम उठाएंगे. राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने रविवार को बताया था कि उनकी पार्टी ने अजित पवार तथा आठ अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में अप्रत्याशित टूट से न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर पड़ेगा. दरअसल देश में कई दलों ने मिलकर केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार के खिलाफ एक विकल्प तैयार करने की कोशिश की है. इस क्रम में पहली बैठक पटना में हो चुकी है और दूसरी बैठक जल्द ही हो सकती है. एकनाथ शिंदे नीत सरकार में शामिल होने के लिए अजित पवार द्वारा अपने चाचा एवं राकांपा प्रमुख शरद पवार का साथ छोड़ने से विपक्षी एकता कायम करने के 15 पार्टियों के कदम को बड़ा झटका लगा है.
विपक्ष की एकता पर सवाल
इन विपक्षी दलों ने पिछले महीने पटना में एक बैठक की थी. हालांकि, रविवार के घटनाक्रम से पहले ही विपक्ष में एकता कायम करने की कोशिशें बड़े विपक्षी दलों के बीच मतभेदों से प्रभावित हुईं. इनमें आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच खुला बैर तथा पश्चिम बंगाल में तृणमूल और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप शामिल हैं. केरल में भी कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) चिर प्रतिद्वंद्वी हैं.
अजित पवार के हालिया कदम ने विपक्षी एकता की कोशिशों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि विपक्षी पार्टियां 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी नीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सामूहिक रूप से कड़ी चुनौती देने की उम्मीद कर रही हैं.
महाराष्ट्र में भाजपा का फिर से उभरना
भाजपा और शिंदे नीत शिवसेना से हाथ मिलाने के अजित पवार के फैसले ने संक्षिप्त अवधि के लिए दरकिनार रहने के बाद, एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में इसे (भाजपा को) स्थिति को नियंत्रित करने वाली पार्टी की भूमिका में ला दिया है. अब यह (भाजपा) एक बहुत मजबूत गठबंधन बनाने की स्थिति में है, जिससे लोकसभा चुनावों के दौरान राज्य में उसकी पकड़ मजबूत हो सकती है. इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), शरद पवार की राकांपा और कांग्रेस की भागीदारी वाले महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन को मिली किसी भी तरह की बढ़त को समाप्त कर दिया है.
कांग्रेस अलग-थलग पड़ी
सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार के समर्थक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पटना में शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ मंच साझा करने को लेकर नाराज हैं. यह घटनाक्रम और कांग्रेस एवं शक्तिशाली क्षेत्रीय दलों के बीच तकरार से यह सवाल पैदा होता है कि क्या क्षेत्रीय क्षत्रप विपक्षी गठबंधन में राहुल के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे.
शरद पवार की भूमिका घटी
किसी समस्या का समाधान करने के लिए चतुराई से और अप्रत्याशित कदम उठाने वाले एक मंझे हुए राजनेता माने जाने वाले शरद पवार के बारे में ऐसा प्रतीत होता है कि अजित पवार की मदद से भाजपा द्वारा चली गई राजनीतिक चाल से उन्हें शिकस्त मिली है. शरद पवार की रणनीति और विचार सोमवार को स्पष्ट होंगे, जब वह सार्वजनिक रूप से बयान देने वाले हैं.
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