अभी कुछ दिन पहले मनोज जोशी निर्देशित नाटक ‘चाणक्य’ के मंचन को देखने का सुअवसर मिला, जिसमें मुख्य भूमिका यानि चाणक्य का किरदार भी मनोज जोशी ने ही निभाया है. नाटक की बात करें तो यह अभिभूत करने वाला अनुभव था, रोम-रोम स्पंदित हो उठा. शानदार अभिनय, बेजोड़ निर्देशन और उतना ही शानदार विषय. चाणक्य (376 ईपू० – 283 ईपू०) भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे. वे कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी विख्यात थे. चाणक्य कूटनीति, अर्थनीति, राजनीति के महाविद्वान थे और अपने महाज्ञान का ‘कुटिल’ ‘सदुपयोग , जनकल्याण तथा अखंड भारत के निर्माण जैसे सृजनात्मक कार्यो में करने के कारण वह; कौटिल्य’ ‘कहलाए. ईसा से चार सदी पहले, सिकंदर के आक्रमण के समय, एक जटा और जनेऊ धारी ब्राह्मण ने अखंड भारत का सपना देखा और उसे चन्द्रगुप्त के जरिये साकार किया, यह भर काफी है चाणक्य की महानता को सिद्ध करने के लिए. किसी भी युद्ध में सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण तत्त्व है – युद्ध की परियोजना, अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल. इसी को ‘ रणनीति’ कहा जाता है. सेनापति बुद्धिमान तो जीत पक्की क्योंकि कोई भी युद्ध, सामरिक शक्ति से ज़्यादा मानसिक शक्ति से जीता जाता है.
नाटक देखते समय अंतःकरण में चाणक्य को देखते समय उनके रूप में जैसे अपने गृह मंत्री अमित शाह दिख रहे थे. चाणक्य जैसे तीक्ष्ण बुद्धि के मालिक, त्वरित निर्णय लेने की कला में दक्ष, वही दूरदृष्टि, वही तेवर. चाणक्य के अतिरिक्त अगर और किसी हस्ती से अमित शाह की तुलना बनती है तो वे थे लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल. सरदार पटेल (1875–1950) का नाम किसी परिचय का मोहताज़ नहीं. वे स्वतंत्र भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री थे. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई लेकिन उनका असली योगदान था 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण करके भारतीय एकता का निर्माण करना. अमित शाह भी कुछ ऐसे ही लौहपुरुष हैं. अनुच्छेद 370 और 35 A को हटा कर, जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्य धारा में जोड़ कर उन्होंने, सरदार पटेल के अधूरे काम को अंजाम तक पहुंचाया है.
मोदी और शाह की जुगलबंदी
शतरंज खेलने, क्रिकेट देखने एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले अमित शाह ने राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता की गाथा लिखी है. बीजेपी पार्टी को आगे लाने में मोदी लहर के साथ-साथ अमित शाह का भी अहम योगदान है. मोदी और शाह एक परफेक्ट टीम हैं. दोनों का तारतम्य ज़बरदस्त है और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. जैसे संगीत में जुगलबंदी होती है जिसके न होने से सुर, लय और ताल सब बिगड़ जाता है, तो मोदी जी और अमित शाह की जुगलबंदी एकदम परफेक्ट है. मोदी बीजेपी का चेहरा हैं, पहचान है और बीजेपी का परचम हैं. करोड़ों भारतीय उन्हें अपना मसीहा मानते हैं और उनके आह्वान पर कुछ भी करने को उद्यत रहते हैं. दूसरा एक प्रखर रणनीतिज्ञ और सेनापति है जो राजनैतिक गठबंधन बनाते हैं, उम्मीदवारों का चयन करते हैं, स्थानीय स्तर तक की योजनाएं बनाते हैं और जिनकी पैनी निगाह, छोटी से छोटी डिटेल पर भी जाती है.
टेक्नोलॉजी की भाषा में कहें तो एक backend संभालता है और एक front office और दोनों का तालमेल, देश और पार्टी दोनों के लिए ही बहुत अच्छे परिणाम लाता रहा है.
