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Showing posts from April, 2024

कृतघ्न प्राणी (कहानी) : गोनू झा

 मिथिला नरेश की जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वे मनमौजी होते जा रहे थे। कई बार तो दरबारी उनके व्यवहार से चकित हो जाते और आपस में बतियाते कि महाराज तो इन दिनों सनकी होते जा रहे हैं । जब देखो तब बेतुकी बातें करने लगते हैं । एक दिन ऐसे ही मिथिला नरेश दरबार में बहक गए और दरबारियों से पूछा -" आप में से कोई बता सकता है कि संसार का सबसे कृतघ्न प्राणी कौन है?" दरबारी अटकलें लगाने लगे। एक ने कहा -" शेर महाराज, शेर। शेर से बड़ा कृतघ्न प्राणी भला कौन होगा ? बड़े से बड़ा जानवर उससे घबराता है । खरगोश हो या हाथी, सबको चटकर जाता है। एक बार पेट भर जाए तो पन्द्रह दिनों तक हिलता-डुलता नहीं। अघाया हुआ पड़ा रहता है।" दूसरे ने कहा “अरे महाराज ! यही आदत तो बाघ, चीता, तेंदुआ आदि में भी है। आखिर यह कैसे तय होगा कि इनमें से कौन कृतघ्न है ?" तीसरे ने कहा -" महाराज, सबसे कृतघ्न प्राणी लकड़बग्घा होता है । शरीर से कुछ और सिर से कुछ और दिखता है । छोटे जीवों और कमजोर बच्चों को अपना आहार बनाता है ।" मतलब यह कि दरबार में बतकही का दौर चला तो चलता ही रहा । गोनू झा इन बातों में र...

ठग उन्मूलन अभियान (कहानी) : गोनू झा

 मिथिला में चोर -उचक्कों और ठगों का कभी बहुत जोर था । चोर-उचक्कों के इस जोर के कारण ही कोई अजनबी न तो मिथिला जाना चाहता था और न वहाँ के लोगों से मेल -जोल बढ़ाने का ही साहस कर पाता था । मिथिलांचल नरेश ने चोरी और ठगी रोकने के कई उपाय किए लेकिन सारे विफल रहे । एक दिन उन्होंने गोनू झा से कहा -" अब आप ही कोई उपाय करें पंडित जी ! राज्य में चोरी और ठगी की घटनाएँ इतनी बढ़ गई हैं कि पड़ोस के राज्यों से कोई मिथिला भ्रमण के लिए आना ही नहीं चाहता । मिथिला की कलात्मक तस्वीरों के लिए पहले यहाँ पर्यटकों की भीड़ लगी रहती थी । मिथिला अपने प्राकृतिक रंग-निर्माण के लिए अपनी प्रसिद्धि के कारण व्यापारियों को भी आकर्षित करता था । मखाने की खेती में यह क्षेत्र अव्वल है लेकिन चोरों और ठगों के उत्पात के कारण अब मखाने के व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है । मिथिला की मछलियाँ दूर-दराज तक के खरीददार ले जाया करते थे लेकिन मछलियों की माँग भी कम होती जा रही है । यदि यही हाल रहा तो राजस्व में कमी आएगी और हमें नए कर लगाने होंगे। इससे हमारी प्रजा पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव आएगा । यह उचित नहीं होगा । मुझे विश्वास है पंडित ...

मिथिला से चोरों का सफाया (कहानी)

 मिथिलाँचल जिस तरह मछली और मखाने के लिए प्रसिद्ध रहा है, कभी यह चोरों के उत्पात के लिए भी उतना ही बदनाम था । मिथिला नरेश चोरों के उत्पात से तंग आ चुके थे । चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि से राज्य की सुरक्षा-व्यवस्था के आगे सवालिया निशान आ खड़ा हुआ था । बाजार, गली, मुहल्ला, कोई स्थान सुरक्षित नहीं था । किसी ने बाजार में कुछ खरीदा और उस सामान को बगल में रखकर प्याऊ पर पानी पीने लगा । पानी पीकर बगल से सामान उठाने लगा तो देखा, उसका सामान गायब । रोज दरबार में महाराज के सामने कोई न कोई फरियादी अपनी ऐसी ही शिकायत के साथ उपस्थित होता । महाराज को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वे चोरी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए आखिर कौन सा कदम उठाएँ। अपने खुफिया-तंत्र के शीर्ष अधिकारी से इस प्रसंग में कई बार बातें कर चुके थे लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया था । एक दिन दरबार के समापन पर, महाराज ने गोनू झा को रोक लिया । सभी दरबारियों के चले जाने के बाद महाराज गोनू झा के साथ राजमहल की फुलवारी की ओर निकल गए । गोनू झा समझ रहे थे कि महाराज किसी गम्भीर समस्या पर विचारमग्न हैं । वे महाराज के साथ मूक बने फुलवारी ...

