उत्तरायण
उत्तरायण = उत्तर + अयन – शाब्दिक अर्थ – ‘उत्तर में गमन’।
उत्तरायण 14 जनवरी से 21 जून तक रहता है।
दिन लम्बे होते जाते हैं और रातें छोटी।
क्षितिज पर यदि सूर्योदय होने के बिंदु को प्रतिदिन देखा जाए तो वह बिंदु धीरे धीरे उत्तर की और बढ़ता प्रतीत होगा ।
इसी प्रकार दिन के समय सूर्य के उच्चतम बिंदु को यदि दैनिक तौर पर देखा जाये तो उत्तरायण के दौरान वह बिंदु हर दिन उत्तर की और बढ़ता हुआ दिखेगा।
उत्तरायण तीर्थ यात्रा व उत्सवों का समय होता है – नए कार्य, गृह प्रवेश, यज्ञ, व्रत – अनुष्ठान, विवाह, मुंडन जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है।
उसके बाद दक्षिणायन प्रारंभ होता है।
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दक्षिणायन:
दक्षिणायन = दक्षिण + अयन – शाब्दिक अर्थ – ‘दक्षिण में गमन’।
सूरज कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक दक्षिण की ओर गमन करता है।
कर्क संक्रांति के दिन सूरज की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ने के बाद क्रमशः दक्षिण की ओर खिसकते हुए मकर संक्रांति के दिन मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं।
दक्षिणायन 21 जून से 22/23 दिसंबर तक रहता है।
रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं।
ये व्रतों एवं उपवास का समय होता है – विवाह, मुंडन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं और ऐसा माना जाता है कि इस समय किए गए धार्मिक कार्य जैसे व्रत, पूजा इत्यादि से रोग और शोक मिटते हैं।
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