Saturday, October 7, 2023

😜मस्त दुमदार दोहे😜

 पहला दुमदार दोहा शायद

अमीर खुसरो ने रचा!


खीर पकाई जतन से,

चरखा दिया चलाय।

आया कुत्ता खा गया,

बैठी ढोल बजाय।


ला, अब पानी तो पिला


अमीर खुसरो ने इस दोहे को

कहने के बाद पानी माँगा

और शायद “ला, अब पानी तो पिला”

दोहे का विस्तार लगी।


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


प्रसिद्ध हास्य कवि श्री धर्मवीर

‘सबरस’ जी ने अपनी पुस्तक 

‘खटोला यहीं बिछेगा’ 

में 131 दुमदार दोहे कहे।


उन्होंने हास्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी

और कुछ अन्य हास्य व्यंग्य

कवियों के साथ इस तरह के दोहे लिखे।

उदाहरण के लिये देखिये:


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


सबरस:


भारत में जो भी मरे

सीधा स्वर्ग को जाए

पता नहीं ये नर्क क्यूँ

विधि ने दिया बनाय


वहाँ क्या भैंस बंधेगी?


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


हुल्लड़ ने दिया जवाब:


नर्क ना कोई जा रहा

करूँ मैं कौन उपाय

सबरस जी है प्रार्थना

आप स्वयं ही जाँए


पिताजी वहीं मिलेंगे!


🤪🤣😜😂😉🙄🤪



🤪🤣😜😂😉🙄🤪


वैकुन्ठ नाथ गुप्त ‘अरविन्द’


जनता जाये भाड़ में,

लें बटोर ये नोट।

पांच साल के बाद फिर,

कौन किसे दे वोट?


गरीबी मिटा रहे हैं।


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


पत्रकारिता के लिए,

पैदा हुए कलंक।

जन सेवा के कार्य को,

बेंच रहे निःशंक।


कहो तो खबर छाप दूं।


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


रपट लिखाने जब गए,

थाने में श्रीमान।

मुंशी ने देकर कहा,

गांधी चित्र प्रमाण।


पाँच से कम न लेंगे ।


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


अर्जी लेकर हाथ में,

कड़के थानेदार।

नगदनारायण के बिना,

सब कुछ है बेकार।


लग रहा तुम्हीं चोर हो।


🤪🤣😜😂😉🙄🤪




]


🤪🤣😜😂😉🙄🤪


दोहे में दुम की आवश्यकता क्यों पड़ी ?


कुछ दोहे पढ़कर लगता है कोई बात

अधूरी- अनकही रह गयी।

जैसे ‘सबरस’ जी के इस दोहे में:


सास-बहू में ठन गयी,

लड़ते बीती रात

बढ़ते-बढ़ते बढ़ गयी,

सिर्फ ज़रा सी बात


खटोला यहीं बिछेगा


बिना दुम अधूरापन लगता है कि

किस बात पर ठनी?


“खटोला यहीं बिछेगा” बताता है कि

खटोला बिछाने के स्थान पर यह रार ठनी थी!


🤪🤣😜😉🙄🤪


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