एक गांव से दूर एक सुमसान इलाका था। यह दूर के जंगल का किनारा था। यहाँ जंगली बकरियाँ आराम से चरती थीं, यहाँ तक कि जंगल के हिरण भी कभी-कभी दिख जाते थे, सब आराम से रहते थे। एक दिन एक बकरी का युवा बच्चा आया और उसने झुंड के नेता को बताया। “मैंने एक शेर देखा। यह हमारे क्षेत्र में आ रहा है।” बकरियों के नेता ने युवा बच्चे के साथ जाकर देखा कि एक बूढ़े सिंह हमारे इलाके की और आ रहा है।
और वह खुले मैदान में बकरियों का शिकार करने आ रहा था। क्योंकि वह बूढ़ा होने के कारण घने जंगल में शिकार नहीं कर सकता था।
बकरियों के नेता ने सभी बकरियों को इकट्ठा करके कहा।
‘शेर दो दिन में यहां पहुंच जाएगा। हम सबको साथ रहना है। आप सभी को पश्चिम दिशा में खड़ा होना है और मैं पूर्व दिशा में अकेला खड़ा रहूंगा। किसी को डरना नहीं है, यह शेर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ने वाला। हमें उसका सामना करना है। आप सभी को बहुत बे बे करके शोर मचाना है,?’ सभी बकरियों ने कहा, “ठीक है, सरदार!”
इस बकरियों के नेता ने तीन युवा बकरियों की मदद ली और पूर्व में एक गहरा गड्ढा खोदावाया। इसमें बड़े बड़े कांटे वाला झाड़ीया लाके बिछाई और फिर उसके ऊपर पत्तो को व्यवस्थित करके बाहरी भाग पे हरी घास बिछा दी। और खड्डा है वैसा किसीको मालूम ही न हो ऐसा बना दिया।
दो दिन बाद शेर सुभह सुभह आ पहोचा। वह हैरान था कि कोई बकरा उसे देखकर भागा नहीं। सभी एक साथ खड़े हुए थे। और शेर को घूर रहे थे।
बकरियों का नेता दूसरी दिशा में दौड़ा और खड़ा हो गया। फिर वह गर्व भरे स्वर में बोला, “अच्छा किया! बकरियां। आपको इस शेर से बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। वह हमारा कुछ भी बिगड़ नहीं पायेगा। हम सब साथ में मिलके इसका सामना करेंगे।” – शेर बकरिया को डराने के लिए आवाज निकाली तब सामने सभी बकरियां भी बे.., बे…, करके आवाज लगाई और शोर मचाया। – सिंह व्याकुल हुआ। उसने सोचा। ‘ये बकरियां क्यों नहीं डरतीं? डरने की जगह क्यों सामना करती है?’
थोड़ी ही देर में उन्हें एहसास हुआ कि उनका नेता उन्हें हिम्मत दे रहा है। चलो पहेले उसे मार के खा जाऊ। तब इन बकरियों की टूट जाएगी ये सारी हिम्मत! – सिंह पूर्व की ओर चलने लगा और गर्जना की। फिर भी सभी बकरियों ने में.. में करके शोर किया।
बकरियों का सरदार शान से खड़ा रहा। शेर ने पैर को ठीक किया और उस बकरे पे छलांग मारी। उसने सोचा। “एक ही बार में , उस बकरे को मुह मरू तब इस बकरे का राम राम जाएगा!” लेकिन यह क्या बकरा तो अपनी जगह से थोडा सा खिसक लिया। शेर हरी घास पर गिर पड़ा और गिरते ही खड्डे में उतरने लगा। सभी बकरियां भी आश्चर्य से देख रही थीं। – शेर एक गहरे गड्ढे में गिर गया और जल्द ही उसकी दयाभरी आवाज सुनाई दी। इसके पुरे शरीर में बबूल के कांटों से चुभ गया।
बकरों गड़हे के किनारे पे जा के बोला, “हम तुमसे नहीं डरते। तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।’ शेर ने बाहर निकलने के लिए संघर्ष किया, लेकिन गड्ढा गहरा था। और नीचे कांटे थे। जितना अधिक वह कूदता, उतना ही अधिक घायल हो गया। अंत में बेहोश हो गया। बकरियों को पता था कि शेर भूख और खून-निकलने से मरने वाला है। सभी बकरे आनंदित हो गए। और सभी बकरिया ख़ुशी से बे… बे… करने लगी।
तो दोस्तों लीडर अच्छा हो, तो पूरी टीम सफल हो जाती है, बकरियों के चतुर नेता ने सारी बकरिया की जान बचाई।
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