Thursday, July 13, 2023

योगी आदित्यनाथ में ऐसा क्या है कि वे अपनी पार्टी के सहकर्मियों के लिए और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के लिए एक आदर्श बन गए हैं? इतना कि शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, जो पहले अपने सिर पर मुस्लिम टोपी पहनते थे और अपने आवास पर इफ्तार पार्टी आयोजित करते थे, अब आदित्यनाथ के नक़्शे कदम पर चल के अपनी नई इमेज गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.

 जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य जो लोक सभा में अन्य सभी प्रदेशों से ज़्यादा यानि 80 सदस्य भेजता है, इतना सब पर्याप्त है भारत के सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश की महत्ता को स्थापित करने के लिए. आज़ादी से पहले भी भी U.P यानि United Provinces और आज़ादी के बाद भी U.P यानि उत्तर प्रदेश. वहीं उत्तर प्रदेश, 2017 से ‘उत्तम प्रदेश’ बनने की राह पर चल पड़ा है और बहुत मज़बूती के साथ चल पड़ा है.


योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद, मानो इस प्रदेश ने अंगड़ाई ली है, यह सोया शेर अपनी नींद से जागा है और अपनी असली पहचान को ढूंढ़ने निकल पड़ा है. उत्तर प्रदेश के बारे में सबका परसेप्शन बदला है. पहले उत्तर प्रदेश का ज़िक्र आते ही माफिया, अराजकता, असुरक्षा का माहौल आदि विचार दिमाग में आते थे और आज यूपी की बात करें तो दिमाग में कौंधता है. जेवर का निर्माणाधीन एयरपोर्ट, निवेश को आकर्षित करता प्रदेश, सबसे ज़्यादा एक्सप्रेस वे वाला राज्य आदि-आदि. और इस सबका श्रेय जाता है एक संत को- योगी आदित्यनाथ और उनके प्रखर प्रशासन को.

योगी जी ने उत्तर प्रदेश की जैसे काया ही पलट दी है, जो बातें कल तक असंभव लगती थीं वे आज रोज़मर्रा की बातें हो गई हैं. बिना किसी तटीय सुविधा के भी उत्तर प्रदेश, निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बन गया है. अराजकता और माफिया राज एक गुज़रे ज़माने की घटनाएँ हो गई हैं. इस बारे में कोई दो राय नहीं, उत्तर प्रदेश देश दुनिया के पटल पर बदलती तस्वीर के साथ अपनी नई छाप छोड़ता जा रहा है. अब यूपी की छवि जुझारू, आगे बढ़ने व अपने विशाल संसाधनों के बेहतर उपयोग कर सकने वाले राज्य की बन रही है. निवेश, उत्पादन, निर्यात में बढ़ोतरी व बेहतर होते कारोबारी माहौल अब यूपी की नई पहचान हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राज्य को विकास पथ पर आगे बढ़ाने का श्रेय देते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राज्य विकास के हर क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है.


“आज यूपी निराशा की अपनी पुरानी छवि से बाहर आ गया है. जैसे-जैसे सुरक्षा मजबूत होगी और सुविधाएं बढ़ेंगी, वैसे-वैसे समृद्धि आना तय है”. पीएम ने योगी की सबसे लंबे समय तक राज्य की सेवा करने वाले एकमात्र सीएम बनने का रिकॉर्ड बनाने के लिए भी प्रशंसा की.


योगी राज में उत्तर प्रदेश का विकास


सुरक्षा का माहौल

योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है. उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था का शासन स्थापित करना और यह सब उस राज्य में जहाँ माफिया और उसके सरगना समानान्तर सरकार चलाते थे और बेख़ौफ़ चलाते थे. पीड़ित व्यक्ति इनके खिलाफ रिपोर्ट लिखने तक से डरते थे और यह क्रम अनवरत चलता रहता था. ऐसे माहौल में क्या किसी भी प्रकार की तरक्की के बारे में सोचा भी जा सकता है?


Abraham Maslow बीसवीं सदी के जाने माने अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने एक सिद्धांत विकसित किया था जिसे “Hierarchy of Needs” कहा जाता है. इस सिद्धांत के अनुसार, मनुष्य की आवश्यकताओं की पाँच श्रेणियां होती हैं जिसमें पिरामिड के नीचे बुनियादी आवश्यकताएँ होती हैं और ऊपरी स्तरों पर और उच्च-स्तरीय, अमूर्त आवश्यकताएँ. एक व्यक्ति ऊपरी स्तर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल तब आगे बढ़ सकता है जब उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी तरह से तृप्त हों. साधारण शब्दों में कहें तो हम सब अपनी बुनियादी जरूरतें जैसे अच्छा जीवन यापन करना, सुरक्षित महसूस करना, अपने परिजनों का सकुशल होना आदि के बाद ही समाज या राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य, या फिर पर्यावरण इत्यादि जैसे उच्च स्तरीय मुद्दों के बारे में सोच सकते हैं.