कंजूस राजा को नसीहत (कहानी) : गोनू झा

 मिथिला नरेश के दरबार में गोनू झा के बुद्धिकौशल और वाक्चातुर्य का जो जादू चल रहा था उसकी कीर्ति मिथिलांचल के आस -पास के क्षेत्रों में भी फैल चुकी थी । मिथिला के पड़ोसी राज्य अंग देश के राजा ने राज्योत्सव के कई अवसरों पर गोनू झा को विशेष रूप से आमंत्रित किया था तथा उन्हें पुरस्कार-अलंकरण आदि से सम्मानित किया था । अंग देश के राजा में उदारता थी लेकिन युवराज अपने पिता के ठीक विपरीत प्रवृत्ति के थे। हद से ज्यादा मितव्ययी । राजा के जीवनकाल में ही युवराज की कंजूसी की कथाएँ पूरे प्रदेश में मशहूर हो चुकी थीं । राजा ने युवराज को बहुत समझाया कि प्रजा -पालन के लिए उदारता, करुणा, सहानुभूति आदि की भी जरूरत होती है । इन गुणों को राजा का आभूषण माना जाता है। परम्परा से चली आ रही रीतियों का निर्वाह भी राजनीति का एक महत्त्वपूर्ण अंग है । ब्राह्मण, चारण आदि को राज्याश्रय मिलना चाहिए। कलाकारों और साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य की ओर से प्रतियोगिताओं का आयोजन और पुरस्कारों की व्यवस्था राजधर्म है । खिलाडियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए भी राजकोष का उपयोग किया जाना चाहिए । जैसे सैनिकों को तरोत...

खेत की सिंचाई (कहानी) : गोनू झा

 शातिर चोरों को हवालात की सैर करवाने के कारण गोनू झा पूरे मिथिलांचल के चोरों की आँखों की किरकिरी बन गए। मिथिला में ठग और चोर गोनू झा से बदला लेने की ताक में रहने लगे। ठगों और चोरों की नाक में नकेल डालने के कारण मिथिला नरेश की दृष्टि में गोनू झा का सम्मान और बढ़ गया । लंगडू उस्ताद के गिरोह के कुछ लोग कारावास से सजा काटकर बाहर आए। कारावास से छूटने से पहले उन्होंने लंगडू उस्ताद के सामने शपथ ली कि जब तक गोनू झा से बदला नहीं ले लेंगे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। गोनू झा इस स्थिति का अनुमान उस दिन ही लगा चुके थे जिस दिन उनके दरवाजे पर लंगडू उस्ताद का गिरोह गिरफ्त में आया था इसलिए उन्होंने कोतवाल को कुछ आवश्यक निर्देश दिए थे। कोतवाल गोनू झा का अहसानमंद था क्योंकि चोर गिरोह की गिरफ्तारी के बाद गोनू झा की अनुशंसा पर महाराज ने उसकी पगार बढ़ा दी थी । एक तरह से पूरी मिथिला से अपराधियों का सफाया हो चुका था जिसके कारण कोतवाल भी निश्चिन्त था । रसिक प्रवृत्ति का कोतवाल मौज-मस्ती में डूबा रहने लगा । उन दिनों मिथिला में भाँग और ताड़ी का नशा प्रचलन में था लेकिन रसिक कोतवाल अपने लिए पश्चिम बंगाल से मदिर...

