कथा का दूसरा रूप
यह कथा एक और तरीके से भी कही जाती है। एक बार की बात है कि काशमीर में अली मदान खान नाम का एक राजा राज करता था।
एक दिन वह शालीमार के पास शिकार खेलने के लिये गया। वहाँ दो आदमी उसके पास आये और उससे बोले — “राजा साहब अगर आप हमारी बात सुन लेंगे तो हमें बड़ी खुशी होगी। हमारी प्रार्थना है कि आप इस जगह से आगे न जायें। कहीं ऐसा न हो कि अजगर आपको निगल जाये। यह अजगर यहाँ अक्सर घूमता रहता है।”
राजा बोला — “आप लोग यह क्या बेहूदी बात कर रहे हैं।”
वे आदमी बोले — “नहीं हम कोई बेहूदा बात नहीं कर रहे हैं। हम आपको सच बता रहे हैं। हमने उसे अपनी आँखों से देखा है। वह हर शाम पानी पीने के लिये झील के किनारे जाता है और इसी जंगल से गुजरता है। आपको पहले से सावधान करना हमारा फर्ज था बाकी आप जानें। हम आपसे फिर प्रार्थना करते हैं कि आप यहाँ से आगे न जायें।”
“ठीक है।” कह कर राजा ने अपना घोड़ा वापस किया और अपने घर चला गया। घर जा कर उसने अपने वजीरों को जो कुछ उसने आज सुना था वह सब कहने के लिये बुलाया। यह सब बता कर उसने उनसे उनकी सलाह माँगी कि उस अजगर को कैसे मारा जाये।
उन्होंने उसको सलाह दी कि बहुत सारी भेड़ों की खाल चूने से भर कर उसी रास्ते पर डाल दी जायें जहाँ से वह अजगर रोज पानी पीने जाता था। साथ ही जहाँ वह अजगर पानी पीता था उसी जगह के पास दो गड्ढे खोद दिये जायें जिनमें तेल भरवा दिया जाये।
उनका सोचना यह था कि जब अजगर चूना भरी भेड़ की खाल देखेगा तो सोचेगा कि वे असली भेड़ हैं और उनको निगल लेगा। इसके अलावा जब वह तेल से भरे गड्ढे देखेगा तो उसे लगेगा कि वे पानी से भरे हैं और उनमें से तेल पी कर अपनी प्यास बुझाने की कोशिश करेगा।
इस तरह से उसके पेट में बहुत ज़ोर की जलन होगी जो उसको मार देगी। राजा ने उनकी सलाह मान ली उसको काम में लाया गया और इस तरह से अजगर को मार दिया गया।
अली मर्दान खान उसका ढाँचा देखने के लिये गया और अपने सिपाहियों से उसको जलाने के लिये कहा। उसने दो बूढ़े लोगों की सहायता से उसकी वह गुफा भी ढूँढी जिसमें वह रहता था और उसके अन्दर गया।
वहाँ उसको एक बन्द दरवाजा मिला जिसे उसने खोला। यह दरवाजा एक कमरे में खुलता था। इस कमरे में उसको एक छोटा सा बक्सा मिला और इस बक्से को खोलने पर उसमें रखा एक पत्थर मिला। इत्तफाक से यह पत्थर संगी पारस निकला जिसके छूने से हर धातु सोना बन जाती है। वह उसे उठा लाया।
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