धारा 370 और अमित शाह
अमित शाह देशवासियों की नज़र में हीरो बने 2019 में अनुच्छेद 370 के ख़ारिज किए जाने के बाद. मोदी जी अपने कार्यकर्ताओं के कौशल को बखूबी पहचानते हैं और उसके चलते बहुत सटीक निर्णय भी लेते है. चाहे वो योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना हो, या फिर जयशंकर को विदेश मंत्री और वो भी सब राजनैतिक कयासों के विपरीत. और दोनों ही अपने काम में अव्वल साबित हुए हैं. कुछ ऐसा ही निर्णय लिया था मोदी जी ने जब उन्होंने अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटाकर को गृह-मंत्रालय जैसे अहम महकमे की जिम्मेदारी सौंपी थी. कुछ अजीब लगा था लेकिन बाद में समझ आया कि अनुच्छेद 370 को शांति पूर्ण तरीके से ख़ारिज करने के लिए एक मज़बूत और दमदार गृहमंत्री का होना अनिवार्य था. इस कसौटी पर अमित शाह खरे उतरे और शुरुआती छुटपुट विरोधों और दिक्कतों के बाद, जो कि अपेक्षित थे, आज जम्मू और कश्मीर में हालत सामान्य हैं और पहले से कहीं बेहतर हैं. अमित शाह ने स्थिति को बहुत बढ़िया तरीके से संभाला.
अनुच्छेद 370 के ख़ारिज किए जाने के विषय में संसद में दिए अपने भाषण में अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर की बदहाल दशा के लिए अनुच्छेद 370 को जिम्मेदार ठहराया था और इसे बखूबी साबित भी किया. उनका कहना था कि अनुच्छेद 370 और 35A के कारण वहां विकास में रुकावटें ही रुकावटें हैं.
अमित शाह ने कहा था कि ‘जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की जड़ भी 370 है. उन्होंने कहा कि धारा 370 की वजह से ही जम्मू कश्मीर का विकास नहीं हुआ. जम्मू कश्मीर में गरीबी के पीछे भी धारा 370 ही है. उन्होंने कहा कि 35 A के कारण ही हुनरमंद लोग जम्मू कश्मीर नहीं जाते. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू और कश्मीर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कंपनियां नहीं जा सकती. ये कंपनियां वहां गई तो वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा. बड़ी कंपनियां वहां गईं तो पर्यटन बढ़ेगा. लेकिन 370 के कारण ये संभव नहीं है. 370 के कारण जम्मू कश्मीर में देश का कोई बड़ा डॉक्टर नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहां वो अपना घर नहीं खरीद सकता, वहां का मतदाता नहीं बन सकता और वहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता. 370 आरोग्य में भी बाधक है.’
मुड़ कर देखें तो गृह मंत्री के ये दावे वक्त की कसौटी पर खरे उतरे हैं. जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी देखी गई है. पर्यटकों का आना-जाना बहुत बढ़ गया है, पर्यटन के विकास से रोज़गार के नए अवसर पैदा होते हैं और आम जनता की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है. यूनाइटेड किंगडम में प्रकाशित एक एशियाई दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. सरकार की नीतियों के चलते विकास के नए आयाम लिखे जा रहे हैं. जम्मू और कश्मीर में जी-20 समिट आयोजित करने को भारत द्वारा एक साहसिक और महत्वाकांक्षी कदम के रूप में वर्णित किया जा रहा है, जिसके द्वारा भारत ने जम्मू और कश्मीर के लिए वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त की है. पाकिस्तान और चीन के प्रतिरोध के बावजूद, भारत ने यह आयोजन किया और सफलतापूर्वक किया. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से जी-20 प्रतिनिधियों ने चीन और पाकिस्तान की भारत के कश्मीर घाटी में अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने के फैसले की आलोचना के सामने मौन बनाए रखा है, यह भी अपने आप में भारत की कूटनीतिक जीत है.
पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर अमित शाह
पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर अमित शाह ज़बरदस्त काम करते हैं। उन्होंने हर जिले में पार्टी के स्वामित्व वाली जमीन पर दफ्तर होने का अभियान छेड़ा. वे यात्रा के माध्यम से पार्टी से ज़मीनी रूप से जुड़े रहते हैं. अमित शाह स्थानीय नेताओं को बहुत तवज्जो देते हैं और यही नेता पार्टी में मतदान के समय प्राण फूंक देते हैं. अपनी यात्राओं के दौरान वे होटल की बजाय किसी कार्यकर्ता या फिर सर्किट हाउस में ठहरना पसंद करते हैं. इससे दो लक्ष्य हासिल होते हैं – पार्टी का पैसा बचता है और संगठन मज़बूत होता है. उनका मानना है इससे कार्यकर्ताओं के मन की बात करीब से जानी जा सकती है. उल्लेख एनपी की किताब ‘वॉर रूम- नरेंद्र मोदी की 2014 की जीत के पीछे के लोग, रणनीति और तकनीक’ में जिक्र है कि शाह लगातार स्थानीय नेताओं से बात करते हैं. खुद भी फोन लगाते रहते हैं और बात की शुरुआत ‘दोस्त बोल रहा हूं’ कहकर करते हैं.