उत्तर प्रदेश के सन्दर्भ में बात करें तो 2017 यानि योगी जी के मुख्यमंत्री बनने से पहले कैसे यहाँ के निवासी उच्च-स्तरीय और अमूर्त आवश्यकताओं के बारे में सोचते क्योंकि उनकी सारी शक्ति तो बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में ही समाप्त हो जाती थी.

योगी राज में माफिया का अंत- अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति

योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में सुरक्षा की दृष्टि से कई कदम उठाए गए हैं. राज्य में पिछले पाँच वर्षों में चार मुख्य बिंदुओं पर कार्य किया गया है. पहला पुलिस भर्ती और प्रशिक्षण, दूसरा पुलिस का आधुनिकीकरण, तीसरा इन्फ़्रास्ट्रक्चर सुविधाओं में वृद्धि और चौथा चुनौतियों को देखते हुए गृह मंत्रालय से सामंजस्य. इससे कानून व्यवस्था को निरंतर मजबूत रखने में सफलता मिली है. इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नीक और ट्रेनिंग के मेलजोल से मजबूत हुई है, यूपी की कानून व्यवस्था.


राज्य सरकार ने पुलिस विभाग को ताकतवर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में धन व्यय किया. उत्तर प्रदेश में बदहाल हालातों के खत्म होने के लिए योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग में बड़े बदलाव किए हैं. उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. उन्होंने राज्य सरकार के तहत क्राइम ब्रांच को मजबूत किया है और नक्सली और आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया है.


‘Yogi Model Against Crime’ यानि ‘अपराध के विरुद्ध योगी मॉडल’ सोशल मीडिया पर सुपर हिट, ट्विटर पर टॉप ट्रेंड में नंबर वन है. कानून व्यवस्था का योगी सरकार मॉडल लोगों को पसंद आ रहा है. संगठित अपराध का सफाया हो या फिर महिला अपराधों में सजा दिलाने की बात, एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो) के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. सीएम योगी की सख्त प्रशासक छवि की वजह से जनता सुरक्षित हुई है.


योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था उस दर्जे की है, जैसे किसी ज़माने में महान अफगान शासक शेर शाह की थी. शेर शाह के शासन के लिए मशहूर था कि उनके राज्य में एक बूढी महिला रात में सोने की गठरी लेकर अकेली और सुरक्षित घूम सकती थी और उसे लूटे जाने का लेशमात्र भी डर नहीं था.


योगी जी ने सच ही कहा –

“6 साल में यूपी ने अपना परसेप्शन बदला है. सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति रही उसने कुछ चीजें तय की है. उत्तर प्रदेश उपद्रवियों के लिए नही बल्कि उत्सवों के प्रदेश के रूप में जाना जाएगा. उत्तर प्रदेश माफ़िया के लिए नहीं, महोत्सव के लिए जाना जाएगा. गुंडाराज, माफियाराज, और जंगल राज जैसे शब्द अब अतीत के शब्द बन जाएंगे. उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलंदियों को छुएगा.”


योगी राज में यूपी का आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

फरवरी, 2023 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (यूपी जीआईएस-2023) का आयोजन हुआ. उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार दुनिया भर के निवेशकों ने इतने बड़े पैमाने पर निवेश का लक्ष्य रखा है. लक्ष्य तो मात्र बीस लाख करोड़ के निवेश का था, लेकिन 33.50 लाख करोड़ से ज्यादा के करार कर राज्य ने विकास के पथ पर मानो अपना डंका बजा दिया. नए और पुराने हर सेक्टर में निवेश लाने में योगी सरकार कामयाब रही. आर्टीफिशयल इंटेलिजेंस व डेटा सेंटर से लेकर टेक्सटाइल तक में अब उद्योग लगाने की तैयारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार कह चुके हैं कि उनका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है. उन्होंने यह कहा है कि जब देश की अर्थव्यवस्था 10 ट्रिलियन डॉलर की होगी, तो उसमें राज्य की हिस्सेदारी दो ट्रिलियन डॉलर की होगी. निवेश प्रस्तावों को सेक्टर के हिसाब से देखने पर भी आशाजनक तस्वीर उभरती है.


एक जनपद एक उत्पाद योजना- One District One Product

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सामान्य विभाग और जनपद स्तर पर भी “एक जनपद, एक उत्पाद” योजना की शुरुआत की है. इस योजना के तहत, प्रत्येक जनपद के लिए एक विशिष्ट उत्पाद तय किया गया है, जो वहां की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है. यह योजना उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास और बेरोजगारी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इस योजना के अंतर्गत स्थानीय उत्पादों के लिए मार्केटिंग और निर्यात की भी व्यवस्था की जाती है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिलता है और उनका आर्थिक स्तर बढ़ता है.