चोरों ने तौबा कर ली (कहानी)

 गोनू झा और चोरों के बीच आँख -मिचौली बरसों चलती रही। गोनू झा महाराज को वचन दे चुके थे कि उनके रहते मिथिला में चोरों का मनोबल बढ़ने नहीं दिया जाएगा । संयोग ऐसा रहा कि हमेशा चोरों को गोनू झा से मुँह की खानी पड़ी । दूसरी तरफ चोर बिरादरी के लोग लंगडू उस्ताद से वचनबद्ध थे कि जब भी मौका मिलेगा, वे गोनू झा के घर ऐसी चोरी करेंगे जिसे उनके सात पुश्त स्मरण रखेंगे। घात-प्रतिघात की यह बात गोनू झा समझते थे और हमेशा सतर्क रहते थे। एक बार की बात है । गोनू झा दरबार से लौटकर अपने दरवाजे पर टहल रहे थे। सतर्क रहने की आदत ने गोनू झा को थोड़ा शंकालु बना दिया था । वे टहलते समय भी इतने चौकन्ने रहते, जितना कि बाज रहता है । अचानक उन्होंने कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनी । सोचने लगे, कुत्ता इस समय इस तरह नहीं भौंकता है। उन्होंने ध्यान देकर सुना-यह पड़ोसी मदन झा के कुत्ते के भौंकने की आवाज थी । मदन झा ने हाल में ही गोनू झा के अहाते के बगल में जमीन खरीदी थी और वहाँ अपना मकान बना लिया था । बहुत शौकीन आदमी था मदन झा । दिलेर और उत्साही भी । उसके आजू-बाजू उसके दो रिश्तेदारों ने भी मकान बनाया था । देर रात उनके घरों ...

उपदेशी को सबक (कहानी)

 गोनू झा एक दिन मिथिला बाजार में चहल-कदमी कर रहे थे। वहाँ एक सेठ एक भारी बक्सा लिए बैठा था और बार-बार मजदूरों को बुलाता और उनसे कुछ बातें करता और मजदूर गर्दन हिलाते हुए या हाथ को इनकार की मुद्रा में हिलाते हुए वहाँ से चले जाते । काफी देर तक बाजार चौक पर यह नजारा देखने के बाद गोनू झा ने सोचा चलो, चल के देखें कि माजरा क्या है? वैसे वे इतना समझ चुके थे कि सेठ वह बक्सा उठवाकर कहीं ले जाना चाहता है मगर मजदूर कम मेहनताना के कारण इनकार करके वहाँ से चले जा रहे हैं। गोनू झा सेठ के पास पहुँचे और सेठ से पूछा -" क्या बात है सेठ जी, आप बहुत देर से यहाँ परेशान हाल बैठे हैं ?” सेठ ने कहा -" हाँ, भाई ! मुझे एक मजदूर चाहिए जो यह बक्सा उठा-कर यहाँ से तीन कोस की दूरी पर जो गाँव है, वहाँ पहुँचा दे।” । गोनू झा ने कहा-“मैं भी यहाँ काम की तलाश में आया हूँ- चलिए, मैं ही पहुँचा दूँ! बोलिए मजूरी क्या देंगे ?" सेठ मुस्कुराया, बोला-“मेरे पास देने के लिए तीन अनमोल उपदेश हैं जो मैं हर एक कोस पर तुम्हें एक- एक कर दूंगा !" गोनू झा ने कहा “यानी पैसा -रुपया कुछ नहीं ? खाना-खुराकी भी नहीं ? सिर्फ उपद...

घरानों का इतिहास और इनका क्या है मतलब? हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के गायन के लिये प्रसिद्ध घरानों में आगरा, ग्वालियर, इंदौर, जयपुर, किराना, और पटियाला शामिल है.

