Meghalaya Winter Capital Row: मेघालय में तुरा को राज्य की शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग तेजी हो गई है. ऐसे में सवाल यह भी है कि तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है?

 मेघालय के कुछ समूह तुरा को शीतकालीन राजधानी करने की मांग कर रहे हैं. इस मांग के कारण भीड़ ने सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय पर उस समय हमला किया जब वो तुरा में मीटिंग कर रहे थे. हमले में 5 पुलिस कर्मी घायल हुए. यह नया मामला नहीं है. इससे पहले ही तुरा को राजधानी बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए. हिंसा और झड़प की खबरें आईं.


कुछ समूहों की मांग के कारण मेघालय में नई बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई तुरा राज्य की शीतकालीन राजधानी होनी चाहिए या नहीं. ऐसे में सवाल यह भी है कि तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है और इसका क्या मतलब है.


तुरा को राजधानी बनाने के लिए क्या तर्क दिए गए?

तुरा को शीतकालीन राजधानी बनाने की मांग प्रमुखतौर पर दो संगठन ने की. ACHIK (कॉन्शियस होलिस्टिकली इंटीग्रेटेड क्रिमा) और GHSMC (गारो हिल्स स्टेट मूवमेंट कमेटी). 11 जुलाई को ACHIK नेताओं ने तुरा को शीतकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की और अक्टूबर से मार्च तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी घोषणा की. इस ऐलान के बाद राज्य में हिंसा और झड़प की खबरें आने लगीं. इस ऐलान से पहले अप्रैल में संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांग रखी. संगठन का कहना था कि मुख्ममंत्री ने उनकी मांग को मानने का वादा भी किया.


तुरा को राजधानी बनाने के लिए पत्र में कई तर्क दिए गए. ACHIK का कहना है कि इससे पूरे राज्य में विकास की रफ्तार तेज होगी. सुविधाओं का बंटवारा होगा. विकास एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. ट्रांसपोर्ट की सुविधाओं में तेजी आएगा. सर्दी में यहां का मौसम भी बेहतर रहता है कि इसलिए इसे शीतकालीन राजधानी बनाना बेहतर फैसला साबित होगा.


ACHIK का तर्क है राजधानी बनने से यहां के स्थानीय समूहों के बीच आपसी संवाद और सद्भाव बढ़ेगा. तर्क यह भी दिया कि इससे गारो पहाड़ी वाले हिस्से में सामाजिक और आर्थिक विकास होगा. शिलांग को सर्दियों में राहत मिलेगी जब पर्यटन अपने पीक पर होता है. अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी.


अब हालिया विवाद की वजह भी समझ लेते हैं

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ACHIK और GHSMC समूह के साथ इनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठक कर रहे थे. इसी दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय के बाद भीड़ पहुंची और नारे लगाने लगे. भीड़ हिंसात्मक रूप लेने लगी और मुख्यमंत्री कार्यालय पर पथराव करने लगे. मामला आगजनी और तोड़फोड़ तक पहुंच गया. हालांकि सुरक्षा बलों के जरिए मुख्यमंत्री को बचाया गया.


प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने एक्शन लेते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े. लाठी चार्ज करके प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा. इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए. तुरा में कर्फ्यू लगा दिया गया. शहर के कई हिस्सों में भी उग्र प्रदर्शन की खबरें आईं.


हर कोई सहमत नहीं

संगठन की मांग से राज्य में हर कोई सहमत नहीं नजर आ रहा है. मेघालय की स्वास्थ्य मंत्री अम्पारीन लिंगदोह ने ACHIK की मांग को खारिज किया है. उनका कहना है कि शिलांग पहले से राजधानी है. अगर हर जिला यह कहने लगा यह इस जिले में लाओ और वो मेरे जिले में लाओ, तो मुश्किल हो जाएगी. प्रशासन के लिए इसे संभालना दिक्कतभरा हो जाएगा

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