एक जनपद-एक उत्पाद” कार्यक्रम जनपद के स्थानीय लोगों के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि उन्हें अपनी स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उन्हें उत्पादित करके उद्यमिता के साथ स्थानीय बाजार में बेचने का अवसर मिलता है. इस तरह से, उन्हें एक उत्पाद के विकास से संबंधित नौकरियों का भी अवसर मिलता है, जो उनके आर्थिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इसके अलावा, ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के बीच व्यापार बढ़ता है, जिससे जनपदों के बीच आर्थिक संबंध और उनकी आर्थिक विकास की गति में सुधार होता है. उत्तर प्रदेश सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से उत्पादकों को उनकी स्थानीय बाजार में विक्रय करने के लिए आवश्यक संसाधन और जानकारी प्रदान करती है.

योगी का जादुई नुस्खा

मन में यह प्रश्न आता है कि योगी के पास ऐसा कौन सा जादुई नुस्खा है या कौन सी जादू की छड़ी है, जिसके चलते प्रदेश की काया पलट हो गई? क्यों नहीं उनसे पहले के सीएम ऐसा कुछ कर पाए? क्यों उत्तर प्रदेश में माफिया की समानांतर सरकार हुकूमत करती थी? आज जो पुलिस इतनी कुशलता से काम करती है, कल तक उसके हाथ क्यों बंधे थे?


उत्तर छुपा है सीएम के नाम में ही. ‘ योगी’. जिस व्यक्ति की अपनी कोई महत्वाकांक्षाएँ ही नहीं हैं, जिस व्यक्ति की अपनी कोई आवश्यकताएँ ही नहीं, जिसे लोभ-लालच छू भी न गए, जिसे मोह-माया से कुछ लेना देना नहीं, उसे निःस्वार्थ भाव से काम करने से भला कौन रोक सकता है?


स्वामी विवेकानन्द ने कहा था, ‘‘मनुष्य जितना अधिक स्वार्थी होता है, उतना ही अधिक अनैतिक होता है”. तो योगी जी के पास स्वार्थ नाम की कोई चीज़ है ही नहीं तो वो अनैतिक क्यों होंगे. बॉलीवुड की सुपर हिट फिल्म ‘सिंघम’ का भी कुछ ऐसा ही एक डायलॉग है- “मेरी जरूरतें कम हैं, इसलिए मेरे जमीर में दम है.” सच ही तो है. एथिक्स से समझौता करते हैं लालची और महत्वाकांक्षी लोग. जो व्यक्ति ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ को हर दिन, मूर्त रूप में जीता हो, उसे सत्य और न्याय का मार्ग क्यों अरुचिकर लगेगा? आम तौर पर सरकारें कुछ फैसले सिर्फ इसलिए नहीं ले पातीं कि उन्हें लेने से उनके राजनैतिक समीकरण बिगड़ सकते हैं, वोट बैंक में सेंध लग सकती है या फिर सहयोगी पार्टियाँ अपना हाथ खींच सकती हैं. योगी को इस सब की परवाह इसलिए नहीं है क्योंकि सूबे की जनता उनकी दीवानी है.


योगी ने आम आदमी की ज़िन्दगी को आसान बनाया है, चाहे वो महिला सुरक्षा की बात हो या फिर बिजली सप्लाई की. अब कोई युवती देर से घर आती है तो उसके माता-पिता आश्वस्त रहते हैं कि उनकी बेटी घर से बाहर भी सुरक्षित है. कबीर का कहना था-

“कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर.


अर्थात इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो! कुछ ऐसी ही सोच रखते हैं अपने योगी जी. न कोई अपना, न पराया लेकिन सर्वे भवन्तु सुखिनः – सब का कल्याण हो और सब सुखी रहें. योगी जी फक्कड़ हैं, हठयोग से उन्होंने अपने तन-मन को तपा के कुंदन बना लिया है. उनका प्रशासन, उनकी संतोचित इच्छा शक्ति के कारण सर्व जन सुखाय की भावना से ओत प्रोत है.


2020 में कोविड-19 के दौरान जब योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन हुआ, तो वे इस महामारी के नियंत्रण के मामले पर अधिकारियों के साथ एक बैठक में थे. योगी जी ने अश्रु पूरित नेत्रों के साथ बैठक जारी रखी, वे पूरे दिन मास्क पहने रहे, शायद अपने आँसुओं को छुपाने के लिए. बाद में उन्होंने अपनी शोक संतप्त माता को एक पत्र लिखकर सूचित किया कि वे अपने “पूर्वाश्रम के जन्मदाता” यानी ‘संन्यास से पहले के पिता’ के अंतिम संस्कार में इसलिए शामिल न हो सके जिससे वे उत्तर प्रदेश के 23 करोड़ लोगों के प्रति अपने कर्त्तव्य का निर्वहन कर सकें. अगले दिन के अख़बार उनकी प्रशंसा करते न थकते थे.