अमित शाह की कूटनीतिक समझ
इस लेख का उद्देश्य अमित शाह के बारे में वो सब बताने का नहीं है जो आंकड़े या अख़बार कहते और लिखते हैं. हम तो उनकी शख्सियत के उन पहलुओं पर फोकस करना चाहते हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं, जो उनके राजनैतिक पौरुष का बखान करती हैं, जो पडोसी और गैर पडोसी मुल्कों के सामने हमें एक शक्तिशाली राष्ट्र के तौर पर स्थापित करती हैं. उनकी कूटनीतिक समझ देखिये.
अरुणाचल प्रदेश भारत-चीन के बीच होने वाले विवाद की कई वजहों में से एक कारक है. चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में अपना दावा करता आया है. पिछले दिनों चीन ने अरुणाचल के 11 स्थानों के नाम भी बदले थे. इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने फ़ौरन अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया और यह यात्रा खास तौर पर उसी क्षेत्र में थी, जिस पर चीन आए दिन अपना दावा करता है. चीन के मंसूबों का इससे माकूल तथा करारा जवाब और क्या हो सकता है? लम्बे चौड़े वक्तव्य भी वो हासिल न कर पाते जो उनके अरुणाचल दौरे ने कर दिखाया. चीन के गृहमंत्री ने अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश के कुछ महीने पहले हुए दौरे को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अरुणाचल चीन का हिस्सा है और वहां पर भारत के किसी अधिकारी और नेता का दौरा उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है. चीन के गृहमंत्री के दौरे पर आपत्ति जताने पर उन्होंने कहा, हमारी सेना और आईटीबीपी के जवानों की बहादुरी की वजह से हमारे देश की सीमाओं पर हमें कोई चुनौती नहीं दे सकता. वह समय चला गया जब कोई भी हमारी जमीन पर कब्जा कर सकता था, लेकिन अब सुई की नोक के बराबर भी जमीन पर कब्जा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा हमारी नीति स्पष्ट है. हम सभी के साथ शांति से रहना चाहते हैं लेकिन अपनी जमीन पर एक इंच भी कब्जा नहीं होने देंगे.
कितने साहस और विश्वास का संचार हुआ होगा हमारे सैनिकों में और आम जनता में जब हमारे गृह मंत्री सीना ठोक कर हमारा मनोबल बढ़ाते हैं. ये हैं हमारे चाणक्य सरीखे अमित शाह.
अमित शाह के व्यक्तित्व का दूसरा पहलू
अमित शाह सिर्फ गंभीर मुद्दों पर ही चिंतन नहीं करते बल्कि देश के नौनिहालों से भी बाल सुलभ शब्दावली में वार्तालाप कर लेते हैं. एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में, बहुत ही सरल भाषा में उन्होंने बच्चों का बखूबी मार्ग दर्शन किया. उन्होंने बच्चों को समझाया कि उनके दृढ़ संकल्प से भारत को महान बनाने के रास्ते खुलेंगे और संकल्प भी ऐसे जो कि बच्चों को समझ भी आते हैं और जिन्हें वे पूरा भी कर सकते हैं- जैसे भोजन की थाली में जूठा नहीं छोड़ना, कमरे से बाहर निकलने पर बिजली बंद करना, नियमों का पालन करना आदि-आदि.
राजनीति में माहिर रणनीतिकार अमित शाह ने ‘पंचायत से लेकर संसद’ तक भाजपा को सत्ता में काबिज कर किया है. विचारधारा की दृढ़ता, असीमित कल्पनाशीलता और राजनीतिक लचीलेपन का समागम उनके व्यक्तित्व की पहचान है. उनकी प्रशंसा में पोथियां लिखी जा सकती हैं लेकिन उनकी तारीफ में उत्तर प्रदेश के मुख्य-मंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कहा उससे बेहतर कहना मुश्किल है. ‘उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन 2023’ में एमएसएमई एवं सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के विषय पर आयोजित सत्र में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने सत्र के मुख्य अतिथि अमित शाह की प्रशंसा में कहा- ‘केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के व्यक्तित्व पर चार महापुरुषों – आदिगुरु शंकराचार्य, आचार्य चाणक्य, वीर सावरकर तथा प्रधानमंत्री मोदी जी की छाप स्पष्ट रूप से दिखती है.’
भारत के महानतम दार्शनिक एवं धर्म प्रवर्तक आदि गुरु शंकराचार्य; कूटनीति, अर्थनीति, राजनीति के महाविद्वान चाणक्य; महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, इतिहासकार, राजनेता तथा विचारक वीर सावरकर, और आज की तारीख में दुनिया के सब से लोकप्रिय नेता मोदी जी से तुलना मात्र काफी है इस देश के परिप्रेक्ष्य में आपका स्थान सिद्ध करने के लिए.
ईश्वर आपको देश सेवा में दीर्घायु करें मान्यवर.
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