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 जब हम संगीत की बात करते हैं तो 'घराना' का नाम सबसे पहले आता है. आज भारत में ग्वालियर घराना, पंजाब घराना जैसे संगीत से जुड़े कई अलग अलग घराने मशहूर हैं. आमतौर पर अगर किसी भी गायक, वादक के नाम के साथ किसी समृद्ध घराने का नाम जुड़ा होता है तो संगीत की जगत में उसका सम्मान बढ़ जाता है.  लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये घराना है क्या और इसका संगीत की दुनिया से क्या ताल्लुकात है. इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि यह घराना है क्या और अस्तित्व में कैसे आया... क्या होता है घराना घराने को आमतौर पर संगीत के स्कूल या कलाकारों के समूह को कहा जाता है. दरअसल संगीत ऐसी कला है जिसे कोई भी व्यक्ति एक दिन, एक महीने या एक साल में नहीं सीख सकता. यह वर्षों का संघर्ष मांगता है और जब गायक या वादक की उम्र बीतने लगती है, तो उनके साथ ही उनका संगीत भी अनुभवी और उम्रदराज होने लगता है.   बाद में उनकी इसी विशिष्ट शैली को उनके शिष्य अपना लेते हैं और फिर वे उनके शिष्यों को भी उसी विशिष्ट शैली में शिक्षा देते हैं. धीरे-धीरे यह एक चेन बन जाता है और इसी को घराने की संज्ञा दी गई है. हिन्दुस्त...

शाहरुख खान की 'बेटी' सलमान के शो में आएगी नजर? Sana Saeed: सना सईद को लेकर कहा जा रहा है कि एक्ट्रेस सलमान खान के शो 'बिग बॉस ओटीटी 3' में एंट्री ले सकती हैं

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 Bigg Boss OTT 3: सना सईद कई सालों से इंडस्ट्री में एक्टिव हैं. सना 'बाबुल का आंगन छूटे ना', 'खतरों के खिलाड़ी', 'नच बलिये', 'लो हो गई पूजा इस घर की' जैसे टीवी शोज में काम किया है. इसी के साथ सना सईद ने 'कुछ कुछ होता है' फिल्म में शाहरूख खान की बेटी अंजलि का किरदार निभाया था. शाहरुख खान की 'बेटी' सलमान के शो में आएगी नजर? बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट पॉपुलर हुई सना सईद को लेकर कहा जा रहा है कि अब एक्ट्रेस सलमान खान के शो 'बिग बॉस ओटीटी 3' में एंट्री ले सकती हैं. बता दें कि बिग बॉस ओटीटी का पहला सीज़न, जहां दिव्या अग्रवाल ने जीता था, लेकिन एक्ट्रेस कई लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब नहीं हो पाई, वहीं दूसरे सीजन को यूट्यूबर एल्विश यादव ने शो जीता मेकर्स अब तीसरे सीजन के साथ पूरी तरह तैयार हैं और ओटीटी शो में जाने वाले नामों में से एक 'कुछ कुछ होता है' फेम सना सईद हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, सना को 'बिग बॉस ओटीटी 3' को मेकर्स ने अप्रोच किया है. कहा जा रहा है कि अग चीजें ठीक रही तो सना इस शो में नजर आ सकती हैं. 'बिग बॉस ओटी...

Amit Shah Attacked Mallikarjun Kharge: जम्मू कश्मीर को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बयान पर गृहमंत्री अमित शाह ने निशाना साधा है.

 Amit Shah Questions Mallikarjun Kharge: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान पर निशाना साधा. दरअसल, खरगे ने राजस्थान में एक रैली में कहा था कि आर्टिकल 370 खत्म होने का राजस्थान से क्या वास्ता है? अमित शाह ने खरगे के इस बयान को इटालियन संस्कृति वाला बताया. उन्होंने कहा है कि यह सुनना शर्मनाक है कि कांग्रेस पूछ रही है कश्मीर से क्या वास्ता है. उन्होंने एक्स पर मल्लिकार्जुन खरगे के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा- 'यह सुनना शर्मनाक है कि कांग्रेस पार्टी पूछ रही है कि कश्मीर से क्या वास्ता है? मैं कांग्रेस पार्टी को याद दिलाना चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और प्रत्येक राज्य और नागरिक का जम्मू-कश्मीर पर अधिकार है, जैसे जम्मू-कश्मीर के लोगों का शेष भारत पर अधिकार है. अमित शाह बोले -कश्मीर में राजस्थान के कई वीर सपूतों ने शहादत दी है अमित शाह ने आगे कहा कि कांग्रेस को यह नहीं पता कि कश्मीर में शांति और सुरक्षा के लिए राजस्थान के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन यह सिर्फ कांग्रेस नेताओं की गलती नहीं है. भारत के विचार...