जनता से सीधा संवाद

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ख़ासियत जनता से सीधा संवाद और संपर्क है. यह कोई मामूली बात नहीं है. केंद्र में मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने से पहले आम आदमी के लिए सरकार तक अपनी गुहार पहुँचाना सुगम न था. और अब सरकार के पास अपनी बात पहुँचाने के लिए बस एक क्लिक करना होता है. योगी जी की दिनचर्या सुबह मंदिर में लगने वाले जनता दरबार से होती है, जिसमें वह लोगों की समस्याएँ सुनते हैं और उसके समाधान के लिए अफ़सरों को आदेश देते हैं. कितनी आश्वस्त होगी, ऐसे मुख्य-मंत्री की प्रजा, कितना विश्वास जागता होगा आम आदमी में, जब वो अपनी समस्या सीधे अपने मुख्य-मंत्री को बताता होगा.


रोल मॉडल मुख्यमंत्री

कर्नाटक विधानसभा द्वारा विवादास्पद गोहत्या विरोधी बिल को पास करने से पहले मुख्यमंत्री श्री बी.एस. येदियुरप्पा ने अपने पशुपालन मंत्री प्रभु चव्हाण को लखनऊ भेजा था. चव्हाण, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने गए थे, जिससे उन्हें सीखने का मौका मिला कि आखिरकार उन्होंने 1955 के गोहत्या निषेध कानून को और सख्त कैसे बनाया जाए. उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अध्यादेश, 2020, जिसे ‘प्रेम जेहाद’ कानून के रूप में भी जाना जाता है, के लागू होने के नौ दिनों बाद, 7 दिसंबर को, मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रमेश्वर शर्मा लखनऊ में थे योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए, ताकि उन्हें यूपी के अंतर-धर्मीय विवाह के खिलाफ कानून के बारे में जानने का मौका मिले.


सवाल यह है कि योगी आदित्यनाथ में ऐसा क्या है कि वे अपनी पार्टी के सहकर्मियों के लिए और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के लिए एक आदर्श बन गए हैं? इतना कि शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, जो पहले अपने सिर पर मुस्लिम टोपी पहनते थे और अपने आवास पर इफ्तार पार्टी आयोजित करते थे, अब आदित्यनाथ के नक़्शे कदम पर चल के अपनी नई इमेज गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसके कई कारण हैं. सब से महत्वपूर्ण कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल खोल कर योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कमाल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं, चाहे वह विकास की गति हो, कोविड-19 प्रबंधन हो या कानून व्यवस्था में अप्रतिम सुधार या सुरक्षा स्थिति.

तथाकथित वामपंथी और उदारवादी, उत्तर प्रदेश में ‘पुलिस राज’, नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का हनन और साम्प्रदायिक राजनीति के विरुद्ध कितना भी लामबंद हो जाएँ, कटु सत्य है कि योगी आदित्यनाथ, मोदी के बाद, भाजपा के दूसरे सबसे बड़े स्टार प्रचारक बन गए हैं. हाल में हुए कर्नाटक चुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई लेकिन उसी दौरान हुए यूपी के निकाय चुनावों में बीजेपी की प्रचंड जीत देखने को मिली. बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के मेयर पदों पर कब्जा किया और इस जीत ने उत्तर प्रदेश और पार्टी के अंदर योगी आदित्यनाथ का कद और भी बढ़ा दिया.


योगी जी का कहना है, “आम जनता अपने नेतृत्व से सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुरक्षा की गारन्टी चाहती है”, जो उन्होंने अपनी जनता को भर-भर के दी है. योगी जी अपनी फेरारी बेचने वाले संत तो नहीं है और हो भी नहीं सकते, क्योंकि उनके पास इतनी महँगी गाड़ी आएगी कहाँ से? योगी जी वो संत हैं, जिसने अपने सूबे के 23 करोड़ लोगों को सपने देखने की जुर्रत करना सिखाया और उन्हें पूरा होते देखने का भी अवसर दिया, जिसने अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को बताया है कि शासन कैसे किया जाता है और अपनी प्रजा को सुखी जीवन कैसे दिया जाता है, वो संत हैं, जिसने सियासत को भी सेवा में बदल दिया.


उत्तर प्रदेश आप जैसे मुखिया को पा के धन्य हो गया महात्मन!

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